जल जीवन मिशन में अनियमितताएं: जम्मू-कश्मीर सदन समिति की रिपोर्ट
जम्मू-कश्मीर में 1,100 करोड़ रुपये की जल जीवन मिशन परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सदन समिति ने सोमवार (21 सितंबर, 2026) को सदन में अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति के अध्यक्ष, नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही, घटिया सिविल कार्य तथा वितरण पाइप बिछाने और ठेके देने में अनियमितताएं पाई गईं। 18 सूत्री सिफारिश में समिति ने मामला जांच एजेंसी को सौंपने को कहा।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- J&K House Committee tabled its report on alleged irregularities in ₹1,100-crore Jal Jeevan Mission projects on Monday, September 21, 2026. — Date and figure appear in source; attributed to the tabled committee report.
- Report cites gross negligence, below-standard civil works and irregularities in pipe network laying and contract awards. — Directly quoted from the committee report in the source.
- An official order allowed Executive Engineers of Jammu Division to use HDPE pipes instead of GI pipes depending on site feasibility. — Stated in the source as a committee finding; the order itself is not independently documented in the text.
- Contracts were awarded to contractors from outside J&K for Poonch, Rajouri, Reasi and Udhampur districts without verifying capacity. — Attributed to the committee report; contractors' side not represented.
- JJM was launched on August 15, 2019 to supply 55 litres per capita per day to every rural household by March 2024. — Background figure and date appear in source; standard scheme description.
विश्लेषकों की राय राय
जल जीवन मिशन केंद्र की प्रमुख योजना है, इसलिए जम्मू-कश्मीर सदन समिति की रिपोर्ट सिर्फ प्रशासनिक खामियों की सूची नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हथियार भी है। एनसी विधायक और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी की अध्यक्षता में आई यह रिपोर्ट निर्वाचित विधायिका को "प्रशासनिक तंत्र" से कड़े सवाल पूछने का मौका देती है। लेकिन खबर यह भी बताती है कि 2025 में दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर विधायकों ने जांच की मांग की थी — इसलिए इसे एकतरफा राजनीतिक हमला कहना आसान नहीं।
- समिति के अध्यक्ष सत्तारूढ़ एनसी के विधायक हैं, इसलिए रिपोर्ट की राजनीतिक विश्वसनीयता मसूदी की न्यायाधीश वाली पृष्ठभूमि पर काफी निर्भर करेगी।
- मामला जांच एजेंसी को सौंपने की 18-सूत्री सिफारिश ही असली कसौटी है — यूटी सरकार इस पर अमल करती है या नहीं, वहीं सत्ता का असली खेल दिखेगा।
- योजना प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई फ्लैगशिप पहल होने के कारण, अमल में विफलता की बहस केंद्र-राज्य अधिकार विवाद में बदल सकती है।
- पुंछ, राजौरी, रियासी और उधमपुर का नाम आने से पीने के पानी का न पहुँचना स्थानीय, ज़मीनी नाराज़गी का मुद्दा बन जाता है।
- 2025 में सर्वदलीय जांच की मांग का इतिहास बताता है कि किसी भी पक्ष के लिए निष्कर्षों को सिरे से खारिज करना आसान नहीं होगा।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि यूटी सरकार वाकई मामला जांच एजेंसी को सौंपती है या नहीं, और कार्रवाई कहाँ तक पहुँचती है — इंजीनियरों और ठेकेदारों तक, या वरिष्ठ निर्णयकर्ताओं तक।
यह खबर केवल समिति के निष्कर्ष और सिफारिशें बताती है; किसी व्यक्ति या नेता का दोष इससे सिद्ध नहीं होता, न ही सरकार की प्रतिक्रिया या जांच का कोई नतीजा इसमें दर्ज है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
जल जीवन मिशन (JJM) केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है, जिसे 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू किया था, और इसका लक्ष्य मार्च 2024 तक हर ग्रामीण घर को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर पेयजल उपलब्ध कराना था। जम्मू-कश्मीर में 2025 में सभी दलों के विधायकों ने मिशन के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए और सदन समिति से गहन जांच की मांग की। इसके बाद गठित सदन समिति ने केंद्रशासित प्रदेश में 1,100 करोड़ रुपये की JJM परियोजनाओं की जांच की। समिति ने 21 सितंबर 2026 को अपनी रिपोर्ट सदन में पेश की, जिसमें प्रशासनिक लापरवाही, घटिया निर्माण और ठेकों में गड़बड़ी को उजागर किया गया।
मुख्य तथ्य
- जम्मू-कश्मीर सदन समिति ने 1,100 करोड़ रुपये की जल जीवन मिशन परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं पर रिपोर्ट सोमवार, 21 सितंबर 2026 को सदन में पेश की।
- समिति के अध्यक्ष नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी हैं।
- रिपोर्ट में 'प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही, मानक से नीचे के सिविल कार्य, वितरण पाइप नेटवर्क बिछाने तथा ठेके देने में अनियमितताएं' दर्ज हैं।
- 18 सूत्री सिफारिश में समिति ने केंद्रशासित प्रदेश सरकार से मामला जांच एजेंसी को सौंपने और कानून के तहत कार्रवाई करने को कहा।
- मिशन के क्रियान्वयन के बीच एक आधिकारिक आदेश से जम्मू संभाग के सभी कार्यपालक अभियंताओं को GI पाइप के स्थान पर HDPE पाइप 'साइट पर व्यवहार्यता के अनुसार' उपयोग करने की अनुमति दी गई।
- रिपोर्ट के अनुसार GI से HDPE पाइप में बदलाव उचित नहीं ठहराया जा सकता; खरीदे, उपयोग किए और अप्रयुक्त पाइपों का कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड समिति के सामने नहीं रखा गया।
- लगभग सभी स्थल दौरों में पाया गया कि वितरण नेटवर्क के GI और HDPE पाइप जमीन में गाड़े नहीं गए, बल्कि जमीन के ऊपर बिछाए गए, जो अनुबंध शर्तों के विरुद्ध है।
- पुंछ, राजौरी, रियासी और उधमपुर जिलों में जम्मू-कश्मीर के बाहर के ठेकेदारों को क्षमता की जांच के बिना ठेके दिए गए; ठेकेदारों ने साइट का दौरा नहीं किया और काम एजेंटों या JJM/जल शक्ति विभाग के अधीनस्थ कर्मचारियों ने किया।
समयरेखा
- 15 अगस्त 2019प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल जीवन मिशन शुरू किया, लक्ष्य—मार्च 2024 तक हर ग्रामीण घर को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल।
- मार्च 2024मिशन के तहत हर ग्रामीण घर तक नियमित पेयजल आपूर्ति का निर्धारित लक्ष्य समय।
- 2025सभी दलों के विधायकों ने JJM क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया और सदन समिति से गहन जांच की मांग की।
- 21 सितंबर 2026 (सोमवार)सदन समिति ने 1,100 करोड़ रुपये की JJM परियोजनाओं पर अपनी रिपोर्ट और 18 सूत्री सिफारिशें सदन में पेश कीं।
किसका दाँव
- जम्मू-कश्मीर सदन समिति (अध्यक्ष: हसनैन मसूदी) — 1,100 करोड़ रुपये की JJM परियोजनाओं की जांच कर तथ्य सामने रखना और जवाबदेही तय करने की सिफारिश करना।
- केंद्रशासित प्रदेश सरकार — 18 सूत्री सिफारिशों पर अमल, मामला जांच एजेंसी को सौंपना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना।
- JJM/जल शक्ति विभाग के अभियंता व अधिकारी — पर्यवेक्षण में चूक, अनावश्यक खर्च और ठेके देने में अनियमितताओं के आरोपों का सामना।
- ग्रामीण लाभार्थी परिवार — स्रोत पुष्टि के बिना कार्यों के कारण अपेक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हुआ; कार्यात्मक नल कनेक्शन के दावे झूठे पाए गए।
- बाहरी राज्यों के ठेकेदार — क्षमता सत्यापन के बिना ठेके पाना, साइट पर न जाना और एजेंटों से काम कराना—कार्रवाई का जोखिम।
- राज्य कोष (exchequer) — स्रोत पुष्टि के बिना बड़े व्यय के कारण भारी नुकसान।
क्यों अहम है
जल जीवन मिशन आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़ा है—स्थिति, लिंग, धर्म या क्षेत्रीय पहचान से स्वतंत्र—और समिति के अनुसार कुछ क्षेत्रों में प्रगति के बावजूद मिशन का समग्र उद्देश्य अधूरा रह गया। रिपोर्ट बताती है कि घटिया सिविल कार्य, स्रोत पुष्टि के बिना खर्च और झूठे FHTC दावों से लाभार्थियों को पानी नहीं मिला और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। यह विधायी निगरानी (सदन समिति) की भूमिका और केंद्र-प्रायोजित योजनाओं में जवाबदेही के सवाल को रेखांकित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- जल जीवन मिशन: 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू; लक्ष्य—मार्च 2024 तक हर ग्रामीण घर को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल।
- FHTC = Functional Household Tap Connection (कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन), JJM की प्रगति मापने की इकाई।
- जम्मू-कश्मीर सदन समिति के अध्यक्ष: नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायक और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी।
- जांच का दायरा: जम्मू-कश्मीर (केंद्रशासित प्रदेश) में 1,100 करोड़ रुपये की JJM परियोजनाएं।
- समिति की 18 सूत्री सिफारिश—मामला जांच एजेंसी को सौंपने और कानून के तहत कार्रवाई की मांग।
- अनियमितता वाले जिले जिनका उल्लेख: पुंछ, राजौरी, रियासी और उधमपुर; GI पाइप की जगह HDPE पाइप के आदेश पर सवाल।
मेन्स दृष्टिकोण
जम्मू-कश्मीर सदन समिति की रिपोर्ट केंद्र-प्रायोजित प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन में संस्थागत कमजोरियों का ठोस उदाहरण है: 1,100 करोड़ रुपये की जल जीवन मिशन परियोजनाओं में प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही, निर्धारित इंजीनियरिंग मानकों के विपरीत सिविल कार्य, स्रोत पुष्टि के बिना भारी व्यय, स्वीकृत स्थल से जलापूर्ति स्थल बदलना (जिससे ठेकेदार को सामग्री ढुलाई व हेड लोड की लागत बचाकर लाभ हुआ), अनुबंध शर्तों के विरुद्ध पाइप जमीन के ऊपर बिछाना, और बाहरी ठेकेदारों को क्षमता सत्यापन के बिना ठेके देना—जिन्होंने काम एजेंटों या विभागीय अधीनस्थ कर्मचारियों से कराया। सबसे गंभीर निष्कर्ष यह है कि रिकॉर्ड में दिए गए FHTC और आवरित बस्तियों के दावे झूठे पाए गए, यानी आउटपुट रिपोर्टिंग ही अविश्वसनीय रही, जिससे 'हर घर जल' जैसे लक्ष्य की उपलब्धि का मापन संदिग्ध हो जाता है। कारणों में पर्यवेक्षी निगरानी के अंतराल, निर्णय-प्रक्रिया व प्रशासनिक नियंत्रण की कमजोरी तथा बीच रास्ते में GI से HDPE पाइप में बदलाव जैसे बिना रिकॉर्ड वाले तकनीकी निर्णय शामिल हैं। आगे का रास्ता समिति की 18 सूत्री सिफारिशों के अनुरूप है—मामला जांच एजेंसी को सौंपना, कानून के तहत कार्रवाई, सामग्री खरीद-उपयोग का विश्वसनीय रिकॉर्ड, स्रोत पुष्टि, स्थल सत्यापन और ठेकेदारों की क्षमता जांच—साथ ही विधायी निगरानी को नियमित जवाबदेही तंत्र के रूप में मजबूत करना।
मुख्य शब्द
- जल जीवन मिशन (JJM)
- 15 अगस्त 2019 को शुरू प्रमुख कार्यक्रम, जिसका लक्ष्य मार्च 2024 तक हर ग्रामीण घर को 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल देना था।
- FHTC
- Functional Household Tap Connection—कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन; रिपोर्ट के अनुसार इनकी संख्या के दावे झूठे पाए गए।
- सदन समिति (House Committee)
- विधायिका द्वारा गठित समिति, जिसने JJM अनियमितताओं की जांच कर रिपोर्ट और 18 सूत्री सिफारिशें सदन में रखीं।
- GI पाइप बनाम HDPE पाइप
- गैल्वनाइज्ड आयरन पाइप की जगह हाई-डेंसिटी पॉलीएथिलीन पाइप के उपयोग की अनुमति, जिसे समिति ने अनुचित और बिना रिकॉर्ड बताया।
- स्रोत पुष्टि (source confirmation)
- जल स्रोत की उपलब्धता की पुष्टि; इसके बिना सिविल कार्यों पर खर्च से पानी नहीं मिला और कोष को नुकसान हुआ।
- जल शक्ति विभाग
- जम्मू-कश्मीर में JJM क्रियान्वयन से जुड़ा विभाग, जिसके अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा ठेकों का काम कराया जाना रिपोर्ट में दर्ज है।
अभ्यास प्रश्न
- जम्मू-कश्मीर सदन समिति की जल जीवन मिशन रिपोर्ट के निष्कर्षों के आलोक में केंद्र-प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में पर्यवेक्षी निगरानी की कमियों का परीक्षण कीजिए।
- विधायी समितियां कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में कितनी प्रभावी हैं? जम्मू-कश्मीर की सदन समिति की 18 सूत्री सिफारिशों के उदाहरण से चर्चा कीजिए।
- 'हर घर जल' जैसे लक्ष्यों की रिपोर्टिंग में झूठे FHTC दावों का क्या प्रभाव पड़ता है? योजना निगरानी व सत्यापन तंत्र सुधारने के उपाय सुझाइए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
