कैडेटों की विकलांगता पेंशन पर नीतिगत अड़चनें: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विकलांगता के आधार पर बोर्ड आउट किए गए सैन्य कैडेटों को विकलांगता पेंशन देने में नीतिगत अड़चनें हैं, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए आठ से दस सप्ताह के कौशल विकास पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के जवाब के अनुसार ऐसे कैडेटों को प्रति माह 9,000 रुपये अनुग्रह राशि मिलती है, जो शत-प्रतिशत विकलांगता पर 16,000 रुपये तक जाती है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने सुनवाई 7 अक्टूबर तय की।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The Centre cited "policy constraints" against granting disability pension to cadets boarded out on disability grounds. — Attributed to a Ministry of Defence response filed Monday in the Supreme Court; quoted DESW submission of September 1, 2022 appears in source.
  • DGR prepared a draft action plan on August 25 for skill training of disabled boarded-out cadets, with 8-10 week modules. — Attributed to the Centre's response; dates and course structure appear in source.
  • Outboarded cadets get ex-gratia of ₹9,000 per month, extendable to ₹16,000 for 100% disability, plus ₹6,750 attendant charges. — Figures appear in source, attributed to information given to the court by the Centre.
  • Roughly 40 cadets are boarded out each year and the total does not exceed 700. — Attributed to the Centre's earlier submission to the court; no independent data cited.
  • Bench of Justices BV Nagarathna and R Mahadevan posted the matter for hearing on October 7. — Attributed to court proceedings as reported; internally consistent.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

मामला अदालत में है, लेकिन दांव राजनीतिक हैं — सैन्य कल्याण से जुड़ा कोई भी विषय किसी भी सरकार के लिए प्रतीकात्मक रूप से भारी पड़ता है। पेंशन पर "नीतिगत अड़चनों" का हवाला देते हुए भी कौशल प्रशिक्षण, विश्वविद्यालयों से समझौते और ईसीएचएस में शामिल करने की पेशकश करके केंद्र दोहरी रणनीति चला रहा है: एक स्थायी वित्तीय हक बन सकने वाली नज़ीर से बचना, और साथ ही संवेदनहीनता के आरोप को कमज़ोर करना। सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान ने इस मुद्दे को सरकार के विवेक से निकालकर सार्वजनिक निगाह में ला दिया है।

  • केंद्र 2011 और 2022 में ली गई अपनी ही स्थिति का बचाव कर रहा है, यानी यह नया राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि नीतिगत निरंतरता बनाए रखने की कोशिश दिखती है।
  • ईसीएचएस में शामिल करना और मसौदा कार्ययोजना स्वतः संज्ञान कार्यवाही शुरू होने के बाद ही सामने आई — यह संकेत है कि न्यायिक दबाव ने प्रशासनिक गति बढ़ाई।
  • बताई गई कम संख्या (सालाना करीब 40, कुल 700 से कम) राजनीतिक रूप से दोनों तरफ काम करती है: आलोचक खर्च को मामूली कहेंगे, सरकार कहेगी कि असली सवाल नज़ीर का है।
  • पूर्व सैनिक दर्जे पर 2015 की सभरवाल समिति की सिफ़ारिश का लागू न होना, विपक्ष और पूर्व सैनिक संगठनों के लिए तैयार राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
  • कैडेटों की अनुग्रह राशि की तुलना रंगरूटों और अर्धसैनिक अधिकारियों को मिलने वाली रकम से करना बहस को "समानता" के इर्द-गिर्द ले जाता है, जो तकनीकी पेंशन नियमों से ज़्यादा असरदार होता है।

किस पर नज़र रखें — 7 अक्टूबर की सुनवाई पर नज़र रखें — पीठ केंद्र के जवाब को पर्याप्त मानती है या विकलांगता पेंशन और पूर्व सैनिक दर्जे पर फिर दबाव डालती है, इससे आगे का राजनीतिक दबाव तय होगा।

यह खबर स्पष्ट नहीं करती कि "नीतिगत अड़चनें" वास्तव में क्या हैं — वित्तीय या प्रशासनिक — और इसमें किसी राजनीतिक दल या पूर्व सैनिक संगठन की प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

सैन्य प्रशिक्षण के दौरान चोट या बीमारी के कारण चिकित्सा आधार पर "बोर्ड आउट" किए गए कैडेटों को न विकलांगता पेंशन मिलती है और न भूतपूर्व सैनिक (ex-servicemen) का दर्जा, जिससे वे उस श्रेणी के आरक्षण/नौकरियों से भी वंचित रह जाते हैं। पिछले साल इन कैडेटों की दुर्दशा पर छपी एक खबर पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (suo motu) लिया था। 4 अगस्त को कोर्ट ने केंद्र से उनके पुनर्वास की योजना बनाने और विकलांगता पेंशन पर अपनी आपत्ति फिर से जांचने को कहा था। सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने जवाब दाखिल कर "नीतिगत अड़चनों" का हवाला दिया, पर कौशल प्रशिक्षण की कार्य-योजना बताई।

मुख्य तथ्य

  • रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को दाखिल जवाब में कहा कि प्रशिक्षण के दौरान बोर्ड आउट पूर्व-कैडेटों को विकलांगता पेंशन देने में "नीतिगत अड़चनें" हैं।
  • DESW के अधीन महानिदेशालय पुनर्वास (DGR) ने 25 अगस्त को "Skill Training of Disabled Boarded Out Cadets" की मसौदा कार्य-योजना तैयार की।
  • योजना में 8 से 10 सप्ताह के संरचित ओरिएंटेशन मॉड्यूल; पाठ्यक्रम चार वर्गों में — स्नातक, गैर-स्नातक, तकनीकी और गैर-तकनीकी।
  • ऐसे कैडेटों को प्रति माह ₹9,000 अनुग्रह राशि मिलती है, 100% विकलांगता पर ₹16,000 तक, साथ में ₹6,750 प्रति माह अटेंडेंट चार्ज।
  • केंद्र के अनुसार NDA, IMA और OTA में हर साल लगभग 40 कैडेट प्रशिक्षण के दौरान चोट से बोर्ड आउट होते हैं; कुल संख्या 700 से अधिक नहीं।
  • एमिकस रेखा पल्ली ने बताया: 20% विकलांगता वाले रिक्रूट को न्यूनतम ₹18,000 प्रति माह, पर कैडेट को केवल ₹12,000 अनुग्रह राशि; अर्धसैनिक ग्रुप A अधिकारी को ₹36,000 से अधिक।
  • DESW ने 1 सितंबर 2022 को नीतिगत अड़चनों के कारण इस प्रस्ताव को अव्यवहार्य बताया था; मुद्दा 2011 और 2022 में भी खारिज हुआ।
  • रक्षा बलों की बीमा योजनाएं: मृत्यु पर ₹1.25 करोड़, 100% विकलांगता पर ₹25 लाख, 20% से कम प्रमाणित चोट पर ₹50,000।

समयरेखा

  1. 2011बोर्ड आउट कैडेटों को विकलांगता पेंशन/भूतपूर्व सैनिक दर्जा देने का मुद्दा पहली बार विचार कर खारिज किया गया।
  2. 2015ले. जन. मुकेश सभरवाल (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली सभरवाल समिति ने चिकित्सा आधार पर बोर्ड आउट कैडेटों को भूतपूर्व सैनिक दर्जा देने की सिफारिश की।
  3. 1 सितंबर 2022DESW ने नीतिगत अड़चनों के कारण विकलांगता पेंशन के प्रस्ताव को अव्यवहार्य बताया।
  4. पिछले वर्षकैडेटों की दुर्दशा पर समाचार रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
  5. 4 अगस्तकोर्ट ने केंद्र से पुनर्वास योजना पर विचार करने और विकलांगता पेंशन तथा भूतपूर्व सैनिक दर्जे पर आपत्ति की पुनर्समीक्षा करने को कहा।
  6. 25 अगस्तDGR ने विकलांग बोर्ड आउट कैडेटों के कौशल प्रशिक्षण की मसौदा कार्य-योजना तैयार की।
  7. सोमवार (जवाब दाखिल)रक्षा मंत्रालय ने जवाब दाखिल किया; पीठ ने इसे रिकॉर्ड पर लिया।
  8. 7 अक्टूबरजस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने अगली सुनवाई तय की।

किसका दाँव

  • चिकित्सा आधार पर बोर्ड आउट कैडेट — विकलांगता पेंशन और भूतपूर्व सैनिक दर्जा नहीं; केवल अनुग्रह राशि, अब कौशल पाठ्यक्रम व ECHS कवरेज।
  • रक्षा मंत्रालय / भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (DESW) — नीतिगत अड़चनों का हवाला देकर पेंशन से इनकार, पर पुनर्वास योजना लागू करने की जिम्मेदारी।
  • महानिदेशालय पुनर्वास (DGR) — 8–10 सप्ताह के कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल और विश्वविद्यालयों से MoU के जरिये लेटरल एंट्री की व्यवस्था।
  • सुप्रीम कोर्ट पीठ (जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस आर. महादेवन) — स्वतः संज्ञान कार्यवाही में कैडेटों के अधिकारों और RPwD अधिनियम के दायरे की निगरानी।
  • एमिकस क्यूरी व वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा पल्ली — कैडेटों के लिए भूतपूर्व सैनिक लाभ और समान मुआवजे की पैरवी; स्वास्थ्य कारणों से सुनवाई में अनुपस्थित।
  • NDA, IMA, OTA जैसी प्रशिक्षण अकादमियां — प्रशिक्षण के दौरान घायल होने वाले कैडेटों (हर साल लगभग 40) के भविष्य से जुड़ी संस्थागत जवाबदेही।

क्यों अहम है

यह मामला उन युवाओं के बारे में है जो सेना में अधिकारी बनने के प्रशिक्षण में घायल होकर न सैनिक कहलाते हैं और न आम नागरिक जैसी सुरक्षा पाते हैं — पेंशन, दर्जा और आरक्षण तीनों से बाहर। केंद्र का रुख दिखाता है कि राहत मुआवजे की जगह कौशल प्रशिक्षण और स्वास्थ्य योजना के रास्ते दी जा रही है, जबकि एमिकस के आंकड़े रिक्रूट, कैडेट और अर्धसैनिक अधिकारी के बीच बड़ी असमानता बताते हैं। सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान कार्यवाही यह तय करेगी कि RPwD अधिनियम के तहत 40% से कम विकलांगता वालों को भी संरक्षण मिल सकता है या नहीं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • DGR (महानिदेशालय पुनर्वास) भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (DESW) के अधीन कार्य करता है।
  • सभरवाल समिति (2015), अध्यक्ष: ले. जन. मुकेश सभरवाल (सेवानिवृत्त) — चिकित्सा आधार पर बोर्ड आउट कैडेटों को भूतपूर्व सैनिक दर्जा देने की सिफारिश।
  • RPwD अधिनियम: 40% से अधिक बेंचमार्क विकलांगता वालों के लिए प्रत्येक समूह के पदों में न्यूनतम 4% रिक्तियां आरक्षित की जा सकती हैं।
  • स्वतः संज्ञान कार्यवाही शुरू होने के बाद ऐसे कैडेटों को भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) में शामिल किया गया।
  • अनुग्रह राशि: ₹9,000 प्रति माह (100% विकलांगता पर ₹16,000 तक) + ₹6,750 प्रति माह अटेंडेंट चार्ज।
  • रक्षा बीमा योजनाएं: मृत्यु ₹1.25 करोड़, 100% विकलांगता ₹25 लाख, 20% से कम चोट ₹50,000।

मेन्स दृष्टिकोण

प्रशिक्षण के दौरान विकलांग होकर बोर्ड आउट किए गए सैन्य कैडेटों का मामला सेवा-शर्तों और विकलांगता अधिकारों के बीच की एक संस्थागत दरार उजागर करता है: कमीशन से पहले बोर्ड आउट होने के कारण वे न सैनिक की श्रेणी में आते हैं, न भूतपूर्व सैनिक कोटे के लाभ पाते हैं, और उन्हें पेंशन की जगह केवल अनुग्रह राशि (₹9,000–₹16,000 प्रति माह) मिलती है। केंद्र ने 2011 और 2022 में इस प्रस्ताव को खारिज किया और 1 सितंबर 2022 को DESW ने इसे "नीतिगत अड़चनों" के कारण अव्यवहार्य बताया; साथ ही RPwD अधिनियम के 4% आरक्षण को 40% से कम विकलांगता तक बढ़ाने को यह कहकर अस्वीकार किया कि सीमित कोटा कम बाधाओं वाले लोगों से भर जाएगा। दूसरी ओर एमिकस क्यूरी रेखा पल्ली ने असमानता की ओर ध्यान खींचा — 20% विकलांगता वाले रिक्रूट को न्यूनतम ₹18,000, कैडेट को ₹12,000, जबकि अर्धसैनिक ग्रुप A अधिकारी को ₹36,000 से अधिक — और 2015 की सभरवाल समिति की सिफारिश दोहराई। आगे का रास्ता यह हो सकता है कि DGR की 8–10 सप्ताह की कौशल प्रशिक्षण योजना, विश्वविद्यालयों से MoU के जरिये लेटरल एंट्री और ECHS कवरेज जैसे कदमों के साथ-साथ मुआवजे की समानता तथा दर्जे के प्रश्न पर न्यायिक निगरानी में पुनर्विचार हो, क्योंकि प्रभावित संख्या (कुल 700 से कम, हर साल लगभग 40) राजकोषीय दृष्टि से सीमित है।

मुख्य शब्द

बोर्ड आउट (Boarded Out)
चिकित्सा बोर्ड की राय पर प्रशिक्षण या सेवा के दौरान विकलांगता/चोट के कारण सैन्य प्रशिक्षण से बाहर किया जाना।
DGR (महानिदेशालय पुनर्वास)
भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के अधीन निकाय, जिसने विकलांग बोर्ड आउट कैडेटों के कौशल प्रशिक्षण की मसौदा कार्य-योजना बनाई।
DESW (भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग)
रक्षा मंत्रालय का विभाग, जिसने 1 सितंबर 2022 को विकलांगता पेंशन प्रस्ताव को अव्यवहार्य बताया।
ECHS
भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद ऐसे कैडेटों को शामिल किया गया।
RPwD अधिनियम
दिव्यांगजन अधिकार कानून; 40% से अधिक बेंचमार्क विकलांगता वालों के लिए न्यूनतम 4% पद आरक्षित करने की अनुमति देता है।
एमिकस क्यूरी
न्यायालय की सहायता के लिए नियुक्त अधिवक्ता; इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा पल्ली।

अभ्यास प्रश्न

  1. प्रशिक्षण के दौरान विकलांग होकर बोर्ड आउट किए गए सैन्य कैडेटों को विकलांगता पेंशन और भूतपूर्व सैनिक दर्जा देने के पक्ष-विपक्ष के तर्कों का परीक्षण कीजिए।
  2. RPwD अधिनियम के तहत 40% बेंचमार्क विकलांगता की सीमा क्या कम विकलांगता वाले व्यक्तियों के साथ अन्याय करती है? केंद्र के तर्क के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
  3. सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान शक्ति सामाजिक-कल्याण नीति में सुधार का साधन कैसे बनती है? कैडेट पुनर्वास मामले के उदाहरण से समझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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