महारेरा परियोजनाओं में बार-बार समयसीमा विस्तार: टीओआई विश्लेषण
टीओआई ने महारेरा की उस सूची की 4,237 रजिस्ट्रेशन का विश्लेषण किया, जिसमें पूरा होने की तारीख बीत जाने पर परियोजनाएं अबेयंस में रखी गई हैं; सूची 10 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार है। इनमें 1,154 यानी 27.2% में कम से कम एक विस्तार दर्ज मिला, 392 में दो या अधिक और 110 में तीन या अधिक। इन 110 में कम से कम 12 ने 95% से अधिक और पांच ने 100% पूर्णता बताते हुए और समय मांगा। महारेरा ने 2025-26 में 4,204 नए रजिस्ट्रेशन और 3,687 विस्तार दर्ज किए।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- TOI analysed 4,237 registrations on MahaRERA's abeyance list as it stood on Sept 10, 2026, finding 1,154 (27.2%) with at least one recorded extension event, 392 with two or more and 110 with three or more. — Figures appear in source, attributed to TOI's analysis using a public reconstruction of MahaRERA filings by ReraGenie; not independently verifiable here.
- In 2025-26 MahaRERA reported 4,204 fresh registrations, 2,488 corrections and 3,687 timeline extensions, with extensions 35.5% of the three categories. — Attributed in source to MahaRERA's own annual figures; internal arithmetic stated by the source.
- Among 110 projects examined, at least 12 claimed 95%-plus completion and at least five claimed 100% completion while seeking more time. — Attributed to TOI's examination of MahaRERA records; described as 'at least' counts.
- In May 2026 MahaRERA issued show-cause notices to 8,212 of 33,029 registered projects for missing quarterly progress reports. — Figure appears in source and is attributed to MahaRERA action; no order number cited.
- FPCE estimates ₹12.44 lakh crore affecting around 27.6 lakh families, against an Amitabh Kant committee citation of IBA estimates of 4.12 lakh stressed units worth ₹4.08 lakh crore. — Both figures attributed to named bodies; source notes the FPCE figure is modelled, not a project-by-project count.
विश्लेषकों की राय राय
గడువు పొడిగింపు అనేది నిర్మాణ రంగంలో సహజమే — కానీ మహారేరా గణాంకాలు చూపిస్తున్నది వేరు: పొడిగింపు ఇప్పుడు మినహాయింపు కాకుండా వ్యవస్థలో ఒక సాధారణ లావాదేవీగా మారింది. 2025-26లో 4,204 కొత్త రిజిస్ట్రేషన్లకు 3,687 పొడిగింపులు నమోదైనవి అంటే, నియంత్రణ సంస్థ పని చాలా భాగం పాత టైమ్లైన్లను తిరగరాయడంలోనే గడుస్తోంది. ఆర్థికంగా చూస్తే ఈ ఆలస్యం ఖర్చు ప్రధానంగా కొనుగోలుదారుడిపైనే పడుతుంది — అతను EMI, అద్దె రెండూ కడుతూ, పెట్టిన మూలధనం ఇరుక్కుపోయిన స్థితిలో ఉంటాడు.
- ఆలస్యం అసలు ఖర్చు కొనుగోలుదారుడిదే: సెక్షన్ 18 కింద నెలవారీ వడ్డీ హక్కు కాగితంపై ఉన్నా, దానిని అమలు చేయించుకోవడానికే ఏళ్లు పడుతున్నట్టు కథనంలోని కేసులు సూచిస్తున్నాయి.
- 95-100 శాతం పూర్తయినట్టు చెప్పుకుంటూనే అదనపు సమయం కోరిన 12 ప్రాజెక్టులు — ఇవి పూర్తికాని పనికంటే, చివరి దశ నిధుల కొరత లేదా NOC/అనుమతుల అడ్డంకిని సూచించే ఆర్థిక లక్షణం కావచ్చు.
- రిజిస్ట్రేషన్ను సజీవంగా ఉంచడం వాణిజ్యపరంగా విలువైనది — అమ్ముడుపోని ఫ్లాట్లు అమ్మడానికి పొడిగింపు నంబర్ అవసరమని నాలుగు ప్రాజెక్టుల ప్రమోటర్లు స్పష్టంగా చెప్పారని కథనం పేర్కొంది; ఇది ప్రోత్సాహకాల (incentive) సమస్యను చూపుతుంది.
- నియంత్రణ సంస్థ వాదనలోనూ ఆర్థిక తర్కం ఉంది: రిజిస్ట్రేషన్ రద్దు చేస్తే పని ఆగి, అప్పటికే డబ్బు కట్టిన కొనుగోలుదారులకే మరింత నష్టం — అందుకే షరతులతో కొనసాగింపు 'బ్యాలెన్స్ ఆఫ్ కన్వీనియెన్స్' అని 10 ఉత్తర్వుల్లో పేర్కొన్నట్టు కథనం చెబుతోంది.
- ఇరుక్కుపోయిన ప్రాజెక్టుల మొత్తం విలువపై అమితాబ్ కాంత్ కమిటీ ఉదహరించిన ₹4.08 లక్షల కోట్లు, FPCE అంచనా ₹12.44 లక్షల కోట్లు — ఈ భారీ తేడాయే విధాన రూపకల్పనకు అవసరమైన విశ్వసనీయ డేటాబేస్ లేకపోవడాన్ని బయటపెడుతోంది.
किस पर नज़र रखें — 2025 సెప్టెంబర్లో ప్రారంభమైన యూనిఫైడ్ రేరా పోర్టల్ ప్రాజెక్టుల పూర్తి ప్రయాణాన్ని (పొడిగింపులతో సహా) బహిరంగంగా చూపే డేటాబేస్గా మారుతుందా, అలాగే 51 శాతం అలాట్టీ సమ్మతి, సైట్ తనిఖీ లాంటివి పొడిగింపుకు ముందే తప్పనిసరి అవుతాయా అన్నది గమనించాల్సిన అంశం.
27.2 శాతం అనేది వైఫల్య రేటు కాదని కథనమే స్పష్టం చేసింది — పొడిగింపు పొందిన ప్రాజెక్టులలో ఎన్ని నిజంగా పూర్తయ్యాయో, ఆలస్యానికి ఎంత భాగం ప్రమోటర్ల చేతిలో లేని కారణాలదో, కొనుగోలుదారులపై పడిన మొత్తం ఆర్థిక భారం ఎంతో ఈ విశ్లేషణ నిర్ధారించలేదు.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2016 (रेरा) 1 मई 2017 से पूर्ण रूप से लागू हुआ, जिसका उद्देश्य देरी से जूझते खरीदारों को कानूनी सुरक्षा देना था। यह एक केंद्रीय कानून है, पर हर राज्य अपने नियम बनाता और अपना प्राधिकरण नियुक्त करता है; महारेरा (2017 से कार्यरत) देश के सबसे पुराने और व्यस्ततम प्राधिकरणों में है। टीओआई ने महारेरा की उस सूची का विश्लेषण किया जिसमें पूरा होने की तारीख बीत जाने के बाद परियोजनाएं "अबेयंस" (स्थगित प्रशासनिक स्थिति) में रखी गई हैं, यह देखने के लिए कि अतिरिक्त समय देने से परियोजनाएं वास्तव में पूरी होती हैं या नहीं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि "तारीख पे तारीख" का चलन ही असली समस्या है, कानून नहीं।
मुख्य तथ्य
- टीओआई ने महारेरा की लैप्स-संबंधी अबेयंस सूची की 4,237 रजिस्ट्रेशन का विश्लेषण किया; सूची 10 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार।
- 1,154 (27.2%) में कम से कम एक विस्तार-इतिहास दर्ज, 392 में दो या अधिक, और 110 में तीन या अधिक।
- 110 परियोजनाओं में कम से कम 12 ने 95%+ पूर्णता बताते हुए और समय मांगा; कम से कम 5 ने 100% पूर्णता का दावा किया।
- महारेरा ने 2025-26 में 4,204 नए रजिस्ट्रेशन, 2,488 सुधार और 3,687 टाइमलाइन विस्तार दर्ज किए — प्रति 100 नई रजिस्ट्रेशन पर लगभग 88 विस्तार; तीन श्रेणियों में विस्तार का हिस्सा 35.5%।
- मई 2026 में महारेरा ने 33,029 पंजीकृत परियोजनाओं में से 8,212 को कारण बताओ नोटिस दिए, क्योंकि उन्होंने जनवरी-मार्च तिमाही की अनिवार्य प्रगति रिपोर्ट 20 अप्रैल की समयसीमा तक दाखिल नहीं की।
- 2025 में धारा 7(3) के तहत जारी 10 महारेरा आदेशों में सभी 10 में 51% आवंटी सहमति नहीं थी, फिर भी सभी 10 में अतिरिक्त समय दिया गया।
- गजानन प्लाजा (बोरीवली, मुंबई): जनवरी 2020 में 97% पूर्णता बताई गई; मूल पूर्णता तिथि 31 दिसंबर 2018; सितंबर 2026 तक संशोधित तिथि 30 अप्रैल 2028 (महारेरा आदेश 66/2026 के चार माह विस्तार सहित)।
- अमिताभ कांत समिति ने भारतीय बैंक संघ के अनुमान का हवाला दिया — लगभग 4.12 लाख तनावग्रस्त आवास इकाइयां, ₹4.08 लाख करोड़; एफपीसीई का अनुमान ₹12.44 लाख करोड़ और लगभग 27.6 लाख परिवार।
समयरेखा
- 2016रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम पारित।
- 1 मई 2017रेरा पूर्ण रूप से लागू; उसी वर्ष महारेरा ने काम शुरू किया।
- 2017बॉम्बे हाईकोर्ट का नीलकमल रियल्टर्स निर्णय — असाधारण, बाध्यकारी परिस्थितियों में मामला-दर-मामला विस्तार पर विचार संभव।
- जनवरी 2020गजानन प्लाजा के प्रोमोटर ने महारेरा को बताया कि 97% काम पूरा हो चुका है।
- जनवरी 2023इंद्रप्रस्थनगरी फेज 1 (पुणे) के इंजीनियर प्रमाणपत्र में परियोजना लागत ₹16.62 करोड़, ₹1.66 करोड़ शेष।
- जुलाई 2024गजानन प्लाजा में सात यूनिट के 11 शिकायतकर्ता, कुल ₹1.67 करोड़ भुगतान कर चुके, आदेशों के अनुपालन के लिए महारेरा के समक्ष।
- फरवरी 2025सुनवाई में गजानन प्लाजा के प्रोमोटर ने दिसंबर 2027 तक समय मांगा।
- सितंबर 2025केंद्र ने यूनिफाइड रेरा पोर्टल शुरू किया; राष्ट्रीय स्तर पर 1,51,113 परियोजनाएं पंजीकृत।
- मार्च 2026आवास मंत्रालय ने संसद में कहा कि सांसदों द्वारा मांगी गई विस्तृत राज्य-स्तरीय जानकारी "केंद्रीय रूप से संधारित नहीं" है।
- मई 2026महारेरा ने 8,212 परियोजनाओं को तिमाही प्रगति रिपोर्ट न देने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए।
किसका दाँव
- घर खरीदार/आवंटी — कब्जा मिलने में वर्षों की देरी; धारा 18 के तहत हर महीने की देरी पर ब्याज या ब्याज सहित रिफंड का अधिकार, पर जमीनी स्तर पर बहुत कम बदलाव।
- महारेरा — नियामकीय कार्य का बड़ा हिस्सा अब विस्तार आवेदनों पर; तय करना होगा कि अतिरिक्त समय समाधान है या केवल एक और समयसीमा।
- डेवलपर/प्रोमोटर — रजिस्ट्रेशन जीवित रखना व्यावसायिक रूप से जरूरी; 110 में से चार परियोजनाओं में प्रोमोटरों ने कहा कि बिना बिकी फ्लैट बेचने के लिए विस्तार संख्या चाहिए।
- एफपीसीई (फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स) और अध्यक्ष अभय उपाध्याय — 192 पृष्ठों की रिपोर्ट में कई राज्यों के विस्तार आदेशों की जांच; तर्क — "रेरा वाटरटाइट है, गलत वह व्यवहार है जो इसके इर्द-गिर्द बना।"
- केंद्र सरकार/आवास मंत्रालय — यूनिफाइड रेरा पोर्टल के बावजूद परियोजना-यात्रा जोड़ने वाला सार्वजनिक राष्ट्रीय डेटाबेस अनुपलब्ध।
- बैंक/भारतीय बैंक संघ — अटकी परियोजनाओं में ₹4.08 लाख करोड़ का जोखिम; अबेयंस परियोजनाओं के बैंक खाते फ्रीज़ किए जाते हैं।
क्यों अहम है
रेरा लागू होने के दस साल बाद भी बड़ा सवाल यह नहीं है कि विलंबित परियोजनाओं को अतिरिक्त समय चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि नियामक कैसे तय करें कि अतिरिक्त समय अब समाधान नहीं, बस एक और समयसीमा बन गया है। जब 100% पूर्णता के दावे के बाद भी कब्जा नहीं मिलता और 51% आवंटी सहमति के बिना भी विस्तार मिल जाता है, तो रेरा रजिस्ट्रेशन खरीदार के लिए निश्चित गारंटी नहीं रह जाता। साथ ही राष्ट्रीय सार्वजनिक डेटाबेस के अभाव में यह मापना ही असंभव है कि दिया गया अतिरिक्त समय कितनी बार वास्तव में घर की चाबी में बदलता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- रेरा अधिनियम 2016 में पारित, 1 मई 2017 से पूर्ण रूप से लागू; केंद्रीय कानून पर राज्य अपने नियम बनाते और प्राधिकरण नियुक्त करते हैं।
- धारा 6: फोर्स मैज्योर आधार पर विस्तार, कुल मिलाकर अधिकतम एक वर्ष तक सीमित।
- धारा 7(3): पंजीकरण रद्द करने के बजाय शर्तों के अधीन जारी रखने की अनुमति; धारा 8: परियोजना प्रोमोटर से लेकर अन्य को सौंपने का प्रावधान।
- धारा 18: देरी की स्थिति में आवंटी को कब्जा मिलने तक हर माह ब्याज, या ब्याज सहित रिफंड का अधिकार।
- नीलकमल रियल्टर्स (बॉम्बे हाईकोर्ट, 2017): असाधारण एवं बाध्यकारी परिस्थितियों में मामला-दर-मामला विस्तार।
- यूनिफाइड रेरा पोर्टल सितंबर 2025 में शुरू; तब 1,51,113 परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत।
मेन्स दृष्टिकोण
महाराष्ट्र के आंकड़े दिखाते हैं कि रेरा की समस्या कानूनी ढांचे में नहीं, उसके व्यवहार में है: अबेयंस सूची की 4,237 रजिस्ट्रेशन में 27.2% में कम से कम एक विस्तार, 392 में दो या अधिक और 110 में तीन या अधिक विस्तार दर्ज हैं, और 2025-26 में 4,204 नई रजिस्ट्रेशन के मुकाबले 3,687 विस्तार दर्ज हुए। कारण कई हैं — धारा 6 के फोर्स मैज्योर मार्ग को लगभग स्वतः स्वीकृति की तरह देखा जाना, धारा 7(3) में "बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस" के तर्क पर 51% आवंटी सहमति के बिना भी निरंतरता देना, प्रगति रिपोर्टिंग की कमजोरी (8,212 परियोजनाओं को नोटिस), और घोषित पूर्णता प्रतिशत तथा इंजीनियर/आर्किटेक्ट प्रमाणपत्रों में अंतर (98%-95%-98% के दावे, फायर व लिफ्ट एनओसी लंबित होते हुए 100% पूर्णता का दावा)। परिणाम यह है कि रजिस्ट्रेशन जीवित रखना बिक्री जारी रखने का साधन बन जाता है, जबकि खरीदार का धारा 18 का ब्याज/रिफंड अधिकार कागज़ पर ही रहता है। आगे का रास्ता स्रोत में सुझाए बिंदुओं तक सीमित है: विस्तार मांगे जाने पर पहली ही बार में कठिन प्रश्न और साइट निरीक्षण पहले (बाद में नहीं), वित्तीय व्यवहार्यता बचे रहने तक धारा 8 का अधिक प्रयोग, और परियोजना की पूरी यात्रा दर्ज करने वाला सार्वजनिक राष्ट्रीय डेटाबेस — जिसकी आवश्यकता सरकार ने भी यूनिफाइड रेरा पोर्टल की बैठक में स्वीकारी।
मुख्य शब्द
- अबेयंस (लैप्स-संबंधी सूची)
- प्रशासनिक स्थिति जिसमें पूर्णता तिथि बीतने पर परियोजना रखी जाती है; महारेरा के अनुसार बैंक खाते फ्रीज़ और अनुपालन तक बिक्री करार/विक्रय-पत्र निष्पादन पर रोक।
- धारा 6 (फोर्स मैज्योर विस्तार)
- अप्रत्याशित परिस्थितियों के आधार पर पंजीकरण की अवधि बढ़ाने का प्रावधान, कुल मिलाकर एक वर्ष तक सीमित।
- धारा 7(3)
- पंजीकरण रद्द करने के बजाय प्राधिकरण द्वारा शर्तों के साथ परियोजना जारी रखने की अनुमति; महारेरा इसे लैप्स-पश्चात निरंतरता में उपयोग करता है।
- तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR)
- प्रोमोटरों द्वारा अनिवार्य रूप से दाखिल की जाने वाली प्रगति जानकारी; जनवरी-मार्च तिमाही की समयसीमा 20 अप्रैल थी।
- एफपीसीई
- फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स — घर खरीदारों का संगठन, अध्यक्ष अभय उपाध्याय; कई राज्यों के विस्तार आदेशों पर 192 पृष्ठ की रिपोर्ट।
- महारेरा आदेश 66/2026
- राज्यभर की योग्य परियोजनाओं पर स्वतः लागू ब्लैंकेट फोर्स मैज्योर विस्तार, जिसमें चार माह की अतिरिक्त अवधि दी गई।
अभ्यास प्रश्न
- रेरा 2016 के धारा 6 और धारा 7(3) के प्रावधानों के आलोक में परखें कि बार-बार समयसीमा विस्तार घर खरीदारों के अधिकारों को कैसे प्रभावित करता है। महाराष्ट्र के आंकड़ों से उदाहरण दें।
- "रेरा वाटरटाइट है, गलत वह व्यवहार है जो इसके इर्द-गिर्द बना।" इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
- अटकी आवासीय परियोजनाओं पर राष्ट्रीय सार्वजनिक डेटाबेस की अनुपस्थिति नीति-निर्माण और नियामकीय जवाबदेही को कैसे कमजोर करती है? चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।