उड़ान के नए चरण में राज्यों को हवाई अड्डे चुनने की भूमिका
नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना उड़ान के अगले चरण में राज्य सरकारें उच्च संभावना वाले एयरस्ट्रिप और एयरोड्रोम चिह्नित करेंगी। इसके क्रियान्वयन के लिए 21 राज्यों ने केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन किए। योजना 10 वर्ष और बढ़ाई गई है। नायडू के मुताबिक बीते 10 वर्षों में 90 हवाई अड्डे बने और नई परियोजनाएं 18 महीनों में पूरी होंगी। वायबिलिटी गैप फंडिंग तीन से पांच वर्ष की गई।
स्रोत
Civil Aviation — Ram Mohan Naidu · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- 21 states signed MoUs with the Centre for the next phase of Udan. — Stated in the source in connection with Minister Ram Mohan Naidu's remarks on Tuesday; figure appears in source.
- The scheme is being extended for another 10 years and 90 airports were built in the last 10 years. — Attributed directly to Civil Aviation Minister Ram Mohan Naidu.
- Next-phase projects will be completed within 18 months. — Attributed to the minister; presented as a target, not a verified outcome.
- Viability gap funding support extended from three years to five years. — Described in the source as a key change under modified Udan; attributed to officials, no document cited.
- More than 687 air routes and 97 airports were connected under Udan, launched in 2016. — Figures appear in the source, attributed to officials; source also notes 90 airports built, a figure an editor may wish to reconcile.
विश्लेषकों की राय राय
संशोधित उड़ान योजना में राज्यों को एयरस्ट्रिप और एयरोड्रोम चुनने का अधिकार देना केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक जिम्मेदारी का बँटवारा है। 21 राज्यों के एमओयू पर हस्ताक्षर से केंद्र व्यापक सहमति दिखा सकता है, जबकि भूमि अधिग्रहण, मंजूरियाँ और लास्ट-माइल सड़कों जैसे कठिन काम अब स्पष्ट रूप से राज्यों के खाते में हैं। दस साल का विस्तार और वायबिलिटी गैप फंडिंग को पाँच साल तक बढ़ाना बताता है कि सरकार बंद पड़े हवाई अड्डों और ठप रूट्स से पैदा हुई राजनीतिक असहजता दोहराना नहीं चाहती।
- राज्यों द्वारा स्थान सुझाने से हवाई अड्डों की जगह का चुनाव केंद्र-राज्य मोलभाव और स्थानीय क्षेत्रीय राजनीति का मुद्दा बन सकता है।
- "चैलेंज मोड" तेज़ी से आगे बढ़ने वाले राज्यों को लाभ देगा और देरी की जिम्मेदारी राज्यों पर डालना केंद्र के लिए आसान बना देगा।
- अधिकारियों द्वारा कुशीनगर और मुरादाबाद जैसे बंद हवाई अड्डों का उल्लेख यह स्वीकारोक्ति है कि पिछला अमल आलोचकों के लिए तैयार हथियार है।
- वीजीएफ को तीन से पाँच साल करना और किरायों में चरणबद्ध बढ़ोतरी आर्थिक कदम से ज्यादा राजनीतिक बीमा है — रूट शुरू होकर बंद हो जाने के असहज चक्र से बचाव।
- पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में हेलीपोर्ट, स्वदेशी विमान निर्माण और एमआरओ की चर्चा कनेक्टिविटी को राष्ट्रीय क्षमता के बड़े नैरेटिव से जोड़ती है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि कौन से राज्य स्थान चयन, भूमि और मंजूरियों में पहले आगे बढ़ते हैं — और क्या विपक्ष शासित राज्य प्राथमिकता तय करने में पक्षपात का आरोप लगाते हैं।
यह खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि कौन से 21 राज्यों ने हस्ताक्षर किए, कितना धन तय हुआ, कौन से स्थान चुने जाएँगे या राज्यों को कितना खर्च उठाना होगा; पूर्णिया केवल उदाहरण के रूप में आया है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना 2016 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद जिलों और दूरदराज के इलाकों को हवाई सेवा से जोड़ना, नए पर्यटन स्थलों को जोड़ना तथा स्वास्थ्य व व्यापार तक पहुंच सुधारना था। अब सरकार 'संशोधित उड़ान' के तहत योजना का अगला चरण ला रही है, जिसमें राज्य सरकारें ऊंची संभावना वाले एयरस्ट्रिप और एयरोड्रोम चिह्नित करेंगी। नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार योजना 10 वर्ष और बढ़ाई गई है और इसके क्रियान्वयन के लिए 21 राज्यों ने केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए हैं। साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग की अवधि तीन से पांच वर्ष कर दी गई है।
मुख्य तथ्य
- नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि उड़ान के अगले चरण में राज्य सरकारें उच्च संभावना वाले एयरस्ट्रिप और एयरोड्रोम चिह्नित करेंगी।
- क्रियान्वयन के लिए 21 राज्यों ने केंद्र के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए; योजना 10 वर्ष और बढ़ाई गई है।
- नायडू के अनुसार पिछले 10 वर्षों में उड़ान के तहत 90 हवाई अड्डे बने; अगले चरण की परियोजनाएं 18 महीनों में पूरी होंगी।
- उड़ान 2016 में शुरू हुई; अब तक 687 से अधिक हवाई मार्ग और 97 हवाई अड्डे जोड़े गए।
- वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सहायता अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई।
- संशोधित वीजीएफ मॉडल में शुरुआती तीन वर्ष के बाद अगले दो वर्षों में किराया चरणबद्ध ढंग से बढ़ेगा, ताकि यात्रियों पर अचानक बोझ न पड़े।
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और मुरादाबाद जैसे हवाई अड्डे बंद होने के बाद वहां एयरलाइन परिचालन नहीं हो रहा; ऐसे कम सेवा वाले हवाई अड्डों के लिए 'रीबूट' शुरू किया गया।
- पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में योजना के तहत हेलीपोर्ट बनाए जाएंगे; मंत्री ने कहा एमआरओ क्षेत्र विकसित हो रहा है और देश अपने विमान बनाने की स्थिति में है।
समयरेखा
- 2016उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना शुरू; लक्ष्य—जिलों व दूरदराज इलाकों को हवाई संपर्क, पर्यटन, स्वास्थ्य व व्यापार पहुंच।
- पिछले 10 वर्षयोजना के तहत 90 हवाई अड्डे बने; 687 से अधिक मार्ग और 97 हवाई अड्डे जोड़े गए, पर कुशीनगर व मुरादाबाद जैसे हवाई अड्डे बंद हुए।
- मंगलवार (समाचार प्रकाशन: 23 सितंबर 2026)मंत्री राम मोहन नायडू ने अगले चरण की घोषणा की; 21 राज्यों ने एमओयू किए, योजना 10 वर्ष बढ़ाई गई।
- आगेचिह्नित परियोजनाएं प्राथमिकता पर, 18 महीनों में पूरी; वीजीएफ पांच वर्ष; अन्य हवाई अड्डे चरणबद्ध ढंग से विकसित।
किसका दाँव
- नागर विमानन मंत्रालय (MoCA) — राज्यों के सुझावों पर परियोजनाएं क्रियान्वित करना; वित्तपोषण, संस्थागत सहयोग और नीतिगत ढांचा देना।
- राज्य सरकारें (21 एमओयू करने वाले राज्य) — उच्च संभावना वाले एयरस्ट्रिप/एयरोड्रोम चिह्नित करना; भूमि आवंटन-अधिग्रहण, सड़क व लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, सुरक्षा, अग्निशमन व स्थानीय मंजूरियां।
- एयरलाइन ऑपरेटर — मार्गों पर निवेश व परिसंपत्तियां लगती हैं; मार्ग चयन पर अलग से परामर्श, वीजीएफ सहायता और पुनः आवंटित मार्ग।
- यात्री व दूरदराज के जिले — सस्ता व निरंतर हवाई संपर्क; वीजीएफ खत्म होने पर किराया बढ़ने और मार्ग बंद होने का जोखिम।
- पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्य — हेलीपोर्ट निर्माण से दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क सुधार।
- कुशीनगर व मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) जैसे बंद हवाई अड्डे — 'रीबूट' के तहत पहचान के बाद मार्गों का एयरलाइनों को पुनः आवंटन और परिचालन बहाली।
क्यों अहम है
उड़ान का पहला दशक दिखाता है कि हवाई अड्डे बनाना ही पर्याप्त नहीं—वीजीएफ खत्म होने और मांग न बनने पर मार्ग व हवाई अड्डे बंद हो जाते हैं। नए चरण में राज्यों को स्थान चुनने की भूमिका, 'चैलेंज मोड', 18 महीने की समयसीमा और पांच वर्ष की वीजीएफ मिलकर योजना को मांग-आधारित और टिकाऊ बनाने का प्रयास है। यह संघीय सहयोग, भूमि-मंजूरी जैसी राज्य-स्तरीय अड़चनों और छोटे शहरों की आर्थिक-पर्यटन संभावनाओं को सीधे प्रभावित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- उड़ान = उड़े देश का आम नागरिक; 2016 में शुरू क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना, नागर विमानन मंत्रालय के अधीन।
- अब तक 687 से अधिक हवाई मार्ग व 97 हवाई अड्डे जुड़े; 10 वर्षों में 90 हवाई अड्डे बने।
- संशोधित उड़ान: 21 राज्यों के एमओयू, योजना 10 वर्ष का विस्तार, परियोजनाएं 18 महीनों में पूरी।
- वीजीएफ (वायबिलिटी गैप फंडिंग) अवधि 3 वर्ष से 5 वर्ष; किराया वृद्धि चरणबद्ध।
- 'चैलेंज मोड': राज्य तय करेंगे कहां हवाई अड्डे चाहिए; उदाहरण—बिहार का पूर्णिया (उच्च यात्री मांग)।
- पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में हेलीपोर्ट; एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) क्षेत्र का विकास।
मेन्स दृष्टिकोण
उड़ान के पहले दशक ने क्षेत्रीय संपर्क का विस्तार किया—687 से अधिक मार्ग, 97 हवाई अड्डे और 90 नए हवाई अड्डों का निर्माण—लेकिन कुशीनगर और मुरादाबाद जैसे उदाहरण बताते हैं कि आपूर्ति-आधारित ढांचा मांग के अभाव में टिकता नहीं; अधिकारियों के अनुसार वीजीएफ समाप्त होते ही कई मार्ग बंद हुए क्योंकि यात्री ऊंचा किराया देने को तैयार नहीं थे। संशोधित उड़ान इन्हीं सबकों पर आधारित है: राज्य सरकारें उच्च संभावना वाले एयरस्ट्रिप/एयरोड्रोम चिह्नित करेंगी ('चैलेंज मोड', उदाहरण पूर्णिया), मंत्रालय परियोजनाएं क्रियान्वित करेगा और वित्तपोषण, संस्थागत सहयोग व नीति ढांचा देगा, जबकि राज्य भूमि अधिग्रहण, सड़क व लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, सुरक्षा और अग्निशमन/स्थानीय मंजूरियां सुनिश्चित करेंगे। वीजीएफ को पांच वर्ष तक बढ़ाकर व किराया वृद्धि चरणबद्ध कर 'कॉस्ट शॉक' टालने, बंद हवाई अड्डों के 'रीबूट' और मार्ग पुनः आवंटन, एयरलाइनों से परामर्श तथा 18 महीने की समयसीमा से क्रियान्वयन कसा जाएगा। आगे की राह मांग-आधारित स्थल चयन, हवाई अड्डों के संचालनरत रहने की जवाबदेही, पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में हेलीपोर्ट तथा एमआरओ व घरेलू विमान निर्माण क्षमता के साथ तालमेल में है।
मुख्य शब्द
- उड़ान (UDAN)
- 'उड़े देश का आम नागरिक'—2016 में शुरू क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना, जो दूरदराज जिलों, पर्यटन स्थलों व स्वास्थ्य-व्यापार पहुंच को जोड़ती है।
- संशोधित उड़ान
- योजना का अगला चरण जिसमें राज्यों की बड़ी भूमिका, पांच वर्ष की वीजीएफ, बंद हवाई अड्डों का पुनरुद्धार और तेज क्रियान्वयन शामिल है।
- वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ)
- उड़ान मार्गों पर उड़ान भरने वाली एयरलाइनों को केंद्र द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता; अवधि अब तीन से पांच वर्ष।
- चैलेंज मोड
- अधिकारियों द्वारा बताया गया तरीका जिसमें राज्य सरकारें स्वयं ऐसे स्थान चिह्नित करेंगी जहां हवाई अड्डे बनने चाहिए।
- एमआरओ
- मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल—विमानों के रखरखाव, मरम्मत व ओवरहॉल का क्षेत्र, जो मंत्री के अनुसार विकसित हो रहा है।
- एयरस्ट्रिप/एयरोड्रोम
- छोटी हवाई पट्टियां व हवाई परिचालन स्थल, जिन्हें राज्य चिह्नित करेंगे और प्राथमिकता से विकसित किया जाएगा।
अभ्यास प्रश्न
- उड़ान योजना के पहले दशक के अनुभवों के आलोक में 'संशोधित उड़ान' में राज्यों की बढ़ी भूमिका और वीजीएफ विस्तार कैसे क्षेत्रीय हवाई संपर्क को टिकाऊ बना सकते हैं? समीक्षा कीजिए।
- कम सेवा वाले हवाई अड्डों के बंद होने के कारणों का विश्लेषण कीजिए और 'रीबूट' व मार्ग पुनः आवंटन की रणनीति का मूल्यांकन कीजिए।
- 'चैलेंज मोड' जैसे मांग-आधारित स्थल चयन में केंद्र-राज्य जिम्मेदारियों के बंटवारे से जुड़ी चुनौतियां क्या हैं? चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
