रूस में यूपी के तीन युवक लापता, परिजनों ने जबरन सेना में भर्ती का आरोप लगाया
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन युवक रूस में लापता हैं। परिजनों का आरोप है कि उनके पासपोर्ट जब्त कर उन्हें यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए रूसी सेना में जबरन भर्ती किया गया। मुजफ्फरनगर के हिमांशु शर्मा (24) और शक्ति पुंडेर (23) तथा शामली के आशु सैनी (25) से 30 जुलाई के बाद संपर्क नहीं हुआ। शामली के एजेंट ने छात्र वीजा के नाम पर प्रत्येक से ₹3.5 लाख लिए। रूसी सेना के साथ यूक्रेन में अब तक 30 से अधिक भारतीयों की मौत हुई है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Three men — Himanshu Sharma (24) and Shakti Punder (23) of Muzaffarnagar, and Ashu Saini (25) of Shamli — are untraceable since July 30. — Names, ages and date appear in source, attributed to the families.
- Their passports were confiscated and they were forced to join the Russian Army. — Alleged claim relayed by families from the men's last phone calls; not independently confirmed in source.
- A Shamli-based agent charged each ₹3.5 lakh, promising student visas and part-time work. — Figure appears in source, attributed to the families; police are examining the agent's role.
- Over 30 Indians have died serving with the Russian military in Ukraine. — Stated in source without a named source; repeated twice in the text.
- The external affairs ministry in July said India is pursuing the release of about two dozen Indians in the Russian Army; the Supreme Court took up a plea by kin of 26 Indians. — Attributed to the ministry and court proceedings in the source.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन युवक रूस में लापता हैं। परिजनों का आरोप है कि मॉस्को में रूसी भाषा का कोर्स कर रहे इन युवकों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए रूसी सेना में जबरन भर्ती किया गया। यह मामला उस बड़े पैटर्न का हिस्सा है जिसमें एजेंट छात्र और पर्यटक वीजा तथा अंशकालिक नौकरी का वादा कर भारतीय युवाओं को रूस भेजते रहे हैं। यूक्रेन मोर्चे पर रूसी सेना के साथ काम करते हुए अब तक 30 से अधिक भारतीयों की मौत हो चुकी है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।
मुख्य तथ्य
- मुजफ्फरनगर के हिमांशु शर्मा (24) और शक्ति पुंडेर (23) तथा शामली के आशु सैनी (25) से परिजनों का 30 जुलाई के बाद कोई संपर्क नहीं हुआ।
- तीनों मॉस्को में रूसी भाषा का कोर्स कर रहे थे और अलग-अलग समय पर शामली के एक एजेंट के जरिए रूस गए थे।
- एजेंट ने छात्र वीजा तथा अनुमत अंशकालिक रोजगार का वादा करते हुए प्रत्येक से ₹3.5 लाख लिए।
- आशु सैनी इंटरमीडिएट पूरा करने के बाद अप्रैल में रूस गया; शर्मा और पुंडेर का एक साल का वीजा समाप्त होने पर अगस्त में लौटना तय था।
- जुलाई के अंत में अंतिम बातचीत में तीनों ने बताया कि उनके पासपोर्ट ले लिए गए हैं और उन्हें सैन्य सेवा के लिए मजबूर किया जा रहा है।
- आशु की बहन अंशुल के अनुसार अंतिम कॉल केवल लगभग 30 सेकंड चली, जिसके बाद फोन कट गया और दोबारा संपर्क नहीं हुआ।
- यूक्रेन संघर्ष के मोर्चे पर रूसी सेना के साथ सेवा करते हुए अब तक 30 से अधिक भारतीयों की मौत हुई है।
- सुप्रीम कोर्ट ने उन 26 भारतीयों के परिजनों की याचिका पर सुनवाई शुरू की, जो 2024-2025 में पर्यटक व छात्र वीजा पर रूस गए और भर्ती एजेंटों द्वारा सैन्य सेवा में फंसाए गए।
समयरेखा
- 2024-202526 भारतीय पर्यटक और छात्र वीजा पर रूस गए, जिन्हें भर्ती एजेंटों ने सैन्य सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित/बहकाया।
- अप्रैलआशु सैनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद रूस के लिए रवाना हुआ।
- जुलाई का अंततीनों युवकों ने मॉस्को से घबराहट भरे फोन कॉल में बताया कि उनके पासपोर्ट ले लिए गए और सैन्य सेवा के लिए दबाव डाला जा रहा है।
- 30 जुलाईइसके बाद परिजनों का तीनों से कोई संपर्क नहीं हो सका।
- जुलाईविदेश मंत्रालय ने कहा कि रूसी सेना में सेवा कर रहे लगभग दो दर्जन भारतीयों की रिहाई का मुद्दा मॉस्को के अधिकारियों के साथ उठाया जा रहा है।
- अगस्त (नियोजित)शर्मा और पुंडेर का एक वर्षीय वीजा समाप्त होने पर स्वदेश लौटना तय था।
किसका दाँव
- लापता तीन युवक और उनके परिवार — जीवन, सुरक्षित वापसी और सूचना का अभाव; परिजन पूरी अनिश्चितता में जी रहे हैं।
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) — आशु सैनी के किसान पिता राकेश कुमार ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए PMO से संपर्क किया।
- जिला प्रशासन व उत्तर प्रदेश सरकार — पुंडेर के पिता विपिन कुमार ने बेटे का पता लगाने में मदद मांगी है।
- विदेश मंत्रालय — रूसी सेना में सेवा कर रहे लगभग दो दर्जन भारतीयों की रिहाई का मुद्दा मॉस्को के अधिकारियों के साथ उठा रहा है।
- पुलिस — शामली स्थित एजेंट की भूमिका की जांच, जिसने कथित रूप से तीनों की यात्रा की व्यवस्था की।
- सुप्रीम कोर्ट — रूस में सैन्य सेवा में फंसाए गए 26 भारतीयों के परिजनों की याचिका पर सुनवाई।
क्यों अहम है
यह मामला दिखाता है कि छात्र और पर्यटक वीजा के नाम पर चलने वाले अनियंत्रित भर्ती एजेंट भारतीय युवाओं को विदेशी युद्धक्षेत्र तक पहुंचा दे रहे हैं, जहां अब तक 30 से अधिक भारतीयों की जान गई है। यह भारत के लिए प्रवासी सुरक्षा, कांसुलर हस्तक्षेप और मानव तस्करी जैसी भर्ती पर कानूनी शिकंजे का सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और विदेश मंत्रालय की कोशिशें इसे नीतिगत मुद्दा बनाती हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- मुजफ्फरनगर के हिमांशु शर्मा (24), शक्ति पुंडेर (23) और शामली के आशु सैनी (25) 30 जुलाई के बाद रूस में लापता।
- शामली के एजेंट ने छात्र वीजा व अंशकालिक रोजगार का वादा कर प्रत्येक युवक से ₹3.5 लाख वसूले।
- रूसी सेना के साथ यूक्रेन मोर्चे पर अब तक 30 से अधिक भारतीयों की मौत।
- जुलाई में विदेश मंत्रालय ने कहा—रूसी सेना में सेवारत लगभग दो दर्जन भारतीयों की रिहाई का मुद्दा मॉस्को के साथ उठाया जा रहा है।
- सुप्रीम कोर्ट में 2024-2025 में रूस गए 26 भारतीयों के परिजनों की याचिका पर सुनवाई।
मेन्स दृष्टिकोण
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन युवकों का रूस में लापता होना विदेशी रोजगार व शिक्षा के नाम पर चलने वाले भर्ती तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है। कारणों में ग्रामीण-अर्ध शहरी युवाओं में बेरोजगारी और विदेश जाने की आकांक्षा, एजेंटों की जवाबदेही का अभाव, तथा छात्र/पर्यटक वीजा के दुरुपयोग की सुविधा शामिल है—स्रोत के अनुसार एक शामली-स्थित एजेंट ने प्रत्येक से ₹3.5 लाख लिए और मॉस्को में रूसी भाषा कोर्स के साथ अंशकालिक काम का वादा किया, जिसके बाद पासपोर्ट जब्त कर सैन्य सेवा के लिए दबाव डालने का आरोप है। इसके प्रभाव बहुआयामी हैं: 30 से अधिक भारतीयों की मौत, परिवारों की सूचना-विहीन पीड़ा, कांसुलर व राजनयिक दबाव की सीमाएं, और भारत-रूस संबंधों पर संवेदनशील मानवीय मुद्दा। आगे का रास्ता स्रोत में वर्णित संस्थागत प्रतिक्रियाओं में दिखता है—विदेश मंत्रालय द्वारा मॉस्को के अधिकारियों के साथ रिहाई का मुद्दा उठाना, सुप्रीम कोर्ट में 26 प्रभावितों के परिजनों की याचिका पर न्यायिक निगरानी, और पुलिस द्वारा एजेंट की भूमिका की जांच; इसके साथ प्रस्थान-पूर्व जागरूकता तथा एजेंटों पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य है।
मुख्य शब्द
- छात्र वीजा (Student Visa)
- अध्ययन के उद्देश्य से दिया जाने वाला वीजा; इस मामले में एजेंट ने इसी के साथ अनुमत अंशकालिक काम का वादा किया।
- भर्ती एजेंट
- विदेश भेजने की व्यवस्था करने वाला बिचौलिया; यहां शामली-स्थित एजेंट की भूमिका पुलिस जांच के दायरे में है।
- विदेश मंत्रालय (MEA)
- भारत का मंत्रालय जो जुलाई में रूसी सेना में सेवारत लगभग दो दर्जन भारतीयों की रिहाई का मुद्दा मॉस्को के साथ उठा रहा था।
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
- आशु सैनी के पिता राकेश कुमार ने तत्काल हस्तक्षेप के लिए यहीं गुहार लगाई।
- सुप्रीम कोर्ट याचिका
- रूस में सैन्य सेवा में फंसाए गए 26 भारतीयों के परिजनों द्वारा दायर याचिका, जिसे शीर्ष अदालत ने सुनवाई के लिए लिया।
अभ्यास प्रश्न
- विदेश में रोजगार व शिक्षा के नाम पर होने वाली अनियंत्रित भर्ती भारतीय नागरिकों को युद्धक्षेत्रों तक कैसे पहुंचा देती है? रूस के मामले के आलोक में परीक्षण करें।
- विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा में विदेश मंत्रालय की कांसुलर भूमिका और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं पर चर्चा करें।
- एजेंटों द्वारा युवाओं को गुमराह करने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य पुलिस, जिला प्रशासन और केंद्र सरकार के स्तर पर किन उपायों की आवश्यकता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
