राष्ट्रीय ग्वालियर

लाडली बहना योजना बंद करने की याचिका; सरकार को नोटिस जारी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने लाडली बहना योजना बंद करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किए हैं। इस योजना में पात्र महिलाओं को हर माह ₹1,500 मिलते हैं। ग्वालियर की पूर्व कांग्रेस पार्षद सुधा दुबे की याचिका पर न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने 16 सितंबर को सुनवाई की। याचिका में इसे चुनावी रेवड़ी और सालाना ₹22,000 करोड़ से अधिक का बोझ बताया गया। वित्त वर्ष 2026-27 का आवंटन ₹23,882 करोड़ था।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • A Division Bench of Justices G.S. Ahluwalia and Anuradha Shukla issued notices to State authorities in Gwalior on September 16. — Specific, attributed to the Madhya Pradesh High Court proceedings as reported in the source.
  • Petition was filed by former Congress councillor from Gwalior, Sudha Dubey, who says she acted in her independent capacity. — Attributed to the petitioner in a direct quote to The Hindu.
  • Scheme launched in March 2023 at ₹1,000/month, raised to ₹1,250 in October 2023 and to ₹1,500 from November 2025. — Figures and dates appear in the source; no external verification possible.
  • Budget allocation for FY2026-27 was ₹23,882 crore; petition says cost exceeds ₹22,000 crore a year. — Allocation figure stated in source without named source; cost figure attributed to the petition.
  • Beneficiaries fell from about 1.31 crore in 2023 to about 1.25 crore in the 40th instalment of ₹1,835 crore. — Figures appear in source; attribution to instalment data, not independently verified.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

लाडली बहना योजना को 2023 में मध्य प्रदेश में भाजपा की सत्ता-विरोधी लहर को काटने और वापसी का श्रेय दिया जाता है — इसलिए इसे बंद करने की मांग वाली याचिका राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। ध्यान देने की बात है कि याचिकाकर्ता, एक पूर्व कांग्रेस पार्षद, खुद कह रही हैं कि उन्होंने "व्यक्तिगत हैसियत" से याचिका दायर की है; करीब 1.25 करोड़ महिलाओं की मासिक किस्त रोकने की मांग किसी भी दल के लिए आसान नारा नहीं है। हाईकोर्ट का नोटिस अभी प्रक्रियात्मक कदम है, लेकिन सरकार को कर्ज और ब्याज देनदारी के आंकड़े रखने पर मजबूर करना बहस को "रेवड़ी बनाम कल्याण" की ओर मोड़ सकता है।

  • 2023 चुनाव से एक महीने पहले राशि ₹1,250 करना और घोषणापत्र में ₹3,000 का वादा — यही याचिका के "चुनावी रेवड़ी" तर्क को सबसे तेज धार देता है।
  • योजना को भाजपा की जीत की कुंजी माना जाता है, इसलिए इसके खिलाफ कानूनी चुनौती कांग्रेस के लिए दोतरफा जोखिम है, और दूरी बनाने का संकेत इसी का नतीजा है।
  • मोहन यादव द्वारा नवंबर 2025 से राशि ₹1,500 करना शिवराज सिंह चौहान से विरासत में मिली योजना पर अपना दावा जमाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
  • 2023 के बाद नए पंजीकरण रुकना और लाभार्थियों की संख्या लगभग 1.31 करोड़ से 1.25 करोड़ पर आना विपक्ष को बंद करने की मांग के बजाय सुरक्षित हमले का मौका देता है।
  • सरकार के पास इस याचिका को "महिलाओं के प्रति कांग्रेस की सोच" बताने का स्पष्ट राजनीतिक अवसर है, हालांकि खबर में ऐसा किए जाने का उल्लेख नहीं है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि चार हफ्ते के जवाब में सरकार कर्ज और ब्याज देनदारी का कितना ब्यौरा देती है, और कांग्रेस औपचारिक रूप से याचिका से किनारा करती है या नहीं।

अदालत ने योजना की वैधता पर कोई राय नहीं दी है और भुगतान पर रोक नहीं लगाई है; यह खबर यह भी स्थापित नहीं करती कि कांग्रेस इस याचिका का समर्थन करती है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की प्रमुख योजना है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर माह नकद सहायता दी जाती है। मार्च 2023 में ₹1,000 प्रति माह से शुरू हुई यह राशि अब ₹1,500 प्रति माह है। ग्वालियर की पूर्व कांग्रेस पार्षद सुधा दुबे ने इसे "चुनावी रेवड़ी" बताते हुए और राजकोष पर पड़ने वाले बोझ पर सवाल उठाते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में योजना बंद करने की याचिका दायर की है। न्यायालय ने 16 सितंबर को राज्य सरकार के विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मुख्य तथ्य

  • योजना के तहत पात्र महिलाओं को राज्य सरकार से हर माह ₹1,500 की सहायता मिलती है।
  • 16 सितंबर को न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने ग्वालियर में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा वित्त विभाग सहित राज्य प्राधिकारियों को नोटिस जारी किए।
  • योजना मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ₹1,000 प्रति माह से शुरू की थी।
  • अक्टूबर 2023 में, विधानसभा चुनाव से एक माह पहले, राशि ₹1,250 प्रति माह कर दी गई; भाजपा घोषणापत्र में ₹3,000 प्रति माह का वादा था।
  • 2023 में योजना से लगभग 1.31 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हुईं; चुनावों के बाद नवंबर 2025 से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राशि ₹1,500 की।
  • वित्त वर्ष 2026-27 के लिए योजना का बजट आवंटन ₹23,882 करोड़ था; याचिका के अनुसार लागत ₹22,000 करोड़ प्रति वर्ष से अधिक है।
  • 2023 चुनावों के बाद नए पंजीकरण रुके रहने से लाभार्थी संख्या घटकर लगभग 1.25 करोड़ रह गई।
  • 40वीं किस्त में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹1,835 करोड़ हस्तांतरित किए।

समयरेखा

  1. मार्च 2023तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ₹1,000 प्रति माह की राशि के साथ मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना शुरू की।
  2. अक्टूबर 2023विधानसभा चुनाव से एक माह पहले राशि बढ़ाकर ₹1,250 प्रति माह की गई; भाजपा ने घोषणापत्र में ₹3,000 का वादा किया।
  3. 2023 (विधानसभा चुनाव)लगभग 1.31 करोड़ महिलाओं तक पहुंची योजना को भाजपा की बड़े बहुमत से सत्ता में वापसी का श्रेय दिया गया; इसके बाद नए पंजीकरण रुके।
  4. नवंबर 2025मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राशि ₹1,500 प्रति माह की।
  5. इस माह की शुरुआत (40वीं किस्त)लगभग 1.25 करोड़ लाभार्थियों के खातों में ₹1,835 करोड़ अंतरित किए गए।
  6. 16 सितंबरउच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई कर राज्य को नोटिस जारी किए; सरकार को जवाब के लिए चार सप्ताह।

किसका दाँव

  • योजना की लाभार्थी महिलाएं (लगभग 1.25 करोड़) — हर माह ₹1,500 की नकद सहायता जारी रहना; याचिका में वितरण पर रोक की मांग की गई है।
  • मध्य प्रदेश सरकार (भाजपा), महिला एवं बाल विकास तथा वित्त विभाग — नोटिस का जवाब देना; योजना की वित्तीय देनदारी, कर्ज व ब्याज के आंकड़े साझा करने का दबाव।
  • मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया व अनुराधा शुक्ला) — जनधन के विवेकपूर्ण उपयोग और योजना की वैधता से जुड़े प्रश्नों पर विचार।
  • याचिकाकर्ता सुधा दुबे, ग्वालियर की पूर्व कांग्रेस पार्षद — योजना को "चुनावी रेवड़ी" बताते हुए बंद करने की मांग; कहती हैं कि यह याचिका उनकी स्वतंत्र क्षमता में है।
  • अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा — याचिकाकर्ता का पक्ष; तर्क कि मामला राजनीतिक नहीं, जनधन के विवेकपूर्ण उपयोग का है।
  • करदाता और राज्य का राजकोष — बाजार से उधारी, बकाया कर्ज व ब्याज देनदारी के बीच ₹23,882 करोड़ के आवंटन का वहन।

क्यों अहम है

यह मामला प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजनाओं और राज्य की वित्तीय क्षमता के बीच टकराव को अदालत के दायरे में ले आता है। सवाल यह है कि हर माह बड़ी राशि बांटने से महिलाओं को स्थायी आर्थिक सशक्तीकरण, रोजगार और कौशल मिल रहा है या नहीं, और शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी मदों पर इसका क्या असर पड़ता है। चुनावी राजनीति में ऐसी योजनाओं की भूमिका को देखते हुए यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और करदाताओं के धन का भी प्रश्न बनता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना: मध्य प्रदेश सरकार की योजना, मार्च 2023 में ₹1,000 प्रति माह से शुरू।
  • राशि क्रम: ₹1,000 (मार्च 2023) → ₹1,250 (अक्टूबर 2023) → ₹1,500 (नवंबर 2025)।
  • वित्त वर्ष 2026-27 का बजट आवंटन: ₹23,882 करोड़; याचिका के अनुसार वार्षिक लागत ₹22,000 करोड़ से अधिक।
  • लाभार्थी: 2023 में लगभग 1.31 करोड़, अब लगभग 1.25 करोड़; 40वीं किस्त में ₹1,835 करोड़ अंतरित।
  • याचिका पर सुनवाई: ग्वालियर में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ—न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया व न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला, 16 सितंबर।
  • याचिकाकर्ता: सुधा दुबे, ग्वालियर की पूर्व कांग्रेस पार्षद; अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा।

मेन्स दृष्टिकोण

लाडली बहना योजना पर उठा विवाद कल्याणकारी नकद हस्तांतरण और राजकोषीय विवेक के बीच के तनाव को उजागर करता है। याचिका का तर्क है कि हर माह बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन बांटा जा रहा है, जबकि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं है कि इस आवर्ती नकद सहायता से महिलाओं के लिए स्थायी आर्थिक सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता, रोजगार, कौशल या स्थायी आय के अवसर बन रहे हैं; साथ ही राज्य बाजार उधारी और राज्य विकास ऋणों से संसाधन जुटा रहा है और उस पर कर्ज व ब्याज की देनदारी बनी हुई है। दूसरी ओर, योजना का राजनीतिक-सामाजिक प्रभाव स्पष्ट है—2023 में लगभग 1.31 करोड़ महिलाओं तक पहुंच और भाजपा की सत्ता में वापसी में इसकी भूमिका; राशि भी चुनाव से पहले बढ़ाई गई और घोषणापत्र में ₹3,000 का वादा किया गया। याचिकाकर्ता का सुझाव है कि सरकार कौशल विकास और रोजगार के अवसरों पर ध्यान दे, क्योंकि ₹1,500 गृहस्थी चलाने के लिए पर्याप्त नहीं। आगे का रास्ता पारदर्शिता में है: योजना की वित्तीय देनदारी, उधारी और बकाया कर्ज के आंकड़े सार्वजनिक करना, स्वतंत्र व व्यापक प्रभाव मूल्यांकन कराना, नए पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट करना, और नकद सहायता को शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, बिजली व सड़क जैसे टिकाऊ विकास व्यय के साथ संतुलित करना।

मुख्य शब्द

मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना
मध्य प्रदेश सरकार की प्रमुख योजना, जिसमें पात्र महिलाओं को मासिक नकद सहायता (अब ₹1,500) दी जाती है।
खंडपीठ (Division Bench)
उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों वाली पीठ; यहां न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला।
चुनावी रेवड़ी (election freebie)
वह मुफ्त सुविधा/नकद लाभ जिसे आलोचक कल्याण के बजाय मतदाताओं को आकर्षित करने का साधन मानते हैं।
राज्य विकास ऋण (State Development Loans)
राज्य सरकारों द्वारा बाजार से जुटाई गई उधारी, जिस पर कर्ज और ब्याज की देनदारी बनती है।
बजटीय आवंटन
किसी योजना के लिए बजट में निर्धारित राशि; लाडली बहना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में ₹23,882 करोड़।
प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण
लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे राशि भेजना; 40वीं किस्त में ₹1,835 करोड़ अंतरित हुए।

अभ्यास प्रश्न

  1. क्या प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण योजनाएं महिलाओं के स्थायी आर्थिक सशक्तीकरण का साधन बन सकती हैं? मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना के संदर्भ में परीक्षण करें।
  2. "कल्याणकारी व्यय और राजकोषीय विवेक के बीच संतुलन राज्यों के लिए बड़ी चुनौती है।" राज्य उधारी और कर्ज देनदारी के आलोक में चर्चा करें।
  3. चुनाव से पहले घोषित नकद लाभ योजनाओं की न्यायिक समीक्षा की गुंजाइश और सीमाएं क्या हैं? उदाहरण सहित विवेचना करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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