नए हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर में मीडियन कट नहीं: एनएचएआई

एनएचएआई ने सोमवार को जारी दिशा-निर्देशों में कहा कि नए एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर में मीडियन खुले नहीं होंगे और सतही चौराहे भी नहीं बनेंगे। ऊंचे कंक्रीट डिवाइडर की जगह तार रस्सियों या क्रैश बैरियर वाले फ्लश मीडियन होंगे, तथा 5 किमी, 2 किमी, 1 किमी और 500 मीटर पहले निकास संकेतक लगेंगे। कारें 100 किमी प्रति घंटे तक चल सकेंगी। नियम चार व छह लेन की ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं पर लागू होंगे, राइट ऑफ वे 60 या 70 मीटर रहेगा। सरकार का लक्ष्य 50,000 किमी है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • New NHAI guidelines issued on Monday bar median openings and at-grade intersections on access-controlled high-speed NH corridors. — Attributed to NHAI guidelines as stated in the source; date given only as 'Monday'.
  • Corridors will have flush medians with wire ropes or crash barriers instead of raised concrete dividers. — Stated in source as mandated under the guidelines; no independent document cited.
  • Advance exit signage at 5 km, 2 km, 1 km and 500 metres; cars allowed up to 100 kmph. — Figures appear in the source text.
  • Guidelines apply to all upcoming four-lane and six-lane greenfield and brownfield access-controlled high-speed national highways. — Quoted to an unnamed NHAI spokesperson.
  • Government target of 50,000 km of access-controlled high-speed corridors; right of way of 60 m or 70 m. — Figures appear in the source; attributed to the guidelines/government without further sourcing.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

देखने में यह एक तकनीकी दिशानिर्देश है, लेकिन राजनीतिक संकेत साफ है — सरकार 50,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर के लक्ष्य को अपनी बुनियादी ढांचा पहचान के रूप में आगे बढ़ा रही है। सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं में कमी ऐसे मुद्दे हैं जिनका विरोध करना राजनीतिक रूप से कठिन है, इसलिए इस घोषणा को आसान रास्ता मिलेगा। दूसरी ओर, मीडियन कट और सतही चौराहे न होने से कॉरिडोर के किनारे बसे गांवों और कस्बों की कनेक्टिविटी पर सवाल उठ सकते हैं — इस पहलू पर खबर चुप है।

  • राजमार्ग विस्तार केंद्र सरकार के सबसे दिखने वाले और गिनने योग्य प्रदर्शन संकेतकों में है, और 50,000 किमी का लक्ष्य किसी भी चुनावी कथानक में सहजता से फिट बैठता है।
  • खबर के अनुसार एक्सप्रेसवे के अलावा एक्सेस-कंट्रोल्ड राजमार्गों के लिए अलग मानक नहीं थे; इस खाली जगह को भरने से परियोजना स्तर के विवाद और देरी घट सकती है, जो प्रशासनिक श्रेय का विषय है।
  • 60 या 70 मीटर का राइट ऑफ वे भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को केंद्र में ले आता है, और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में किसानों व स्थानीय संगठनों की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति को छूती है।
  • मीडियन कट हटाना सुरक्षा के लिहाज़ से मजबूत तर्क है, पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्रों के लिए प्रवेश बिंदु, अंडरपास और इंटरचेंज की मांग एक आम राजनीतिक दबाव है।
  • खबर में जिन कॉरिडोर का नाम है — दिल्ली-देहरादून, अंबाला-कोटपूतली, ट्रांस-हरियाणा — वे उत्तर भारत केंद्रित हैं, इसलिए आवंटन में क्षेत्रीय संतुलन का सवाल राजनीतिक रूप से उठ सकता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राज्य सरकारें और स्थानीय सांसद-विधायक इन कॉरिडोर पर अतिरिक्त इंटरचेंज, अंडरपास और सर्विस रोड की मांग कितनी मजबूती से उठाते हैं, और भूमि अधिग्रहण को ज़मीन पर कैसी प्रतिक्रिया मिलती है।

यह खबर केवल दिशानिर्देशों की तकनीकी सामग्री बताती है; वित्तपोषण, समयसीमा, राज्यवार आवंटन या किसी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बारे में इसमें कुछ भी स्थापित नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सोमवार को जारी नए दिशा-निर्देशों के जरिए एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर की योजना और डिजाइन के लिए पहली बार समर्पित मानक तय किए हैं। अब तक एक्सप्रेसवे को छोड़कर ऐसे एक्सेस-कंट्रोल्ड राजमार्गों के लिए अलग मानक नहीं थे, जिससे परियोजनाओं में तकनीकी एकरूपता का अभाव था। इन कॉरिडोर पर कारें 100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकती हैं, इसलिए डिजाइन में टकराव बिंदु (कॉन्फ्लिक्ट पॉइंट) खत्म करने पर जोर है। सरकार ने आने वाले वर्षों में 50,000 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

मुख्य तथ्य

  • एनएचएआई के सोमवार को जारी दिशा-निर्देशों के तहत नए एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर में मीडियन (डिवाइडर) में कोई खुलापन नहीं होगा और सतही (एट-ग्रेड) चौराहे नहीं बनेंगे।
  • ऊंचे कंक्रीट डिवाइडर की जगह फ्लश मीडियन होंगे — पेंट की गई सेंटर लेन के साथ मोटी तार रस्सियाँ या क्रैश बैरियर।
  • निकास (एक्जिट) की अग्रिम साइनेज 5 किमी, 2 किमी, 1 किमी और 500 मीटर पहले लगाई जाएगी, ताकि चालक लेन बदलने की तैयारी कर सकें।
  • इन एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर कारों को 100 किमी प्रति घंटे तक की गति की अनुमति है।
  • दिशा-निर्देश सभी आगामी चार-लेन और छह-लेन ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे।
  • यातायात मात्रा तथा पुल, फ्लाईओवर, इंटरचेंज जैसे ढांचों की संख्या के आधार पर राइट ऑफ वे 60 मीटर या 70 मीटर रहेगा।
  • सरकार ने आने वाले वर्षों में 50,000 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य तय किया है।
  • दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, अंबाला-कोटपूतली कॉरिडोर और ट्रांस-हरियाणा कॉरिडोर ऐसे राजमार्गों में शामिल हैं।

समयरेखा

  1. वर्तमान स्थिति (दिशा-निर्देशों से पहले)एक्सप्रेसवे के अलावा एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना व डिजाइन के लिए कोई अलग मानक नहीं थे।
  2. सोमवार (स्रोत में तिथि नहीं दी गई)एनएचएआई ने नए दिशा-निर्देश जारी किए: मीडियन कट और सतही चौराहे समाप्त, फ्लश मीडियन व अग्रिम एक्जिट साइनेज अनिवार्य।
  3. आने वाले वर्षसरकार का 50,000 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य।
  4. 29 सितंबर 2026 (नियोजित)नई दिल्ली में बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर के उद्घाटन की तिथि निर्धारित (तस्वीर के विवरण के अनुसार)।

किसका दाँव

  • एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) — परियोजनाओं में एकरूप योजना, डिजाइन और तकनीकी मानकों की निरंतरता सुनिश्चित करना।
  • वाहन चालक व यात्री — 100 किमी प्रति घंटे की गति पर टकराव बिंदु, गलत दिशा में ड्राइविंग और दुर्घटनाओं का जोखिम घटना।
  • सरकार / सड़क परिवहन नीति निर्माता — 50,000 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर लक्ष्य की सुरक्षित व मानकीकृत पूर्ति।
  • निर्माण ठेकेदार व डिजाइन सलाहकार — फ्लश मीडियन, क्रैश बैरियर, साइनेज और 60/70 मीटर राइट ऑफ वे के नए डिजाइन मानदंडों का पालन।
  • कॉरिडोर मार्ग के आसपास के स्थानीय लोग — मीडियन कट और सतही चौराहे न होने से आवागमन/क्रॉसिंग की व्यवस्था बदलना (स्रोत में विस्तार नहीं)।

क्यों अहम है

तेज गति वाले राजमार्गों पर मीडियन कट और सतही चौराहे ही दुर्घटनाओं के प्रमुख टकराव बिंदु होते हैं; इन्हें खत्म करने से खतरनाक क्रॉस मूवमेंट और गलत दिशा में ड्राइविंग रुकने की उम्मीद है। यह पहला मौका है जब एक्सप्रेसवे से अलग, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए समर्पित डिजाइन मानक तय किए गए हैं। चूंकि सरकार 50,000 किमी ऐसे कॉरिडोर बनाना चाहती है, इसलिए ये मानक भविष्य के राजमार्ग नेटवर्क की सुरक्षा और यातायात प्रवाह तय करेंगे।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एनएचएआई के नए दिशा-निर्देश: एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों पर मीडियन खुलापन और एट-ग्रेड इंटरसेक्शन प्रतिबंधित।
  • फ्लश मीडियन = पेंट की गई सेंटर लेन + मोटी तार रस्सी या क्रैश बैरियर (ऊंचे कंक्रीट डिवाइडर के स्थान पर)।
  • अग्रिम एक्जिट साइनेज की दूरियाँ: 5 किमी, 2 किमी, 1 किमी और 500 मीटर।
  • इन कॉरिडोर पर कारों के लिए अनुमत गति 100 किमी प्रति घंटे तक।
  • राइट ऑफ वे: यातायात व संरचनाओं के आधार पर 60 मीटर या 70 मीटर; लागू — चार व छह लेन, ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड।
  • उदाहरण कॉरिडोर: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, अंबाला-कोटपूतली कॉरिडोर, ट्रांस-हरियाणा कॉरिडोर; सरकारी लक्ष्य 50,000 किमी।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत के राजमार्ग विस्तार का अगला चरण एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर पर केंद्रित है, जहाँ 100 किमी प्रति घंटे तक की गति अनुमत है, लेकिन अब तक एक्सप्रेसवे को छोड़कर ऐसे राजमार्गों के लिए अलग योजना-डिजाइन मानक मौजूद नहीं थे — यही मानक-शून्यता असमान डिजाइन और उच्च गति पर दुर्घटना जोखिम का कारण बनती रही। एनएचएआई के नए दिशा-निर्देश इस अंतर को भरते हैं: मीडियन कट और सतही चौराहों को हटाकर टकराव बिंदु समाप्त करना, ऊंचे कंक्रीट डिवाइडर के स्थान पर तार रस्सी/क्रैश बैरियर वाले फ्लश मीडियन, तथा 5 किमी से 500 मीटर तक क्रमिक एक्जिट साइनेज। अधिकारियों के अनुसार इससे खतरनाक क्रॉस मूवमेंट और गलत दिशा में ड्राइविंग रुकेगी, जबकि मानकीकृत साइनेज व ज्यामितीय डिजाइन यातायात प्रवाह सुधारेगा। आगे की राह में तीन पहलू महत्वपूर्ण हैं — विस्तृत यातायात आकलन व भविष्य के यातायात प्रक्षेपण के आधार पर लेन कॉन्फिगरेशन तय करना, 60/70 मीटर राइट ऑफ वे के अनुरूप भूमि व संरचनाओं (पुल, फ्लाईओवर, इंटरचेंज) की योजना, और चार व छह लेन की ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड परियोजनाओं में एकरूप अनुपालन, ताकि 50,000 किमी का लक्ष्य सुरक्षा से समझौता किए बिना पूरा हो।

मुख्य शब्द

एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर
वह राजमार्ग जिसमें प्रवेश-निकास नियंत्रित होता है; स्रोत के अनुसार इन पर कारें 100 किमी प्रति घंटे तक चल सकती हैं।
मीडियन कट (मीडियन ओपनिंग)
डिवाइडर में बना खुलापन जिससे वाहन दूसरी दिशा में मुड़ते या पार करते हैं; नए मानकों में यह प्रतिबंधित।
एट-ग्रेड इंटरसेक्शन
सतह स्तर पर बना चौराहा; नए कॉरिडोर में इसे नहीं बनाया जाएगा।
फ्लश मीडियन
पेंट की गई सेंटर लेन, जिसके साथ मोटी तार रस्सियाँ या क्रैश बैरियर लगाए जाते हैं, ऊंचे कंक्रीट डिवाइडर के बजाय।
ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड परियोजना
ग्रीनफील्ड यानी नए संरेखण पर बनने वाली परियोजना; ब्राउनफील्ड यानी मौजूदा राजमार्ग का उन्नयन — दोनों पर नियम लागू।
राइट ऑफ वे (ROW)
राजमार्ग के लिए उपलब्ध भूमि पट्टी की चौड़ाई; इन कॉरिडोर के लिए 60 मीटर या 70 मीटर निर्धारित।

अभ्यास प्रश्न

  1. एनएचएआई के नए दिशा-निर्देशों में मीडियन कट और एट-ग्रेड इंटरसेक्शन हटाने के पीछे सुरक्षा तर्क क्या हैं? परीक्षण कीजिए।
  2. एक्सप्रेसवे से अलग, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए समर्पित डिजाइन मानकों की आवश्यकता क्यों पड़ी? चर्चा कीजिए।
  3. 50,000 किमी एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर के लक्ष्य को पूरा करने में डिजाइन मानकीकरण, राइट ऑफ वे और यातायात प्रक्षेपण की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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