राष्ट्रीय श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर में 21.8 लाख किताबों की जांच, 4,249 हटाईं

जम्मू-कश्मीर में पिछले दो महीनों में "आपत्तिजनक सामग्री" के लिए 21.8 लाख से अधिक किताबों की जांच के बाद सार्वजनिक, स्कूल और कॉलेज पुस्तकालयों से 4,249 किताबें हटा दी गईं और 1,752 अन्य शीर्षक विशेषज्ञ परीक्षण के लिए भेजे गए। शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। हटाई गई किताबों में 3,996 कश्मीर और 253 जम्मू से थीं; अब तक 518 पुस्तकें प्रतिबंधित हैं। एआईपी विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने कश्मीर से जुड़ी किताबों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 4,249 books were withdrawn from public, school and college libraries in J&K, and 1,752 titles sent for expert examination after screening over 21.8 lakh books in two months. — Attributed to education minister Sakina Itoo in a written reply in the assembly; figures appear in source.
  • Of the withdrawn books, 3,996 were from Kashmir and 253 from Jammu; 518 books have been banned and removed so far. — Figures appear in source, attributed to the minister's reply; the relationship between the 518 and 4,249 totals is not explained.
  • Screening orders were issued in July after the UT administration withdrew two books called 'highly inappropriate'. — Attributed in source to education department and university orders; no document cited.
  • The home department banned 25 books on Kashmir a year ago for promoting a 'false narrative', 'secessionism' and 'anti-national' views. — Stated in source as background; attributed to the home department, no order number given.
  • MLA Khursheed Ahmad Sheikh alleged large-scale targeting of Kashmir-related books and literature. — Direct quotes attributed to the AIP MLA; allegation, not verified.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह खबर किताबों से ज़्यादा इस सवाल की है कि जम्मू-कश्मीर में असल ताकत किसके हाथ में है। निर्वाचित ओमर अब्दुल्ला सरकार की शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में ये आंकड़े रखकर और उनका बचाव करके, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के आदेशों से शुरू हुई इस छानबीन की राजनीतिक ज़िम्मेदारी निर्वाचित सरकार के खाते में डाल दी है। 4,249 में से 3,996 किताबें कश्मीर से और सिर्फ 253 जम्मू से हटाई जाना — यह असंतुलन विपक्ष को तैयार हथियार दे देता है।

  • ये आंकड़े एआईपी विधायक खुर्शीद अहमद शेख के सवाल के जवाब में आए, जो दिखाता है कि अवामी इत्तिहाद पार्टी इस मुद्दे से नेशनल कॉन्फ्रेंस पर दबाव बनाए रखना चाहती है।
  • कश्मीर (3,996) और जम्मू (253) के बीच का बड़ा फर्क "कश्मीर को निशाना बनाया जा रहा है" वाले आरोप को घाटी में आसानी से राजनीतिक धार देता है।
  • मंत्री सकीना इटू की भाषा — "स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड", संवैधानिक मूल्य, संप्रभुता और अखंडता — एक सधी हुई लाइन लगती है, जो दिल्ली से टकराव टालती है और साथ ही संकेत देती है कि पहल निर्वाचित सरकार की नहीं है।
  • हटाई गई किताबों की सूची सार्वजनिक करने की मांग ने पारदर्शिता को मुख्य मुद्दा बना दिया है: नाम न बताने से संदेह बढ़ेगा, बताने से हर किताब पर अलग विवाद खड़ा होगा — दोनों सरकार के लिए असहज हैं।
  • यह आम जानकारी है कि केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे में कानून-व्यवस्था और गृह विभाग से जुड़ी अहम शक्तियां निर्वाचित सरकार के पास नहीं हैं, लेकिन अमल शिक्षा विभाग के जरिए हो रहा है, इसलिए राजनीतिक कीमत एनसी को चुकानी पड़ सकती है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि सरकार हटाई गई किताबों की सूची और इस्तेमाल किए गए मानदंड सार्वजनिक करती है, या यह मामला सदन में एनसी बनाम एआईपी टकराव के रूप में और तेज़ होता है।

यह खबर यह नहीं बताती कि कौन-सी किताबें हटाई गईं, "अभ्यंतरकर सामग्री" के मानदंड वास्तव में क्या हैं, और इस कवायद में निर्वाचित सरकार की तथा केंद्र शासित प्रशासन की भूमिका कितनी-कितनी है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर सरकार ने "आपत्तिजनक सामग्री" की तलाश में सार्वजनिक, स्कूल और कॉलेज पुस्तकालयों की किताबों की बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। यह कवायद जुलाई में शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों द्वारा जारी उन आदेशों के बाद हुई, जिनमें दफ्तरों, कक्षाओं, स्टाफ रूम और पुस्तकालयों की सभी नई-पुरानी किताबों की जांच कहा गया था। इससे पहले केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ने दो किताबों को "अत्यंत अनुचित" बताकर हटाया था, और एक वर्ष पूर्व गृह विभाग ने कश्मीर पर 25 किताबें प्रतिबंधित की थीं। शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने मंगलवार को विधानसभा में इसके आंकड़े रखे।

मुख्य तथ्य

  • पिछले दो महीनों में 21.8 लाख से अधिक किताबों की "आपत्तिजनक सामग्री" के लिए जांच की गई।
  • सार्वजनिक, स्कूल और कॉलेज पुस्तकालयों से 4,249 किताबें हटाई गईं।
  • 1,752 अन्य शीर्षक "विशेषज्ञ परीक्षण" के लिए भेजे गए।
  • हटाई गई 4,249 किताबों में 3,996 कश्मीर से और 253 जम्मू से थीं।
  • अब तक कुल 518 किताबें प्रतिबंधित और हटाई गई हैं।
  • जुलाई में शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों ने सभी नई-पुरानी किताबों की जांच के आदेश दिए थे।
  • एक वर्ष पूर्व गृह विभाग ने कश्मीर पर 25 किताबें "झूठा नैरेटिव", "अलगाववाद" और "राष्ट्र-विरोधी" विचारों के प्रचार के आरोप में प्रतिबंधित की थीं।
  • शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने लिखित जवाब में कहा कि आपत्तिजनक सामग्री पहचानने के लिए "स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड" इस्तेमाल हो रहे हैं।

समयरेखा

  1. लगभग एक वर्ष पूर्वगृह विभाग ने कश्मीर पर 25 किताबें प्रतिबंधित कीं।
  2. जांच से पहले (तिथि स्रोत में नहीं)केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ने दो किताबों को "अत्यंत अनुचित" बताकर वापस लिया।
  3. जुलाईशिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों ने दफ्तरों, कक्षाओं, स्टाफ रूम व पुस्तकालयों की सभी किताबों की जांच के आदेश दिए।
  4. पिछले दो महीने21.8 लाख से अधिक किताबों की जांच; 4,249 हटाई गईं, 1,752 विशेषज्ञ परीक्षण को भेजी गईं।
  5. मंगलवार (शरद सत्र)शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने विधानसभा में आंकड़े दिए; विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने सवाल उठाया।

किसका दाँव

  • जम्मू-कश्मीर शिक्षा विभाग व शिक्षा मंत्री सकीना इटू — जांच की जिम्मेदारी; "स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड" तथा संवैधानिक मूल्यों के पालन का दावा।
  • मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार — विपक्ष का आरोप कि वह कश्मीर-संबंधी किताबों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाने में सहयोग कर रही है।
  • अवामी इत्तिहाद पार्टी के विधायक खुर्शीद अहमद शेख — हटाई गई किताबों के नाम और कारण सार्वजनिक करने की मांग; कश्मीर-केंद्रित साहित्य हटाने का आरोप।
  • केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन/गृह विभाग — दो किताबें "अत्यंत अनुचित" बताकर वापस लीं; 25 किताबों पर पहले प्रतिबंध।
  • छात्र, शिक्षक, विश्वविद्यालय व कॉलेज पुस्तकालय — पठन-सामग्री की उपलब्धता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और पाठ्यक्रम-संदर्भ सामग्री पर सीधा असर।

क्यों अहम है

यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शैक्षणिक स्वायत्तता और राज्य द्वारा "आपत्तिजनक सामग्री" तय करने की शक्ति के बीच टकराव को सामने रखता है। 21.8 लाख किताबों की जांच जैसी व्यापक कवायद में पारदर्शिता—किन किताबों को क्यों हटाया गया—का प्रश्न लोकतांत्रिक जवाबदेही का प्रश्न बन जाता है। साथ ही यह दिखाता है कि जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के बीच अधिकार-क्षेत्र का मुद्दा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी राजनीतिक विवाद पैदा करता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • जम्मू-कश्मीर में दो महीनों में 21.8 लाख से अधिक किताबों की जांच; 4,249 हटाई गईं, 1,752 विशेषज्ञ परीक्षण को भेजी गईं।
  • हटाई गई किताबों में 3,996 कश्मीर संभाग से, 253 जम्मू संभाग से; अब तक 518 किताबें प्रतिबंधित।
  • जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री: सकीना इटू; मुख्यमंत्री: उमर अब्दुल्ला।
  • गृह विभाग ने एक वर्ष पूर्व कश्मीर पर 25 किताबें "अलगाववाद" व "राष्ट्र-विरोधी" विचारों के आरोप में प्रतिबंधित कीं।
  • सवाल उठाने वाले विधायक: खुर्शीद अहमद शेख, अवामी इत्तिहाद पार्टी (जेल में बंद सांसद इंजीनियर रशीद की पार्टी)।
  • जांच के आदेश जुलाई में शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों द्वारा जारी किए गए थे।

मेन्स दृष्टिकोण

जम्मू-कश्मीर में 21.8 लाख किताबों की जांच के बाद 4,249 किताबें हटाने का मामला इस प्रश्न को केंद्र में लाता है कि राज्य सत्ता शैक्षणिक संस्थानों में पठन-सामग्री को कितनी दूर तक नियंत्रित कर सकती है। सरकार का तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों से अपेक्षा है कि वे संवैधानिक मूल्यों, उत्तरदायी नागरिकता और भारत की संप्रभुता, एकता व अखंडता के प्रति सम्मान को बढ़ावा दें, और चयन "स्पष्ट तथा वस्तुनिष्ठ मानदंड" पर हो रहा है; विपक्षी विधायक खुर्शीद अहमद शेख का आरोप है कि कश्मीर से संबंधित तथा बड़े लेखकों की किताबें भी हटाई जा रही हैं और यह "किताब-विहीन समाज" की ओर ले जाएगा। आंकड़ों का असंतुलन—3,996 बनाम 253—क्षेत्रीय असमानता की धारणा को बल देता है, जबकि हटाई गई किताबों की सूची और कारण सार्वजनिक न होना पारदर्शिता का सवाल खड़ा करता है। आगे का रास्ता सार्वजनिक रूप से अधिसूचित मानदंड, हटाई गई शीर्षकों की सूची का प्रकाशन, विशेषज्ञ/शैक्षणिक समितियों की भागीदारी और अपील की व्यवस्था में निहित दिखता है, ताकि सुरक्षा-चिंताओं और शैक्षणिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बने।

मुख्य शब्द

आपत्तिजनक सामग्री
वह सामग्री जिसे प्रशासन अनुपयुक्त मानता है; स्रोत के अनुसार इसे पहचानने के लिए "स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड" इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञ परीक्षण (expert examination)
संदिग्ध किताबों को विशेषज्ञों के पास भेजकर जांचने की प्रक्रिया; 1,752 शीर्षक इसके लिए भेजे गए।
अवामी इत्तिहाद पार्टी (एआईपी)
जेल में बंद सांसद इंजीनियर रशीद की पार्टी, जिसके विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने विधानसभा में यह सवाल पूछा।
केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन
जम्मू-कश्मीर का प्रशासनिक ढांचा, जिसने दो किताबों को "अत्यंत अनुचित" बताकर वापस लिया।
गृह विभाग का प्रतिबंध
एक वर्ष पूर्व कश्मीर पर 25 किताबों पर "झूठा नैरेटिव", "अलगाववाद" और "राष्ट्र-विरोधी" विचारों के आधार पर लगाया गया प्रतिबंध।

अभ्यास प्रश्न

  1. जम्मू-कश्मीर में पुस्तकालयों से किताबें हटाने की कवायद के आलोक में शैक्षणिक स्वतंत्रता और राज्य की सुरक्षा-चिंताओं के बीच संतुलन पर चर्चा कीजिए।
  2. क्या "आपत्तिजनक सामग्री" तय करने के मानदंड सार्वजनिक रूप से अधिसूचित होने चाहिए? पारदर्शिता और जवाबदेही के दृष्टिकोण से परीक्षण कीजिए।
  3. हटाई गई 4,249 किताबों में 3,996 कश्मीर से होने के आंकड़े के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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