राजभर का दावा: जाति जनगणना के बाद यूपी का चार हिस्सों में बंटवारा
उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को अंबेडकरनगर में एक जनसभा में कहा कि जाति जनगणना के बाद राज्य को पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश में बांटा जाएगा, और पूर्वांचल का पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा। भाजपा नेताओं ने टिप्पणी नहीं की। कांग्रेस ने दोहरे रवैये का आरोप लगाया, सपा ने इसे बांटो और राज करो की नीति बताया।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- U.P. will be divided into four parts — Purvanchal, Madhyanchal, Bundelkhand and Harit Pradesh — soon — Attributed to SBSP chief Om Prakash Rajbhar at a public meeting in Ambedkarnagar; no official confirmation in source.
- PM Modi told Rajbhar the division could happen after the caste census — Rajbhar's own claim about a private conversation; no corroboration, and BJP leaders declined to comment.
- The first Chief Minister of a separate Purvanchal will be from the Rajbhar community — Speculative assertion attributed to Rajbhar; not a verified fact.
- BSP-led U.P. government passed an assembly proposal before the 2012 election to split the State into four parts but did not get Central approval — Stated as background in the source without a named source or document reference.
- Rajbhar community supported the INDIA alliance in the 2024 Lok Sabha elections — Attributed to Congress national secretary Shahnawaz Alam; a political claim, not independent data.
विश्लेषकों की राय राय
यह किसी गंभीर राज्य पुनर्गठन प्रस्ताव से ज़्यादा जातीय वोट आधार को फिर से जोड़ने की कोशिश लगती है। 'पूर्वांचल राज्य' और 'राजभर मुख्यमंत्री' — इन दोनों को एक साथ पेश करके ओम प्रकाश राजभर सत्तारूढ़ गठबंधन में रहते हुए ही अपने समाज को अधिकतम राजनीतिक लाभ का संकेत दे रहे हैं। प्रधानमंत्री का नाम लेना दावे को वज़न देता है, लेकिन भाजपा नेताओं की चुप्पी बताती है कि पार्टी इसे अपनाने को तैयार नहीं है।
- नया राज्य बनाना संवैधानिक रूप से संसद का अधिकार है, इसलिए एक राज्य मंत्री की घोषणा का महत्व नीतिगत नहीं, प्रतीकात्मक है।
- कांग्रेस के इस दावे के बीच कि 2024 में राजभर समाज इंडिया गठबंधन की ओर झुका, इस बयान को खोई ज़मीन वापस पाने की कोशिश के रूप में पढ़ा जा सकता है।
- भाजपा नेताओं का न समर्थन करना, न खंडन करना — इससे सहयोगी दल जातीय गणित साधता है और पार्टी पश्चिमी यूपी व मध्यांचल में प्रतिक्रिया से बचती है।
- 2012 से पहले बसपा सरकार का विभाजन प्रस्ताव, जिसे केंद्र की मंज़ूरी नहीं मिली, दिखाता है कि यह मांग चुनाव से पहले उठती है और फिर ठंडी पड़ जाती है।
- जातीय जनगणना को विभाजन से जोड़ना दो अलग मांगों को एक ढांचे में ले आता है, जिससे विपक्ष को 'बांटो और राज करो' का हथियार मिला — सपा ने वही किया।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि भाजपा औपचारिक रूप से दूरी बनाती है या चुप रहती है, और पूर्वांचल-बुंदेलखंड के क्षेत्रीय संगठन इसे व्यापक अभियान में बदल पाते हैं या नहीं।
यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि प्रधानमंत्री मोदी ने वास्तव में क्या कहा, न ही राज्य विभाजन पर किसी सरकारी प्रस्ताव, समयसीमा या निर्णय का कोई प्रमाण देती है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार (21 सितंबर 2026) को अंबेडकरनगर में दावा किया कि जाति जनगणना पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों — पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश — में बांटा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कही और यह भी दावा किया कि अलग पूर्वांचल राज्य बनने पर पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा। राज्य विभाजन की मांग पुरानी है — 2012 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा सरकार ने विधानसभा में यूपी को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसे केंद्र की मंजूरी नहीं मिली। राजभर सुभासपा के जरिये उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी हैं।
मुख्य तथ्य
- सुभासपा अध्यक्ष और यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को अंबेडकरनगर की जनसभा में राज्य के चार हिस्सों में बंटवारे का दावा किया।
- राजभर के अनुसार जाति जनगणना पूरी होने के बाद विभाजन में कोई दिक्कत नहीं होगी, और यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे कही।
- प्रस्तावित चार इकाइयां — पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश; राजभर का दावा कि पूर्वांचल में राजभर समाज का सबसे बड़ा वोट आधार है।
- राजभर ने कहा कि अलग पूर्वांचल राज्य बनने के दिन पहला मुख्यमंत्री राजभर समुदाय का बेटा होगा।
- 2012 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा नेतृत्व वाली यूपी सरकार ने विधानसभा में राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया, पर केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली।
- पूर्वांचल विकास परिषद से जुड़े देवेश चौबे ने कहा कि अलग पूर्वांचल की मांग लंबे समय से लंबित है और पूर्वी यूपी की आर्थिक-सामाजिक स्थिति पश्चिमी यूपी से मूल रूप से भिन्न है।
- कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में राजभर सामाजिक समूह ने इंडिया गठबंधन का समर्थन किया और पिछले दो वर्षों में राजभर का राजनीतिक कद घटा है।
- सपा प्रवक्ता सुनील सिंह यादव 'सजन' ने बयान को 'बांटो और राज करो' की नीति बताया और कहा कि सपा यूपी के विभाजन के मूल रूप से विरोध में है; भाजपा नेताओं ने टिप्पणी से इनकार किया।
समयरेखा
- 2012 विधानसभा चुनाव से पहलेबसपा नेतृत्व वाली यूपी सरकार ने विधानसभा में राज्य को चार हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया, लेकिन केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली।
- 2024 लोकसभा चुनावकांग्रेस के दावे के अनुसार राजभर सामाजिक समूह ने इंडिया गठबंधन का समर्थन किया।
- 21 सितंबर 2026 (सोमवार)ओम प्रकाश राजभर ने अंबेडकरनगर में जाति जनगणना के बाद राज्य के चार हिस्सों में बंटवारे और पूर्वांचल के पहले मुख्यमंत्री राजभर समाज से होने का दावा किया।
- 22 सितंबर 2026रिपोर्ट प्रकाशित; भाजपा ने मुद्दे को तवज्जो नहीं दी, कांग्रेस और सपा ने हमला बोला।
किसका दाँव
- ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा अध्यक्ष, यूपी कैबिनेट मंत्री) — पूर्वांचल की राजनीति में प्रासंगिकता और राजभर समुदाय के बीच अपना राजनीतिक आधार बनाए रखना।
- भारतीय जनता पार्टी — सहयोगी दल के विवादित दावे से दूरी; भाजपा नेताओं ने टिप्पणी करने से इनकार किया और मुद्दे को तवज्जो नहीं दी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — राजभर द्वारा उनके साथ हुई बातचीत का हवाला; कांग्रेस ने उन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
- कांग्रेस (शाहनवाज आलम, राष्ट्रीय सचिव) — दावे को राजभर की हताशा बताकर राजभर समुदाय के सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर झुकाव को रेखांकित करना।
- समाजवादी पार्टी (सुनील सिंह यादव 'सजन', प्रवक्ता) — यूपी के विभाजन का मूल विरोध; एनडीए पर 'बांटो और राज करो' तथा विकास पर चुप्पी का आरोप।
- पूर्वांचल विकास परिषद (देवेश चौबे) — अलग पूर्वांचल राज्य की लंबित मांग को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना।
- राजभर समुदाय व पूर्वांचल के मतदाता — क्षेत्रीय पहचान, प्रतिनिधित्व और विकास के वादों पर सीधा असर।
क्यों अहम है
देश के सबसे बड़े राज्य के पुनर्गठन की मांग एक बार फिर चुनावी विमर्श के केंद्र में आ गई है, और इस बार उसे जाति जनगणना से जोड़ा जा रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के एक मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री के हवाले से किया गया दावा, जिस पर भाजपा ने चुप्पी साधी, गठबंधन की अंतर्विरोधी राजनीति और क्षेत्रीय असंतुलन के सवाल दोनों उठाता है। 2012 का बसपा प्रस्ताव दिखाता है कि राज्य विभाजन अंततः केंद्र की मंजूरी पर निर्भर है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- ओम प्रकाश राजभर — सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री; यूपी में भाजपा के सहयोगी।
- राजभर द्वारा प्रस्तावित चार इकाइयां: पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश।
- 2012 विधानसभा चुनाव से पूर्व बसपा सरकार ने यूपी को चार भागों में बांटने का विधानसभा प्रस्ताव पारित किया; केंद्र की स्वीकृति नहीं मिली।
- पूर्वांचल विकास परिषद — अलग पूर्वांचल राज्य की मांग उठाने वाला संगठन (प्रतिनिधि: देवेश चौबे)।
- कांग्रेस के अनुसार 2024 लोकसभा चुनाव में राजभर सामाजिक समूह ने इंडिया गठबंधन का समर्थन किया।
- बयान की तारीख: 21 सितंबर 2026, अंबेडकरनगर जिला (उत्तर प्रदेश)।
मेन्स दृष्टिकोण
उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग नई नहीं है — 2012 के चुनाव से पहले बसपा सरकार ने विधानसभा में चार राज्यों का प्रस्ताव पारित किया था, जो केंद्र की मंजूरी के अभाव में आगे नहीं बढ़ा; इससे स्पष्ट है कि राज्य पुनर्गठन का निर्णायक अधिकार केंद्र के पास है, राज्य विधानमंडल की भूमिका सलाहकारी अधिक है। ओम प्रकाश राजभर का ताजा दावा दो धाराओं को जोड़ता है: एक, पूर्वी यूपी की भिन्न आर्थिक-सामाजिक स्थिति और प्रशासनिक आकार के कारण छोटे राज्यों के पक्ष में तर्क, जिसे पूर्वांचल विकास परिषद जैसे संगठन उठाते हैं; दो, जाति जनगणना और सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व की राजनीति, जिसमें 'पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से' जैसा वादा जातीय गोलबंदी का औजार बन जाता है। विपक्ष की आलोचना दो स्तरों पर है — कांग्रेस इसे 2024 में राजभर समुदाय के इंडिया गठबंधन की ओर झुकाव के बीच प्रासंगिकता बचाने की कोशिश और प्रधानमंत्री के दोहरे रवैये का प्रमाण बताती है, जबकि सपा इसे 'बांटो और राज करो' तथा विकास के मुद्दों से ध्यान हटाने की रणनीति कहती है। भाजपा की चुप्पी गठबंधन प्रबंधन की मजबूरी दर्शाती है। आगे का रास्ता यह है कि क्षेत्रीय असंतुलन के प्रश्न को चुनावी जातीय वादों से अलग कर, तथ्यात्मक आर्थिक-प्रशासनिक आकलन और व्यापक सार्वजनिक विमर्श के जरिये हल किया जाए, न कि अपुष्ट दावों के जरिये।
मुख्य शब्द
- सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा)
- ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाला दल, जो उत्तर प्रदेश में भाजपा का सहयोगी है।
- पूर्वांचल
- पूर्वी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र, जिसके अलग राज्य की मांग लंबे समय से लंबित है।
- हरित प्रदेश
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए प्रस्तावित अलग राज्य का नाम, जो चार प्रस्तावित इकाइयों में शामिल है।
- जाति जनगणना
- जातियों की गणना; राजभर के दावे के अनुसार इसके पूरा होने के बाद राज्य विभाजन किया जाएगा।
- पूर्वांचल विकास परिषद
- अलग पूर्वांचल राज्य की मांग का समर्थन करने वाला संगठन, जिससे देवेश चौबे जुड़े हैं।
- इंडिया गठबंधन
- विपक्षी गठबंधन, जिसे कांग्रेस के अनुसार 2024 लोकसभा चुनाव में राजभर सामाजिक समूह का समर्थन मिला।
अभ्यास प्रश्न
- उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के पुनर्गठन की मांगों के पीछे कौन-से प्रशासनिक और आर्थिक तर्क हैं? 2012 के बसपा प्रस्ताव के अनुभव के आलोक में परीक्षण करें।
- क्या जाति जनगणना जैसे आंकड़ों को राज्य पुनर्गठन की मांगों से जोड़ना उचित है? तर्क सहित चर्चा करें।
- गठबंधन राजनीति में सहयोगी दलों के विवादित बयान शासन और नीति-विमर्श को कैसे प्रभावित करते हैं? ओम प्रकाश राजभर के दावे के संदर्भ में विश्लेषण करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
