ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बावजूद रूस का ध्यान यूरोप पर: पीआरआईओ
ओस्लो शांति शोध संस्थान (पीआरआईओ) के विश्लेषण के अनुसार, 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मतभेदों के बावजूद संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ, लेकिन उसमें रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख नहीं था। पुतिन तीन दिन दिल्ली में रहे, कई द्विपक्षीय बैठकें कीं और जी7 को कमजोर होता बताया। लेख में यूक्रेनी ड्रोन हमलों से नौ माह से रूसी तेल उत्पादन में गिरावट और 14 प्रतिशत मुख्य ब्याज दर का उल्लेख है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The 18th BRICS summit was held in New Delhi on September 12-13 and produced a joint declaration that does not mention Russia's war against Ukraine. — Stated in the source and attributed to Rossiiskaya Gazeta reporting; declaration content described by the author.
- Putin stayed in New Delhi three days, held many bilateral meetings, and had no face-to-face talk with Xi Jinping at the summit. — Attributed in the source to Izvestiya, September 12.
- Russian oil production has fallen for nine months due to Ukrainian long-range drone strikes on energy infrastructure. — Attributed to Forbes.ua, September 10; figure appears in source.
- Russia's central bank is holding the key interest rate at 14 percent. — Figure appears in source, attributed to The Bell, September 10.
- September 12 explosions at Bulgarian firm EMCO's ammunition facility prompted a sabotage investigation with suspicion of Kremlin involvement. — Attributed to Radio Svoboda; suspicion is described as unproven in the source itself.
विश्लेषकों की राय राय
पुतिन ने नई दिल्ली में तीन दिन बिताए और ब्रिक्स मंच से कहा कि जी7 कमज़ोर पड़ रहा है, लेकिन पीआरआईओ के विश्लेषण से उभरती सामरिक सच्चाई अलग है — मॉस्को का असली ध्यान अब भी यूरोप पर ही है। संयुक्त घोषणापत्र में यूक्रेन युद्ध का ज़िक्र न होना यह संकेत देता है कि ब्रिक्स देश रूस के टकराव में साझेदार बनने के बजाय दूरी बनाए रखना चाहते हैं। ईरान को छोड़कर अधिकांश सदस्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ लाभकारी संबंध बनाए रखना चाहते हैं, इसलिए ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी गुट बनाने की रूसी कोशिश की सीमाएँ साफ़ दिखती हैं।
- घोषणापत्र में युद्ध का उल्लेख न होना मॉस्को के लिए कूटनीतिक जीत लग सकता है, पर यह सहमति के अभाव और सदस्य देशों द्वारा चुनी गई तटस्थता को अधिक दर्शाता है।
- एशिया में ब्रिक्स मंच से यह चेतावनी देना कि यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती रूस से युद्ध मानी जाएगी, बताता है कि यह मंच यूरोप को संदेश भेजने का ज़रिया भी बना।
- यूक्रेनी ड्रोन हमलों के चलते नौ महीने से तेल उत्पादन में गिरावट और 14 प्रतिशत की प्रमुख ब्याज दर, लंबी जंग झेलने की रूसी क्षमता पर आर्थिक दबाव के संकेतक हैं।
- लेख के अनुसार रूस की आशा तेल कीमतों में उछाल पर टिकी है — जो आयात-निर्भर ब्रिक्स देशों की सबसे बड़ी चिंता है, यही समूह के भीतर हितों के टकराव का उदाहरण है।
- बल्गारियाई गोला-बारूद भंडार में विस्फोटों के बाद संभावित साज़िश की जाँच का उल्लेख है; प्रमाणित न होने पर भी यह दिखाता है कि यूरोपीय औद्योगिक ढाँचे की सुरक्षा एक नया मोर्चा बन रही है।
किस पर नज़र रखें — यूक्रेन के रक्षा उद्योग का यूरोपीय पुनःशस्त्रीकरण कार्यक्रमों में एकीकरण, जेट-चालित ड्रोनों के मुकाबले इंटरसेप्टरों का उत्पादन, और यूरोप में संदिग्ध साज़िश की जाँच के नतीजे देखने लायक होंगे।
यह खबर बल्गारिया के विस्फोटों या ऐसी अन्य घटनाओं में रूसी भूमिका प्रमाणित नहीं करती — ये जाँच के दायरे में संदेह भर हैं — और यह एक शोधकर्ता का विश्लेषण है, कोई पुष्ट खुफिया निष्कर्ष नहीं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
ओस्लो शांति शोध संस्थान (पीआरआईओ) के शोध प्रोफेसर पावेल के बायेव के विश्लेषण में कहा गया है कि 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बावजूद रूस का वास्तविक ध्यान यूरोप और यूक्रेन युद्ध पर बना हुआ है। रूसी राज्य मीडिया एससीओ और ब्रिक्स को पश्चिमी प्रभुत्व की जगह लेने वाली बहुध्रुवीय व्यवस्था के प्रतीक के रूप में पेश करता है। भारत ने शिखर सम्मेलन के आयोजन में बड़ा प्रयास किया और सदस्य देशों के मतभेदों के बावजूद संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई उल्लेख नहीं था। लेख के अनुसार 2022 के पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद से रूस का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और अर्थव्यवस्था दोनों कमजोर हुए हैं।
मुख्य तथ्य
- 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हुआ; ईरान और यूएई सहित सदस्य देशों के मतभेदों के बावजूद संयुक्त घोषणापत्र जारी हुआ।
- नई दिल्ली घोषणापत्र में रूस के यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध का कोई उल्लेख नहीं है।
- राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिन नई दिल्ली में रहे और कई द्विपक्षीय बैठकें कीं (इज़वेस्तिया, 12 सितंबर)।
- पुतिन और शी जिनपिंग की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमने-सामने बातचीत नहीं हुई; दोनों 31 अगस्त को एससीओ शिखर सम्मेलन में मिले थे।
- पुतिन ने जी7 को 'घटता हुआ' और 'इतना बड़ा नहीं' बताया, जो स्वयं को 'जंगली जंगल' से घिरा 'फूलों का बगीचा' दिखाने की कोशिश करता है (आरबीसी, 12 सितंबर)।
- यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के कारण पिछले नौ माह से रूस का तेल उत्पादन गिर रहा है (Forbes.ua, 10 सितंबर)।
- रूस का केंद्रीय बैंक मुख्य ब्याज दर 14 प्रतिशत पर बनाए हुए है, फिर भी मुद्रास्फीति पूरी तरह नियंत्रित होने की संभावना नहीं (The Bell, 10 सितंबर)।
- 10 सितंबर को यूक्रेनी बलों ने सोची के निकट काला सागर में रूसी तेल टैंकर 'Armada Leader' पर हमला किया (द मॉस्को टाइम्स, 12 सितंबर)।
समयरेखा
- 2022रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने का आक्रमण किया; इसके बाद से उसका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव काफी घटा।
- 31 अगस्तपुतिन और शी जिनपिंग एससीओ शिखर सम्मेलन में मिले।
- 10 सितंबरयूक्रेनी बलों ने सोची के पास काला सागर में रूसी तेल टैंकर Armada Leader पर हमला किया।
- 12-13 सितंबरनई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; संयुक्त घोषणापत्र जारी, यूक्रेन युद्ध का उल्लेख नहीं।
- 12 सितंबरपुतिन ने ब्रिक्स भाषण में कहा कि यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती रूस के साथ युद्ध होगी।
- 12 सितंबरबुल्गारियाई कंपनी EMCO के गोला-बारूद भंडारण केंद्र में विस्फोट; संभावित तोड़फोड़ की जांच शुरू।
किसका दाँव
- रूस (पुतिन सरकार) — पश्चिम से टकराव के बीच ब्रिक्स को बहुध्रुवीयता का प्रमाण दिखाना, गिरती अर्थव्यवस्था और तेल उत्पादन में गिरावट से जूझना।
- भारत (मेज़बान) — शिखर सम्मेलन के आयोजन में बड़ा निवेश और मतभेदों के बीच संयुक्त घोषणापत्र दिलाना; रूस के यूरोप-केंद्रित जुनून से सतर्क।
- यूक्रेन — रूसी ऊर्जा ढांचे पर ड्रोन हमले, यूरोपीय पुनःशस्त्रीकरण कार्यक्रमों में रक्षा उद्योग का एकीकरण और नए इंटरसेप्टर का उत्पादन।
- यूरोपीय संघ / यूरोपीय देश — रूस से कटे तकनीकी-निवेश संबंध, बढ़ती रूसी तोड़फोड़ की घटनाएं और यूक्रेन को समर्थन जारी रखने का दबाव।
- अन्य ब्रिक्स सदस्य व अतिथि (चीन, कज़ाख़स्तान, वियतनाम आदि) — अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ लाभकारी सहयोग बनाए रखना; तेल कीमतों में उछाल उनके लिए चिंता का विषय।
- ईरान — पश्चिम के साथ टकराव में रूस जैसी स्थिति; शिखर सम्मेलन में मतभेद का प्रमुख बिंदु।
क्यों अहम है
विश्लेषण बताता है कि ब्रिक्स के बहुध्रुवीय मंच की कूटनीतिक चमक के पीछे रूस की प्राथमिकता यूरोप और यूक्रेन युद्ध ही है—व्यापार शुल्क, एआई विनियमन या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार नहीं। भारत जैसे मेज़बान के लिए यह चुनौती है कि वह समूह की सहमति बनाए रखे, जबकि रूस का पश्चिम से टकराव और गिरती अर्थव्यवस्था समूह के एजेंडे पर छाया डालती है। तेल कीमतों में उछाल की रूस की उम्मीद अन्य ब्रिक्स सदस्यों के लिए आर्थिक जोखिम है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 12-13 सितंबर, नई दिल्ली; संयुक्त घोषणापत्र में यूक्रेन युद्ध का उल्लेख नहीं।
- ब्रिक्स मूलतः ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका का ढीला राजनीतिक-आर्थिक समूह; अब 11 सदस्य देश (BRICS Info)।
- रूस के केंद्रीय बैंक की मुख्य ब्याज दर: 14 प्रतिशत।
- यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूसी तेल उत्पादन में नौ माह से गिरावट।
- पुतिन-शी की एससीओ शिखर सम्मेलन में मुलाकात: 31 अगस्त; ब्रिक्स में आमने-सामने बातचीत नहीं।
- टैंकरों पर हमलों का विस्तार: होर्मुज जलडमरूमध्य से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक।
मेन्स दृष्टिकोण
पीआरआईओ विश्लेषण ब्रिक्स की बहुध्रुवीय बयानबाज़ी और उसकी वास्तविक सीमाओं के बीच अंतर उजागर करता है। रूस एससीओ और ब्रिक्स को पश्चिमी प्रभुत्व के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है, लेकिन 2022 के आक्रमण के बाद उसका प्रभाव सिकुड़ा है और आर्थिक संकट गहराया है—बजट घाटा बढ़ने की आशंका, कराधान से घटता प्रतिफल, 14 प्रतिशत ब्याज दर के बावजूद मुद्रास्फीति, तथा ड्रोन हमलों से नौ माह से गिरता तेल उत्पादन और रिफाइनरियों को नुकसान से महंगा पेट्रोल। दूसरी ओर, ईरान को छोड़कर अधिकांश सदस्य और कज़ाख़स्तान-वियतनाम जैसे अतिथि अमेरिका व यूरोपीय संघ के साथ लाभकारी सहयोग चाहते हैं, जिससे समूह की सर्वसम्मति नाज़ुक रहती है—यही कारण है कि घोषणापत्र यूक्रेन युद्ध पर चुप है। पुतिन का यूरोप पर 'जुनून' (यूरोपीय सैनिकों की तैनाती को युद्ध कहना, तोड़फोड़ की बढ़ती घटनाएं, सैक्सोनी-अनहाल्ट चुनाव पर टिप्पणी) दर्शाता है कि उनके लिए यूरोपीय समर्थन में कटौती ब्रिक्स एजेंडे के मुद्दों से अधिक महत्वपूर्ण है। आगे का रास्ता विश्लेषण के अनुसार स्पष्ट संकेत देता है कि भारत जैसे सदस्यों को समूह की साझा प्राथमिकताओं—व्यापार, एआई, यूएनएससी सुधार—को द्विपक्षीय टकरावों से अलग रखते हुए सतर्क संतुलन साधना होगा।
मुख्य शब्द
- पीआरआईओ (PRIO)
- ओस्लो स्थित शांति शोध संस्थान; इस विश्लेषण के लेखक पावेल के बायेव वहां शोध प्रोफेसर हैं।
- ब्रिक्स
- ढीला राजनीतिक-आर्थिक समूह, मूलतः ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका; अब 11 सदस्य देश।
- एससीओ
- शंघाई सहयोग संगठन; रूसी राज्य मीडिया इसे ब्रिक्स के साथ बहुध्रुवीय व्यवस्था का प्रतीक बताता है।
- जी7
- सात देशों का समूह, जिसे पुतिन ने 'घटता हुआ' और 'इतना बड़ा नहीं' कहा।
- शैडो फ्लीट
- प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल ढोने वाले टैंकरों का बेड़ा; इनकी जब्ती पर पुतिन ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी।
- गेरान-5
- रूस के नए जेट-चालित ड्रोन मॉडल, जिनके विरुद्ध यूक्रेन नई पीढ़ी के इंटरसेप्टर विकसित करना चाहता है।
अभ्यास प्रश्न
- ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख न होना समूह की आंतरिक सर्वसम्मति की सीमाओं के बारे में क्या बताता है? परीक्षण कीजिए।
- आर्थिक दबाव (गिरता तेल उत्पादन, 14 प्रतिशत ब्याज दर, बढ़ता बजट घाटा) किस प्रकार रूस की विदेश नीति के विकल्पों को सीमित कर रहे हैं? चर्चा कीजिए।
- बहुध्रुवीय व्यवस्था के मंच के रूप में ब्रिक्स की उपयोगिता का मूल्यांकन कीजिए, जब उसके अधिकांश सदस्य अमेरिका और यूरोपीय संघ से लाभकारी सहयोग चाहते हैं।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
