एसआईआर के बीच बीएलओ ऐप में ईसीआई ने जोड़ा 'मार्क वीआईपी' फीचर

निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच बूथ लेवल अधिकारियों के ऐप में 'मार्क वीआईपी' फीचर जोड़ा है, यह हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया। दिल्ली सीईओ कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार ऐप 30 जुलाई को अपडेट हुआ; एपल ऐपस्टोर में 31 जुलाई को दर्ज हुआ। दिल्ली और हरियाणा के बीएलओ ने फीचर की पुष्टि की। वीआईपी अंकन का प्रावधान 2018 से है; दिल्ली में करीब 3,000 वीआईपी मतदाता हैं। ईसीआई ने जवाब नहीं दिया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • ECI added a 'Mark VIP' feature to the BLO App on July 30, during the ongoing SIR in 16 states and three UTs — Attributed to unnamed officials in Delhi CEO's office; figures appear in source
  • Apple App Store logged the update on July 31 with descriptor 'mark VIP elector related changes'; no such record on Android Play Store — Reported as the publication's own check of app store records
  • BLOs in Delhi and Haryana confirmed the module is live; West Bengal BLOs said it was absent when SIR began there in November 2025 — Attributed to BLOs and an anonymous West Bengal BLO association member
  • Delhi has about 3,000 VIP electors and New Delhi district around 1,000 — Figures attributed to two anonymous officials; not independently confirmed in source
  • Provision to mark VIP voters has existed in EC rules and manual since 2018; March 2023 manual provides for flagging 'marked electors' — Cited to EC rules and the ECI Manual on Electoral Rolls; ECI gave no comment on the new feature

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

तकनीकी रूप से यह एक छोटा ऐप अपडेट हो सकता है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह एसआईआर विवाद के बीच विपक्ष को "दो तरह के मतदाता" वाला तैयार नैरेटिव दे देता है। अधिकारियों के मुताबिक वीआईपी मतदाताओं को चिह्नित करने का प्रावधान 2018 से है और 2023 की मतदाता सूची मैनुअल में भी दर्ज है, इसलिए आयोग के पास नियम-आधारित मजबूत बचाव है; पर पुनरीक्षण के बीचोंबीच और बड़े नामों को नोटिस मिलने के विवाद के दौरान यह टाइमिंग असहज है। आयोग की चुप्पी इस खालीपन को आलोचकों के लिए छोड़ देती है।

  • "आम मतदाता कागज़ ढूंढता रहे और वीआईपी के फॉर्म पहले निपटें" — यह सरल और भावनात्मक तर्क विपक्ष के लिए बिना लागत वाला हथियार है।
  • प्रावधान पुराना हो सकता है, लेकिन उसका अमल नया है — एन्यूमरेशन और दावे-आपत्ति चरणों के बीच बीएलओ ऐप बदलना प्रक्रिया की तटस्थता पर सवाल खड़े करता है।
  • ईसीआई का जवाब न देना और एंड्रॉयड प्लेस्टोर पर बदलाव का रिकॉर्ड न दिखना — मंशा जो भी हो, पारदर्शिता की आलोचना को तेज करता है।
  • नोटिस दिल्ली की मुख्यमंत्री, केजरीवाल, आडवाणी, जयशंकर और एक चुनाव आयुक्त तक गए — यह एकपक्षीय पक्षपात के आरोप को कमजोर करता है और आयोग की सबसे मजबूत ढाल है।
  • अधिकारियों के अनुसार वीआईपी मतदाता नोटिस से मुक्त नहीं हैं, इसलिए यह लड़ाई कानूनी अधिकार की नहीं, धारणा और छवि की होगी।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि विपक्ष संसद और विधानसभाओं में इसे अपने व्यापक एसआईआर हमले में जोड़ता है या नहीं, और ईसीआई औपचारिक स्पष्टीकरण या संबंधित आदेश सामने रखता है या नहीं।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि फीचर किसके आदेश पर और किस अधिकार के तहत जोड़ा गया, या इससे किसी मतदाता को वास्तविक नुकसान हुआ — और आयोग का पक्ष अभी नहीं आया है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

निर्वाचन आयोग (ईसीआई) 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा रहा है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर गणना और सत्यापन करते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार इस प्रक्रिया के बीच ही बीएलओ ऐप में 'मार्क वीआईपी' नाम का नया फीचर जोड़ा गया, जिससे बीएलओ किसी मतदाता को वीआईपी के रूप में चिह्नित कर सकते हैं। यह घटनाक्रम दिल्ली में कई प्रमुख हस्तियों को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' नोटिस मिलने के विवाद के बीच सामने आया। 'मार्क्ड इलेक्टर्स' को चिह्नित करने का प्रावधान ईसीआई के नियमों और मैनुअल में 2018 से मौजूद है।

मुख्य तथ्य

  • ईसीआई ने बीएलओ ऐप में 'मार्क वीआईपी' फीचर जोड़ा, जबकि 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर चल रहा था।
  • दिल्ली सीईओ कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार बीएलओ ऐप 30 जुलाई को नए फीचर के साथ अपडेट हुआ।
  • एपल ऐपस्टोर रिकॉर्ड में यह अपडेट 31 जुलाई को 'mark VIP elector related changes' विवरण के साथ दर्ज हुआ; एंड्रॉयड प्लेस्टोर पर ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं था।
  • अपडेट के समय दिल्ली और चार अन्य राज्यों में एसआईआर गणना चरण में था, तथा ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित 10 राज्यों में दावे व आपत्ति चरण में था।
  • दिल्ली और हरियाणा के बीएलओ ने पुष्टि की कि मॉड्यूल उनके ऐप पर सक्रिय है; पश्चिम बंगाल के बीएलओ ने कहा कि नवंबर 2025 में वहां एसआईआर शुरू होने पर यह मौजूद नहीं था।
  • दिल्ली में वीआईपी मतदाताओं की सूची लगभग 3,000 की है; नई दिल्ली जिले में करीब 1,000 वीआईपी मतदाता हैं (सीईओ कार्यालय व जिला अधिकारी)।
  • दिल्ली में रेखा गुप्ता, अरविंद केजरीवाल, एल के आडवाणी, एस जयशंकर और निर्वाचन आयुक्त एस एस संधू को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस भेजे गए।
  • ईसीआई ने फीचर लाने के कारण और अधिकार पर एचटी के सवालों का गुरुवार रात तक कोई जवाब नहीं दिया।

समयरेखा

  1. 2018ईसीआई के नियमों और मैनुअल में कुछ मतदाताओं को वीआईपी के रूप में चिह्नित करने का प्रावधान अस्तित्व में आया।
  2. मार्च 2023ईसीआई का मतदाता सूची संबंधी मैनुअल 'मार्क्ड इलेक्टर्स' को डेटाबेस में फ्लैग करने का प्रावधान करता है।
  3. 30 जुलाईदिल्ली सीईओ कार्यालय के अनुसार बीएलओ ऐप 'मार्क वीआईपी' फीचर के साथ अपडेट हुआ।
  4. 31 जुलाईएपल ऐपस्टोर पर अपडेट 'mark VIP elector related changes' विवरण के साथ दर्ज हुआ।
  5. नवंबर 2025पश्चिम बंगाल में एसआईआर शुरू; बीएलओ के अनुसार तब ऐप में यह फीचर नहीं था।

किसका दाँव

  • भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) — ऐप और सॉफ्टवेयर में बदलाव के आदेश सीधे आयोग से आते हैं; फीचर के औचित्य और अधिकार पर पारदर्शिता का सवाल।
  • बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) — घर-घर सत्यापन के दौरान मतदाता को वीआईपी चिह्नित करना और उनके फॉर्म प्राथमिकता से प्रोसेस करना।
  • दिल्ली सीईओ कार्यालय, एईआरओ व ईआरओ — बीएलओ द्वारा किए गए वीआईपी अंकन का सत्यापन; कार्यालय स्वयं ऐप में बदलाव नहीं कर सकता।
  • वीआईपी/'मार्क्ड' मतदाता (सांसद, विधायक, एमएलसी, न्यायपालिका, लोक सेवा, कला-पत्रकारिता-खेल की हस्तियां) — गणना फॉर्म भरे बिना भी ड्राफ्ट रोल में नाम, सुनवाई केंद्र जाने से छूट, पर नोटिस से छूट नहीं।
  • आम मतदाता — एसआईआर में समान व्यवहार का प्रश्न, क्योंकि वीआईपी फॉर्म पहले प्रोसेस किए जाते हैं।

क्यों अहम है

मतदाता सूची पुनरीक्षण की निष्पक्षता का प्रश्न सीधे चुनावी लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है, और चल रही प्रक्रिया के बीच तकनीकी बदलाव जोड़ने पर पारदर्शिता के सवाल उठते हैं। वीआईपी मतदाताओं को गणना फॉर्म के बिना ड्राफ्ट रोल में जगह और प्राथमिकता मिलने से समान व्यवहार की चिंता पैदा होती है, जबकि लाखों सामान्य मतदाता दस्तावेज और नोटिस की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। ईसीआई की चुप्पी इस बहस को और तीखा बनाती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा; चरण — गणना तथा दावे व आपत्ति।
  • बीएलओ ऐप में 'मार्क वीआईपी' फीचर — दिल्ली सीईओ कार्यालय के अनुसार 30 जुलाई को अपडेट, एपल ऐपस्टोर पर 31 जुलाई को दर्ज।
  • वीआईपी मतदाता चिह्नित करने का प्रावधान ईसीआई नियमों/मैनुअल में 2018 से; मार्च 2023 का मतदाता सूची मैनुअल 'मार्क्ड इलेक्टर्स' फ्लैग करने का प्रावधान करता है।
  • मार्क्ड इलेक्टर्स में सांसद, विधायक, एमएलसी, घोषित पदधारक, कला-संस्कृति-पत्रकारिता-खेल की हस्तियां, न्यायपालिका व लोक सेवा के सदस्य शामिल।
  • दिल्ली में वीआईपी मतदाता लगभग 3,000; नई दिल्ली जिले में करीब 1,000।
  • वीआईपी अंकन की श्रृंखला: बीएलओ → एईआरओ → ईआरओ → मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय।

मेन्स दृष्टिकोण

चल रहे एसआईआर के बीच बीएलओ ऐप में 'मार्क वीआईपी' फीचर जोड़ना मतदाता सूची प्रबंधन में प्रशासनिक सुविधा और समान नागरिकता के सिद्धांत के बीच तनाव को उजागर करता है। कारण पक्ष में आयोग के अधिकारी इसे 'समेकन' और सुविधा प्रदान करने का उपाय बताते हैं — मैनुअल (मार्च 2023) के अनुसार मार्क्ड इलेक्टर्स का नाम ड्राफ्ट रोल में सुनिश्चित करना ताकि दावे व आपत्ति अवधि में दस्तावेज एकत्र किए जा सकें; इस अर्थ में प्रावधान 2018 से मौजूद है और वीआईपी मतदाता नोटिस से मुक्त नहीं हैं, जैसा दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से निर्वाचन आयुक्त एस एस संधू तक को भेजे लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिसों से स्पष्ट है। निहितार्थ यह है कि जब एक वर्ग के फॉर्म पहले प्रोसेस होते हैं और उन्हें सुनवाई केंद्र जाने से छूट मिलती है, तो प्रक्रियात्मक समानता पर प्रश्न उठता है; साथ ही प्रक्रिया के मध्य सॉफ्टवेयर बदलाव, एपल ऐपस्टोर पर दर्ज पर एंड्रॉयड प्लेस्टोर पर अनुपलब्ध रिकॉर्ड, और ईसीआई की ओर से जवाब न मिलना पारदर्शिता की कमी दर्शाता है। आगे का रास्ता यह हो सकता है कि आयोग ऐसे बदलावों की अधिसूचना, कानूनी आधार और ऑडिट ट्रेल सार्वजनिक करे, तथा स्पष्ट करे कि 'सुविधा' किसी मतदाता वर्ग को विशेषाधिकार में न बदले।

मुख्य शब्द

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण)
मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण, जिसमें गणना चरण और दावे व आपत्ति चरण होते हैं; वर्तमान में 16 राज्यों व 3 केंद्र शासित प्रदेशों में।
बीएलओ ऐप
बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा सत्यापन और गणना के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ऐप, जिसमें 30 जुलाई को 'मार्क वीआईपी' फीचर जोड़ा गया।
मार्क्ड इलेक्टर्स
ईसीआई के मार्च 2023 मैनुअल के तहत डेटाबेस में फ्लैग किए जाने वाले मतदाता — सांसद, विधायक, एमएलसी, घोषित पदधारक, न्यायपालिका, लोक सेवा और कला-खेल-पत्रकारिता की हस्तियां।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस
मतदाता विवरण में विसंगति पर भेजा जाने वाला नोटिस; दिल्ली में कई प्रमुख हस्तियों को ऐसे नोटिस मिले।
ईआरओ / एईआरओ
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक ईआरओ, जो बीएलओ द्वारा किए गए वीआईपी अंकन का सत्यापन करते हैं।
सीईओ (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) कार्यालय
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर का निर्वाचन कार्यालय; अधिकारी के अनुसार यह ऐप या सॉफ्टवेयर में बदलाव नहीं कर सकता, आदेश आयोग से आते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के बीच निर्वाचन आयोग द्वारा डिजिटल उपकरणों में बदलाव करने से पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर क्या प्रश्न उठते हैं? चर्चा कीजिए।
  2. 'मार्क्ड इलेक्टर्स' का प्रावधान प्रशासनिक सुविधा है या विशेषाधिकार? मतदाताओं के समान व्यवहार के सिद्धांत के आलोक में परीक्षण कीजिए।
  3. एसआईआर में गणना चरण तथा दावे व आपत्ति चरण की भूमिका स्पष्ट करते हुए बताइए कि वीआईपी अंकन इन चरणों को कैसे प्रभावित करता है।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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