प्रीमियम एफएआर याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम का जिक्र किया
कर्नाटक की प्रीमियम एफएआर योजना को बरकरार रखने वाले हाई कोर्ट आदेश के खिलाफ याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारी बारिश में नागरिक व्यवस्था चरमराने के उदाहरण के रूप में गुरुग्राम का जिक्र किया। सीजेआई कांत ने कहा कि ग्रेटर नोएडा को अगले 30-40 साल को ध्यान में रखकर बनाया गया। पीठ ने सिटिजन्स एक्शन फोरम की याचिका पर नोटिस जारी कर बेंगलुरु अधिकारियों को चार सप्ताह का समय दिया और स्पष्ट किया कि अतिरिक्त एफएआर से अवैध निर्माण नियमित नहीं किया जा सकता।
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डेस्क ने क्या जाँचा (4)
- Supreme Court cited Gurugram as an example of civic systems collapsing in heavy rains and called Greater Noida planned for the next 30-40 years. — Attributed to the bench, with CJI Kant quoted; sourced to PTI in the article.
- Notice was issued on the Citizens Action Forum plea and Bengaluru authorities were given four weeks to respond. — Attributed to the court proceedings as reported in the source.
- Solicitor General Tushar Mehta said additional FAR is capped at 0.6 and collections go to a dedicated civic infrastructure fund. — Figure appears in source, attributed to Mehta in open court.
- Karnataka High Court on June 15 upheld the Premium FAR scheme under Section 18-B of the KTCP Act, 1961. — Date and legal provision appear in the source; year of the order not specified.
विश्लेषकों की राय राय
सुप्रीम कोर्ट का नोटिस केवल एक प्रक्रियागत कदम नहीं है — यह कर्नाटक के शहरी राजस्व मॉडल पर राजनीतिक दबाव बढ़ाता है। हाई कोर्ट में जीत हासिल कर चुकी सरकार को अब चार हफ्तों में सार्वजनिक रूप से यह जवाब देना होगा कि बुनियादी ढांचा बढ़ाए बिना मंज़िलें क्यों बढ़ाई जा रही हैं। गुरुग्राम को चेतावनी और ग्रेटर नोएडा को तुलनात्मक उदाहरण बताकर पीठ ने शहरी नियोजन की विफलता को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का मुद्दा बना दिया है।
- अगर प्रीमियम एफएआर के ज़रिये स्थानीय निकायों की कमाई का रास्ता सवालों के घेरे में आता है, तो बेंगलुरु के नागरिक ढांचे के लिए धन जुटाने के राजनीतिक रूप से असहज विकल्प सरकार के सामने आएंगे।
- अतिरिक्त एफएआर से अवैध निर्माण नियमित नहीं किए जा सकते — कोर्ट की यह स्पष्टता 'अक्रमा-सक्रमा' जैसी योजनाओं से जुड़ी पुरानी राजनीतिक बहस को फिर जगाती है।
- सिटिज़न्स एक्शन फोरम जैसे नागरिक संगठन चुनावी मंच की जगह अदालत के रास्ते शहरी नीति को चुनौती दे रहे हैं, जो दबाव के बदलते ठिकाने का संकेत है।
- सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकीलों की पेशी, और अतिरिक्त एफएआर 0.6 तक सीमित रहने तथा पार्किंग नियम लागू रहने का बचाव बताता है कि यह योजना सरकार के लिए आर्थिक और राजनीतिक रूप से कितनी अहम है।
- खुली अदालत में ट्रैफिक, पानी और बिजली के दबाव का ज़िक्र विपक्ष को बेंगलुरु की रहने-योग्यता पर तैयार हमला उपलब्ध कराता है।
किस पर नज़र रखें — चार हफ्तों में बेंगलुरु अधिकारियों का जवाब देखने लायक होगा — वे योजना का पूरा बचाव करेंगे या राजनीतिक जोखिम घटाने के लिए नियमितीकरण वाले प्रावधान से पीछे हटेंगे।
नोटिस जारी करना और मौखिक टिप्पणियां करना योजना के खिलाफ फैसला नहीं है; यह खबर यह नहीं बताती कि कौन सा दल कैसी प्रतिक्रिया देगा या चुनावी असर क्या होगा।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
कर्नाटक सरकार की "प्रीमियम एफएआर" (फ्लोर एरिया रेशियो) योजना के तहत संपत्ति मालिक निर्धारित प्रीमियम शुल्क देकर सामान्य रूप से अनुमत एफएआर से अधिक निर्माण अधिकार खरीद सकते हैं, जिससे लंबवत (वर्टिकल) विकास और शहरी निकायों के लिए राजस्व जुटाना लक्ष्य है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने 15 जून को इस योजना की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी थी। इसके खिलाफ एनजीओ 'सिटिजन्स एक्शन फोरम' की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि बढ़ते निर्माण के साथ बुनियादी ढांचा बढ़ाया जा रहा है या नहीं, और गुरुग्राम का उदाहरण दिया जहां भारी बारिश में नागरिक व्यवस्था चरमरा जाती है।
मुख्य तथ्य
- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई में गुरुग्राम को उदाहरण बताया कि निर्माण के अनुपात में जलनिकासी व सीवेज ढांचा न बढ़ने पर भारी बारिश में नागरिक व्यवस्था कैसे ध्वस्त हो जाती है।
- सीजेआई कांत ने कहा कि ग्रेटर नोएडा अलग है क्योंकि इसे अगले 30-40 साल को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध किया गया।
- पीठ ने 'सिटिजन्स एक्शन फोरम' की याचिका पर नोटिस जारी कर बेंगलुरु अधिकारियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा।
- पीठ ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त एफएआर का उपयोग अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुल अतिरिक्त एफएआर 0.6 पर सीमित है और सेटबैक तथा पार्किंग की शर्तें लागू रहती हैं।
- मेहता के अनुसार योजना से जुटाई गई राशि नागरिक बुनियादी ढांचे के लिए एक समर्पित कोष में जाती है।
- 15 जून को कर्नाटक हाई कोर्ट ने योजना की संवैधानिक वैधता बरकरार रखते हुए संपत्ति अधिकार और टीडीआर मूल्य क्षरण की दलीलें खारिज कीं।
- यह योजना कर्नाटक नगर एवं ग्राम नियोजन (केटीसीपी) अधिनियम, 1961 की धारा 18-बी के तहत लाई गई; हाई कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 14, 21 या 300ए का उल्लंघन नहीं माना।
समयरेखा
- 15 जूनकर्नाटक हाई कोर्ट ने प्रीमियम एफएआर योजना की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी और याचिकाएं खारिज कीं।
- मंगलवार (सुनवाई का दिन)सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट आदेश के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया, गुरुग्राम व ग्रेटर नोएडा का जिक्र किया और बेंगलुरु अधिकारियों को चार सप्ताह दिए।
- सुनवाई के बाद चार सप्ताहबेंगलुरु अधिकारियों को जवाब दाखिल करने की समयसीमा।
किसका दाँव
- सिटिजन्स एक्शन फोरम (एनजीओ, याचिकाकर्ता) — तर्क कि सड़क की चौड़ाई ही प्रीमियम एफएआर का मुख्य मानदंड बन गई और बेंगलुरु के ढांचे पर दबाव अनदेखा हुआ।
- सुप्रीम कोर्ट पीठ (सीजेआई कांत, जस्टिस बागची) — यह तय करना कि निर्माण बढ़ाने के साथ बुनियादी ढांचा बढ़ रहा है या नहीं; अवैध निर्माण नियमितीकरण पर स्पष्टता।
- कर्नाटक सरकार व बेंगलुरु प्राधिकरण — योजना का बचाव; राजस्व और लंबवत विकास की नीति; चार सप्ताह में जवाब दाखिल करना।
- संपत्ति मालिक व डेवलपर — प्रीमियम देकर अतिरिक्त निर्माण अधिकार (0.6 तक सीमित) खरीदने की सुविधा, पार्किंग व अन्य शर्तों के अधीन।
- टीडीआर धारक भूस्वामी — दावा कि बाजार मूल्य से सस्ते दर पर अतिरिक्त निर्माण अधिकार मिलने से टीडीआर निष्प्रभावी हो गए।
- बेंगलुरु के नागरिक — ट्रैफिक, पार्किंग, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव।
क्यों अहम है
यह मामला भारतीय शहरों की केंद्रीय दुविधा को छूता है — सीमित भूमि पर लंबवत विकास बढ़ाना बनाम जलनिकासी, सीवर, सड़क और पार्किंग जैसे बुनियादी ढांचे की क्षमता। सुप्रीम कोर्ट का गुरुग्राम बनाम ग्रेटर नोएडा का उदाहरण दिखाता है कि नियोजन की समयसीमा (30-40 साल) और ढांचे का साथ-साथ विस्तार ही शहरी लचीलापन तय करता है। साथ ही यह सवाल भी जुड़ा है कि क्या अतिरिक्त एफएआर को अवैध निर्माण नियमित करने का रास्ता बनने दिया जाए।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो): भवन के कुल फ्लोर क्षेत्र और भूखंड के आकार का अनुपात।
- प्रीमियम एफएआर योजना कर्नाटक नगर एवं ग्राम नियोजन (केटीसीपी) अधिनियम, 1961 की धारा 18-बी के तहत लाई गई।
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने 15 जून को योजना को अनुच्छेद 14, 21 और 300ए के अनुरूप बताया।
- सॉलिसिटर जनरल के अनुसार कुल अतिरिक्त एफएआर की सीमा 0.6 है।
- पूर्ववर्ती 'अकरमा-सकरमा' योजना के तहत कर्नाटक में अनधिकृत निर्माण को वैध किया जाता था।
- याचिका में ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण अधिनियम के उस प्रावधान का उल्लेख, जिससे प्रीमियम एफएआर से अवैध निर्माण नियमित करने का दावा किया गया।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रीमियम एफएआर विवाद शहरी नियोजन में राजस्व-आधारित घनत्व वृद्धि और वहन क्षमता के बीच टकराव को उजागर करता है। राज्य का तर्क है कि शहरी भूमि सीमित है, इसलिए लंबवत विकास ही विकल्प है; अतिरिक्त एफएआर 0.6 तक सीमित है, सेटबैक व पार्किंग नियम लागू रहते हैं और प्रीमियम की राशि नागरिक ढांचे के समर्पित कोष में जाती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सड़क की चौड़ाई को ही मुख्य मानदंड बनाकर बेंगलुरु के ट्रैफिक, पार्किंग, पानी और बिजली के दबाव को अनदेखा किया गया, तथा बाजार मूल्य से सस्ता अतिरिक्त एफएआर टीडीआर को निष्प्रभावी बनाता है; साथ ही अकरमा-सकरमा जैसी नियमितीकरण की आशंका है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता यही है कि भूखंड पर मंजिलें बढ़ें पर नई सड़कें, सीवर लाइनें और फ्लाईओवर न जुड़ें, तो प्राकृतिक आपदा में व्यवस्था गुरुग्राम की तरह ध्वस्त हो सकती है। आगे का रास्ता कोर्ट द्वारा रेखांकित दिशा में है — अतिरिक्त एफएआर का अवैध निर्माण नियमित करने में उपयोग न हो, प्रीमियम कोष वास्तव में ढांचे पर खर्च हो, और ग्रेटर नोएडा की तरह 30-40 वर्ष की दीर्घकालिक नियोजन दृष्टि अपनाई जाए।
मुख्य शब्द
- प्रीमियम एफएआर योजना
- निर्धारित प्रीमियम शुल्क देकर सामान्य अनुमत एफएआर से अधिक निर्माण अधिकार खरीदने की व्यवस्था, जिससे लंबवत विकास और निकायों को राजस्व मिले।
- एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो)
- भवन के कुल फ्लोर क्षेत्र और उस भूखंड के आकार का अनुपात जिस पर वह बना है।
- टीडीआर (हस्तांतरणीय विकास अधिकार)
- भूमि के बदले नकद मुआवजे की जगह भूस्वामियों को मिलने वाले विकास अधिकार, जिनका मूल्य याचिकाकर्ता के अनुसार प्रभावित हुआ।
- अकरमा-सकरमा
- कर्नाटक सरकार की पूर्ववर्ती योजना, जिसके तहत अनधिकृत निर्माणों को वैध किया जाता था।
- केटीसीपी अधिनियम, 1961 की धारा 18-बी
- वह प्रावधान जिसके तहत कर्नाटक में प्रीमियम एफएआर योजना लागू की गई।
- अनुच्छेद 300ए
- संपत्ति से वंचित न किए जाने का संवैधानिक प्रावधान; हाई कोर्ट ने कहा कि संपत्ति मूल्य में उतार-चढ़ाव से नीति इसका उल्लंघन नहीं बनती।
अभ्यास प्रश्न
- प्रीमियम एफएआर जैसी योजनाएं शहरी निकायों के लिए राजस्व जुटाती हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की वहन क्षमता पर दबाव डालती हैं। बेंगलुरु के उदाहरण से इस संतुलन की समीक्षा करें।
- गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा के विपरीत उदाहरणों के आलोक में भारतीय शहरों के लिए दीर्घकालिक नियोजन दृष्टि के महत्व पर चर्चा करें।
- क्या अतिरिक्त निर्माण अधिकारों की बिक्री से टीडीआर व्यवस्था कमजोर होती है? कर्नाटक हाई कोर्ट के तर्क और याचिकाकर्ता की आपत्तियों के संदर्भ में परीक्षण करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
