2,550 किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक कार्बन भुगतान

पंजाब और हरियाणा के 2,550 छोटे किसानों को पुनर्योजी खेती अपनाने के लिए 2.9 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डिजिटल भुगतान के जरिये दी जाएगी, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में डीएआरई सचिव एवं आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम एल जाट ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण की शुरुआत की। पहली किश्त में करीब 30,000 एकड़ और 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट शामिल रहे। प्रत्येक किसान को लगभग 3,000 से 15,000 रुपये मिले।

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Over Rs 2.9 crore will be paid to 2,550 small farmers in Punjab and Haryana via digital payments for regenerative farming. — Attributed to a Ministry of Agriculture statement issued on Wednesday; figures appear in source.
  • First issuance covered about 30,000 acres and more than 50,000 carbon credits, with farmers receiving roughly Rs 3,000-Rs 15,000 each. — Figures appear in source; no independent verification document cited.
  • The 'Aadi' Grow Indigo programme, launched in 2019 with ICAR technical guidance, covers over 2 million acres and 100,000-plus farmers in seven states under the Verra VM0042 methodology. — Programme details as stated in source; methodology named but not otherwise sourced.
  • Enrolled fields during 2019-2022 saved an estimated 45 billion litres of water and kept over two lakh tonnes of residue out of fires, avoiding about 1,000 tonnes of PM2.5 emissions. — Presented in source as programme estimates, not verified data.
  • Dr ML Jat, DARE Secretary and ICAR Director General, initiated the Direct Benefit Transfer at Punjab Agricultural University, Ludhiana. — Named official and venue given in source; direct attribution present.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह पहला ठोस संकेत है कि भारत का कृषि कार्बन बाज़ार नीति के कागज़ से निकलकर किसान के खाते तक पहुँचा है। लेकिन आँकड़ों को उनके वास्तविक पैमाने पर पढ़ना ज़रूरी है — 2,550 किसानों में 2.9 करोड़ रुपये का मतलब औसतन करीब 11,000 रुपये प्रति किसान, यानी यह फसल आय के ऊपर एक अतिरिक्त राशि है, आजीविका नहीं। असली आर्थिक मूल्य भुगतान में कम और बचे पानी, घटी लागत तथा साफ़ हवा जैसे बाहरी लाभों में ज़्यादा है।

  • प्रति किसान 3,000 से 15,000 रुपये एक सीज़न की खेती लागत के सामने छोटी रकम है, पर नई पद्धति अपनाने का जोखिम कुछ हद तक भरपाई कर सकती है।
  • भुगतान का रास्ता महत्वपूर्ण है — ग्रो इंडिगो ने क्रेडिट पूरी तरह बिकने से पहले अपने फंड से पैसा दिया, जिससे कीमत और बिक्री का जोखिम किसान से कंपनी पर चला गया।
  • किसानों को दिया गया विकल्प — निश्चित अग्रिम राशि या बिक्री के बाद शुद्ध कार्बन आय का 75 प्रतिशत — निश्चितता बनाम अधिक लाभ का शास्त्रीय सौदा है, और छोटे किसान आम तौर पर निश्चितता चुनते हैं।
  • कहानी में बताई गई 45 अरब लीटर पानी की बचत, दो लाख टन से अधिक पराली जलने से बचना और लगभग 1,000 टन PM2.5 की कमी किसान के बहीखाते में नहीं दिखती, पर बिजली सब्सिडी और स्वास्थ्य खर्च के रूप में सार्वजनिक बचत बनती है।
  • सात राज्यों में बीस लाख एकड़ और एक लाख से अधिक किसान पहले से जुड़े होने पर असली सवाल यह है कि मापन और सत्यापन की लागत इतनी घटे कि यह मॉडल लाभप्रद ढंग से बढ़ सके।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि 2022 के बाद जुड़े किसानों को अगले मॉनिटरिंग चक्र में कितनी जल्दी और कितनी राशि मिलती है, और वैश्विक कार्बन क्रेडिट कीमतें प्रति एकड़ रिटर्न बढ़ाती हैं या घटाती हैं।

यह खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि क्रेडिट किस कीमत पर बिके, किसानों को अपनी लागत घटाकर शुद्ध लाभ कितना हुआ, या भुगतान रुकने पर किसान इन पद्धतियों को जारी रखेंगे या नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारत में कृषि कार्बन बाजार अब नीति के स्तर से खेत के स्तर तक पहुंच गया है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार पंजाब और हरियाणा के 2,550 छोटे किसानों को पुनर्योजी खेती (रीजेनरेटिव फार्मिंग) अपनाने के बदले सत्यापित कार्बन क्रेडिट से जुड़े 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का डिजिटल भुगतान किया जा रहा है। यह भुगतान 'आदि' नामक ग्रो इंडिगो के किसान कार्बन कार्यक्रम का हिस्सा है, जो 2019 में आईसीएआर के तकनीकी मार्गदर्शन में शुरू हुआ था। किसानों ने 2019 से 2022 के बीच सीधी बुवाई वाला धान (डीएसआर), कम जुताई और फसल अवशेष प्रबंधन जैसी पद्धतियां अपनाईं, जिनसे हुई ग्रीनहाउस गैस कटौती और मृदा कार्बन वृद्धि को मापकर स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया गया।

मुख्य तथ्य

  • पंजाब और हरियाणा के 2,550 छोटे किसानों में 2.9 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डिजिटल भुगतान के जरिये वितरित की जाएगी।
  • पहली किश्त में लगभग 30,000 एकड़ और 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट शामिल रहे; प्रत्येक किसान को करीब 3,000 से 15,000 रुपये मिले।
  • डीएआरई सचिव एवं आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम एल जाट ने लुधियाना के पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) की शुरुआत की।
  • 'आदि' कार्यक्रम सात राज्यों में 20 लाख (दो मिलियन) एकड़ से अधिक और 1,00,000 से अधिक किसानों को कवर करता है।
  • कार्बन क्रेडिट 'Verra VM0042' पद्धति के तहत जारी किए गए हैं।
  • 2019–2022 में नामांकित खेतों से 45 अरब लीटर पानी की बचत और दो लाख टन से अधिक फसल अवशेष को जलाए जाने से बचाने का अनुमान है, जिससे करीब 1,000 टन पीएम2.5 उत्सर्जन टला।
  • ग्रो इंडिगो ने क्रेडिट पूरी तरह बिकने से पहले अपने कोष से डिजिटल भुगतान जारी किया, ताकि किसानों को बिक्री राशि का इंतजार न करना पड़े।
  • किसानों के पास सुनिश्चित अग्रिम भुगतान या क्रेडिट बिकने के बाद शुद्ध कार्बन राजस्व के 75 प्रतिशत में से चुनने का विकल्प था।

समयरेखा

  1. 2019आईसीएआर के तकनीकी मार्गदर्शन में ग्रो इंडिगो का किसान कार्बन कार्यक्रम 'आदि' शुरू किया गया।
  2. 2019–2022किसानों ने डीएसआर, कम जुताई और फसल अवशेष प्रबंधन अपनाया; ग्रीनहाउस गैस कटौती व मृदा कार्बन की माप और स्वतंत्र सत्यापन हुआ।
  3. 17 सितंबर 2026 (प्रकाशन तिथि), बुधवारकृषि मंत्रालय के बयान के अनुसार पीएयू लुधियाना में पहला भुगतान जारी; 2,550 किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक।
  4. आगे2022 के बाद जुड़े किसान अगले निगरानी चक्र का हिस्सा हैं और उनके कार्बन क्रेडिट जारी होने पर भुगतान मिलेगा।

किसका दाँव

  • पंजाब व हरियाणा के 2,550 छोटे किसान — पुनर्योजी पद्धतियों के बदले प्रति किसान लगभग 3,000–15,000 रुपये की अतिरिक्त आय।
  • कृषि मंत्रालय — कृषि कार्बन बाजार को नीति से खेत स्तर तक ले जाने की घोषणा और निगरानी।
  • आईसीएआर एवं डीएआरई — ग्रीनहाउस गैस लेखांकन, फसल-सिमुलेशन मॉडलिंग, मृदा नमूना प्रोटोकॉल, उपकरण सत्यापन, प्रशिक्षण और उपग्रह/रिमोट सेंसिंग में वैज्ञानिक सहयोग।
  • ग्रो इंडिगो — 'आदि' कार्यक्रम का संचालन; क्रेडिट बिकने से पहले अपने कोष से भुगतान जारी करना।
  • पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना — कार्यक्रम स्थल; क्षेत्रीय स्तर पर पुनर्योजी खेती के प्रसार का मंच।
  • पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य — पराली जलाने में कमी, पीएम2.5 उत्सर्जन में गिरावट और जल संरक्षण से लाभ।

क्यों अहम है

यह भारत में पहली बार दर्शाता है कि सत्यापित कृषि कार्बन क्रेडिट छोटे किसानों की जेब तक डिजिटल भुगतान के रूप में पहुंच सकते हैं, जिससे जलवायु-स्मार्ट खेती के लिए ठोस आर्थिक प्रोत्साहन बनता है। डीएसआर से सिंचाई की मांग घटती है और बेहतर अवशेष प्रबंधन से पराली जलाना कम होता है—पंजाब-हरियाणा के भूजल संकट और वायु प्रदूषण की दो सबसे बड़ी चुनौतियों से सीधा जुड़ाव। स्वतंत्र सत्यापन और अंतरराष्ट्रीय पद्धति का उपयोग इस मॉडल की विश्वसनीयता और विस्तार की संभावना तय करेगा।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 2,550 किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक; पहली किश्त—लगभग 30,000 एकड़ और 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट।
  • 'आदि' — ग्रो इंडिगो का किसान कार्बन कार्यक्रम, 2019 में आईसीएआर के तकनीकी मार्गदर्शन से शुरू।
  • कार्बन क्रेडिट 'Verra VM0042' पद्धति के तहत जारी; कार्यक्रम सात राज्यों, 20 लाख एकड़, 1 लाख से अधिक किसानों तक।
  • डॉ. एम एल जाट — सचिव, डीएआरई एवं महानिदेशक, आईसीएआर; डीबीटी की शुरुआत पीएयू लुधियाना में।
  • पद्धतियां: सीधी बुवाई वाला धान (डीएसआर), कम जुताई, फसल अवशेष प्रबंधन (2019–2022)।
  • अनुमानित लाभ: 45 अरब लीटर जल बचत, 2 लाख टन से अधिक अवशेष जलने से बचा, ~1,000 टन पीएम2.5 उत्सर्जन टला।

मेन्स दृष्टिकोण

पंजाब-हरियाणा में धान-गेहूं चक्र से जुड़े भूजल दोहन और पराली जलाने की समस्या के समाधान के लिए अब बाजार-आधारित प्रोत्साहन का प्रयोग हो रहा है: 2,550 छोटे किसानों को सत्यापित कार्बन क्रेडिट के बदले 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का डीबीटी भुगतान। कारण पक्ष में यह है कि केवल नियामकीय प्रतिबंध या सब्सिडी पराली जलाने और अधिक सिंचाई वाली रोपाई को रोकने में सीमित रहे हैं, जबकि डीएसआर, कम जुताई और अवशेष प्रबंधन अपनाने की लागत व जोखिम किसान वहन करता है—कार्बन भुगतान उस अंतर को आय से भरता है। निहितार्थ महत्वपूर्ण हैं: 2019–2022 के नामांकित खेतों में 45 अरब लीटर जल बचत, दो लाख टन से अधिक अवशेष का न जलना और लगभग 1,000 टन पीएम2.5 उत्सर्जन टलना दर्शाता है कि आय और पर्यावरणीय लाभ साथ चल सकते हैं। साथ ही चुनौतियां भी हैं—प्रति किसान 3,000 से 15,000 रुपये की राशि, बहु-वर्षीय माप व स्वतंत्र सत्यापन की लंबी प्रक्रिया, तथा क्रेडिट बिक्री पर निर्भरता (जिसे ग्रो इंडिगो ने अपने कोष से अग्रिम भुगतान देकर पाटा)। आगे का रास्ता: आईसीएआर द्वारा विकसित ग्रीनहाउस गैस लेखांकन, मृदा नमूना प्रोटोकॉल और रिमोट सेंसिंग क्षमताओं का विस्तार, किसानों को अग्रिम बनाम 75 प्रतिशत शुद्ध राजस्व जैसे पारदर्शी विकल्प, और 2022 के बाद जुड़े किसानों के लिए समयबद्ध निगरानी चक्र।

मुख्य शब्द

पुनर्योजी खेती (Regenerative Agriculture)
मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और जलवायु सहनशीलता सुधारने वाली कृषि पद्धतियां, जैसे कम जुताई और फसल अवशेष प्रबंधन।
सीधी बुवाई वाला धान (डीएसआर)
पारंपरिक रोपाई के बजाय बीज सीधे खेत में बोना, जिससे सिंचाई की आवश्यकता घट सकती है।
कार्बन क्रेडिट
मापी और स्वतंत्र रूप से सत्यापित ग्रीनहाउस गैस कटौती/मृदा कार्बन वृद्धि के आधार पर जारी इकाई, जिसे बेचा जा सकता है।
Verra VM0042
वह पद्धति जिसके तहत इस कार्यक्रम में कृषि कार्बन क्रेडिट जारी किए गए।
'आदि' कार्यक्रम
ग्रो इंडिगो का किसान कार्बन कार्यक्रम, 2019 में आईसीएआर के तकनीकी मार्गदर्शन में शुरू; सात राज्यों में 20 लाख एकड़ से अधिक।
डीएआरई / आईसीएआर
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद; डॉ. एम एल जाट क्रमशः सचिव व महानिदेशक।

अभ्यास प्रश्न

  1. कृषि कार्बन बाजार छोटे किसानों की आय बढ़ाने और पराली जलाने पर अंकुश लगाने में कितने कारगर हो सकते हैं? पंजाब-हरियाणा के अनुभव के आधार पर परखें।
  2. सीधी बुवाई वाला धान (डीएसआर) और फसल अवशेष प्रबंधन उत्तर-पश्चिम भारत के जल एवं वायु गुणवत्ता संकट को कैसे संबोधित करते हैं? चर्चा करें।
  3. कार्बन क्रेडिट आधारित प्रोत्साहन योजनाओं में माप, सत्यापन और भुगतान की समयबद्धता से जुड़ी चुनौतियों की समीक्षा कीजिए और सुधार सुझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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