तमिलनाडु में कक्षा 6 से 8 तक मुफ्त नाश्ता योजना का विस्तार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मंगलवार को राज्य की मुफ्त नाश्ता योजना का विस्तार सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों तक कर दिया, जिससे लगभग 15.30 लाख बच्चे जुड़े। उन्होंने तिरुवन्मियूर के गांधीग्रामम स्थित चेन्नई मिडिल स्कूल में पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना की शुरुआत की और बच्चों के साथ नाश्ता किया। विस्तार में 7,537 अतिरिक्त स्कूल शामिल हैं और 217.63 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटित हुए। कुल 44,984 स्कूलों के 34.64 लाख विद्यार्थियों को 724 करोड़ रुपये से नाश्ता मिलेगा।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Free breakfast scheme extended to Classes 6 to 8, adding about 15.30 lakh children. — Figure appears in source, attributed to the state government's expansion announcement.
- Expansion covers 7,537 additional schools with an extra Rs 217.63 crore this financial year. — Attributed in source to the state government.
- About 34.64 lakh students in 44,984 schools now covered at a total allocation of Rs 724 crore. — Figures appear in source, attributed to the state government; internally consistent.
- CM C Joseph Vijay launched the expanded scheme at Chennai Middle School, Gandhigramam, Thiruvanmiyur. — Stated in source as an event on Tuesday; no independent confirmation possible.
- State Planning Commission found 1,319 of 1,543 schools recorded higher attendance after the scheme began. — Attributed to a Tamil Nadu State Planning Commission evaluation cited in the source.
विश्लेषकों की राय राय
मुफ्त नाश्ता योजना को कक्षा 6 से 8 तक बढ़ाकर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय तमिलनाडु की सबसे असरदार कल्याणकारी परंपरा पर अपनी मुहर लगा रहे हैं। यह योजना 2022 में तत्कालीन डीएमके सरकार में एम के स्टालिन ने शुरू की थी — इसे बंद करने या नया नाम देने की जगह विस्तार देना, प्रतिद्वंद्वी के विचार को अपनाकर उसका लाभ अपने खाते में जोड़ने की जानी-पहचानी रणनीति है। योजना का 'पेरुनथलैवर कामराजर' नाम भी कामराज से लेकर एमजीआर, करुणानिधि और जयललिता तक चली आ रही परंपरा में मौजूदा सरकार को खड़ा करता है।
- लगभग 15.30 लाख नए लाभार्थी और कुल 34.64 लाख छात्र — यह एक बहुत बड़ा वर्ग है जिसे कल्याण सीधे घर के स्तर पर छूता है।
- कुल 724 करोड़ रुपये के आवंटन में 217.63 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि बताती है कि कल्याणकारी खर्च बजट की घोषित प्राथमिकता बना हुआ है।
- योजना की शुरुआत डीएमके शासन में हुई थी, इसलिए श्रेय की राजनीतिक खींचतान संभव है, जबकि विस्तार करने वाली सरकार को तत्काल प्रचार-लाभ मिलता है।
- छात्रों के साथ बैठकर नाश्ता करना एक सुपरिचित राजनीतिक संकेत है, जो बजट की एक पंक्ति को व्यक्तिगत जुड़ाव में बदल देता है।
- राज्य योजना आयोग द्वारा दर्ज उपस्थिति में बढ़ोतरी सरकार को यह तर्क देती है कि यह 'मुफ्त रेवड़ी' नहीं, निवेश है।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि श्रेय के सवाल पर विपक्ष की प्रतिक्रिया कैसी रहती है, और कक्षा 9 व उससे ऊपर तक विस्तार की मांग कितना जोर पकड़ती है।
यह खबर यह साबित नहीं करती कि विस्तार वोटों में बदलेगा या दीर्घकालिक पोषण सुधार लाएगा, और इसमें किसी दल की औपचारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तमिलनाडु ने 2022 में कक्षा 1 से 5 के विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री नाश्ता योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य था कि बच्चे भूखे पेट स्कूल न पहुँचें। यह योजना चरणबद्ध रूप से निगम, नगरपालिका, सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तक फैली। अब मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने इसे कक्षा 6 से 8 तक बढ़ा दिया है और इसका नाम पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना है। राज्य में स्कूली भोजन का इतिहास 1922 से चला आ रहा है, जब चेन्नई के कुछ स्कूलों में गरीब बच्चों को भोजन दिया गया था।
मुख्य तथ्य
- मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मंगलवार को मुफ्त नाश्ता योजना का विस्तार सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की कक्षा 6 से 8 तक किया, जिससे लगभग 15.30 लाख बच्चे जुड़े।
- विस्तार में 7,537 अतिरिक्त स्कूल शामिल हैं और चालू वित्त वर्ष में 217.63 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटित किए गए।
- अब कुल 44,984 स्कूलों के कक्षा 1 से 8 के लगभग 34.64 लाख विद्यार्थियों को 724 करोड़ रुपये के आवंटन से नाश्ता मिलेगा।
- योजना का शुभारंभ तिरुवन्मियूर के गांधीग्रामम स्थित चेन्नई मिडिल स्कूल में हुआ, जहाँ विजय बच्चों के साथ नाश्ते में बैठे।
- 7 मई 2022 को एम के स्टालिन ने योजना की घोषणा की; पहले चरण में 1,545 स्कूलों के 1.14 लाख बच्चे 33.56 करोड़ रुपये की लागत से शामिल थे।
- राज्य योजना आयोग के मूल्यांकन में जाँचे गए 1,543 स्कूलों में से 1,319 में उपस्थिति बढ़ी; 1,086 स्कूलों में 20% तक और 22 स्कूलों में 40% से अधिक वृद्धि।
- NFHS-5 (2019-21) के अनुसार तमिलनाडु में 6 से 59 महीने के 57.8% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त थे।
- 1956 में मुख्यमंत्री के कामराज ने गरीब परिवारों के बच्चों को साल में 200 दिन मध्याह्न भोजन देने की व्यवस्था पूरे तमिलनाडु में लागू की।
समयरेखा
- 1922चेन्नई कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष और जस्टिस पार्टी नेता पी त्यागराय चेट्टी ने चुनिंदा चेन्नई स्कूलों में वंचित बच्चों को भोजन देना शुरू किया।
- 1922-1925लगभग 800 विद्यार्थी लाभान्वित हुए; ब्रिटिश प्रशासन के तहत कार्यक्रम बंद कर दिया गया।
- 1927भोजन कार्यक्रम फिर से शुरू किया गया।
- 1956कांग्रेस के मुख्यमंत्री के कामराज ने पूरे तमिलनाडु में साल में 200 दिन मध्याह्न भोजन दिया।
- 1982मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन ने इसे पौष्टिक भोजन कार्यक्रम के रूप में विस्तारित किया, शुरू में 2 से 9 वर्ष के कुपोषित बच्चों पर केंद्रित।
- 1989एम करुणानिधि सरकार ने हर पखवाड़े एक उबला अंडा शुरू किया; बाद में अंडे बढ़ाकर हर कार्यदिवस और अंडा न खाने वालों को 100 ग्राम केला।
- 2013जे जयललिता सरकार ने वैरायटी भोजन शुरू किया, जिसमें वेजिटेबल बिरयानी और टमाटर, नींबू व इमली चावल तथा मसाला अंडा शामिल।
- 7 मई 2022स्टालिन ने सरकार की पहली वर्षगांठ पर कक्षा 1 से 5 के लिए मुख्यमंत्री नाश्ता योजना की घोषणा की।
- सितंबर 2022योजना शुरू हुई, जिसमें उपमा, किचड़ी, पोंगल और कुछ दिन रवा या सेमिया केसरी का घूमता मेन्यू।
- फरवरी 2023योजना निगम और नगरपालिका स्कूलों तक बढ़ाई गई।
किसका दाँव
- कक्षा 6 से 8 के लगभग 15.30 लाख विद्यार्थी — नए सिरे से मुफ्त नाश्ते का लाभ, जिससे भूखे पेट कक्षा में बैठने से बचाव और पढ़ाई में एकाग्रता।
- 44,984 सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल — नाश्ता वितरण की जिम्मेदारी; उपस्थिति और नामांकन पर असर।
- तमिलनाडु सरकार / मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय — 724 करोड़ रुपये का कुल आवंटन और योजना के क्रियान्वयन की राजनीतिक व वित्तीय जिम्मेदारी।
- तमिलनाडु राज्य योजना आयोग — योजना का मूल्यांकन करना; उपस्थिति में बदलाव का प्रमाण प्रस्तुत करना।
- गरीब व दूरदराज से आने वाले परिवार — आर्थिक कठिनाई या लंबी दूरी के कारण बिना खाए स्कूल पहुँचने वाले बच्चों को राहत।
- पूर्व डीएमके सरकार (एम के स्टालिन) — 2022 में योजना शुरू करने का श्रेय; नीति की निरंतरता।
क्यों अहम है
यह विस्तार पोषण, उपस्थिति और अधिगम को एक साथ जोड़ने वाली एक बड़ी राज्य-वित्तपोषित सामाजिक योजना को कक्षा 8 तक ले जाता है, जिसका लाभ 34.64 लाख बच्चों तक पहुँचेगा। NFHS-5 के अनुसार राज्य में 6-59 माह के 57.8% बच्चे एनीमिक थे, इसलिए स्कूल-आधारित पोषण हस्तक्षेप का महत्व अधिक है। राज्य योजना आयोग के शुरुआती आँकड़े दर्शाते हैं कि नाश्ता योजना से स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी, जो अन्य राज्यों के लिए भी नीतिगत संकेत है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना — तमिलनाडु की मुफ्त नाश्ता योजना; अब कक्षा 1 से 8 तक, 44,984 स्कूल, 34.64 लाख विद्यार्थी, 724 करोड़ रुपये।
- मुख्यमंत्री नाश्ता योजना की घोषणा 7 मई 2022 को एम के स्टालिन ने की; सितंबर 2022 में शुरुआत; पहला चरण 1,545 स्कूल, 1.14 लाख बच्चे, 33.56 करोड़ रुपये।
- 1922 में पी त्यागराय चेट्टी (जस्टिस पार्टी, चेन्नई कॉर्पोरेशन अध्यक्ष) ने स्कूल भोजन की शुरुआत की; 1956 में के कामराज ने 200 दिन का मध्याह्न भोजन दिया।
- 1982 में एम जी रामचंद्रन ने पौष्टिक भोजन कार्यक्रम शुरू किया; 1989 में करुणानिधि सरकार ने उबला अंडा जोड़ा; 2013 में जयललिता सरकार ने वैरायटी भोजन शुरू किया।
- NFHS-5 (2019-21): तमिलनाडु में 6-59 माह के 57.8% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त।
- राज्य योजना आयोग मूल्यांकन: 1,543 में से 1,319 स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी; 22 स्कूलों में 40% से अधिक वृद्धि।
मेन्स दृष्टिकोण
तमिलनाडु की मुफ्त नाश्ता योजना का कक्षा 6 से 8 तक विस्तार राज्य के एक सदी पुराने स्कूल-भोजन इतिहास की ताज़ा कड़ी है — 1922 के चेन्नई प्रयोग से 1956 के कामराज मध्याह्न भोजन, 1982 के पौष्टिक भोजन कार्यक्रम और 2022 की नाश्ता योजना तक। इसका मूल तर्क सरकारी अध्ययनों में मिला यह तथ्य है कि कुछ बच्चे लंबी दूरी या घरेलू आर्थिक कठिनाई के कारण बिना खाए स्कूल पहुँचते हैं; NFHS-5 (2019-21) में 6-59 माह के 57.8% बच्चों में एनीमिया और आहार विविधता की कमी से जुड़ी लौह, विटामिन ए व जिंक की कमी इस हस्तक्षेप का पोषण-आधार मजबूत करती है। राज्य योजना आयोग के मूल्यांकन में 1,543 में से 1,319 स्कूलों में उपस्थिति वृद्धि और 1-2 किमी के भीतर के 414 पड़ोसी स्कूलों की तुलना में बेहतर रुझान दर्शाता है कि पोषण, उपस्थिति और अधिगम परस्पर जुड़े हैं। चुनौती वित्तीय स्थिरता (अब 724 करोड़ रुपये, जिसमें 217.63 करोड़ रुपये अतिरिक्त) और 44,984 स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण, विविध मेन्यू की निरंतर आपूर्ति है। आगे का रास्ता — अरियलूर के मिलेट लड्डू और पेरम्बलूर के कुकीज़-चिक्की जैसे स्थानीय प्रयोगों से मिले BMI सुधार को आधार बनाकर नियमित मूल्यांकन, सूक्ष्म पोषक तत्वों पर ध्यान और कवरेज की निगरानी।
मुख्य शब्द
- पेरुंतलैवर कामराजर नाश्ता योजना
- तमिलनाडु की मुफ्त स्कूल नाश्ता योजना, जो अब सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की कक्षा 1 से 8 तक लागू है।
- पौष्टिक भोजन कार्यक्रम (1982)
- एम जी रामचंद्रन द्वारा विस्तारित कार्यक्रम, शुरू में ग्रामीण प्री-स्कूल व प्राथमिक स्कूलों के 2-9 वर्ष के कुपोषित बच्चों के लिए।
- NFHS-5
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण का पाँचवाँ दौर (2019-21), जिसके अनुसार तमिलनाडु में 6-59 माह के 57.8% बच्चे एनीमिक थे।
- तमिलनाडु राज्य योजना आयोग
- राज्य की नियोजन संस्था, जिसने नाश्ता योजना का शुरुआती मूल्यांकन कर उपस्थिति में वृद्धि दर्ज की।
- आहार विविधता
- भोजन में विविध खाद्य समूहों की उपस्थिति; इसकी कमी लौह, विटामिन ए और जिंक जैसी सूक्ष्म पोषक कमियों से जुड़ी पाई गई।
- सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल
- निजी प्रबंधन वाले पर सरकारी अनुदान पाने वाले स्कूल, जो इस योजना के दायरे में शामिल हैं।
अभ्यास प्रश्न
- तमिलनाडु की स्कूल भोजन योजनाओं के विकास (1922 से वर्तमान नाश्ता योजना तक) का परीक्षण करते हुए बताइए कि इन्होंने बच्चों की उपस्थिति और पोषण को कैसे प्रभावित किया है।
- क्या स्कूल-आधारित नाश्ता योजनाएँ बाल एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से निपटने का प्रभावी उपाय हैं? तमिलनाडु के अनुभव और NFHS-5 आँकड़ों के आलोक में चर्चा करें।
- कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार में राजकोषीय स्थिरता और सार्वभौमिक कवरेज के बीच संतुलन की चुनौतियों का तमिलनाडु की नाश्ता योजना के उदाहरण से मूल्यांकन कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
