गंदरबल परियोजना मंजूरी पर सीएम उमर से बयान की कांग्रेस विधायक की मांग
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शून्यकाल में कश्मीर की 93 मेगावाट न्यू गंदरबल पनबिजली परियोजना को पर्यावरण मंजूरी के दो साल के विस्तार से इनकार का मुद्दा उठाया और बिजली मंत्रालय भी संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सदन में बयान देने की मांग की। मुद्दा उठाए जाने के समय अब्दुल्ला सदन में मौजूद नहीं थे। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने नया प्रस्ताव मांगा है। भट ने कहा कि यूटी सरकार से परामर्श नहीं किया गया।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The Environment Ministry's Expert Appraisal Committee denied an environmental clearance extension to the 93-MW New Ganderbal project until a fresh proposal is submitted. — Attributed in source to the EAC's 60th meeting and read out in the House by MLA Nizamduddin Bhat; figure appears in source.
- Clearance was granted in September 2013, valid 13 years until September 2026, extendable by two years. — Dates and validity stated in source without documentary citation; internally consistent with the 26.09.2028 extension date quoted.
- CM Omar Abdullah, who holds the power portfolio, was absent when the issue was raised during zero hour. — Attributed to Bhat and to the reporter's account; CM's response not recorded in source.
- In 2019 the SAC under Governor Satya Pal Malik cancelled HCC's contract worth over Rs 819 crore. — Figure appears in source; no document or official cited.
- The project would generate an estimated 382.82 GWh annually once commissioned. — Projection stated in source, apparently from project details; attributed to no named official.
विश्लेषकों की राय राय
ऊपर से यह पर्यावरण मंजूरी का विवाद दिखता है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह जम्मू-कश्मीर में अधिकार किसके पास है, इसकी लड़ाई है। परियोजना मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ही निर्वाचन क्षेत्र में है और बिजली विभाग भी उनके पास है, इसलिए दबाव सीधे उन पर आता है। कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने निशाना केंद्र पर साधा, मगर सदन में बयान की मांग करके सहयोगी सरकार पर भी परोक्ष दबाव बनाया — यह दिखाता है कि कश्मीर में "निर्वाचित सरकार के अधिकार" आज भी एक असरदार राजनीतिक मुद्दा है।
- इनकार को "जनता की सरकार के अधिकारों में हस्तक्षेप" कहकर भट ने परियोजना की देरी को केंद्र बनाम निर्वाचित सरकार के मुद्दे में बदल दिया।
- एनसी-कांग्रेस गठबंधन के गणित में एक कांग्रेस विधायक केंद्र पर हमला करते हुए भी, सदन में बयान मांगकर अपनी ही सरकार को जवाबदेह ठहरा सकता है।
- मुद्दा उठने के समय बिजली मंत्री भी रहे मुख्यमंत्री का सदन में मौजूद न होना — कारण चाहे जो हो — आलोचकों के लिए आसान राजनीतिक हथियार बन सकता है।
- भट का यह मानना कि समिति के कारण "तर्कसंगत लगते हैं", साफ करता है कि उनकी आपत्ति तकनीकी फैसले पर नहीं, परामर्श की प्रक्रिया पर है।
- 1996 से लंबित परियोजना और 2019 में रद्द हुआ ठेका — यह लंबा इतिहास किसी एक सरकार पर पूरा दोष डालना मुश्किल बनाता है और केंद्र को राजनीतिक कवच देता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि अब्दुल्ला सदन में बयान देते हैं या नहीं, और वे दोष केंद्र पर डालते हैं या नए प्रस्ताव की समयसीमा बताते हैं — यही इस विवाद की राजनीतिक दिशा तय करेगा।
यह खबर केंद्र के फैसले के पीछे किसी राजनीतिक मंशा को साबित नहीं करती, और न ही इसमें मंत्रालय का यह पक्ष है कि यूटी सरकार से परामर्श हुआ था या नहीं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
कश्मीर की 93 मेगावाट न्यू गंदरबल पनबिजली परियोजना, जो झेलम की सहायक नाला सिंध पर बनने वाली रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, 1996 में परिकल्पित होने के बाद से लंबित है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने इसकी पर्यावरण मंजूरी के दो साल के विस्तार से इनकार कर नया प्रस्ताव मांगा है। कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शून्यकाल में यह मुद्दा उठाकर बिजली मंत्रालय संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सदन में बयान की मांग की। परियोजना स्थल स्वयं मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में पड़ता है।
मुख्य तथ्य
- परियोजना क्षमता 93 मेगावाट; कमीशन होने पर सालाना अनुमानित 382.82 गीगावाट-घंटा बिजली उत्पादन की उम्मीद।
- पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने सितंबर 2013 में पर्यावरण मंजूरी दी थी, जो 13 साल यानी सितंबर 2026 तक वैध थी।
- जेकेपीडीसी ने दो साल के विस्तार की मांग की थी; मंत्रालय के नियमों के तहत दो साल का विस्तार संभव है।
- नई दिल्ली में पिछले महीने हुई नदी घाटी एवं पनबिजली परियोजनाओं पर EAC की 60वीं बैठक ने जम्मू-कश्मीर अधिकारियों से अद्यतन प्रस्ताव मांगा।
- EAC ने कहा कि 26.09.2028 तक दो साल का विस्तार दिए जाने पर भी निर्माण कार्य और पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) पूरी नहीं होगी।
- 2019 में राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता वाली राज्य प्रशासनिक परिषद (SAC) ने 819 करोड़ रुपये से अधिक लागत का HCC का ठेका रद्द किया था।
- 2022 की तीसरी निविदा प्रक्रिया से निकले L1 बोलीदाता HCC-CPPPL (JV) को मुख्य कार्य देने का नया प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
- परियोजना में 163.5 मीटर ग्रॉस हेड, 142.2 मीटर नेट हेड और 265 मीटर लंबाई के तीन पेनस्टॉक प्रस्तावित हैं।
समयरेखा
- 1996न्यू गंदरबल पनबिजली परियोजना की परिकल्पना; तब से परियोजना लंबित।
- सितंबर 2013पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दी, वैधता सितंबर 2026 तक।
- 2019राज्यपाल सत्यपाल मलिक की SAC ने 819 करोड़ रुपये से अधिक का HCC ठेका, अमल न होने पर रद्द किया।
- 2022तीसरे दौर की निविदा में HCC-CPPPL (JV) L1 बोलीदाता बना; प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया।
- पिछला महीना (रिपोर्ट के अनुसार)नई दिल्ली में EAC की 60वीं बैठक ने विस्तार से इनकार कर अद्यतन प्रस्ताव मांगा।
- गुरुवार (समाचार प्रकाशन 24 सितंबर 2026)विधायक निजामुद्दीन भट ने शून्यकाल में मुद्दा उठाया; मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे।
किसका दाँव
- निजामुद्दीन भट, कांग्रेस विधायक (बांदीपोरा) — सदन में सरकार से बयान की मांग; कहते हैं कि यह निर्वाचित सरकार के अधिकारों में दखल है।
- मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला — बिजली मंत्री भी हैं और परियोजना उनके निर्वाचन क्षेत्र में है; उनसे रुख स्पष्ट करने की अपेक्षा।
- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की EAC — मंजूरी विस्तार पर निर्णय; आशंका कि मौजूदा मंजूरी अवधि में परियोजना पूरी नहीं होगी।
- जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (JKPDC) — विस्तार का आवेदक; अब नई डीपीआर और प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी।
- यूटी सरकार / जम्मू-कश्मीर विधानसभा — परामर्श न किए जाने का आरोप; केंद्र-यूटी अधिकार क्षेत्र का प्रश्न।
- कश्मीर के बिजली उपभोक्ता — ऊर्जा-कमी वाले क्षेत्र में 382.82 GWh सालाना बिजली का लाभ अटका।
- HCC तथा HCC-CPPPL (JV) — पुराना ठेका रद्द; नए प्रस्ताव की मंजूरी पर निर्भर ठेका।
क्यों अहम है
ऊर्जा की कमी से जूझते कश्मीर में 1996 से लंबित एक परियोजना की पर्यावरण मंजूरी का विस्तार न मिलना बिजली आपूर्ति और निवेश दोनों के लिए झटका है। यह मामला केंद्र की नियामक संस्थाओं और निर्वाचित यूटी सरकार के बीच परामर्श व अधिकार क्षेत्र के टकराव को भी सामने लाता है। साथ ही यह दिखाता है कि ठेका रद्दीकरण और बार-बार निविदा से होने वाली देरी कैसे परियोजनाओं को नियामक समयसीमा से बाहर धकेल देती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- न्यू गंदरबल पनबिजली परियोजना: 93 मेगावाट, रन-ऑफ-द-रिवर, झेलम की सहायक नाला सिंध पर।
- पर्यावरण मंजूरी सितंबर 2013 में दी गई, वैधता सितंबर 2026; नियमों के तहत दो वर्ष का विस्तार संभव।
- विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) की नदी घाटी व पनबिजली परियोजनाओं पर 60वीं बैठक नई दिल्ली में हुई।
- 2019 में राज्यपाल सत्यपाल मलिक की राज्य प्रशासनिक परिषद (SAC) ने HCC का 819 करोड़ रुपये से अधिक का ठेका रद्द किया।
- मौजूदा 15 मेगावाट गंदरबल परियोजना की आयु समाप्त होने पर नई परियोजना की परिकल्पना की गई।
- विधानसभा में 'शून्यकाल' के दौरान मुद्दा उठाया गया; मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बिजली मंत्रालय भी संभालते हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
जम्मू-कश्मीर की 93 मेगावाट न्यू गंदरबल परियोजना का मामला भारत में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की तीन पुरानी समस्याओं को एक साथ दर्शाता है—दीर्घकालिक प्रशासनिक विलंब, ठेका निष्पादन की विफलता, और नियामक मंजूरी की समयसीमा से टकराव। 1996 में परिकल्पित परियोजना को 2013 में पर्यावरण मंजूरी मिली, 2019 में ठेका रद्द हुआ, 2022 में तीसरी बार निविदा हुई, और अब EAC का मानना है कि दो साल का अतिरिक्त विस्तार (26.09.2028 तक) भी निर्माण तथा पर्यावरण प्रबंधन योजना पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। विधायक भट का तर्क इसमें संघीय आयाम जोड़ता है—कि केंद्रीय मंत्रालय ने निर्णय से पहले यूटी सरकार से परामर्श नहीं किया, जिसे वे निर्वाचित सरकार के अधिकारों में दखल बताते हैं; वहीं वे यह भी मानते हैं कि इनकार के "कारण प्रशंसनीय लगते हैं"। आगे का रास्ता स्रोत के अनुसार नई डीपीआर व अद्यतन प्रस्ताव प्रस्तुत करने, L1 संयुक्त उपक्रम को मुख्य कार्य देने के लंबित निर्णय को तेज करने, और केंद्र-यूटी के बीच संस्थागत परामर्श व सदन में जवाबदेही से जुड़ा है, जिससे ऊर्जा-कमी वाले कश्मीर को 382.82 GWh वार्षिक उत्पादन का लाभ मिल सके।
मुख्य शब्द
- विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC)
- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की समिति जो नदी घाटी व पनबिजली परियोजनाओं की पर्यावरण मंजूरी पर सिफारिश करती है।
- पर्यावरण मंजूरी (EC) विस्तार
- मंत्रालय के नियमों के तहत मौजूदा मंजूरी की वैधता को अतिरिक्त दो वर्ष तक बढ़ाने की व्यवस्था।
- JKPDC
- जम्मू-कश्मीर पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, जिसने परियोजना के लिए मंजूरी विस्तार मांगा था।
- रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना
- बड़े जलाशय के बजाय बहती नदी के प्रवाह से बिजली बनाने वाली पनबिजली परियोजना; यहाँ नाला सिंध पर प्रस्तावित।
- राज्य प्रशासनिक परिषद (SAC)
- राज्यपाल शासन के दौरान निर्णय लेने वाली परिषद; 2019 में इसने HCC का ठेका रद्द किया।
- पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP)
- परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के उपायों की योजना, जिसे मंजूरी अवधि में लागू करना होता है।
अभ्यास प्रश्न
- पर्यावरण मंजूरी की वैधता अवधि और उसके विस्तार की व्यवस्था बड़ी पनबिजली परियोजनाओं की समयबद्धता को कैसे प्रभावित करती है? न्यू गंदरबल परियोजना के उदाहरण से समझाइए।
- केंद्रीय नियामक निकायों के निर्णयों में केंद्रशासित प्रदेश की निर्वाचित सरकार से परामर्श का प्रश्न सहकारी संघवाद के लिए क्या संकेत देता है? चर्चा कीजिए।
- ठेका रद्दीकरण और बार-बार निविदा प्रक्रिया से होने वाली देरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत और जनहित पर कैसे असर डालती है? न्यू गंदरबल परियोजना के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।