2028 के मध्य तक स्मार्ट मीटर में घरेलू चिप अनिवार्य: बिजली सचिव

साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार 2028 के मध्य तक स्मार्ट मीटर में देश में डिजाइन की गई चिप का उपयोग अनिवार्य करने की योजना बना रही है। यह जानकारी बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने फिक्की द्वारा आयोजित दूसरे इंडियन पावर सेक्टर कॉन्फ्रेंस में दी। वर्तमान में एक स्मार्ट मीटर चिप की कीमत 8 से 10 डॉलर है। आरडीएसएस के तहत 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर मंजूर हुए, 5.73 करोड़ लगाए गए। विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 7.24 करोड़ मीटर लगे हैं।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Government plans to mandate domestically designed chips in smart meters by mid-2028 for cybersecurity reasons. — Directly attributed to Power Secretary Pankaj Agarwal, speaking at the 2nd Indian Power Sector Conference organised by FICCI.
  • A smart meter chip currently costs between $8 and $10 apiece. — Figure appears in source, attributed to Agarwal; no supporting breakdown given.
  • 20.33 crore smart meters sanctioned under RDSS; 5.73 crore installed under the scheme and 7.24 crore overall. — Attributed in source to government data; internally consistent with component figures of 19.79 crore consumers, 52.53 lakh DTs and 2.05 lakh feeders.
  • Draft National Electricity Policy note sent to the Union Cabinet for inter-ministerial consultation, to replace the 2005 policy. — Attributed to Agarwal; source notes draft was issued in January this year.
  • AI data centres will add 26.3 GW of load by 2031-32. — Source attributes this to information given by the Power Ministry to Parliament in July.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह सरकारी खरीद को औद्योगिक नीति में बदलने की कोशिश है। 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर मंजूर हुए हैं और अब तक 7.24 करोड़ ही लगे हैं, इसलिए सचिव का यह तर्क आर्थिक रूप से ठीक लगता है कि अलग प्रोत्साहन की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकारी खरीद ही बाजार की गारंटी है। असली सवाल यह है कि 2028 के मध्य तक घरेलू चिप लागत और आपूर्ति भरोसे में आयातित चिप की बराबरी कर पाएंगी या नहीं।

  • एक चिप की कीमत अभी 8–10 डॉलर है और खबर के मुताबिक चिप डिजाइन मीटर की निर्माण लागत का बड़ा हिस्सा है, इसलिए घरेलू डिजाइन से इनपुट लागत घट सकती है।
  • मंजूर 20.33 करोड़ में से 7.24 करोड़ मीटर ही लगे हैं — यही बड़ा बचा हुआ बाजार बिना सब्सिडी निवेश खींचने के दावे का आधार है।
  • अगर कीमतें नहीं गिरीं तो अतिरिक्त लागत अंततः डिस्कॉम, आरडीएसएस फंडिंग और अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता टैरिफ पर आएगी।
  • करीब तीन साल की समयसीमा घरेलू चिप डिजाइनरों और फैब इकाइयों के लिए अनुकूल है, लेकिन आयातित चिप पर निर्भर मीटर निर्माताओं को सप्लाई चेन बदलने की लागत उठानी पड़ेगी।
  • साइबर सुरक्षा का लाभ पैसों में नापना कठिन है, पर आर्थिक तर्क यही है कि ग्रिड में गड़बड़ी की लागत चिप के मूल्य अंतर से कहीं ज्यादा हो सकती है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि घरेलू चिप कब वैलिडेशन पास कर व्यावसायिक उत्पादन में आती हैं और आगामी टेंडरों में मीटर की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

खबर घरेलू चिप की वास्तविक लागत, उत्पादन क्षमता या समयसीमा चूकने पर क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं करती — यह अभी घोषित योजना है, अधिसूचित अनिवार्यता नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

बिजली वितरण क्षेत्र के सुधारों के तहत देश भर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिनमें इस्तेमाल होने वाली चिप मुख्यतः आयातित है। साइबर सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने फिक्की के दूसरे इंडियन पावर सेक्टर कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार 2028 के मध्य तक स्मार्ट मीटर में भारत में डिजाइन (और संभवतः भारत में निर्मित) चिप अनिवार्य करने की योजना बना रही है। इसी मंच पर उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी) का मसौदा नोट अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेजा गया है, जो 2005 की दो दशक पुरानी नीति की जगह लेगी।

मुख्य तथ्य

  • बिजली सचिव पंकज अग्रवाल के अनुसार सरकार 2028 के मध्य तक स्मार्ट मीटर में 'डिजाइन इन इंडिया' चिप अनिवार्य कर सकती है, और संभवतः 'मेक इन इंडिया' चिप भी।
  • वर्तमान में एक स्मार्ट मीटर चिप की कीमत 8 से 10 डॉलर प्रति यूनिट है।
  • आरडीएसएस के तहत 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं, 52.53 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर और 2.05 लाख फीडर के लिए कुल 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर मंजूर किए गए हैं।
  • आरडीएसएस के तहत अब तक 5.73 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए गए; सभी योजनाओं को मिलाकर देश में कुल 7.24 करोड़ स्मार्ट मीटर लगे हैं।
  • अग्रवाल ने कहा कि घरेलू डिजाइन वाली चिप के लिए अलग प्रोत्साहन की जरूरत नहीं, क्योंकि सरकारी खरीद ही सुनिश्चित बाजार देगी।
  • इस वर्ष जनवरी में जारी मसौदा राष्ट्रीय विद्युत नीति के करीब आठ महीने बाद नोट कैबिनेट को भेजा गया; नई नीति 2005 की नीति को प्रतिस्थापित करेगी।
  • जुलाई में एक डेटा ब्रीच में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (केकेएनपी) से जुड़ी जानकारी उजागर हुई; उसी महीने साइबर सुरक्षा नियम अधिसूचित किए गए।
  • बिजली मंत्रालय ने जुलाई में संसद को बताया कि एआई डेटा सेंटर 2031-32 तक 26.3 गीगावाट का अतिरिक्त लोड जोड़ेंगे, जिसे मुख्यतः नवीकरणीय क्षमता से पूरा किया जाएगा।

समयरेखा

  1. 2005तत्कालीन राष्ट्रीय विद्युत नीति अधिसूचित, जिसे अब नई नीति प्रतिस्थापित करेगी।
  2. जनवरी (इस वर्ष)बिजली मंत्रालय ने मसौदा राष्ट्रीय विद्युत नीति जारी की।
  3. जुलाईडेटा ब्रीच में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़ी सूचना उजागर; साइबर सुरक्षा नियम अधिसूचित; मंत्रालय ने संसद को एआई डेटा सेंटर के 26.3 गीगावाट लोड की जानकारी दी।
  4. फिक्की का दूसरा इंडियन पावर सेक्टर कॉन्फ्रेंस (तिथि स्रोत में नहीं)बिजली सचिव ने घरेलू चिप अनिवार्यता और कैबिनेट को भेजे एनईपी नोट की घोषणा की।
  5. 2028 के मध्य तक (प्रस्तावित)स्मार्ट मीटर में भारत में डिजाइन की गई चिप अनिवार्य करने का लक्ष्य।
  6. 2031-32एआई डेटा सेंटर से 26.3 गीगावाट अतिरिक्त बिजली लोड का अनुमान।

किसका दाँव

  • बिजली मंत्रालय / बिजली सचिव पंकज अग्रवाल — साइबर सुरक्षा जोखिम कम करना, घरेलू चिप अनिवार्यता की समयसीमा तय करना और नई राष्ट्रीय विद्युत नीति लाना।
  • स्मार्ट मीटर निर्माता — 8-10 डॉलर की चिप की लागत, आपूर्ति स्रोत बदलने और नई अनुपालन समयसीमा का दबाव; घरेलू चिप से इनपुट लागत घट सकती है।
  • चिप डिजाइनर/सेमीकंडक्टर कंपनियाँ — सरकारी खरीद से सुनिश्चित बाजार; चिप की टेस्टिंग और वैलिडेशन के बाद व्यावसायिक उत्पादन का अवसर।
  • राज्य व वितरण कंपनियाँ (डिस्कॉम) — आरडीएसएस के तहत 20.33 करोड़ मंजूर मीटरों की स्थापना और सुरक्षित मीटरिंग अवसंरचना।
  • बिजली उपभोक्ता — स्मार्ट मीटर डेटा की सुरक्षा और मीटर लागत पर असर।
  • डेटा सेंटर व ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएँ — गीगावाट-स्केल लोड; आपूर्ति सुरक्षा चाहिए, बदले में नई नीति के तहत लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) अधिदेश निभाने होंगे।
  • फिक्की — उद्योग संस्था के रूप में नीति संवाद का मंच उपलब्ध कराना।

क्यों अहम है

स्मार्ट मीटर देश की बिजली वितरण प्रणाली की रीढ़ बनते जा रहे हैं—7.24 करोड़ मीटर पहले ही लग चुके हैं—इसलिए इनकी चिप में मौजूद कोई भी कमजोरी राष्ट्रीय स्तर पर साइबर जोखिम बन सकती है, जैसा कुडनकुलम डेटा ब्रीच ने रेखांकित किया। घरेलू डिजाइन अनिवार्य करने से आपूर्ति-श्रृंखला पर नियंत्रण बढ़ेगा और चिप डिजाइन की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण मीटर की कुल लागत भी घट सकती है। साथ ही, डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे गीगावाट-स्केल लोड के दौर में नई राष्ट्रीय विद्युत नीति ग्रिड प्रबंधन की दिशा तय करेगी।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • आरडीएसएस (पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना) के तहत 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर मंजूर; 5.73 करोड़ स्थापित।
  • सभी योजनाओं को मिलाकर देश में कुल 7.24 करोड़ स्मार्ट मीटर स्थापित।
  • स्मार्ट मीटर चिप की मौजूदा कीमत: 8-10 डॉलर प्रति चिप; घरेलू डिजाइन की समयसीमा 2028 के मध्य।
  • नई राष्ट्रीय विद्युत नीति 2005 की नीति को प्रतिस्थापित करेगी; मसौदा जनवरी में जारी, नोट कैबिनेट को भेजा गया।
  • जुलाई में साइबर सुरक्षा नियम अधिसूचित; कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़ा डेटा ब्रीच सामने आया।
  • भारत 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता पर; एआई डेटा सेंटर से 2031-32 तक 26.3 गीगावाट अतिरिक्त लोड का अनुमान।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत का बिजली वितरण सुधार अब दो चुनौतियों के संगम पर है—डिजिटलीकरण और साइबर सुरक्षा। आरडीएसएस के तहत 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर मंजूर होने और 7.24 करोड़ लगने के बाद मीटरिंग अवसंरचना एक विशाल डिजिटल नेटवर्क बन गई है, जिसकी चिप आयातित होने पर रणनीतिक भेद्यता पैदा होती है; जुलाई का कुडनकुलम डेटा ब्रीच और उसी महीने अधिसूचित साइबर सुरक्षा नियम इस चिंता को पुष्ट करते हैं। सरकार का जवाब दो-स्तरीय है: 2028 के मध्य तक 'डिजाइन इन इंडिया' (और संभवतः 'मेक इन इंडिया') चिप अनिवार्य करना—जिसके लिए अलग प्रोत्साहन की जगह सरकारी खरीद से सुनिश्चित बाजार का सहारा लिया जा रहा है—और नई राष्ट्रीय विद्युत नीति, जो 2005 की नीति की जगह विकसित भारत 2047 की जरूरतों, 300 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता, ग्रिड प्रबंधन तथा डेटा सेंटर व ग्रीन हाइड्रोजन जैसे गीगावाट-स्केल लोड के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखेगी। आगे की राह में चिप की टेस्टिंग-वैलिडेशन के बाद समयबद्ध व्यावसायिक उत्पादन, आपूर्ति के साथ-साथ मांग-पक्ष लचीलापन अधिदेश, और नीति को अंतर-मंत्रालयी परामर्श के बाद शीघ्र अंतिम रूप देना निर्णायक होगा।

मुख्य शब्द

आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme)
वितरण क्षेत्र की पुनर्गठित योजना, जिसके तहत उपभोक्ताओं, ट्रांसफॉर्मर और फीडर के लिए स्मार्ट मीटरिंग कार्य मंजूर किए जाते हैं।
स्मार्ट मीटर
डिजिटल बिजली मीटर जो खपत का रिमोट माप और संचार करता है; इसमें लगी चिप मुख्य लागत व सुरक्षा घटक है।
डिजाइन इन इंडिया / मेक इन इंडिया चिप
भारत में डिजाइन की गई और आगे भारत में ही निर्मित/फैब्रिकेटेड चिप, जिसे स्मार्ट मीटर में अनिवार्य करने की तैयारी है।
राष्ट्रीय विद्युत नीति (एनईपी)
बिजली क्षेत्र की व्यापक नीति; नई नीति 2005 की नीति की जगह लेगी और कैबिनेट के अंतर-मंत्रालयी परामर्श में है।
फ्लेक्सिबिलिटी मैंडेट
डेटा सेंटर जैसे बड़े लोड वाले उपभोक्ताओं पर ग्रिड के उतार-चढ़ाव संभालने में सहयोग करने की प्रस्तावित बाध्यता।
डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर (डीटी) व फीडर
वितरण नेटवर्क के घटक, जिनकी मीटरिंग भी आरडीएसएस के तहत मंजूर की गई है (52.53 लाख डीटी, 2.05 लाख फीडर)।

अभ्यास प्रश्न

  1. स्मार्ट मीटरिंग के विस्तार से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिमों की चर्चा करें। घरेलू स्तर पर डिजाइन की गई चिप को अनिवार्य करना इन जोखिमों का समाधान कहाँ तक कर सकता है?
  2. आरडीएसएस के तहत स्मार्ट मीटरिंग की प्रगति का मूल्यांकन करें। मंजूर 20.33 करोड़ और स्थापित 5.73 करोड़ मीटरों के अंतर के कारण और समाधान बताइए।
  3. डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे गीगावाट-स्केल लोड भारतीय ग्रिड के लिए क्या चुनौतियाँ पैदा करते हैं, और नई राष्ट्रीय विद्युत नीति से किन बदलावों की अपेक्षा है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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