नोएडा का स्टार्टअप सेना के लिए बना रहा ड्रोन और सैटेलाइट

अमेरिका में 12 साल से अधिक समय बिताकर भारत लौटे प्रोफेसर दंपती आकाश और ज्योति सिन्हा नोएडा के सेक्टर 80 में ओम्निप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज के जरिये भारतीय सेना और वायुसेना के लिए ड्रोन तथा सैटेलाइट बना रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के आईडेक्स अनुदान से और 75 कंपनियों में से चुनी गई यह फर्म अगले साल प्रक्षेपित होने वाला सैटेलाइट, 3डी मैपिंग कॉन्स्टेलेशन और वायुसेना के लिए एआई तकनीक विकसित कर रही है। हवाई अड्डों पर पक्षी टकराव घटाने वाले बर्ड एक्स पर भी काम जारी है।

स्रोत

News18 — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

#defence startup#drones#satellites#idex#noida#3d mapping

डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Omnipresent Robot Technologies, founded by Akash and Jyoti Sinha in Noida, is building drones and satellites for the Indian Army and Air Force with Ministry of Defence IDEX funding. — Attributed to the founders in the source report; figures and scheme name appear in the source.
  • The firm was selected out of 75 bidders for the satellite project and its satellite is likely to launch next year. — Stated in the source, sourced to the company; no ministry confirmation cited.
  • iDEX has seen procurement worth over Rs 2,400 crore approved and projects worth over Rs 1,500 crore sanctioned, with 676 start-ups engaged and 551 contracts signed as of March 2026. — Source attributes these figures to government data; not independently verified here.
  • The company developed mapping and navigation software for the Chandrayaan Pragyan rover and mapped over 10,000 villages in the Saumitra mission. — Direct claim by co-founder Akash Sinha; no third-party corroboration in the source.
  • Defence Secretary Rajesh Kumar Singh said 25% of DRDO's R&D budget is earmarked for industry, start-ups and academia. — Direct quote attributed to the Defence Secretary in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI టెక్నాలజీ విశ్లేషకులు · తెలుగు

ఇది ఒక్క స్టార్టప్ కథ కంటే ఎక్కువ — భారత రక్షణ సాంకేతిక సేకరణ నమూనా మారుతున్నదానికి సూచన. ప్రోటోటైప్ దశలోనే నిధులు, ఒప్పందంలోనే హామీ ఇచ్చిన కనీస ఆర్డర్ పరిమాణం (MOQ) కలిపి ఇవ్వడం వల్ల, భారత్‌లో దశాబ్దాలుగా డీప్-టెక్ హార్డ్‌వేర్ సంస్థలను చంపేసిన "ప్రయోగశాల నుంచి ఆర్డర్ దాకా" లోయ కొంత తగ్గుతోంది. అదే సమయంలో సాంకేతిక వాదనలు — మీటర్ లోపు రిజల్యూషన్ 3డీ మ్యాపింగ్ కూటమి, జీపీఎస్ లేని పరిస్థితుల్లో పనిచేసే డ్రోన్ నావిగేషన్ — ఇంకా ప్రయోగాత్మక దశలోనే ఉన్నాయి; నిర్ధారణ కక్ష్యలో, క్షేత్రంలో మాత్రమే జరుగుతుంది.

  • ఐడెక్స్ తరహా పథకాల అసలు మార్పు నిధులు కాదు — ఒప్పందంలోనే MOQ రాయడం, అది పెట్టుబడిదారులకు డిమాండ్ రిస్క్‌ను తగ్గించి, పెద్ద సంస్థల ఆధిపత్యాన్ని కొంత సమతుల్యం చేస్తుంది.
  • మ్యాపింగ్, స్పేస్ రంగాలను ప్రైవేటుకు తెరవడం వల్ల ఉపగ్రహాలు, డ్రోన్లు, ఏఐ సాఫ్ట్‌వేర్ ఒకే సంస్థ కింద కలిపే 'ఫుల్-స్టాక్' మోడల్ సాధ్యమవుతోంది — ప్రపంచవ్యాప్త డిఫెన్స్-టెక్ ధోరణి ఇదే.
  • జీపీఎస్/జీఎన్‌ఎస్‌ఎస్ నిరోధిత పరిస్థితుల్లో నావిగేషన్ అనేది ఇప్పుడు ప్రపంచంలో అత్యంత డిమాండ్ ఉన్న సామర్థ్యం; ఇది ఒక ఉత్పత్తి కాకుండా ఇతర డ్రోన్ తయారీదారులకు అమ్మే సబ్‌సిస్టమ్ కావడం వ్యాపారపరంగా తెలివైన స్థానం.
  • బర్డ్ ఎక్స్ లాంటి 'చిన్న' పరిష్కారాలు ముఖ్యం — వాటి ద్వారా వినియోగదారుడితో (వైమానిక దళం) నిరంతర ఫీడ్‌బ్యాక్ లూప్ ఏర్పడుతుంది, ఇది రక్షణ సేకరణలో అసలైన పోటీ కందకం.
  • అమెరికా వీసా కఠినత్వం భారత డీప్-టెక్‌కు ప్రతిభను చేరువ చేస్తోందన్న 'రివర్స్ బ్రెయిన్ డ్రెయిన్' వాదన ఆకర్షణీయమే కానీ ఈ కథనంలో అది వ్యక్తిగత అనుభవాల ఆధారంగానే ఉంది, పరిమాణాత్మక ధోరణి కాదు.

किस पर नज़र रखें — వచ్చే ఏడాది ప్రతిపాదిత ఉపగ్రహ ప్రయోగం, ప్రోటోటైప్ తర్వాత MOQ ఆర్డర్లు నిజంగా అమలవుతాయా — ఐడెక్స్ నమూనా పనిచేస్తుందా లేదా అనేది తేలేది అక్కడే.

"ప్రపంచంలోనే అత్యధిక రిజల్యూషన్", "80% పక్షుల ఢీ తగ్గింపు" వంటివి సంస్థ స్వయంగా చెప్పిన లక్ష్యాలు మాత్రమే; స్వతంత్ర ధ్రువీకరణ, ఆదాయం, ఒప్పంద విలువలు, ప్రయోగ తేదీ ఈ కథనంలో నిర్ధారించబడలేదు.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

अमेरिका में 12 साल से अधिक समय बिताने और वहां अमेरिकी सेना के लिए रोबोट व उपकरण बनाने के बाद भारत लौटे प्रोफेसर दंपती आकाश और ज्योति सिन्हा नोएडा के सेक्टर 80 में 'ओम्निप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज' चला रहे हैं। यह स्टार्टअप भारतीय सेना और वायुसेना के लिए ड्रोन, सैटेलाइट, एआई और 3डी मैपिंग तकनीक विकसित कर रहा है। इसे रक्षा मंत्रालय के iDEX ढांचे के तहत शुरुआती अनुदान मिला है, जो 2018 में रक्षा व एयरोस्पेस क्षेत्र में स्टार्टअप, एमएसएमई और शिक्षा जगत की भागीदारी बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। कहानी रक्षा क्षेत्र के निजी क्षेत्र के लिए खुलने और 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' दोनों को दर्शाती है।

मुख्य तथ्य

  • ओम्निप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज नोएडा के सेक्टर 80 में स्थित है और रक्षा मंत्रालय की फंडिंग से एक सैटेलाइट बना रही है, जो संभवतः अगले साल अंतरिक्ष में जाएगा।
  • सैटेलाइट परियोजना के लिए बोली लगाने वाली 75 कंपनियों में से इस फर्म का चयन हुआ और उसे प्रोटोटाइप बनाने के लिए फंडिंग मिली।
  • iDEX (Innovations for Defence Excellence) ढांचा सरकार ने 2018 में शुरू किया था, जिसका उद्देश्य उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, आर एंड डी संस्थान और शिक्षा जगत को जोड़कर आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार स्टार्टअप और एमएसएमई से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद मंजूर हुई और 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की नई तकनीक परियोजनाएं स्वीकृत हुईं।
  • मार्च 2026 तक iDEX के जरिये 676 स्टार्टअप व इनोवेटर जुड़े और 551 अनुबंध हस्ताक्षरित हुए।
  • रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार डीआरडीओ ने अपने आर एंड डी बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत के लिए आरक्षित किया है, तथा विभिन्न संस्थानों में करीब 11 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस हैं।
  • कंपनी ने चंद्रयान के प्रज्ञान रोवर के लिए मैपिंग और नेविगेशन सॉफ्टवेयर विकसित किया था; सौमित्र मिशन में 3डी मैपिंग ड्रोन से 10,000 से अधिक गांवों की मैपिंग की।
  • बर्ड एक्स समाधान का पहला ट्रायल और इंस्टॉलेशन एक महत्वपूर्ण वायुसेना अड्डे पर हुआ; लक्ष्य पक्षी टकराव (बर्ड हिट) में 80% कमी लाना है।

समयरेखा

  1. 2018सरकार ने रक्षा व एयरोस्पेस क्षेत्र में नवाचार के लिए iDEX ढांचा शुरू किया।
  2. अमेरिका में 12 वर्ष से अधिक के बाद (तारीख स्रोत में नहीं)आकाश और ज्योति सिन्हा भारत लौटे और नोएडा के एक निजी विश्वविद्यालय में पढ़ाने लगे; बाद में स्टार्टअप शुरू किया।
  3. चंद्रयान परियोजना के दौरानकंपनी ने प्रज्ञान रोवर के लिए मैपिंग व नेविगेशन सॉफ्टवेयर विकसित किया।
  4. चंद्रयान के बादसौमित्र मिशन में 3डी मैपिंग ड्रोन से भारत के 10,000 से अधिक गांवों की मैपिंग।
  5. पिछले पांच वर्षआकाश सिन्हा के अनुसार अंतरिक्ष व मैपिंग क्षेत्र खुलने तथा iDEX, ADITI, RDI जैसी योजनाओं से बड़ा बदलाव आया।
  6. मार्च 2026 तकiDEX के तहत 676 स्टार्टअप जुड़े, 551 अनुबंध हस्ताक्षरित।
  7. 15 सितंबर 2026रिपोर्ट प्रकाशित; कंपनी का सैटेलाइट संभवतः अगले साल प्रक्षेपित होगा, वायुसेना के एक बड़े एयरबेस पर एआई तकनीक का परीक्षण जारी।

किसका दाँव

  • ओम्निप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज (आकाश व ज्योति सिन्हा) — iDEX/ADITI अनुदान और सुनिश्चित न्यूनतम ऑर्डर मात्रा के भरोसे सैटेलाइट, 3डी मैपिंग कॉन्स्टेलेशन व एआई उत्पाद बनाना।
  • रक्षा मंत्रालय — निजी स्टार्टअप के जरिये सशस्त्र बलों की जरूरत की अत्याधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता हासिल करना।
  • भारतीय वायुसेना — एआई तकनीक का परीक्षण, बर्ड एक्स से पक्षी टकराव में कमी और जीपीएस-वंचित परिस्थितियों में ड्रोन क्षमता।
  • भारतीय सेना — सीमाओं की मैपिंग और उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3डी भू-स्थानिक सूचना तक पहुंच।
  • डीआरडीओ व शिक्षा जगत — आर एंड डी बजट का 25% उद्योग/स्टार्टअप/शिक्षा के लिए आरक्षित; 11 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिये सहयोग।
  • युवा इंजीनियर व आईआईटी/आईआईएसटी स्नातक — आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर, भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संस्थान व अमेरिका से आए इंजीनियरों के लिए रोजगार के अवसर।

क्यों अहम है

रक्षा क्षेत्र निजी भागीदारी के लिए खुलने से एक छोटा स्टार्टअप भी उपग्रह, एआई और मैपिंग जैसी संवेदनशील तकनीक बना रहा है, जिसे पहले सरकारी संस्थानों का ही क्षेत्र माना जाता था। अनुबंध के साथ ही न्यूनतम ऑर्डर मात्रा तय होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और स्टार्टअप बड़े खिलाड़ियों के मुकाबले टिक पाते हैं। साथ ही अमेरिका से लौटते प्रतिभाशाली इंजीनियर 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' के रूप में भारत की गहन-तकनीक क्षमता को मजबूत कर रहे हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • iDEX (Innovations for Defence Excellence): 2018 में शुरू, रक्षा-एयरोस्पेस में स्टार्टअप, एमएसएमई, आर एंड डी संस्थानों व शिक्षा जगत को जोड़ने वाला ढांचा।
  • iDEX आंकड़े: 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद मंजूर, 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत, 676 स्टार्टअप, 551 अनुबंध (मार्च 2026 तक)।
  • डीआरडीओ अपने आर एंड डी बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप व शिक्षा जगत के लिए आरक्षित रखता है; करीब 11 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस।
  • MOQ (न्यूनतम ऑर्डर मात्रा) अब iDEX/ADITI अनुबंध का हिस्सा; उद्योग से 50% फंडिंग की अपेक्षा।
  • चंद्रयान के प्रज्ञान रोवर की मैपिंग-नेविगेशन सॉफ्टवेयर एक निजी नोएडा स्टार्टअप ने बनाया; सौमित्र मिशन में 10,000+ गांवों की 3डी मैपिंग।
  • वर्तमान में दुनिया में सटीक 3डी मैपिंग व जियोलोकलाइजेशन करने वाला लगभग एकमात्र कॉन्स्टेलेशन 'लियो कॉन्स्टेलेशन' है।

मेन्स दृष्टिकोण

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की कोशिशों का एक ठोस उदाहरण नोएडा की ओम्निप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज है, जिसे 75 प्रतिस्पर्धियों में से चुनकर रक्षा मंत्रालय ने उपग्रह प्रोटोटाइप के लिए iDEX अनुदान दिया। इसकी वजहें नीतिगत हैं: 2018 में iDEX की शुरुआत, अंतरिक्ष व मैपिंग क्षेत्रों का उदारीकरण, ADITI और RDI जैसी योजनाएं, डीआरडीओ के आर एंड डी बजट का 25% उद्योग-शिक्षा के लिए आरक्षण, तथा अनुबंध में ही न्यूनतम ऑर्डर मात्रा तय करना — जिससे स्टार्टअप 'डेथ वैली' पार कर निवेश जुटा पाते हैं। इसके निहितार्थ दोहरे हैं: एक ओर सीमा मैपिंग, एक मीटर से कम रिज़ॉल्यूशन वाला 3डी कॉन्स्टेलेशन, जीपीएस-वंचित परिस्थितियों में कामिकाजे ड्रोन और वायुसेना के लिए एआई व बर्ड एक्स जैसी परिचालन क्षमताएं; दूसरी ओर आईआईटी व भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संस्थान के स्नातकों तथा अमेरिका से लौटते मध्यम-स्तरीय पेशेवरों के रूप में प्रतिभा का उलटा प्रवाह। आगे की राह रक्षा सचिव के संकेत में दिखती है — प्रोटोटाइप के बाद सेवाओं के साथ मिलकर विकसित तकनीक पर सीमित अवधि के दोहराव ऑर्डर, फिर खुली बोली — ताकि नवाचार को बाजार की निश्चितता और प्रतिस्पर्धा दोनों मिलें।

मुख्य शब्द

iDEX
रक्षा मंत्रालय का 2018 में शुरू किया गया ढांचा, जो अत्याधुनिक रक्षा तकनीक परियोजनाओं को प्रोटोटाइप तक बीज पूंजी देता है।
ADITI
स्रोत में उल्लिखित सरकारी रक्षा नवाचार फंडिंग योजना, जिसके अनुबंध में भी न्यूनतम ऑर्डर मात्रा शामिल होती है; विस्तृत विवरण स्रोत में नहीं।
MOQ (न्यूनतम ऑर्डर मात्रा)
अनुबंध में ही तय आश्वस्त ऑर्डर, जो प्रोटोटाइप बनने पर मूल अनुदान से कई गुना अधिक होता है।
3डी मैपिंग व जियोलोकलाइजेशन
त्रि-आयामी नक्शा बनाने के साथ उसके सटीक जीपीएस निर्देशांक देना; कंपनी पहाड़ी इलाकों में एक मीटर से कम रिज़ॉल्यूशन का दावा करती है।
बर्ड एक्स
हवाई अड्डों व एयरबेस पर पक्षी टकराव 80% तक घटाने के लक्ष्य वाला कंपनी का समाधान, पहला ट्रायल एक अहम एयरबेस पर।
जीपीएस/जीएनएसएस-डिनाइड कामिकाजे ड्रोन
जीपीएस जाम या स्पूफ होने की स्थिति में भी लक्ष्य तक पहुंचकर पेलोड गिराने या स्वयं नष्ट होने वाले आत्मघाती ड्रोन की तकनीक।

अभ्यास प्रश्न

  1. iDEX जैसे ढांचों ने भारत के रक्षा नवाचार परिवेश को कैसे बदला है? नोएडा के इस स्टार्टअप के उदाहरण से अनुबंध में न्यूनतम ऑर्डर मात्रा तय करने के महत्व की व्याख्या करें।
  2. रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने से आत्मनिर्भरता को क्या लाभ मिले हैं और कौन-सी चुनौतियां बनी हुई हैं? चर्चा करें।
  3. 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' क्या है और भारत की गहन-तकनीक (डीप टेक) क्षमता निर्माण में इसकी भूमिका का मूल्यांकन करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

अगली ख़बरएसस पैड रिव्यू: ओएलईडी डिस्प्ले और ग्लाइडएक्स प्रमुख खूबियां →
← सभी ख़बरें