राजनीति श्रीनगर

हरि सिंह, शेख अब्दुल्ला जयंती अवकाश पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहस

महाराजा हरि सिंह और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती के अवकाश पर मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में तीखी बहस हुई। एनसी सदस्य अब्दुल मजीद लार्मी ने 23 सितंबर का अवकाश हटाने या 5 दिसंबर का अवकाश बहाल करने की मांग की। भाजपा विधायकों ने आपत्ति जताते हुए वॉकआउट किया। पीडीपी सदस्यों ने 1931 में 22 मौतों से जुड़े 13 जुलाई के अवकाश की बहाली मांगी। स्पीकर ने कहा कि अवकाश पर उन्हें अधिकार नहीं है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • NC MLA Abdul Majeed Larmi demanded withdrawal of the Sept 23 holiday for Maharaja Hari Singh or restoration of the Dec 5 holiday for Sheikh Abdullah — Attributed to the named NC member in the source; appears as reported proceedings.
  • BJP MLAs walked out in protest against NC members' remarks on the Hari Singh holiday — Stated in the source as an event in the assembly; no direct quotes given.
  • PDP MLAs Waheed Para and Aga Muntazir Mehdi sought restoration of the July 13 holiday marking the 1931 killing of 22 Kashmiris outside Srinagar jail — Attributed to the two named PDP MLAs; the 1931 figure of 22 appears in the source.
  • J&K administration removed July 13 and Dec 5 from the holiday list in Jan 2020, and Sept 23 was added in 2022 — Dates appear in the source without a named official source; internally consistent.
  • The speaker said he had no authority to grant or withdraw government holidays — Attributed to the speaker in the source, paraphrased rather than quoted.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह विवाद असल में छुट्टियों की सूची का नहीं, इस सवाल का है कि जम्मू-कश्मीर का इतिहास कौन परिभाषित करेगा। विधानसभा के ठोस अधिकार सीमित होने के कारण प्रतीकात्मक मुद्दे ही मुख्य राजनीतिक मैदान बन जाते हैं — एनसी घाटी में अपनी संस्थापक विरासत दोहराती है, तो भाजपा जम्मू में डोगरा अस्मिता की पैरोकार बनती है। यह उन दुर्लभ टकरावों में है जिसमें दोनों पक्ष हारे बिना निकल सकते हैं, क्योंकि उनके लक्षित मतदाता अलग-अलग हैं।

  • तीनों विवादित तारीखें — 23 सितंबर (हरि सिंह), 5 दिसंबर (शेख अब्दुल्ला) और 13 जुलाई — जम्मू और घाटी के राजनीतिक विभाजन को लगभग सटीक रूप से दर्शाती हैं।
  • विपक्ष में रहते हुए भी भाजपा का वॉकआउट यह संदेश मजबूत करता है कि जम्मू की भावना की रक्षा वही करती है।
  • 'दोनों छुट्टियां या कोई नहीं' का तर्क चुनकर एनसी अपने संस्थापक की विरासत आगे बढ़ाती है, पर डोगरा भावना से सीधा टकराव टाल देती है।
  • कांग्रेस का बीच का रास्ता — 5 दिसंबर की बहाली का समर्थन और 23 सितंबर को बनाए रखना — गठबंधन सहयोगी को बचाते हुए जम्मू में नुकसान सीमित करता है।
  • पीडीपी का 13 जुलाई उठाना घाटी में एनसी पर दबाव बनाने और ज्यादा मुखर कश्मीरी जगह घेरने की कोशिश दिखता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि यह मांग सदन से आगे बढ़कर सरकार या प्रशासन तक औपचारिक रूप से जाती है, या एनसी नेतृत्व इसे सदन की बयानबाजी तक सीमित रहने देता है।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि छुट्टियों की सूची में कोई बदलाव होगा, एनसी नेतृत्व लार्मी की मांग का औपचारिक समर्थन करता है, या अब फैसला लेने का अधिकार किसके पास है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को सार्वजनिक अवकाशों की सूची पर तीखी बहस हुई। मुद्दा था — डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह की 23 सितंबर की जयंती पर अवकाश, और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 5 दिसंबर की जयंती पर हटाया गया अवकाश। जनवरी 2020 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 13 जुलाई और 5 दिसंबर के अवकाश सूची से हटा दिए थे, जबकि 2022 में 23 सितंबर को सूची में जोड़ा गया। यह विवाद क्षेत्र के प्रतीकों और स्मृति-राजनीति से जुड़ा है, जिसमें जम्मू और कश्मीर संभागों की अलग-अलग भावनाएँ झलकती हैं।

मुख्य तथ्य

  • मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में महाराजा हरि सिंह और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती के अवकाश पर तीखी बहस हुई।
  • एनसी विधायक अब्दुल मजीद लार्मी ने मांग की कि 23 सितंबर (हरि सिंह जयंती) का अवकाश हटाया जाए या 5 दिसंबर (शेख अब्दुल्ला जयंती) का अवकाश बहाल किया जाए।
  • विपक्षी भाजपा विधायकों ने एनसी विधायकों की टिप्पणियों के विरोध में विधानसभा से वॉकआउट किया।
  • कांग्रेस ने 5 दिसंबर का अवकाश बहाल करने की एनसी की मांग का समर्थन किया, साथ ही हरि सिंह का अवकाश बनाए रखने का पक्ष लिया।
  • पीडीपी विधायक वहीद पारा और आगा मुंतजिर मेहदी ने 13 जुलाई के अवकाश की बहाली का मुद्दा उठाया।
  • 13 जुलाई 1931 को श्रीनगर जेल के बाहर डोगरा शासक के विरुद्ध प्रदर्शन में 22 कश्मीरी मारे गए थे।
  • स्पीकर ने कहा कि सरकारी अवकाश देने या हटाने का अधिकार उनके पास नहीं है।
  • जनवरी 2020 में प्रशासन ने 13 जुलाई और 5 दिसंबर को सूची से हटाया; 2022 में 23 सितंबर जोड़ा गया।

समयरेखा

  1. 1931 (13 जुलाई)डोगरा शासक के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान श्रीनगर जेल के बाहर 22 कश्मीरियों की मौत।
  2. जनवरी 2020जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 13 जुलाई और 5 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाशों की सूची से हटाया।
  3. 202223 सितंबर (महाराजा हरि सिंह जयंती) को सार्वजनिक अवकाश सूची में जोड़ा गया।
  4. मंगलवार (हाल में)विधानसभा में बहस; एनसी की मांग, भाजपा का वॉकआउट, पीडीपी की 13 जुलाई बहाली की मांग, स्पीकर का अधिकार-क्षेत्र न होने का बयान।

किसका दाँव

  • नेशनल कॉन्फ्रेंस (सत्तारूढ़) — संस्थापक शेख अब्दुल्ला की 5 दिसंबर जयंती पर अवकाश बहाल कराना और अवकाश-सूची में समानता की मांग।
  • भाजपा (विपक्ष) — महाराजा हरि सिंह की 23 सितंबर की जयंती का अवकाश बरकरार रखना; विरोध में वॉकआउट।
  • कांग्रेस — 5 दिसंबर की बहाली का समर्थन, साथ ही हरि सिंह का अवकाश बनाए रखने का पक्ष।
  • पीडीपी (वहीद पारा, आगा मुंतजिर मेहदी) — 1931 की 22 मौतों की स्मृति में 13 जुलाई का अवकाश बहाल कराना।
  • विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) — सदन संचालन; स्पष्ट किया कि सरकारी अवकाश तय करना उनके अधिकार में नहीं।
  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन — अवकाश सूची में बदलाव करने वाली संस्था — 2020 में हटाना, 2022 में जोड़ना।

क्यों अहम है

अवकाश की सूची जम्मू-कश्मीर में केवल प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि यह तय करती है कि राज्य किन ऐतिहासिक व्यक्तियों और घटनाओं को सार्वजनिक स्मृति में स्थान देता है। डोगरा शासक की जयंती और शेख अब्दुल्ला/13 जुलाई की स्मृति पर टकराव जम्मू और कश्मीर संभागों की भिन्न राजनीतिक भावनाओं तथा 2019 के बाद के बदलावों को उजागर करता है। स्पीकर के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि निर्वाचित सदन और प्रशासन के अधिकार-क्षेत्र का प्रश्न भी इसमें जुड़ा है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक थे; उनकी जयंती 23 सितंबर।
  • शेख मोहम्मद अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक; जयंती 5 दिसंबर।
  • 13 जुलाई 1931: श्रीनगर जेल के बाहर प्रदर्शन में 22 कश्मीरी मारे गए।
  • जनवरी 2020 में 13 जुलाई और 5 दिसंबर के अवकाश हटाए गए; 2022 में 23 सितंबर जोड़ा गया।
  • विधानसभा में बहस में शामिल दल: एनसी (सत्तारूढ़), भाजपा (विपक्ष), कांग्रेस, पीडीपी।
  • पीडीपी विधायक वहीद पारा और आगा मुंतजिर मेहदी ने 13 जुलाई की बहाली की मांग उठाई।

मेन्स दृष्टिकोण

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में अवकाश-सूची पर हुई बहस दर्शाती है कि प्रतीकों की राजनीति कैसे विधायी मंच पर केंद्र में आ जाती है। एनसी ने 23 सितंबर (हरि सिंह जयंती) हटाने या 5 दिसंबर (शेख अब्दुल्ला जयंती) बहाल करने की मांग रखी, भाजपा ने इसका विरोध कर वॉकआउट किया, कांग्रेस ने मध्यमार्ग अपनाते हुए दोनों अवकाश रखने का समर्थन किया, और पीडीपी ने 1931 में 22 कश्मीरियों की मौत से जुड़े 13 जुलाई के अवकाश की बहाली उठाई। मूल कारण यह है कि जनवरी 2020 में प्रशासन ने दो तिथियाँ हटाईं और 2022 में एक नई जोड़ी — यानी स्मृति-चयन प्रशासनिक निर्णयों से बदला, जिससे विभिन्न क्षेत्रीय और राजनीतिक समूहों में असंतोष बना। इसका प्रभाव सदन के कामकाज, संभागीय ध्रुवीकरण और निर्वाचित प्रतिनिधियों की सीमित शक्तियों की धारणा पर पड़ता है — स्पीकर ने स्वयं कहा कि अवकाश देने-हटाने का अधिकार उनके पास नहीं है। आगे का रास्ता यह हो सकता है कि ऐतिहासिक स्मृति से जुड़े ऐसे निर्णय व्यापक परामर्श और पारदर्शी प्रक्रिया से लिए जाएँ, ताकि किसी एक समुदाय या संभाग की भावनाओं का बहिष्कार न दिखे; स्रोत में इससे अधिक नीतिगत प्रस्ताव नहीं दिया गया है।

मुख्य शब्द

महाराजा हरि सिंह
जम्मू-कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक; उनकी जयंती 23 सितंबर को 2022 से सार्वजनिक अवकाश।
शेख मोहम्मद अब्दुल्ला
नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक; उनकी 5 दिसंबर की जयंती का अवकाश जनवरी 2020 में हटाया गया।
13 जुलाई (1931)
डोगरा शासक के विरुद्ध प्रदर्शन में श्रीनगर जेल के बाहर 22 कश्मीरियों की मौत की स्मृति तिथि; अवकाश 2020 में हटाया गया।
वॉकआउट
विरोध जताने के लिए सदस्यों द्वारा सदन की कार्यवाही छोड़कर बाहर चले जाना; यहाँ भाजपा विधायकों ने किया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी)
जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी, जिसके विधायक लार्मी ने अवकाश-सूची में बदलाव की मांग की।
पीडीपी
पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी; इसके विधायक वहीद पारा और आगा मुंतजिर मेहदी ने 13 जुलाई का अवकाश बहाल करने की मांग की।

अभ्यास प्रश्न

  1. जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक अवकाशों की सूची में बदलाव किस तरह क्षेत्रीय स्मृति और पहचान की राजनीति को प्रभावित करते हैं? उदाहरणों सहित चर्चा करें।
  2. विधानसभा अध्यक्ष के इस कथन — कि सरकारी अवकाश तय करना उनके अधिकार में नहीं — के आलोक में निर्वाचित सदन और कार्यपालिका/प्रशासन के अधिकार-क्षेत्र के संबंध की समीक्षा करें।
  3. 1931 की 13 जुलाई की घटना जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है? स्रोत में दी गई जानकारी के आधार पर स्पष्ट करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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