राष्ट्रीय मानस राष्ट्रीय उद्यान

मानस में गैंडा संरक्षण के लिए भारत-भूटान साझेदारी की मांग

असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में विश्व गैंडा दिवस पर अधिकारियों ने एक सींग वाले गैंडे की वापसी और लगातार तीन वर्षों तक शिकार न होने का उल्लेख किया। 2006 में शुरू हुए पुनर्वास कार्यक्रम से संख्या लगभग 50 हो गई, 2022 की गणना में 48 अनुमानित थी। संरक्षण वैज्ञानिक देब कुमार दत्ता ने कहा कि गैंडे बार-बार भूटान चले जाते हैं, इसलिए संयुक्त तंत्र जरूरी है। 2006-2021 के बीच 22 गैंडे काजीरंगा और पोबितोरा से मानस लाए गए।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Manas had an estimated 48 rhinos as per the 2022 census, with numbers now close to 50. — Attributed to conservation scientist Deba Kumar Dutta citing the 2022 census; figure appears in source, which also notes some deaths and births since.
  • Manas rhinos frequently cross into Bhutan, prompting calls for a joint India-Bhutan conservation mechanism. — Attributed to Dutta speaking to The Hindu; Assam forest officials said to agree.
  • Manas recorded three successive years of zero poaching. — Stated in source in connection with park authorities' World Rhino Day observance; no separate data source cited.
  • 22 rhinos were translocated to Manas from Kaziranga and Pobitora between 2006 and 2021, plus 20 orphaned rhinos released. — Figures appear in source, credited to an initiative under Indian Rhino Vision 2020; no document cited.
  • Manas's historic population of about 100 rhinos was wiped out between the late 1980s and early 2000s by unrest and poaching. — Stated in source without specific attribution.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

मानस में गैंडों की वापसी केवल संरक्षण की सफलता नहीं है — यह बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र में शांति और कामकाजी शासन की बहाली का एक संभावित राजनीतिक प्रतीक भी है। जहाँ 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक के आरंभ तक उग्रवाद-जनित अशांति और शिकार ने गैंडों को खत्म कर दिया था, वहाँ लगातार तीन साल शून्य शिकार स्थानीय संस्थाओं, विशेष रूप से बीटीसी के वन विभाग, के लिए दिखाने योग्य रिकॉर्ड है। भूटान को संरक्षण भागीदार बनाने की मांग इस मुद्दे को राज्य स्तर से उठाकर केंद्र के कूटनीतिक दायरे में ले जाती है — यानी श्रेय और नियंत्रण दोनों साझा करने होंगे।

  • उग्रवाद से उजड़े इलाके में संरक्षण की वापसी बोडोलैंड में सामान्य हालात लौटने का राजनीतिक रूप से उपयोगी कथानक देती है।
  • अधिकारियों द्वारा इसे "समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण" की सफलता बताना सीमावर्ती गाँवों को हिस्सेदारी देने के तर्क को मजबूत करता है, जिस पर स्थानीय समर्थन टिका है।
  • स्थानीय हितधारकों का यह मानना कि गैंडे बाघों से अधिक पर्यटक खींचते हैं, संरक्षण के साथ आर्थिक प्रोत्साहन भी जोड़ता है।
  • गैंडों का भूटान की ओर जाना अधिकार-क्षेत्र का सवाल खड़ा करता है — बीटीसी, असम सरकार, केंद्र और भूटान के बीच जिम्मेदारी का बँटवारा अभी तय नहीं है।
  • फिलहाल संयुक्त तंत्र एक वैज्ञानिक और वन अधिकारियों का सुझाव है, किसी सरकार की घोषित नीति नहीं।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि यह अधिकारियों का सुझाव भर रहता है या असम और केंद्र इसे भूटान के साथ औपचारिक सीमापार संरक्षण प्रस्ताव के रूप में आगे बढ़ाते हैं।

यह खबर भूटान की ओर से किसी प्रतिक्रिया या दोनों सरकारों के बीच संयुक्त तंत्र पर बातचीत की पुष्टि नहीं करती; गैंडों का एकमात्र ठोस आंकड़ा 2022 का अनुमान है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पश्चिमी असम का मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक के आरंभ तक उग्रवाद-जनित अशांति और शिकार के कारण अपनी लगभग 100 गैंडों की आबादी खो चुका था। 2006 में शुरू हुए पुनःस्थापन (रीइंट्रोडक्शन) कार्यक्रम से आज यहाँ लगभग 50 एक सींग वाले गैंडे हैं। विश्व गैंडा दिवस (22 सितंबर 2026) पर अधिकारियों ने इस "वापसी" और लगातार तीन वर्षों तक शून्य शिकार का उत्सव मनाया। लेकिन कुछ गैंडे बार-बार सीमा पार भूटान चले जाते हैं, जिससे भारत-भूटान संयुक्त संरक्षण तंत्र की मांग उठी है।

मुख्य तथ्य

  • 20 साल पहले मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य में एक भी एक सींग वाला गैंडा नहीं था; 2006 में शुरू पुनःस्थापन कार्यक्रम से संख्या आज लगभग 50 हो गई।
  • 2022 की गणना के अनुसार मानस में अनुमानित 48 गैंडे; इन चार वर्षों में कुछ की मृत्यु हुई और कुछ का जन्म हुआ।
  • मानस में लगातार तीन वर्षों तक शून्य शिकार (zero poaching) दर्ज।
  • इंडियन राइनो विजन 2020 के तहत 2006 से 2021 के बीच काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और पोबितोरा वन्यजीव अभयारण्य से 22 गैंडे मानस लाए गए।
  • इसी अवधि में काजीरंगा के निकट सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर से छोड़े गए 20 अनाथ गैंडे भी स्थानांतरण में शामिल थे।
  • मानस बाघ अभयारण्य 2,837 वर्ग किमी का है, जिसके कोर में 500 वर्ग किमी का मानस राष्ट्रीय उद्यान है; यह भूटान के 1,057 वर्ग किमी रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान से सटा है।
  • बाघ अभयारण्य बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) द्वारा प्रशासित बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र में स्थित है।
  • 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक के आरंभ तक उग्रवाद-जनित अशांति और हथियारों के बदले सींग के व्यापार हेतु शिकार से मानस की लगभग 100 गैंडों की ऐतिहासिक आबादी समाप्त हो गई।

समयरेखा

  1. 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक का आरंभउग्रवाद-जनित अशांति और हथियारों के बदले सींग के व्यापार हेतु शिकार से मानस की लगभग 100 गैंडों की आबादी समाप्त।
  2. 2006मानस में गैंडा पुनःस्थापन कार्यक्रम की शुरुआत।
  3. 2006 से 2021इंडियन राइनो विजन 2020 के तहत काजीरंगा और पोबितोरा से 22 गैंडे मानस स्थानांतरित; साथ ही 20 अनाथ गैंडे छोड़े गए।
  4. 2022गणना में मानस में अनुमानित 48 गैंडे।
  5. 22 सितंबर 2026 (मंगलवार)विश्व गैंडा दिवस पर मानस के भुयानपारा रेंज में समारोह; गैंडों की 'वापसी' और तीन वर्षों के शून्य शिकार का उत्सव।

किसका दाँव

  • मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य प्रशासन — बढ़ती गैंडा आबादी का प्रबंधन, शून्य शिकार बनाए रखना और सीमा पार जाने वाले गैंडों की निगरानी।
  • भूटान (रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान) — सीमा पार आने वाले गैंडों की सुरक्षा; संयुक्त संरक्षण तंत्र में संभावित भागीदार।
  • बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) — बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र में स्थित बाघ अभयारण्य का वन प्रशासन एवं संरक्षण नेतृत्व।
  • अभयारण्य के किनारे रहने वाले स्थानीय समुदाय — समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण का श्रेय; गैंडों से बढ़ते पर्यटन में आर्थिक हित।
  • संरक्षण वैज्ञानिक देब कुमार दत्ता — स्थानांतरण कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञ; भारत-भूटान संयुक्त तंत्र की वकालत।
  • सोनाली घोष, अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक एवं BTC के वन विभाग प्रमुख — मानस की 'गैंडा वापसी' को समुदाय-नेतृत्व वाले संरक्षण की सफलता के रूप में प्रस्तुत करना।

क्यों अहम है

मानस की गैंडा वापसी दिखाती है कि संघर्ष से तबाह हुए परिदृश्य में भी स्थानांतरण और समुदाय-नेतृत्व वाला संरक्षण एक प्रजाति को लौटा सकता है। लेकिन गैंडों का भूटान आना-जाना बताता है कि वन्यजीव राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानते, इसलिए सुरक्षा और निगरानी के लिए द्विपक्षीय तथा जन-से-जन स्तर के सहयोग की जरूरत है। यह भारत-भूटान संबंधों को सीमापारीय पारिस्थितिक कूटनीति तक विस्तार देने का अवसर है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एक सींग वाला गैंडा = भारतीय गैंडा (ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो); असम में काजीरंगा, पोबितोरा, मानस प्रमुख स्थल।
  • मानस बाघ अभयारण्य: 2,837 वर्ग किमी; कोर मानस राष्ट्रीय उद्यान 500 वर्ग किमी; बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र में।
  • भूटान का रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान: 1,057 वर्ग किमी, मानस से सटा हुआ।
  • इंडियन राइनो विजन 2020 के तहत 2006-2021 में 22 गैंडे काजीरंगा व पोबितोरा से मानस स्थानांतरित।
  • 2022 गणना: मानस में अनुमानित 48 गैंडे; आज लगभग 50; लगातार तीन वर्ष शून्य शिकार।
  • विश्व गैंडा दिवस: 22 सितंबर; 2026 का आयोजन मानस के भुयानपारा रेंज में।

मेन्स दृष्टिकोण

मानस में गैंडे की वापसी भारत के प्रजाति-पुनःस्थापन प्रयासों की एक सफल कहानी है: 1980 के दशक के अंत से 2000 के दशक के आरंभ तक उग्रवाद-जनित अशांति और हथियारों के बदले सींग के व्यापार ने यहाँ की लगभग 100 गैंडों की आबादी मिटा दी थी, जबकि इंडियन राइनो विजन 2020 के तहत 2006-2021 में काजीरंगा और पोबितोरा से 22 गैंडों तथा 20 अनाथ गैंडों के स्थानांतरण से आज लगभग 50 गैंडों की प्रजननशील, स्वावलंबी आबादी बन गई है और तीन वर्षों से शिकार शून्य है। इसकी दो कुंजियाँ हैं—स्थानीय हितधारकों की भागीदारी (जो गैंडों को बाघ से अधिक पर्यटन-आकर्षक मानते हैं) और BTC के अंतर्गत वन प्रशासन। नई चुनौती सीमापारीय है: कई गैंडे सटे हुए रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान (भूटान) की ओर चले जाते हैं, जिससे निगरानी और सुरक्षा में अंतराल बनता है। आगे का रास्ता, जैसा स्रोत में विशेषज्ञ और असम के वन अधिकारी सुझाते हैं, भारत-भूटान के बीच गैंडा, बाघ, हाथी तथा समूचे नाजुक सीमापारीय मानस परिदृश्य के लिए संयुक्त संरक्षण तंत्र, द्विपक्षीय ढांचा और जन-से-जन संरक्षण प्रयास हैं।

मुख्य शब्द

एक सींग वाला गैंडा (ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो)
भारतीय गैंडा; असम के मानस, काजीरंगा और पोबितोरा में पाया जाने वाला शाकाहारी वन्यजीव।
इंडियन राइनो विजन 2020
वह पहल जिसके तहत 2006-2021 में काजीरंगा और पोबितोरा से 22 गैंडे मानस में स्थानांतरित किए गए।
मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य
2,837 वर्ग किमी का बाघ अभयारण्य जिसके कोर में 500 वर्ग किमी का राष्ट्रीय उद्यान है; भूटान सीमा से सटा।
रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान
भूटान का 1,057 वर्ग किमी का संरक्षित क्षेत्र जो मानस बाघ अभयारण्य से लगा हुआ है।
बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC)
बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र का प्रशासी निकाय, जिसके अंतर्गत मानस बाघ अभयारण्य का वन प्रशासन आता है।
स्थानांतरण (ट्रांसलोकेशन)
वन्यजीवों को एक संरक्षित क्षेत्र से दूसरे में ले जाकर आबादी पुनःस्थापित करने की संरक्षण पद्धति।

अभ्यास प्रश्न

  1. मानस राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले गैंडे की वापसी के कारणों का विश्लेषण करें। सीमापारीय वन्यजीव आवागमन इस सफलता के लिए क्या चुनौती पेश करता है?
  2. सीमापारीय संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन में द्विपक्षीय सहयोग और 'जन-से-जन' प्रयास किस प्रकार पूरक भूमिका निभा सकते हैं? भारत-भूटान मानस परिदृश्य के उदाहरण से समझाइए।
  3. क्या समुदाय-नेतृत्व वाला संरक्षण भारत में वन्यजीव संरक्षण का टिकाऊ मॉडल है? मानस के अनुभव के आधार पर परीक्षण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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