सिंगरेनी में जी9 कोयले की कमी, यादाद्री संयंत्र की लागत पर चिंता
नलगोंडा जिले के दामरचेर्ला में पिछली बीआरएस सरकार द्वारा शुरू किए गए 5x800 मेगावाट यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन को सालाना 1.4 करोड़ टन जी9 ग्रेड कोयला चाहिए, लेकिन सिंगरेनी 6 करोड़ टन उत्पादन में से केवल 40 लाख टन जी9 देता है, सरकारी सूत्रों ने कहा। खदानों से 270 किमी दूर स्थित संयंत्र के लिए 40 साल की ढुलाई पर ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और प्रति यूनिट ₹5 की लागत दोगुनी हो जाएगी। अब महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया से कोयला लेने की योजना है।
स्रोत
The Hindu — Telangana · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- YTPS (5x800 MW) at Dameracherla needs 14 million tonnes of G9 grade coal annually, while Singareni produces only 4 mt of G9 out of 60 mt total — Figures appear in source; attributed to government sources, not to an official document or named official.
- The BRS government signed a coal supply agreement with Singareni Collieries in 2022 and did not allow Singareni to bid for coal block auctions — Attributed to government sources; no documentary evidence or BRS response cited in source.
- Plant is 270 km from Singareni mines; coal transport over a 40-year life would add ₹40,000 crore, doubling generation cost from ₹5 per unit — Projection attributed to unnamed government sources; methodology not disclosed in source.
- Project taken up in 2015 with BHEL contract on nomination basis; units due by Oct 2020 and Oct 2021, but one unit is still incomplete — Timeline stated as fact in source without named attribution.
- Government/Genco plans to source coal from Mahanadi Coalfields or Coal India on CM A. Revanth Reddy's instructions — Attributed to government sources; no official order cited.
विश्लेषकों की राय राय
यादाद्री की असली दिक्कत निर्माण नहीं, ईंधन का अर्थशास्त्र और प्लांट की लोकेशन है। खबर के मुताबिक प्लांट को सालाना 1.4 करोड़ टन G9 कोयला चाहिए, जबकि सिंगरेणी केवल 40 लाख टन दे पाती है — बाकी महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया से लेना पड़ेगा, जिससे राज्य की मोलभाव क्षमता घटती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार खदानों से 270 किमी दूरी के कारण 40 साल में ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त ढुलाई बोझ पड़ेगा और उत्पादन लागत ₹5 प्रति यूनिट से दोगुनी हो सकती है — यह बोझ अंततः उपभोक्ता के टैरिफ या सरकारी सब्सिडी से ही भरा जाएगा।
- थर्मल बिजली की लागत में कोयला और ढुलाई का हिस्सा सबसे बड़ा होता है, इसलिए पिटहेड से दूर प्लांट लगाना जीवनभर की संरचनात्मक लागत बन जाता है।
- प्रति यूनिट लागत दोगुनी होने पर बोझ डिस्कॉम, फिर उपभोक्ता टैरिफ या राज्य सब्सिडी पर आता है — वह खत्म नहीं होता।
- महंगी बिजली मेरिट-ऑर्डर डिस्पैच में पीछे चली जाती है, यानी प्लांट कम क्षमता पर चले तो भी स्थिर लागत चुकानी पड़ सकती है।
- अपनी G9 कोयला खदान न होने से बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कीमत और आपूर्ति सुरक्षा दोनों का जोखिम बढ़ाती है।
- दूसरी तरफ अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक और राज्य के पास अपनी बेसलोड क्षमता वास्तविक लाभ हैं — लेकिन ईंधन लागत ऊंची रहने पर यह लाभ सीमित रह जाएगा।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया से समझौता किस कीमत और कितनी अवधि का होता है, और नियामक इस बढ़ी लागत को टैरिफ में कैसे समायोजित करता है।
₹40,000 करोड़ का ढुलाई खर्च और लागत दोगुनी होने का अनुमान इस खबर में सरकारी सूत्रों का दावा है; स्वतंत्र पुष्टि या पिछली सरकार, सिंगरेणी और जेनको का पक्ष इसमें शामिल नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तेलंगाना के नलगोंडा जिले के दामरचेर्ला में पिछली बीआरएस सरकार ने 5x800 मेगावाट का यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन (YTPS) शुरू किया था, जो अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित है। यह परियोजना 2015 में शुरू हुई और तीन साल में पूरी होनी थी, लेकिन निर्माण अब तक अधूरा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार संयंत्र को चलाने के लिए जरूरी जी9 ग्रेड कोयला सिंगरेनी कोलियरीज पर्याप्त मात्रा में नहीं दे सकती, और संयंत्र खदानों से 270 किमी दूर है। इससे ढुलाई लागत और बिजली उत्पादन लागत पर भारी बोझ पड़ने की आशंका है।
मुख्य तथ्य
- यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन की क्षमता 5x800 मेगावाट है, स्थान दामरचेर्ला, नलगोंडा जिला।
- संयंत्र को रेटेड क्षमता पर चलाने के लिए सालाना 1.4 करोड़ टन (14 मिलियन टन) जी9 ग्रेड कोयला चाहिए।
- सिंगरेनी का औसत वार्षिक उत्पादन 6 करोड़ टन है, जिसमें से केवल 40 लाख टन जी9 ग्रेड है।
- बीआरएस सरकार ने 2022 में सिंगरेनी कोलियरीज के साथ कोयला आपूर्ति समझौता किया था।
- संयंत्र सिंगरेनी की कोयला खदानों से 270 किमी दूर स्थित है।
- करीब 40 साल के जीवनकाल में कोयला ढुलाई से उत्पादन लागत पर ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
- सामान्य लागत ₹5 प्रति यूनिट से उत्पादन लागत दोगुनी हो जाएगी, सूत्रों के अनुसार।
- परियोजना 2015 में शुरू हुई, निर्माण अनुबंध बीएचईएल को नॉमिनेशन आधार पर दिया गया।
समयरेखा
- 2015यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन शुरू किया गया; बीएचईएल को नॉमिनेशन आधार पर निर्माण अनुबंध, तीन साल में पूरा करने की योजना।
- अक्टूबर 2020प्रारंभिक योजना के अनुसार पहली दो इकाइयों को चालू किया जाना था।
- अक्टूबर 2021शेष तीन इकाइयों को चालू किया जाना था।
- 2022बीआरएस सरकार ने सिंगरेनी कोलियरीज के साथ कोयला आपूर्ति समझौता किया।
- 24 सितंबर 2026 (रिपोर्ट प्रकाशन)एक इकाई अब तक अपूर्ण; सरकार/जेनको महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया से कोयला लेने की योजना बना रही है।
किसका दाँव
- तेलंगाना सरकार / जेनको — अधूरी परियोजना और बढ़ी उत्पादन लागत का वित्तीय बोझ; वैकल्पिक कोयला स्रोत तय करना।
- सिंगरेनी कोलियरीज — 2022 के आपूर्ति समझौते के बावजूद जरूरी जी9 ग्रेड कोयला देने में असमर्थ; कोयला ब्लॉक नीलामी में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली थी।
- पिछली बीआरएस सरकार — स्थान चयन, कोयला गुणवत्ता की अनदेखी और नीलामी में सिंगरेनी को शामिल न करने पर सवाल।
- बीएचईएल — नॉमिनेशन आधार पर मिला निर्माण अनुबंध; समयसीमा से कई वर्ष देरी।
- महानदी कोलफील्ड्स / कोल इंडिया — मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के निर्देश पर संभावित वैकल्पिक कोयला आपूर्तिकर्ता।
- बिजली उपभोक्ता — प्रति यूनिट लागत दोगुनी होने की आशंका से बिजली की कीमत पर असर।
क्यों अहम है
4,000 मेगावाट की यह परियोजना पूरी होने से पहले ही राज्य पर बोझ बनती दिख रही है, क्योंकि ईंधन की गुणवत्ता और खदान से दूरी जैसे बुनियादी पहलुओं पर सवाल हैं। ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त ढुलाई बोझ और प्रति यूनिट लागत दोगुनी होने की आशंका सीधे राज्य के वित्त और बिजली दरों से जुड़ी है। यह मामला बड़ी बिजली परियोजनाओं में स्थान चयन, ईंधन-संबद्धता और अनुबंध प्रक्रिया की योजना-गुणवत्ता का उदाहरण है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन (YTPS): 5x800 मेगावाट, दामरचेर्ला, नलगोंडा जिला, तेलंगाना; अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक।
- जरूरत: 1.4 करोड़ टन जी9 ग्रेड कोयला/वर्ष; सिंगरेनी का जी9 उत्पादन केवल 40 लाख टन।
- सिंगरेनी का औसत वार्षिक कोयला उत्पादन: 6 करोड़ टन।
- संयंत्र और सिंगरेनी खदानों के बीच दूरी: 270 किमी; 40 वर्ष में ₹40,000 करोड़ अतिरिक्त ढुलाई बोझ।
- कोयला आपूर्ति समझौता: 2022, सिंगरेनी कोलियरीज के साथ।
- वैकल्पिक स्रोत विकल्प: महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया (मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के निर्देश)।
मेन्स दृष्टिकोण
यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन का मामला दिखाता है कि बड़ी ताप विद्युत परियोजनाओं की व्यवहार्यता ईंधन-संबद्धता (कोल लिंकेज) और स्थान चयन पर कितनी निर्भर है। स्रोत के अनुसार संयंत्र को सालाना 1.4 करोड़ टन जी9 ग्रेड कोयला चाहिए, पर सिंगरेनी 6 करोड़ टन कुल उत्पादन में से केवल 40 लाख टन जी9 देती है; 2022 में आपूर्ति समझौता होने के बावजूद आवश्यक मात्रा उपलब्ध नहीं है, और पिछली सरकार ने सिंगरेनी को कोयला ब्लॉक नीलामी में भाग लेने नहीं दिया। दूसरी समस्या स्थान की है—खदानों से 270 किमी दूरी के कारण 40 वर्ष के जीवनकाल में ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त ढुलाई बोझ और ₹5 प्रति यूनिट की सामान्य लागत के दोगुना होने की आशंका। साथ ही 2015 में शुरू हुई और तीन साल में पूरी होने वाली परियोजना की एक इकाई अब तक अधूरी है, जबकि अनुबंध बीएचईएल को नॉमिनेशन आधार पर दिया गया था—यह समयसीमा और खरीद-प्रक्रिया के प्रश्न उठाता है। आगे का रास्ता स्रोत में बताए विकल्प तक सीमित है: महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया से आवश्यक गुणवत्ता व मात्रा में कोयला जुटाना और नई ग्रीनफील्ड खदानों से गुणवत्तापूर्ण कोयला आपूर्ति के समझौतों का उपयोग।
मुख्य शब्द
- जी9 ग्रेड कोयला
- कोयले का एक ग्रेड, जिसकी यादाद्री संयंत्र को सालाना 1.4 करोड़ टन जरूरत है; सिंगरेनी इसका केवल 40 लाख टन उत्पादन करती है।
- अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल
- ताप विद्युत संयंत्र की उच्च दाब-तापमान वाली तकनीक; यादाद्री इसी श्रेणी का संयंत्र है।
- सिंगरेनी कोलियरीज
- तेलंगाना की कोयला कंपनी, औसत वार्षिक उत्पादन 6 करोड़ टन; 2022 में YTPS से कोयला आपूर्ति समझौता।
- नॉमिनेशन आधार पर अनुबंध
- प्रतिस्पर्धी बोली के बजाय सीधे किसी कंपनी को काम देना; YTPS का निर्माण बीएचईएल को इसी तरह दिया गया।
- ग्रीनफील्ड कोयला खदान
- पूर्णतः नई, पहले अविकसित खदान; YTPS को गुणवत्तापूर्ण कोयला देने के लिए ऐसी खदानों के समझौते हैं।
- जेनको
- राज्य की विद्युत उत्पादन कंपनी, जो अब महानदी कोलफील्ड्स या कोल इंडिया से कोयला लेने की योजना बना रही है।
अभ्यास प्रश्न
- ताप विद्युत परियोजनाओं के स्थान चयन में कोयला खदानों से निकटता क्यों महत्वपूर्ण है? यादाद्री परियोजना के उदाहरण से समझाइए।
- यादाद्री थर्मल पावर स्टेशन में कोयला गुणवत्ता (जी9 ग्रेड) और आपूर्ति समझौते से जुड़ी समस्याओं का राज्य के वित्त और बिजली दरों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- बड़ी सार्वजनिक परियोजनाओं में नॉमिनेशन आधार पर अनुबंध देने और समयसीमा में देरी के जोखिमों का परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
