नौसेना ने छह एलसीयू एमके-5 पोतों के लिए आरएफआई जारी किया

भारतीय नौसेना ने छह लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके-5 पोतों के लिए भारतीय शिपयार्डों से सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया है। इनका निर्माण 'मेक इन इंडिया' के तहत होगा और खरीद बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में की जाएगी। प्रत्येक पोत लगभग 85 मीटर लंबा और करीब 1,500 टन विस्थापन वाला होगा, जो कम से कम चार मुख्य युद्धक टैंक, चार बीएमपी वाहन और 190 सैनिक ले जा सकेगा। नौसेना ने 4,500 समुद्री मील की क्षमता, न्यूनतम 15 नॉट गति और 30 वर्ष सेवा अवधि मांगी है।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Indian Navy has issued an RFI for six Landing Craft Utility Mk V vessels from Indian shipyards. — Attributed to the Navy's RFI in the source; the RFI document is not linked, source cites indiandefensenews and thedefensenews.
  • Each vessel is to be about 85 metres long, around 1,500 tonnes displacement with 15% variation allowed. — Figures appear in the source and are internally consistent, repeated twice.
  • Each vessel must carry at least four MBTs, four BMP infantry fighting vehicles and 190 fully equipped troops. — Figure appears in the source and is stated twice without contradiction.
  • Required endurance about 4,500 nautical miles, top speed at least 15 knots, service life 30 years, diesel propulsion. — All figures present in source, attributed to the Navy's requirement.
  • The Navy operates eight LCU Mk IV vessels designed and built by GRSE, about 62.8 m long, 830-1,001 tonnes. — Stated in source; troop capacity of 160-216 is attributed only to unnamed 'sources'.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

ऊपरी तौर पर यह एक तकनीकी खरीद प्रक्रिया है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह सरकार के 'मेक इन इंडिया' रक्षा नैरेटिव को और मज़बूती देने वाला कदम है। छह एलसीयू एमके-5 पोतों को बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में रखना और केवल भारतीय शिपयार्डों से जवाब मांगना आत्मनिर्भरता के एजेंडे को रेखांकित करता है। लगभग 4,500 नॉटिकल मील की एंड्योरेंस और द्वीपीय लॉजिस्टिक्स की भूमिका दूरस्थ क्षेत्रों को लेकर व्यापक रणनीतिक प्राथमिकता का संकेत देती है — पर आरएफआई खरीद की पहली सीढ़ी है, ऑर्डर नहीं।

  • सिर्फ भारतीय शिपयार्डों तक सीमित करने से सार्वजनिक क्षेत्र के यार्ड और निजी कंपनियों के बीच दिलचस्प प्रतिस्पर्धा बनेगी, और जहाँ जहाज़ निर्माण क्षमता है उन राज्यों को लाभ मिल सकता है।
  • मौजूदा आठ एलसीयू एमके-4 पोतों का डिज़ाइन और निर्माण जीआरएसई ने किया था, इसलिए यह सौदा सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित रहेगा या व्यापक प्रतिस्पर्धा खुलेगी, यह राजनीतिक रूप से देखने लायक है।
  • स्वदेशी सामग्री और घरेलू औद्योगिक भागीदारी का ब्योरा मांगना सीधे रोज़गार और स्थानीय सप्लाई चेन के राजनीतिक संदेश से जुड़ता है।
  • द्वीपीय लॉजिस्टिक्स, ईईज़ेड गश्त और एचएडीआर मिशन इस प्लेटफॉर्म को दोहरी उपयोगिता देते हैं — सैन्य क्षमता के साथ राहत अभियानों से मिलने वाली कूटनीतिक सद्भावना भी।
  • रक्षा खरीद में आरएफआई से अनुबंध तक वर्षों लगने का इतिहास रहा है, इसलिए कोई भी देरी विपक्ष को परिचित आलोचना का मौका देगी।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि कितने और कौन-कौन से शिपयार्ड जवाब देते हैं और आरएफपी कितनी जल्दी आता है — यही समयरेखा बताएगी कि इस कार्यक्रम को कितनी राजनीतिक प्राथमिकता है।

यह खबर न लागत, न समयसीमा, न चयनित शिपयार्ड और न अंतिम सरकारी मंजूरी की पुष्टि करती है; यह केवल सूचना जुटाने का चरण है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारतीय नौसेना ने छह नए लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके-5 पोतों के लिए भारतीय शिपयार्डों से सूचना के लिए अनुरोध (आरएफआई) जारी किया है। एलसीयू वे उभयचर पोत हैं जो जहाजों से तट तक सैनिकों, वाहनों और भारी उपकरणों को उतारते हैं तथा राहत व चिकित्सा निकासी कार्यों में भी उपयोगी हैं। नौसेना के पास वर्तमान में आठ एलसीयू एमके-4 पोत हैं, जिन्हें गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने डिजाइन और निर्मित किया था। नए एमके-5 पोत आकार और सहनक्षमता (एंड्योरेंस) में एमके-4 से काफी बड़े होंगे और 'मेक इन इंडिया' के तहत बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में खरीदे जाएंगे।

मुख्य तथ्य

  • नौसेना ने छह एलसीयू एमके-5 पोतों के लिए भारतीय शिपयार्डों से आरएफआई जारी किया है।
  • प्रत्येक पोत लगभग 85 मीटर लंबा और लगभग 1,500 टन विस्थापन वाला होगा; आरएफआई विस्थापन में 15% भिन्नता की छूट देता है।
  • क्षमता: कम से कम चार मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी), चार बीएमपी इन्फैंट्री फाइटिंग वाहन और 190 पूर्ण सुसज्जित सैनिक।
  • सहनक्षमता लगभग 4,500 समुद्री मील और अधिकतम गति कम से कम 15 नॉट मांगी गई है।
  • पोत डीजल प्रणोदन से चलेंगे, सी स्टेट 3 में संचालन और सी स्टेट 7 तक जीवित रहने में सक्षम होने चाहिए; सेवा अवधि 30 वर्ष।
  • मौजूदा आठ एलसीयू एमके-4 पोत लगभग 62.8 मीटर लंबे, 830 से 1,001 टन विस्थापन, 15 नॉट अधिकतम गति और 12 नॉट पर लगभग 1,500 समुद्री मील सहनक्षमता वाले हैं।
  • एमके-4 पोत 160 से 216 कर्मियों तक ले जा सकते हैं और अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह के आसपास मिशन करते हैं।
  • खरीद रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) 2.0 के तहत बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में की जाएगी।

समयरेखा

  1. पूर्व में (तिथि स्रोत में नहीं दी गई)जीआरएसई द्वारा डिजाइन और निर्मित आठ एलसीयू एमके-4 पोत नौसेना में शामिल।
  2. वर्तमान (तिथि स्रोत में नहीं दी गई)नौसेना ने छह एलसीयू एमके-5 पोतों के लिए भारतीय शिपयार्डों से आरएफआई जारी किया।
  3. आगेभारतीय शिपयार्ड स्वदेशी सामग्री और घरेलू औद्योगिक भागीदारी का विवरण देते हुए प्रतिक्रिया देंगे; खरीद डीपीपी 2.0 के तहत आगे बढ़ेगी।

किसका दाँव

  • भारतीय नौसेना — उभयचर अभियानों, द्वीपीय लॉजिस्टिक्स, खोज-बचाव, ईईजेड गश्त और एचएडीआर मिशनों के लिए बड़ी व अधिक सहनक्षमता वाली उतराई क्षमता।
  • भारतीय शिपयार्ड और विक्रेता — आरएफआई में भागीदारी और छह पोतों के निर्माण का अवसर; स्वदेशी सामग्री व घरेलू भागीदारी का विवरण देना अनिवार्य।
  • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) — मौजूदा आठ एलसीयू एमके-4 का डिजाइनर व निर्माता; एमके-5 में अनुभव का लाभ।
  • रक्षा मंत्रालय / 'मेक इन इंडिया' — बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी के जरिये स्वदेशी डिजाइन, विकास व निर्माण को बढ़ावा।
  • अंडमान व निकोबार सहित द्वीपीय क्षेत्र — कर्मियों, आपूर्ति, वाहनों और इंजीनियरिंग उपकरणों की आवाजाही तथा आपदा राहत में सुधार।

क्यों अहम है

लंबी दूरी और बड़ी क्षमता वाले एलसीयू नौसेना को अपने अड्डों से दूर, विशेषकर भारत के द्वीपीय क्षेत्रों में, उभयचर और लॉजिस्टिक अभियान चलाने में सक्षम बनाएंगे। 4,500 समुद्री मील की मांगी गई सहनक्षमता एमके-4 की लगभग 1,500 समुद्री मील से कई गुना अधिक है, जो परिचालन पहुंच में बड़ा विस्तार है। बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में खरीद घरेलू पोत निर्माण और स्वदेशी डिजाइन क्षमता को मजबूत करती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एलसीयू = लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी; जहाज से तट तक सैनिक, वाहन व भारी उपकरण उतारने वाला उभयचर पोत।
  • एलसीयू एमके-5: लगभग 85 मीटर लंबाई, ~1,500 टन विस्थापन, ~4,500 समुद्री मील सहनक्षमता, न्यूनतम 15 नॉट गति, 30 वर्ष सेवा अवधि।
  • क्षमता: 4 एमबीटी + 4 बीएमपी + 190 पूर्ण सुसज्जित सैनिक।
  • मौजूदा आठ एलसीयू एमके-4 पोत जीआरएसई द्वारा डिजाइन व निर्मित; लंबाई ~62.8 मीटर।
  • खरीद श्रेणी: बाय (इंडियन-आईडीडीएम) — स्वदेशी डिजाइन, विकास व निर्माण; प्रक्रिया: डीपीपी 2.0।
  • प्रयोजन: उभयचर अभियान, द्वीपीय लॉजिस्टिक्स, एसएआर, ईईजेड गश्त और एचएडीआर।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की समुद्री सुरक्षा और द्वीपीय क्षेत्रों की लॉजिस्टिक आवश्यकताएं ऐसे पोतों की मांग करती हैं जो तट तक सैनिक, कवचित वाहन और भारी उपकरण पहुंचा सकें तथा आपदा राहत में भी काम आ सकें। नौसेना के मौजूदा आठ एलसीयू एमके-4 पोत लगभग 62.8 मीटर लंबे और 12 नॉट पर लगभग 1,500 समुद्री मील सहनक्षमता वाले हैं, जिससे अड्डों से दूर संचालन सीमित रहता है; इसके विपरीत प्रस्तावित एमके-5 लगभग 85 मीटर, ~1,500 टन विस्थापन और ~4,500 समुद्री मील सहनक्षमता के साथ चार एमबीटी, चार बीएमपी और 190 सैनिक ले जा सकेगा। सी स्टेट 3 में संचालन, सी स्टेट 7 तक जीवितता और 30 वर्ष सेवा अवधि जैसी शर्तें कठिन समुद्री परिस्थितियों में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हैं। बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी और डीपीपी 2.0 के तहत खरीद तथा आरएफआई में स्वदेशी सामग्री व घरेलू औद्योगिक भागीदारी का अनिवार्य विवरण दर्शाता है कि क्षमता विस्तार को आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है। आगे की राह में भारतीय शिपयार्डों की डिजाइन व निर्माण क्षमता, समयबद्ध डिलीवरी और मिशनों की दोहरी (युद्धक व गैर-युद्धक) उपयोगिता निर्णायक होगी।

मुख्य शब्द

आरएफआई (Request for Information)
खरीद से पहले का चरण जिसमें सरकार/नौसेना उद्योग से क्षमता, विशिष्टताओं व स्वदेशी सामग्री की जानकारी मांगती है।
बाय (इंडियन-आईडीडीएम)
रक्षा खरीद श्रेणी जो स्वदेशी डिजाइन, विकास और निर्माण पर केंद्रित है।
एलसीयू (लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी)
उभयचर पोत जो जहाजों से तट तक या तटरेखा के साथ सैनिक, वाहन व भारी उपकरण ले जाता है।
एचएडीआर
मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशन, जिनके लिए एलसीयू का उपयोग किया जाता है।
ईईजेड
अनन्य आर्थिक क्षेत्र, जिसमें गश्त एमके-5 पोतों के निर्धारित कार्यों में शामिल है।
सी स्टेट
समुद्री लहरों की तीव्रता मापने का पैमाना; एमके-5 को सी स्टेट 3 में संचालन और सी स्टेट 7 तक जीवित रहना होगा।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारतीय नौसेना के लिए एलसीयू एमके-5 पोतों की बढ़ी हुई सहनक्षमता और क्षमता का सामरिक महत्व क्या है? एमके-4 वर्ग से तुलना करते हुए समझाइए।
  2. बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी के तहत रक्षा खरीद घरेलू पोत निर्माण उद्योग और आत्मनिर्भरता को कैसे प्रोत्साहित करती है?
  3. उभयचर पोत केवल युद्धक भूमिका तक सीमित नहीं हैं—एचएडीआर, खोज-बचाव और ईईजेड गश्त के संदर्भ में इस कथन की समीक्षा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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