लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371 के तहत नया ढांचा: मुख्य सचिव

पिछले साल 24 सितंबर को लेह में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस गोलीबारी में चार लोगों की मौत की पहली बरसी से दो दिन पहले, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने मंगलवार को कहा कि अनुच्छेद 371 के तहत नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संरक्षण में भूमि, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन शामिल होने चाहिए। मसौदे पर अक्टूबर के पहले सप्ताह में लद्दाख संगठनों से चर्चा होगी। केंद्र के साथ पिछली बैठक 9 सितंबर को दिल्ली में हुई थी।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Ladakh authorities promised a new framework under Article 371 for constitutional safeguards. — Attributed to chief secretary Ashish Kundra at an interaction in Leh.
  • Four people were killed and over 80 injured in alleged police firing on Leh protesters on Sept 24 last year. — Stated in source as alleged firing; no investigating agency or official figure cited.
  • Draft framework will be discussed with Ladakh groups in the first week of October; last Centre meeting was in Delhi on Sept 9. — Dates attributed to Kundra and the source narrative; no document cited.
  • Sonam Wangchuk was arrested, charged under NSA, held in Jodhpur jail, and his detention was revoked in March this year. — Reported in source without naming an order or authority; attribution unspecified.
  • Four lakh tourists visited Ladakh this year, up from 3.35 lakh in all of 2025. — Figures attributed to Kundra; the year references are internally inconsistent in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

लेह में चार मौतों की पहली बरसी से ठीक दो दिन पहले यह घोषणा आना अपने आप में राजनीतिक संदेश है — एक भावनात्मक तारीख से पहले बातचीत की पटरी दोबारा बिछाने की कोशिश। अनुच्छेद 371 के तहत ऐसा ढांचा, जो "देश में कहीं और नहीं" है, पेश करके प्रशासन एक बीच का रास्ता सुझा रहा है — सुरक्षा उपाय, लेकिन छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मुख्य मांगें स्वीकार किए बिना। भूमि, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा लद्दाखी संगठनों की असली चिंताओं को छूती है, मगर संवैधानिक संशोधन और अलग कानून का रास्ता लंबा है।

  • बरसी से पहले घोषणा, पिछले साल की गोलीबारी के बाद रुकी बातचीत को फिर शुरू करने और माहौल ठंडा करने की कोशिश लगती है।
  • छठी अनुसूची या राज्य के दर्जे की भाषा के बजाय अनुच्छेद 371 चुनना केंद्र को 2019 के बाद की व्यवस्था बचाते हुए ठोस सुरक्षा देने की गुंजाइश देता है।
  • प्रस्तावित यूटी-स्तरीय निकाय के लिए सीधे चुनाव का सुझाव एक नया चुनावी अखाड़ा खोलेगा, जिसमें लेह-कारगिल प्रतिनिधित्व संतुलन सबसे संवेदनशील मुद्दा बनेगा।
  • लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के सामने विकल्प है — इसे जीत बताएं या अधूरा कहकर खारिज करें; यही फैसला उनकी मोलभाव-शक्ति तय करेगा।
  • एनएसए हिरासत रद्द होने के बाद सोनम वांगचुक की 9 सितंबर की बैठक में मौजूदगी सड़क के टकराव से बातचीत की ओर वापसी का संकेत है।

किस पर नज़र रखें — अक्टूबर के पहले हफ्ते में मसौदे पर लद्दाखी संगठनों की प्रतिक्रिया और पंचायत चुनाव की समयरेखा देखें — सहमति बनने पर ही मामला संसद में संवैधानिक संशोधन के चरण तक जाएगा।

यह खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि मसौदे में क्या है, सुरक्षा उपाय कितने व्यापक हैं, और लद्दाखी संगठन इसे राज्य के दर्जे व छठी अनुसूची की मांग का जवाब मानेंगे या नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर के विभाजन के बाद विधानसभा रहित केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था, जिसके बाद से स्थानीय संगठन छठी अनुसूची का दर्जा, राज्य का दर्जा तथा भूमि-रोजगार पर संरक्षण मांग रहे हैं। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) 2023 से केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ स्वायत्तता पर बातचीत कर रहे हैं। पिछले साल 24 सितंबर को लेह में प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस गोलीबारी में चार मौतों के बाद यह प्रक्रिया रुक गई थी। अब लद्दाख प्रशासन ने अनुच्छेद 371 के तहत एक नए संवैधानिक ढांचे का वादा किया है।

मुख्य तथ्य

  • लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने मंगलवार को लेह में कहा कि अनुच्छेद 371 के तहत केंद्रशासित प्रदेश की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नया संवैधानिक संरक्षण ढांचा तैयार किया जा रहा है।
  • कुंद्रा के अनुसार संरक्षण में भूमि, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन शामिल होने चाहिए।
  • मसौदे पर लद्दाख संगठनों के साथ अगली बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में होगी; पिछली बैठक केंद्र के साथ 9 सितंबर को दिल्ली में हुई थी।
  • 24 सितंबर (पिछले वर्ष) लेह में छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग करते प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस गोलीबारी में चार लोग मारे गए और 80 से अधिक घायल हुए।
  • चर्चाओं से उभरा प्रमुख सुझाव: प्रस्तावित केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय निकाय के लिए प्रत्यक्ष चुनाव; निकाय की शक्तियों व कार्यों के लिए अलग विधान आवश्यक होगा।
  • LAB सदस्य व कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप लगा, उन्हें गिरफ्तार कर NSA के तहत जोधपुर जेल में रखा गया; केंद्र ने इस वर्ष मार्च में उनकी NSA हिरासत रद्द की।
  • कुंद्रा ने बताया कि इस वर्ष लद्दाख में चार लाख पर्यटक आए, जबकि पूरे 2025 में 3.35 लाख आए थे।
  • लद्दाख के डीजीपी आनंद जैन ने नशा-संबंधी मुद्दों पर प्रस्तुति दी और जागरूकता फैलाने में नागरिक समाज का सहयोग मांगा।

समयरेखा

  1. 2023 सेलेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ लद्दाख की स्वायत्तता पर बातचीत कर रहे हैं।
  2. पिछले वर्ष 24 सितंबरलेह में छठी अनुसूची व राज्य के दर्जे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस गोलीबारी में चार मौतें, 80 से अधिक घायल; वार्ता प्रक्रिया रुकी।
  3. गोलीबारी के बादसोनम वांगचुक पर भड़काने का आरोप, गिरफ्तारी, NSA के तहत जोधपुर जेल में हिरासत।
  4. इस वर्ष मार्चकेंद्र ने सोनम वांगचुक की NSA हिरासत रद्द की; रिहाई के बाद उन्होंने वार्ता पर जोर दिया।
  5. 9 सितंबरदिल्ली में केंद्र के साथ बैठक, जिसमें वांगचुक भी शामिल हुए।
  6. मंगलवार (बरसी से दो दिन पहले)मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह में प्रमुख नागरिकों से बातचीत में अनुच्छेद 371 के तहत नए ढांचे की घोषणा की।
  7. अक्टूबर का पहला सप्ताहलद्दाख संगठनों के साथ अगली बैठक में मसौदे पर चर्चा प्रस्तावित।

किसका दाँव

  • लेह एपेक्स बॉडी (LAB) — लद्दाख की स्वायत्तता, छठी अनुसूची का दर्जा और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर 2023 से गृह मंत्रालय से वार्ता कर रही प्रमुख संस्था।
  • कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) — क्षेत्र की स्वायत्तता पर वार्ता करने वाला दूसरा प्रमुख संगठन; कारगिल के हितों का प्रतिनिधित्व।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय — संवैधानिक संरक्षण ढांचे पर सहमति बनाना; सहमति के बाद संसद में प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर विचार।
  • लद्दाख प्रशासन (मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा) — ढांचे का मसौदा तैयार करना, जिला-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना और पंचायत चुनाव की दिशा में प्रगति।
  • सोनम वांगचुक — कार्यकर्ता व LAB सदस्य; NSA हिरासत रद्द होने के बाद वार्ता बहाल करने पर जोर दे रहे हैं।
  • लद्दाख के निवासी — भूमि, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधनों पर संरक्षण तथा प्रत्यक्ष चुनाव के जरिये प्रतिनिधित्व।
  • लद्दाख पुलिस (डीजीपी आनंद जैन) — कथित गोलीबारी की जवाबदेही तथा नशा-विरोधी जागरूकता में नागरिक समाज का सहयोग।

क्यों अहम है

लद्दाख में विधानसभा के अभाव और स्थानीय पहचान, भूमि व रोजगार पर असुरक्षा की भावना ने 2023 से आंदोलन को जन्म दिया, जो पिछले वर्ष चार मौतों के साथ हिंसक मोड़ पर पहुंचा। अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित ढांचा, जो मुख्य सचिव के अनुसार देश में कहीं और मौजूद नहीं है, सीमावर्ती व पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में केंद्र-स्थानीय भरोसे की बहाली की कसौटी बनेगा। प्रत्यक्ष चुनाव वाले प्रस्तावित निकाय और संभावित संवैधानिक संशोधन से लद्दाख के शासन-ढांचे का स्वरूप तय होगा।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • लद्दाख के लिए प्रस्तावित नया संवैधानिक संरक्षण ढांचा अनुच्छेद 371 के तहत तैयार किया जा रहा है।
  • लद्दाख के मुख्य सचिव: आशीष कुंद्रा; लद्दाख के डीजीपी: आनंद जैन।
  • लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) 2023 से गृह मंत्रालय से वार्ता कर रहे हैं।
  • प्रदर्शनकारियों की मांगें: छठी अनुसूची का दर्जा और राज्य का दर्जा; पिछले वर्ष 24 सितंबर की गोलीबारी में चार मौतें, 80+ घायल।
  • सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत जोधपुर जेल में रखा गया; हिरासत इस वर्ष मार्च में रद्द।
  • पर्यटन: इस वर्ष लद्दाख में चार लाख पर्यटक, पूरे 2025 में 3.35 लाख।

मेन्स दृष्टिकोण

लद्दाख का मामला बताता है कि केंद्रशासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठन के बाद विधायी प्रतिनिधित्व के अभाव ने भूमि, रोजगार, संस्कृति, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर स्थानीय असुरक्षा को गहराया, जिसकी अभिव्यक्ति छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग में हुई। 2023 से LAB और KDA की गृह मंत्रालय से वार्ता पिछले वर्ष 24 सितंबर की कथित पुलिस गोलीबारी—चार मौतें, 80 से अधिक घायल—और सोनम वांगचुक की NSA हिरासत के बाद ठहर गई; मार्च में हिरासत रद्द होने और 9 सितंबर की दिल्ली बैठक से प्रक्रिया पुनर्जीवित हुई। अब प्रशासन अनुच्छेद 371 के तहत एक ऐसा ढांचा प्रस्तावित कर रहा है जो मुख्य सचिव के शब्दों में देश में कहीं और नहीं है, जिसमें प्रस्तावित केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय निकाय के प्रत्यक्ष चुनाव और उसकी शक्तियों के लिए पृथक विधान की बात है; आगे संसद द्वारा संवैधानिक संशोधन पर विचार सहमति बनने के बाद ही होगा। आगे का रास्ता है—अक्टूबर के पहले सप्ताह की बैठक में मसौदे पर पारदर्शी संवाद, जिला-स्तरीय ढांचे व पंचायत चुनावों के जरिये स्थानीय लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण, और पर्यटन वृद्धि (3.35 लाख से चार लाख) के साथ पारिस्थितिक व सांस्कृतिक संरक्षण का संतुलन।

मुख्य शब्द

अनुच्छेद 371
संविधान का प्रावधान जिसके तहत विशेष क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं; लद्दाख हेतु नया संरक्षण ढांचा इसी के तहत प्रस्तावित।
छठी अनुसूची
जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से जुड़ी संवैधानिक अनुसूची, जिसका दर्जा लद्दाख के प्रदर्शनकारी मांग रहे हैं।
लेह एपेक्स बॉडी (LAB)
लेह स्थित संगठनों का मंच, जो लद्दाख की स्वायत्तता पर गृह मंत्रालय से वार्ता कर रहा है।
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA)
कारगिल के संगठनों का गठबंधन, लद्दाख की स्वायत्तता वार्ता का दूसरा प्रमुख पक्ष।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA)
निवारक निरोध कानून, जिसके तहत सोनम वांगचुक को हिरासत में रखा गया था; मार्च में हिरासत रद्द हुई।
प्रस्तावित केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय निकाय
प्रत्यक्ष चुनाव वाला प्रस्तावित निकाय, जिसकी शक्तियों व कार्यों के लिए अलग विधान की आवश्यकता बताई गई है।

अभ्यास प्रश्न

  1. लद्दाख के संदर्भ में अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित संरक्षण ढांचे और छठी अनुसूची की मांग की तुलना करते हुए मूल्यांकन करें कि कोई संवैधानिक व्यवस्था स्थानीय आकांक्षाओं को कैसे संतुलित कर सकती है।
  2. विधानसभा रहित केंद्रशासित प्रदेशों में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की कमी किस प्रकार जन-असंतोष को जन्म देती है? लद्दाख के अनुभव से उदाहरण लेकर चर्चा करें।
  3. सीमावर्ती व पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटन वृद्धि और पर्यावरण-संस्कृति संरक्षण के बीच संतुलन की चुनौतियों पर लद्दाख के आंकड़ों के आलोक में परीक्षण करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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