धीमे ट्रैफिक वाले भारतीय शहरों में हैदराबाद चौथे स्थान पर

टॉमटॉम ग्लोबल ट्रैफिक इंडेक्स की ताज़ा रिपोर्ट में देश के सबसे धीमे ट्रैफिक वाले शहरों में हैदराबाद चौथे स्थान पर है। पहले स्थान पर बेंगलुरु, उसके बाद कोलकाता और पुणे हैं। शहर में भीड़ का स्तर 55.5 प्रतिशत है, 10 किलोमीटर की यात्रा में औसतन 32.7 मिनट और शाम के व्यस्त समय में 39.5 मिनट लगते हैं। औसत गति 23 किमी प्रति घंटा है। लोग सालाना 123 घंटे ट्रैफिक में और क्लाइमेट सेंट्रल के अनुसार 75 घंटे नींद के, कुल 198 घंटे गंवा रहे हैं।

स्रोत

Namasthe Telangana · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Hyderabad ranks fourth among India's slowest-traffic cities, after Bengaluru, Kolkata and Pune — Attributed to TomTom Global Traffic Index report cited in the source.
  • 10 km takes 32.7 minutes on average and 39.5 minutes in evening peak hours; congestion level 55.5% — Figures appear in the source, attributed to the TomTom Traffic Index.
  • Hyderabad residents lose 123 hours a year in traffic and 75 hours of sleep, totalling about 198 hours — Attributed to TomTom (123 hours) and US-based Climate Central (75 hours), which studied 1,330 cities.
  • Average vehicle speed is 23 km/h, falling to 5-10 km/h during rain and peak hours — 23 km/h attributed to the report; the 5-10 km/h drop is attributed to unnamed traffic experts.
  • Vehicle numbers in Hyderabad have crossed 80 lakh — No specific source given in the text for this figure.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

ट्रैफिक इंडेक्स कागज़ पर तकनीकी आंकड़ा है, लेकिन हैदराबाद जैसे शहर में यह शासन की परफ़ॉर्मेंस पर राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड बन जाता है। तेलंगाना में हर राजनीतिक खेमा "विश्वस्तरीय शहर" की ब्रांडिंग पर वोट मांगता है, इसलिए 23 किमी प्रति घंटा की औसत रफ़्तार विपक्ष के लिए आसान हथियार और सत्ता पक्ष के लिए असहज सवाल है। फ्लाईओवर और अंडरपास बनने के बाद भी जाम कम न होना — यह इन्फ़्रास्ट्रक्चर घोषणाओं पर टिके राजनीतिक नैरेटिव को सीधी चुनौती है।

  • आईटी कॉरिडोर के मतदाता — वेतनभोगी, मध्यवर्गीय और मुखर — राजनीतिक रूप से बहुत असर रखते हैं; उनका रोज़ का अनुभव ऐसी रिपोर्ट से मेल खाते ही नाराज़गी तेज़ी से फैलती है।
  • बेंगलुरु का पहले स्थान पर होना सत्ता पक्ष को थोड़ी राहत देता है — "हम उनसे तो बेहतर हैं" वाली तुलना स्वाभाविक बचाव बनेगी।
  • पुराने शहर की तंग सड़कें और अतिक्रमण बनाम हाईटेक सिटी की ड्रेनेज व जंक्शन समस्याएँ — दो अलग तरह की क्षेत्रीय दिक्कतें हैं, इसलिए एक ही राजनीतिक समाधान बेचना मुश्किल है।
  • 80 लाख से अधिक वाहन और सार्वजनिक परिवहन का कम उपयोग — मेट्रो विस्तार और बस सेवाओं के लिए धन आवंटन असली राजनीतिक बहस बन सकता है।
  • अतिक्रमण हटाना और फुटपाथ बहाल करना स्थानीय व्यापारियों-निवासियों को नाराज़ करता है, इसीलिए कोई भी दल इसे अपने नाम लेने में जल्दी नहीं दिखाता।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि विपक्ष इस रिपोर्ट को प्रचार का मुद्दा बनाता है या नहीं, और सरकार ट्रैफिक या सार्वजनिक परिवहन पर नई घोषणाओं से जवाब देती है या नहीं — खासकर स्थानीय निकाय स्तर की राजनीति में।

यह खबर केवल ट्रैफिक और नींद से जुड़े निष्कर्ष बताती है; इसमें किसी दल की प्रतिक्रिया, सरकारी स्पष्टीकरण या वोट पर असर जैसी कोई बात स्थापित नहीं होती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 2 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

वैश्विक स्तर पर ट्रैफिक रुझानों का विश्लेषण करने वाली संस्था टॉमटॉम की ताज़ा 'ग्लोबल ट्रैफिक इंडेक्स' रिपोर्ट में हैदराबाद देश के सबसे धीमे ट्रैफिक वाले शहरों में चौथे स्थान पर आया है। आईटी हब के रूप में तेज़ी से बढ़ते इस शहर में विश्वस्तरीय ढांचे के बावजूद जाम आम बात हो गई है। साथ ही अमेरिका की संस्था क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट बताती है कि रात के बढ़ते तापमान से नींद भी घट रही है। दोनों अध्ययनों को जोड़कर देखें तो हैदराबादवासी साल में करीब 198 घंटे गंवा रहे हैं।

मुख्य तथ्य

  • टॉमटॉम ग्लोबल ट्रैफिक इंडेक्स में भारत के सबसे धीमे ट्रैफिक वाले शहरों में बेंगलुरु पहले, कोलकाता दूसरे, पुणे तीसरे और हैदराबाद चौथे स्थान पर।
  • हैदराबाद में ट्रैफिक भीड़ (कंजेशन) स्तर 55.5 प्रतिशत।
  • 10 किलोमीटर की यात्रा में औसतन 32.7 मिनट; शाम/पीक आवर्स में इतनी ही दूरी के लिए 39.5 मिनट।
  • शहर में वाहनों की औसत गति सिर्फ 23 किमी प्रति घंटा; बारिश और पीक आवर्स में यह 5 से 10 किमी प्रति घंटे तक गिर जाती है।
  • टॉमटॉम के अनुसार हैदराबादवासी सालाना औसतन 123 घंटे ट्रैफिक में गंवाते हैं।
  • क्लाइमेट सेंट्रल के अनुसार हैदराबादवासी सालाना औसतन 75 घंटे नींद गंवा रहे हैं; कुल नुकसान 198 घंटे।
  • क्लाइमेट सेंट्रल ने दुनिया भर के 1330 शहरों का विश्लेषण किया; ऐसे शहरों में लोग साल में 70 से 90 घंटे नींद खो रहे हैं।
  • हैदराबाद में वाहनों की संख्या 80 लाख पार कर चुकी है और हर दिन हज़ारों नए वाहन सड़कों पर आ रहे हैं।

समयरेखा

  1. 21 सितंबर (सिटी ब्यूरो रिपोर्ट)टॉमटॉम और क्लाइमेट सेंट्रल के सर्वे के निष्कर्ष सामने आए, जिनमें हैदराबाद के ट्रैफिक और नींद के नुकसान का ब्योरा।
  2. 22 सितंबर 2026, 02:35 AM ISTरिपोर्ट प्रकाशित — हैदराबाद देश के सबसे धीमे ट्रैफिक वाले शहरों में चौथे स्थान पर।

किसका दाँव

  • हैदराबाद के आम नागरिक/यात्री — सालाना 123 घंटे ट्रैफिक में और 75 घंटे नींद के, कुल 198 घंटे का नुकसान; ईंधन और समय दोनों की बर्बादी।
  • आईटी कॉरिडोर के कर्मचारी (माधापुर, गचीबावली, रायदुर्गम, कोंडापुर) — शाम 6 से रात 8 बजे के बीच भीषण जाम; हल्की बारिश में ड्रेनेज उफनने से घंटों ग्रिडलॉक।
  • पुराने शहर के निवासी और पैदल यात्री (चारमीनार, मदीना मार्केट, बहादुरपुरा) — संकरी सड़कें, अतिक्रमण और फुटपाथ न होने से पैदल चलने वालों को सड़क पर चलना पड़ता है।
  • सार्वजनिक परिवहन एजेंसियां (मेट्रो, आरटीसी बसें) — सेवाएं उपलब्ध होने के बावजूद ज़्यादातर लोग निजी/किराये की कार और बाइक चुन रहे हैं।
  • टॉमटॉम और क्लाइमेट सेंट्रल — क्रमशः ट्रैफिक रुझान और जलवायु-नींद प्रभाव पर आंकड़े देकर नीति-चर्चा का आधार बनाना।

क्यों अहम है

हैदराबाद की पहचान विश्वस्तरीय ढांचे वाले आईटी हब की है, लेकिन 23 किमी/घंटा की औसत गति और 55.5 प्रतिशत कंजेशन बताते हैं कि फ्लाईओवर और अंडरपास बनाने के बाद भी भीड़ घट नहीं रही। समय और ईंधन का नुकसान उत्पादकता, जेब और शहर की प्रतिस्पर्धात्मकता पर सीधा असर डालता है। साथ ही कंक्रीट के जंगल से बढ़ते रात के तापमान और नींद की कमी यह दिखाते हैं कि यातायात और जलवायु संकट जुड़े हुए हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • टॉमटॉम ग्लोबल ट्रैफिक इंडेक्स: वैश्विक ट्रैफिक रुझानों का विश्लेषण करने वाली संस्था की रिपोर्ट।
  • भारत के सबसे धीमे ट्रैफिक वाले शहर क्रम: बेंगलुरु > कोलकाता > पुणे > हैदराबाद।
  • हैदराबाद: कंजेशन 55.5%, औसत गति 23 किमी/घंटा, 10 किमी में 32.7 मिनट (पीक में 39.5 मिनट)।
  • क्लाइमेट सेंट्रल (अमेरिका) ने 1330 शहरों का विश्लेषण किया; हैदराबाद में सालाना 75 घंटे नींद का नुकसान।
  • हैदराबाद में वाहन संख्या 80 लाख से अधिक।
  • अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव: दिन में कंक्रीट व सड़कें गर्मी सोखकर रात में छोड़ती हैं, रात का तापमान बढ़ता है।

मेन्स दृष्टिकोण

हैदराबाद का मामला दिखाता है कि भारतीय महानगरों में गतिशीलता का संकट केवल सड़क-निर्माण की कमी का नहीं, बल्कि वाहन-वृद्धि, भूमि-उपयोग और सड़क-प्रबंधन के असंतुलन का परिणाम है। स्रोत के अनुसार शहर में 80 लाख से अधिक वाहन हैं, हर दिन हज़ारों नए जुड़ रहे हैं, मेट्रो और आरटीसी बसों के बावजूद बहुसंख्यक लोग निजी कार-बाइक पर निर्भर हैं और अकेले कार चलाने वालों से सड़कें जल्दी भर जाती हैं; फुटपाथों पर अतिक्रमण तथा सड़क पर पार्किंग से प्रभावी चौड़ाई घटती है। आईटी कॉरिडोर में चौड़ी सड़कें होने पर भी जंक्शन (कोंडापुर सिटी मॉल, माइंडस्पेस, आईआईआईटी) जाम होते हैं और हल्की बारिश में ड्रेनेज उफनने से ग्रिडलॉक बनता है, जबकि पुराने शहर में संकरी सड़कें और फुटपाथ की अनुपलब्धता समस्या की जड़ है — यानी एक ही शहर के भीतर दो भिन्न समस्याएं, दो भिन्न समाधान मांगती हैं। जलवायु आयाम भी जुड़ा है: कंक्रीटीकरण से रात का तापमान बढ़ने पर नींद घट रही है। आगे का रास्ता आंकड़ा-आधारित जंक्शन सुधार, सार्वजनिक परिवहन की ओर बदलाव, पैदल-यात्री ढांचा, अतिक्रमण व पार्किंग नियंत्रण और जल-निकासी सुधार जैसे एकीकृत उपायों में निहित दिखता है।

मुख्य शब्द

टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स
दुनिया भर के शहरों में यातायात की गति, यात्रा समय और भीड़ के स्तर का विश्लेषण करने वाली रिपोर्ट।
कंजेशन स्तर (भीड़ स्तर)
सामान्य प्रवाह की तुलना में यात्रा में लगने वाला अतिरिक्त समय; हैदराबाद में यह 55.5 प्रतिशत है।
पीक आवर्स
शाम व दफ्तर छूटने का व्यस्ततम समय, जब हैदराबाद में गति 5-10 किमी/घंटा तक गिर जाती है।
क्लाइमेट सेंट्रल
अमेरिका की संस्था, जिसने 1330 शहरों का अध्ययन कर रात के बढ़ते तापमान से नींद के नुकसान का आकलन किया।
ग्रिडलॉक
ऐसा पूर्ण जाम जिसमें वाहन घंटों तक हिल नहीं पाते; आईटी कॉरिडोर में बारिश के बाद आम।
कंक्रीट जंगल
अत्यधिक निर्मित शहरी क्षेत्र, जहां कंक्रीट व सड़कें दिन में गर्मी सोखकर रात में छोड़ती हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. टॉमटॉम और क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्टों के आंकड़ों के आधार पर समझाइए कि हैदराबाद में यातायात संकट और जलवायु परिवर्तन एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं।
  2. फ्लाईओवर और अंडरपास बनने के बाद भी भारतीय महानगरों में भीड़ कम क्यों नहीं होती? हैदराबाद के उदाहरण से मूल्यांकन कीजिए।
  3. एक ही शहर के भीतर पुराने शहर और आईटी कॉरिडोर की यातायात समस्याएं भिन्न हैं — इनके लिए अलग-अलग नीतिगत उपाय क्या हो सकते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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