10,800 एकड़ से अधिक रक्षा भूमि अब भी अतिक्रमण में: समिति की रिपोर्ट
देश भर में 10,800 एकड़ से अधिक रक्षा भूमि अब भी अवैध कब्जे में है, रक्षा भूमि प्रबंधन पर गठित स्वतंत्र समिति ने 10 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट में यह कहा। 1 जनवरी 2015 से जुलाई 2025 के बीच 2,242 एकड़ भूमि वापस ली गई। सर्वाधिक अतिक्रमित भूमि महानिदेशालय रक्षा संपदा (डीजीडीई) के तहत 4,299 एकड़ है, इसके बाद सेना 4,153, वायुसेना 1,739 और नौसेना 546 एकड़। समिति ने केंद्र-राज्य समन्वय तंत्र की सिफारिश की।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Over 10,800 acres of defence land remain under illegal occupation. — Attributed in source to the Independent Committee on Issues of Defence Land Management; figure appears twice in the text.
- 2,242 acres were retrieved between January 1, 2015 and July 2025. — Attributed to data presented by the committee; consistent with the source's 'more than 2,000 acres' statement.
- DGDE accounts for 4,299 acres, Army 4,153, Air Force 1,739, Navy 546. — Figures appear in source, attributed to the committee; the four total about 10,737 acres, broadly matching the stated 10,800.
- Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, West Bengal and Maharashtra account for over 5,800 acres. — Attributed to the committee, with the source citing a nearly 5,900-acre figure given to Parliament as corresponding.
- Report submitted to Supreme Court on September 10; bench headed by CJI Surya Kant to take it up on September 15. — Dates stated in source without direct document citation; CJI's name as given in source, not independently verified.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
देश भर में रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के अधीन बड़ी मात्रा में भूमि छावनी क्षेत्रों के बाहर स्थित है, जहाँ अवैध कब्जे लंबे समय से समस्या रहे हैं। गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की, जिसमें नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की पूर्व रिपोर्टों में उठाए गए सवालों का हवाला था। इसी संदर्भ में रक्षा मंत्रालय ने 14 जुलाई 2025 को रक्षा भूमि प्रबंधन के मुद्दों पर स्वतंत्र समिति गठित की, जिसने 10 सितंबर को अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंपी।
मुख्य तथ्य
- समिति के अनुसार देश भर में 10,800 एकड़ से अधिक रक्षा भूमि अब भी अवैध कब्जे में है।
- 1 जनवरी 2015 से जुलाई 2025 के बीच रक्षा सेवाओं व अन्य हितधारकों ने 2,242 एकड़ भूमि वापस हासिल की।
- सर्वाधिक अतिक्रमित भूमि महानिदेशालय रक्षा संपदा (डीजीडीई) के अधीन—लगभग 4,299 एकड़।
- भारतीय सेना की 4,153 एकड़, वायुसेना की 1,739 एकड़ और नौसेना की 546 एकड़ भूमि अतिक्रमण में।
- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र—इन चार राज्यों में 5,800 एकड़ से अधिक, यानी कुल अतिक्रमण का लगभग 50%।
- दिसंबर 2025 में केंद्र ने संसद में बताए ताज़ा आंकड़ों में इन चार राज्यों का संयुक्त अतिक्रमण लगभग 5,900 एकड़ बताया।
- चार सदस्यीय समिति की अध्यक्षता नौसेना के प्रधान समेकित वित्तीय सलाहकार धनंजय कुमार ने की।
- रिपोर्ट में कहा गया कि रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ) बेदखली कार्यवाही में परिचालन बाधाओं का सामना करते हैं।
समयरेखा
- 1 जनवरी 2015 से जुलाई 2025इस अवधि में 2,242 एकड़ रक्षा भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई।
- 14 जुलाई 2025रक्षा मंत्रालय ने रक्षा भूमि प्रबंधन के मुद्दों पर स्वतंत्र समिति गठित की।
- 10 सितंबरसमिति ने जनहित याचिका के संबंध में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी।
- 15 सितंबरसीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा रिपोर्ट पर विचार अपेक्षित।
- दिसंबर 2025केंद्र ने संसद में चार राज्यों के लगभग 5,900 एकड़ अतिक्रमण के ताज़ा आंकड़े दिए।
किसका दाँव
- रक्षा मंत्रालय (एमओडी) — 14 जुलाई 2025 को स्वतंत्र समिति गठित की; रक्षा भूमि की सुरक्षा और वापसी की जिम्मेदारी।
- महानिदेशालय रक्षा संपदा (डीजीडीई) — इसके अधीन सर्वाधिक 4,299 एकड़ भूमि अतिक्रमण में; रक्षा संपदा अधिकारी बेदखली लागू करते हैं।
- थलसेना, वायुसेना, नौसेना — क्रमशः 4,153, 1,739 और 546 एकड़ भूमि अवैध कब्जे में।
- सुप्रीम कोर्ट (सीजेआई सूर्य कांत की पीठ) — जनहित याचिका पर सुनवाई और समिति रिपोर्ट पर विचार।
- कॉमन कॉज (गैर-लाभकारी संगठन) — याचिकाकर्ता; रक्षा भूमि अतिक्रमण पर सख्त रुख की मांग।
- राज्य सरकारें, स्थानीय नागरिक व पुलिस एजेंसियाँ — छावनी के बाहर की भूमि से बेदखली के लिए इनका सहयोग अनिवार्य; समर्थन का स्तर परिवर्तनशील।
- कैग — पूर्व रिपोर्टों में रक्षा भूमि अतिक्रमण का मुद्दा उठाया; समिति में इसके महानिदेशक (लेखापरीक्षा) शामिल।
क्यों अहम है
रक्षा भूमि रणनीतिक और मूल्यवान सार्वजनिक संपत्ति है, और 10,800 एकड़ से अधिक पर अवैध कब्जा बना रहना संपत्ति प्रबंधन व कानून-व्यवस्था की गंभीर खामियों को दर्शाता है। दशक भर में केवल 2,242 एकड़ की वापसी बताती है कि मौजूदा बेदखली तंत्र धीमा है, क्योंकि छावनी के बाहर की भूमि पर कार्रवाई राज्य व स्थानीय एजेंसियों के सहयोग पर निर्भर है। समिति की केंद्र-राज्य समन्वय और समयबद्ध तंत्र की सिफारिश इसी संस्थागत अंतर को भरने का प्रयास है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- स्वतंत्र समिति (रक्षा भूमि प्रबंधन) गठन: 14 जुलाई 2025, रक्षा मंत्रालय द्वारा; अध्यक्ष धनंजय कुमार।
- समिति ने रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को 10 सितंबर को सौंपी; पीठ के प्रमुख सीजेआई सूर्य कांत।
- याचिकाकर्ता संगठन: कॉमन कॉज; मुद्दा पहले कैग रिपोर्टों में उठाया गया।
- अतिक्रमित रक्षा भूमि: कुल 10,800+ एकड़; डीजीडीई 4,299, सेना 4,153, वायुसेना 1,739, नौसेना 546 एकड़।
- सर्वाधिक अतिक्रमण वाले चार राज्य: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र—5,800+ एकड़ (लगभग 50%)।
- रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ) बेदखली कार्यवाही लागू करने वाला पदाधिकारी।
मेन्स दृष्टिकोण
रक्षा भूमि अतिक्रमण का मुद्दा भूमि अभिलेख, संस्थागत क्षमता और संघीय समन्वय—तीनों की कमजोरी को उजागर करता है। समिति के आंकड़े बताते हैं कि 2015 से जुलाई 2025 के बीच केवल 2,242 एकड़ भूमि वापस मिली, जबकि 10,800 एकड़ से अधिक अब भी कब्जे में है; डीजीडीई (4,299 एकड़) और सेना (4,153 एकड़) सर्वाधिक प्रभावित हैं। मूल कारण यह है कि यह भूमि छावनी सीमा के बाहर है, इसलिए बेदखली के लिए राज्य प्रशासन, स्थानीय नागरिक निकायों और पुलिस के सहयोग की आवश्यकता होती है, जो रिपोर्ट के अनुसार परिवर्तनशील रहता है और रक्षा संपदा अधिकारियों के सामने परिचालन बाधाएँ खड़ी करता है। इसके प्रभाव दोहरे हैं—रणनीतिक परिसंपत्ति का ह्रास और दीर्घकालिक मुकदमेबाजी। आगे का रास्ता समिति की सिफारिशों में निहित है: भारत सरकार और संबंधित राज्यों के बीच निजी व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमित भूमि की वापसी के लिए व्यापक, प्रभावी और समयबद्ध तंत्र, तथा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे उच्च-अतिक्रमण राज्यों पर लक्षित ध्यान, जहाँ थोक वसूली संभव है। कैग की निगरानी और सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक देखरेख जवाबदेही के अतिरिक्त उपकरण हैं।
मुख्य शब्द
- डीजीडीई (महानिदेशालय रक्षा संपदा)
- रक्षा भूमि व छावनी संपदा के प्रबंधन से जुड़ा निकाय; इसके अधीन सर्वाधिक 4,299 एकड़ भूमि अतिक्रमण में।
- रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ)
- रक्षा भूमि से अतिक्रमण हटाने की बेदखली कार्यवाही लागू करने वाला अधिकारी।
- स्वतंत्र समिति (रक्षा भूमि प्रबंधन)
- रक्षा मंत्रालय द्वारा 14 जुलाई 2025 को गठित चार सदस्यीय समिति, अध्यक्ष धनंजय कुमार।
- कॉमन कॉज
- गैर-लाभकारी संगठन जिसने रक्षा भूमि अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की।
- कैग
- नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, जिसने पूर्व रिपोर्टों में रक्षा भूमि अतिक्रमण को रेखांकित किया।
- जनहित याचिका (पीआईएल)
- सार्वजनिक हित के मुद्दे पर अदालत में दायर याचिका; इस मामले में रक्षा भूमि अतिक्रमण से संबंधित।
अभ्यास प्रश्न
- रक्षा भूमि पर अतिक्रमण के प्रमुख कारण क्या हैं और स्वतंत्र समिति की सिफारिशें इन्हें कैसे संबोधित करती हैं? चर्चा कीजिए।
- छावनी सीमा के बाहर स्थित रक्षा भूमि से बेदखली में केंद्र-राज्य समन्वय की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
- सार्वजनिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा में कैग की लेखापरीक्षा रिपोर्ट और न्यायिक हस्तक्षेप की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
