नौसेना छह एलसीयू एमके-5 पोत खरीदने की योजना बना रही

उभयचर अभियान, रसद और एचएडीआर क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना भारतीय शिपयार्डों से छह लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके-5 पोत खरीदने की योजना बना रही है और इसके लिए सूचना अनुरोध (आरएफआई) जारी किया है। आरएफआई के अनुसार खरीद रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0 के तहत बाय (इंडियन – आईडीडीएम) श्रेणी में होगी। 1,500 टन का पोत कम से कम चार युद्धक टैंक, 4 बीएमपी वाहन और 190 सैनिक ले जा सके, अधिकतम गति 15 नॉट और क्षमता 4,500 नॉटिकल मील हो। नौसेना के पास 830 टन के आठ एमके-4 एलसीयू हैं।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (4)
  • The Indian Navy has issued an RFI to procure six LCU Mk V vessels from Indian shipyards. — Attributed in the source to the Navy's request for information; no document number or date given.
  • Procurement is intended under 'Buy (Indian - IDDM)' as per Defence Procurement Procedure 2.0. — Directly quoted from the RFI in the source text.
  • Each vessel should displace 1,500 tonnes, carry at least four main battle tanks, 4 BMP infantry combat vehicles and 190 troops, with speed of 15 knots or more and endurance of about 4,500 nautical miles. — Figures appear in the source as RFI requirements; not independently verifiable here.
  • The Navy currently operates 8 active Mk IV class LCUs of about 830 tonnes, mostly under the Andaman and Nicobar Command, carrying MBTs and up to 160 troops. — Stated in the source without a named official source; internally consistent.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह केवल एक नौसैनिक खरीद सूचना नहीं है — 'बाय (इंडियन – आईडीडीएम)' श्रेणी के तहत छह एलसीयू एमके-5 पोतों के लिए आरएफआई जारी करना दर्शाता है कि सरकार स्वदेशी रक्षा उत्पादन को राजनीतिक रूप से कितनी अहमियत दे रही है। ऑर्डर भारतीय शिपयार्डों तक सीमित रखने से 'मेक इन इंडिया' की कथा को बल मिलता है और साथ ही उन तटीय राज्यों में रोजगार तथा औद्योगिक राजनीति जुड़ जाती है। 830 टन के एमके-4 से 1,500 टन के एमके-5 की ओर बढ़ना क्षमता विस्तार का संकेत है, लेकिन आरएफआई अभी शुरुआती कदम है, हस्ताक्षरित अनुबंध नहीं।

  • आईडीडीएम श्रेणी का चयन स्वदेशी रक्षा निर्माण को सरकार की राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में फिर रेखांकित करता है।
  • काम भारतीय शिपयार्डों को मिलने से उन राज्यों में रोजगार और सहायक उद्योगों का लाभ राजनीतिक चर्चा का विषय बनेगा।
  • आपदा राहत (एचएडीआर) क्षमता का उल्लेख रक्षा खर्च को जनहित के नजरिये से उचित ठहराने का अवसर देता है।
  • मौजूदा एमके-4 पोत मुख्यतः अंडमान-निकोबार कमान के अधीन होने से द्वीपीय क्षेत्रों पर बढ़ते रणनीतिक जोर का संकेत मिलता है।
  • शिपयार्डों को मंजूरी और अधोसंरचना के लिए अग्रिम सूचना मानने को कहना नीति और उद्योग के बीच सुनियोजित तालमेल दिखाता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि आरएफआई कितनी तेजी से टेंडर और अनुबंध में बदलता है और कौन-कौन शिपयार्ड दावेदार बनते हैं — अगली राजनीतिक बहस वहीं केंद्रित हो सकती है।

यह खबर अनुबंध की राशि, समयसीमा, चयनित शिपयार्ड या अंतिम सरकारी मंजूरी के बारे में कुछ तय नहीं करती; यह अभी केवल सूचना अनुरोध है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारतीय नौसेना ने छह लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके-5 पोतों की खरीद के लिए भारतीय शिपयार्डों से सूचना अनुरोध (आरएफआई) जारी किया है। एलसीयू मजबूत, स्टील-पतवार वाले उभयचर पोत होते हैं जो जहाज से तट तक भारी उपकरण, वाहन और सैनिकों को पहुँचाते हैं, और मानवीय सहायता-आपदा राहत (एचएडीआर), चिकित्सा निकासी तथा विशेष समुद्री अभियानों में भी काम आते हैं। नौसेना के पास वर्तमान में स्वदेशी एमके-4 श्रेणी के आठ सक्रिय एलसीयू हैं, जो मुख्यतः अंडमान और निकोबार कमान के अधीन तैनात हैं। नई खरीद रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0 के तहत बाय (इंडियन – आईडीडीएम) श्रेणी में प्रस्तावित है।

मुख्य तथ्य

  • भारतीय नौसेना छह एलसीयू एमके-5 पोत भारतीय शिपयार्डों से खरीदने की योजना बना रही है; इसके लिए आरएफआई जारी किया गया है।
  • प्रस्तावित पोत का विस्थापन 1,500 टन होगा।
  • प्रत्येक पोत कम से कम चार मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी), 4 बीएमपी पैदल सेना लड़ाकू वाहन और 190 सैनिक ले जाने में सक्षम होना चाहिए।
  • अधिकतम गति 15 नॉट या अधिक तथा क्षमता (एंड्यूरेंस) लगभग 4,500 नॉटिकल मील होनी चाहिए।
  • नौसेना के पास अभी स्वदेशी एमके-4 श्रेणी के 8 सक्रिय एलसीयू हैं, जिनका विस्थापन लगभग 830 टन है।
  • एमके-4 एलसीयू अर्जुन या टी-72 जैसे मुख्य युद्धक टैंक, बख्तरबंद वाहन और 160 तक सैनिक ले जा सकते हैं।
  • मौजूदा एमके-4 एलसीयू मुख्यतः अंडमान और निकोबार कमान के अधीन बीचिंग, परिवहन और मानवीय मिशनों के लिए तैनात हैं।
  • खरीद रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0 के अनुसार होगी और शिपयार्डों को स्वदेशी सामग्री (इंडिजिनस कंटेंट) का विवरण देना होगा; श्रेणी बाय (इंडियन – आईडीडीएम) प्रस्तावित है।

समयरेखा

  1. वर्तमान स्थितिनौसेना के पास एमके-4 श्रेणी के आठ सक्रिय एलसीयू (लगभग 830 टन) सेवा में हैं।
  2. हाल ही में (तारीख स्रोत में नहीं दी गई)नौसेना ने छह एलसीयू एमके-5 पोतों के लिए भारतीय शिपयार्डों से सूचना अनुरोध (आरएफआई) जारी किया।
  3. आगामी चरणआरएफआई को अग्रिम सूचना मानते हुए शिपयार्ड आवश्यक सरकारी मंजूरियाँ लें और जनशक्ति व सामग्री संबंधी अवसंरचना तैयार करें।

किसका दाँव

  • भारतीय नौसेना — उभयचर अभियान, रसद और एचएडीआर क्षमताओं को मजबूत करना तथा बड़े, अधिक भार वहन करने वाले एलसीयू बेड़े में जोड़ना।
  • भारतीय शिपयार्ड — बाय (इंडियन – आईडीडीएम) श्रेणी के ऑर्डर की संभावना; स्वदेशी सामग्री का विवरण, सरकारी मंजूरियाँ और अवसंरचना तैयार करने की जिम्मेदारी।
  • अंडमान और निकोबार कमान — मौजूदा एमके-4 एलसीयू यहीं तैनात हैं; बीचिंग, परिवहन और मानवीय मिशनों की क्षमता प्रभावित होगी।
  • रक्षा मंत्रालय / रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0 तंत्र — खरीद की श्रेणी निर्धारण, स्वदेशीकरण मानदंड और प्रक्रिया अनुपालन सुनिश्चित करना।
  • आपदा प्रभावित तटीय व द्वीपीय आबादी — एचएडीआर, चिकित्सा निकासी और राहत सामग्री पहुँचाने की बेहतर क्षमता का लाभ।

क्यों अहम है

एलसीयू एमके-5 मौजूदा 830 टन के एमके-4 की तुलना में लगभग दोगुने विस्थापन वाले होंगे और अधिक टैंक, बीएमपी वाहन तथा सैनिक ले जा सकेंगे, जिससे तट तक सैन्य पहुँच और द्वीपीय क्षेत्रों में रसद क्षमता बढ़ेगी। साथ ही ये पोत आपदा राहत, चिकित्सा निकासी और मानवीय मिशनों में भी काम आते हैं, जिससे नागरिक सुरक्षा भी मजबूत होती है। बाय (इंडियन – आईडीडीएम) श्रेणी में खरीद घरेलू जहाज निर्माण और रक्षा स्वदेशीकरण को बढ़ावा देती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एलसीयू (लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी): स्टील-पतवार वाला उभयचर पोत, जहाज से तट तक वाहन, उपकरण व सैनिकों की ढुलाई के लिए।
  • प्रस्तावित एलसीयू एमके-5: 1,500 टन विस्थापन, 4 एमबीटी + 4 बीएमपी + 190 सैनिक, गति 15 नॉट या अधिक, एंड्यूरेंस ~4,500 नॉटिकल मील।
  • मौजूदा एमके-4 एलसीयू: 8 सक्रिय, ~830 टन, 160 तक सैनिक; अंडमान और निकोबार कमान के अधीन तैनात।
  • खरीद रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0 के तहत, श्रेणी बाय (इंडियन – आईडीडीएम)।
  • आरएफआई (रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन) रक्षा खरीद का प्रारंभिक चरण है, जिसमें शिपयार्डों से विवरण मांगा जाता है।
  • एचएडीआर = मानवीय सहायता और आपदा राहत; एलसीयू चिकित्सा निकासी व विशेष समुद्री अभियानों में भी उपयोगी।

मेन्स दृष्टिकोण

भारतीय नौसेना का छह एलसीयू एमके-5 पोतों के लिए आरएफआई जारी करना उभयचर क्षमता, समुद्री रसद और एचएडीआर तैयारियों के एकसाथ उन्नयन का संकेत है। मौजूदा आठ एमके-4 एलसीयू (लगभग 830 टन, 160 सैनिक) द्वीपीय व तटीय अभियानों की रीढ़ हैं, लेकिन 1,500 टन के एमके-5 में चार मुख्य युद्धक टैंक, चार बीएमपी और 190 सैनिक ले जाने की मांग बड़े भार, अधिक दूरी (~4,500 नॉटिकल मील) और तेज गति (15 नॉट से अधिक) की आवश्यकता को दर्शाती है — यह अंडमान और निकोबार जैसे दूरस्थ द्वीपसमूह में सैन्य व राहत पहुँच के लिए महत्वपूर्ण है। रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0 के तहत बाय (इंडियन – आईडीडीएम) श्रेणी चुनना घरेलू डिज़ाइन, विकास और निर्माण को प्राथमिकता देता है, जिसमें शिपयार्डों को स्वदेशी सामग्री का विवरण देना होगा। आगे की राह में शिपयार्डों द्वारा समय पर सरकारी मंजूरियाँ, जनशक्ति व सामग्री अवसंरचना की तैयारी, तथा आरएफआई से अनुबंध तक की प्रक्रिया को गति देना निर्णायक होगा, ताकि निर्धारित क्षमता मानकों पर पोत समय से बेड़े में जुड़ सकें।

मुख्य शब्द

एलसीयू (लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी)
मजबूत स्टील-पतवार वाला उभयचर पोत, जो जहाज से तट तक भारी उपकरण, वाहन और सैनिक पहुँचाता है।
आरएफआई (सूचना अनुरोध)
खरीद का प्रारंभिक चरण, जिसमें नौसेना शिपयार्डों से क्षमता व स्वदेशी सामग्री संबंधी विवरण मांगती है।
बाय (इंडियन – आईडीडीएम)
रक्षा खरीद की वह श्रेणी जिसमें स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित उपकरण खरीदे जाते हैं।
एचएडीआर
मानवीय सहायता और आपदा राहत; एलसीयू इसके साथ चिकित्सा निकासी में भी उपयोग होते हैं।
रक्षा खरीद प्रक्रिया 2.0
वह प्रक्रिया ढांचा जिसके अनुसार यह पोत खरीद की जाएगी और स्वदेशी सामग्री का विवरण अनिवार्य है।
नॉट / नॉटिकल मील
समुद्री गति व दूरी की इकाइयाँ; एमके-5 के लिए 15 नॉट गति और ~4,500 नॉटिकल मील एंड्यूरेंस की मांग।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारतीय नौसेना की उभयचर क्षमता में लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी की भूमिका का परीक्षण कीजिए। एलसीयू एमके-5 मौजूदा एमके-4 बेड़े से किस प्रकार आगे है?
  2. 'बाय (इंडियन – आईडीडीएम)' श्रेणी के अंतर्गत रक्षा खरीद स्वदेशीकरण को कैसे बढ़ावा देती है? एलसीयू एमके-5 खरीद के उदाहरण से समझाइए।
  3. अंडमान और निकोबार जैसे द्वीपसमूह में सैन्य रसद तथा आपदा राहत के लिए उभयचर पोतों का महत्व चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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