एसआईआर में 1.76 करोड़ मतदाताओं को नोटिस, ईरोनेट पर सवाल

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली के करीब 1.76 करोड़ मतदाताओं को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' श्रेणी के तहत नोटिस मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार 2002 की मूल सूचियों को अंग्रेजी में बदलने के दौरान हुई लिप्यंतरण और आयु-अंतर की त्रुटियां इसका कारण हैं। इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर संधू ने ईरोनेट सॉफ्टवेयर के नियंत्रण पर दस महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई। ईसीआई अधिकारियों ने सॉफ्टवेयर में खराबी से इनकार किया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • About 17.6 million voters in Telangana, Karnataka, Maharashtra and Delhi got notices under 'logical discrepancy'. — Figure appears in source; attributed to SIR phase-3 data reported by HT, no document cited.
  • Election Commissioners Vivek Joshi and Sukhbir Sandhu objected at least 14 times to decisions. — Attributed in source to an Indian Express investigation; not independently confirmed in the text.
  • In West Bengal six million voters were flagged and 2.71 million eventually disenfranchised. — Figures appear in source without a named originating document; earlier HT reporting referenced.
  • Officials say ERONET had only routine updates after West Bengal SIR. — Attributed to an unnamed ECI official quoted directly.
  • ECINET, launched January 2026 with 22 Indian languages, integrates ERONET and over 40 ECI applications. — Stated in source as background; attributed to ECI officials.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

एसआईआर के तीसरे चरण में चार राज्यों के 1.76 करोड़ मतदाताओं को मिले 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' नोटिस अब तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि इस सवाल की लड़ाई बन गए हैं कि मतदाता सूची पर असल नियंत्रण किसका है। तेलुगु, कन्नड़ और मराठी की 2002 की मूल सूचियों को अंग्रेज़ी में बदलने से पैदा हुई नाम-विसंगतियाँ और उम्र-अंतर की गणना की गड़बड़ियाँ क्षेत्रीय दलों को केंद्रीकरण और भाषाई उपेक्षा का तैयार मुद्दा दे रही हैं। इसके ऊपर, तीन में से दो चुनाव आयुक्तों — विवेक जोशी और सुखबीर संधू — द्वारा दस महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने की रिपोर्ट विपक्ष के आरोपों को संस्था के भीतर से मिलती प्रतिध्वनि जैसी दिखती है।

  • तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली — सभी राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, इसलिए किसी भी त्रुटि को नीयत से जोड़कर देखा जाएगा।
  • पश्चिम बंगाल का उदाहरण, जहाँ 60 लाख नाम चिह्नित हुए और 27.1 लाख सूची से बाहर हो गए, विपक्ष को यह तर्क देता है कि नोटिस अंततः मताधिकार छीन सकता है।
  • क्षेत्रीय भाषाओं की सूचियों के अंग्रेज़ीकरण से उठी गलतियाँ क्षेत्रीय दलों के केंद्रीकरण-विरोधी अभियान के लिए स्वाभाविक ईंधन हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार आयुक्तों ने खुद 'मतदाता सूची डेटाबेस के क्रमिक केंद्रीकरण' और राज्य अधिकारियों को ईरोनेट की पूरी पहुँच न मिलने पर सवाल उठाए, जिससे यह संघीय ढाँचे की बहस बन जाती है।
  • आयोग का बचाव तकनीकी है — सॉफ्टवेयर दोषपूर्ण नहीं, नोटिस का मतलब नाम कटना नहीं, सुधार का समय है — पर यह इस राजनीतिक आरोप का पूरा जवाब नहीं देता कि सबूत का बोझ गरीब और बुज़ुर्ग मतदाताओं पर पड़ रहा है।

किस पर नज़र रखें — 5 नवंबर की समय-सीमा पर आने वाले आँकड़े देखिए — कितने नोटिस पाने वाले सूची में बने रहते हैं और कितनों को नया फॉर्म-6 भरना पड़ता है, यही विपक्षी आंदोलन, अदालती चुनौतियों और संसदीय दबाव का पैमाना तय करेगा।

यह रिपोर्ट यह स्थापित नहीं करती कि सॉफ्टवेयर की खामियाँ किसी राजनीतिक पक्ष को लाभ पहुँचाने के लिए बनाई गई थीं, और न ही यह कि नोटिस पाने वालों में से अंततः कितने मताधिकार खोएँगे।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली के करीब 1.76 करोड़ मतदाताओं को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' (तार्किक विसंगति) श्रेणी के तहत नोटिस भेजे गए हैं। इन नोटिसों की जड़ में ईरोनेट (इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नेटवर्क) नामक सॉफ्टवेयर है, जो 2002 की मूल सूचियों की प्रविष्टियों को आज के मतदाताओं से मिलाने का काम करता है और अब ईसीआईनेट में समाहित है। 2002 की सूचियां तेलुगु, कन्नड़ और मराठी में थीं, जिनके अंग्रेजी लिप्यंतरण में हुई गलतियों तथा आयु-अंतर की गणना में चूक से बड़ी संख्या में नाम फ्लैग हुए। साथ ही इस सॉफ्टवेयर पर नियंत्रण को लेकर आयोग के भीतर संस्थागत खींचतान सामने आई है।

मुख्य तथ्य

  • तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली में लगभग 1.76 करोड़ (1.76 crore/17.6 million) मतदाताओं को 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' श्रेणी में नोटिस मिले।
  • इंडियन एक्सप्रेस की जांच के अनुसार चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर संधू ने मई से दस महीनों में कम से कम 14 बार निर्णयों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।
  • पश्चिम बंगाल में 60 लाख लोग लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के तहत फ्लैग हुए थे और 27.1 लाख के नाम अंततः सूची से हट गए।
  • हैदराबाद के लंगर हाउस क्षेत्र के छह बूथों पर कम से कम 205 मतदाताओं को एक ही कारण (नाम की स्पेलिंग मेल न खाना) से नोटिस मिले।
  • बेंगलुरु में जोआन फातिमा के बूथ पर दिए गए 332 नोटिसों में से कम से कम 87 में पिता-पुत्री के 15 वर्ष से कम आयु-अंतर का कारण बताया गया।
  • गोवा में ईआरओ ने 97 मतदाताओं को शामिल करने की मंजूरी दी, पर समयसीमा से पहले डेटाबेस में बदलाव न हो पाने से सभी 97 अंतिम सूची से बाहर रह गए।
  • गोवा सीईओ कार्यालय ने एक ही सप्ताह में आठ बार वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती को लिखा, हर बार डीजी (आईटी) सीमा खन्ना को प्रतिलिपि दी, रोलबैक सुविधा नहीं मिली।
  • ईरोनेट 2017-18 से शुरू हुआ; ईसीआईनेट जनवरी 2026 में लॉन्च हुआ, जिसमें 22 भारतीय भाषाएं और आयोग के 40 से अधिक ऐप एकीकृत हैं।

समयरेखा

  1. 2002मूल (बेस) मतदाता सूचियां — तेलंगाना व आंध्र प्रदेश में तेलुगु, कर्नाटक में कन्नड़, महाराष्ट्र में मराठी में तैयार।
  2. 2017-18ईरोनेट (इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नेटवर्क) की शुरुआत।
  3. मई (वर्ष स्रोत में नहीं)चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर संधू द्वारा औपचारिक आपत्तियां दर्ज करने की शुरुआत; जोशी ने 'मतदाता सूची डेटाबेस के क्रमिक केंद्रीकरण' की चेतावनी दी।
  4. अगस्तसुखबीर संधू ने दोहराया कि राज्य चुनाव अधिकारियों को ईरोनेट पोर्टल पर 'उचित और पूर्ण पहुंच' नहीं है।
  5. 8 सितंबरहैदराबाद की 55 वर्षीय क़मर फ़ातिमा को तेलंगाना सीईओ से नोटिस, नाम 'क़ेमर फ़ातिमा' से मेल न खाने का हवाला।
  6. 5 नवंबरफ़ातिमा के लिए पुरानी प्रविष्टि से संबंध सिद्ध करने की अंतिम तिथि; अन्यथा नए फॉर्म-6 से पहली बार के मतदाता के रूप में आवेदन करना होगा।
  7. जनवरी 2026पश्चिम बंगाल में एसआईआर पूरा होने से एक महीने पहले ईसीआईनेट प्लेटफॉर्म लॉन्च, जिसमें ईरोनेट एकीकृत।
  8. वर्तमान (तीसरा चरण)तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली सहित ओडिशा, झारखंड, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब में एसआईआर जारी।

किसका दाँव

  • 1.76 करोड़ नोटिस पाने वाले मतदाता — नाम की स्पेलिंग या आयु-अंतर की तकनीकी त्रुटि के कारण दस्तावेज जुटाने का बोझ और सूची से नाम कटने का जोखिम।
  • भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) — अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची पर पूर्ण नियंत्रण; सॉफ्टवेयर की विश्वसनीयता और संस्थागत साख दांव पर।
  • चुनाव आयुक्त विवेक जोशी व सुखबीर संधू — मतदाता सूची डेटाबेस के केंद्रीकरण और राज्य अधिकारियों की पहुंच सीमित होने पर 14 बार आपत्ति।
  • डीजी (आईटी) सीमा खन्ना — ईरोनेट पहुंच पर प्रतिबंध लगाने के कानूनी अधिकार पर सवाल; ईसीआईनेट की डिजाइन व साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी।
  • ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) व राज्य सीईओ कार्यालय — कानूनन सूची के संरक्षक होने के बावजूद पोर्टल पर पूर्ण पहुंच व रोलबैक सुविधा का अभाव।
  • बीएलओ (बूथ स्तरीय अधिकारी) — क्षेत्र में दस्तावेज मांगने का काम, जबकि गलती बैकएंड सॉफ्टवेयर गणना की; मतदाताओं को समाधान बता पाने में असमर्थता।

क्यों अहम है

मताधिकार संविधान द्वारा संरक्षित बुनियादी अधिकार है, और जब लिप्यंतरण या आयु-गणना जैसी तकनीकी त्रुटियां करोड़ों लोगों को 'संदिग्ध' श्रेणी में डाल देती हैं तो सबूत का बोझ नागरिक पर आ जाता है — पश्चिम बंगाल में 60 लाख फ्लैग में से 27.1 लाख नाम हट गए। साथ ही यह प्रश्न खड़ा होता है कि सूची पर निर्णय का कानूनी अधिकार ईआरओ और आयोग के पास है या सॉफ्टवेयर व आईटी विभाग के पास, जिससे चुनावी प्रक्रिया की वैधता और विश्वसनीयता जुड़ी है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • अनुच्छेद 324: निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची तैयार करने पर पूर्ण नियंत्रण; 1977 के सुप्रीम कोर्ट निर्णय ने कहा यह शक्ति आयोग को सामूहिक रूप से है, किसी एक कार्यालय को नहीं।
  • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B: प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) की नियुक्ति; ईआरओ सूची का कानूनी संरक्षक।
  • निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960: ईआरओ आवेदनों का निपटारा व विवादों का निर्णय करते हैं; आयोग केवल पर्यवेक्षण करता है।
  • ईरोनेट 2017-18 में शुरू; ईसीआईनेट जनवरी 2026 में लॉन्च — 22 भारतीय भाषाएं, 40+ ईसीआई ऐप एकीकृत।
  • एएसडीडी श्रेणी = अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead), दोहराव (Duplicate)।
  • नाम पुनः जोड़ने के लिए फॉर्म-6 (नए/प्रथम बार मतदाता के रूप में आवेदन) का उपयोग।

मेन्स दृष्टिकोण

एसआईआर के तीसरे चरण में 1.76 करोड़ नोटिस दिखाते हैं कि प्रौद्योगिकी-आधारित मतदाता सूची शुद्धिकरण की डिज़ाइन-संबंधी सीमाएं नागरिकों के अधिकार पर सीधा असर डाल रही हैं। कारण तीन स्तरीय हैं: (1) 2002 की क्षेत्रीय-भाषा (तेलुगु, कन्नड़, मराठी, बंगाली) सूचियों को अंग्रेजी में बदलने से उत्पन्न लिप्यंतरण त्रुटियां, जिन्हें ईरोनेट स्वतः 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' मान लेता है; (2) पिता-संतान आयु-अंतर 15 वर्ष से कम मान लेने जैसी बैकएंड गणना की खामियां, जिसे बीएलओ भी क्षेत्र-सत्यापन की नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर की गलती बताते हैं; और (3) संस्थागत प्रश्न — अनुच्छेद 324 तथा आरपी अधिनियम की धारा 13B के तहत निर्णय का अधिकार आयोग व ईआरओ के पास है, पर राज्य सीईओ और ईआरओ को ईरोनेट पर 'उचित और पूर्ण पहुंच' न होने की शिकायत है, जिसे दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार उठाया; गोवा का 97 मतदाताओं का मामला बताता है कि सांविधिक अधिकारी का आदेश भी डेटाबेस-सीमा के कारण निष्फल हो सकता है। निहितार्थ: सबूत का बोझ मतदाता पर उलट जाता है और बंगाल की तरह बड़े पैमाने पर नाम कट सकते हैं। आगे का रास्ता स्रोत के अनुसार: ईरोनेट-ईसीआईनेट एकीकरण व वास्तविक समय सुधार (आयोग का दावा), ईआरओ/सीईओ को पूर्ण पोर्टल पहुंच व रोलबैक सुविधा, स्पेलिंग-प्रकार व आयु-गणना के फ्लैग को स्वतः निष्कासन का आधार न बनाना, और सुधार के लिए पर्याप्त समय।

मुख्य शब्द

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण)
मतदाता सूचियों का चरणबद्ध गहन पुनरीक्षण, जिसमें वर्तमान मतदाता को 2002 की मूल सूची की प्रविष्टि से मिलाया जाता है; अभी तीसरा चरण चल रहा है।
लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी
सॉफ्टवेयर द्वारा लगाया गया वह वर्ग जिसमें नाम की स्पेलिंग या पारिवारिक आयु-अंतर पुरानी सूची से मेल न खाने पर मतदाता फ्लैग हो जाता है।
ईरोनेट
इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नेटवर्क — 2017-18 से शुरू सॉफ्टवेयर, जो गणना फॉर्म संसाधित कर मतदाता को मूल सूची से मिलाता है।
ईसीआईनेट
जनवरी 2026 में लॉन्च ईसीआई का एकीकृत प्लेटफॉर्म, जिसमें ईरोनेट और 40 से अधिक ऐप तथा 22 भारतीय भाषाएं शामिल हैं।
ईआरओ
निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी — आरपी अधिनियम, 1950 की धारा 13B के तहत नियुक्त, निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची का कानूनी संरक्षक।
एएसडीडी
Absent, Shifted, Dead, Duplicate — वह व्यापक श्रेणी जिसमें कुछ राज्यों ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के आंकड़े मिला दिए।

अभ्यास प्रश्न

  1. मतदाता सूची पुनरीक्षण में प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग से दक्षता बढ़ती है, परंतु त्रुटि का बोझ नागरिक पर आ जाता है। एसआईआर के तीसरे चरण के अनुभव के आलोक में परीक्षण करें।
  2. अनुच्छेद 324 तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B के प्रावधानों के संदर्भ में स्पष्ट करें कि मतदाता सूची पर निर्णय का कानूनी अधिकार किसके पास है और 'डेटाबेस के केंद्रीकरण' की चिंता क्यों उठी।
  3. क्षेत्रीय भाषा की मूल सूचियों के अंग्रेजी लिप्यंतरण से उत्पन्न त्रुटियां भाषाई विविधता वाले देश में चुनावी समावेशन के लिए क्या चुनौतियां पैदा करती हैं? उपाय सुझाएं।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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