पालमूरु परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण तेज करें: रेवंत
मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों को पूर्ववर्ती महबूबनगर जिले की सिंचाई परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। पालमूरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना (पीआरएलआईएस) की समीक्षा करते हुए उन्होंने भूमि अधिग्रहण के लिए धनराशि और लंबित बिलों के भुगतान का आश्वासन दिया। मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने कहा कि परियोजना पूरी करने में करीब एक लाख करोड़ रुपये लग सकते हैं। पीआरएलआईएस का लक्ष्य लगभग 12.3 लाख एकड़ की सिंचाई है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- CM Revanth Reddy directed ministers, MLAs and officials to expedite land acquisition and complete irrigation projects in erstwhile Mahabubnagar district. — Attributed to the Chief Minister at a review meeting; direct quote on funds and pending bills appears in source.
- Rs 35,000 crore was allocated for pumps, motors and surge pools but only Rs 25,000 crore spent over 10 years; nearly Rs 1 lakh crore may be needed to complete PRLIS. — Attributed to minister Jupally Krishna Rao as an allegation against the BRS government; figures appear in source but are unverified politically contested claims.
- 160 TMC of water is available at Tummidihatti, much of which could be drawn by gravity flow. — Attributed to Jupally Krishna Rao; no technical source or study cited in the text.
- PRLIS aims to irrigate nearly 12.3 lakh acres; Phase-I envisages drinking water to 1,226 villages across six districts. — Figures stated in source and attributed to irrigation minister Uttam Kumar Reddy's briefing to the meeting.
- Jurala reservoir storage has fallen below eight TMC due to sedimentation; proposals sent to Union jal shakti ministry under DRIP. — Attributed to irrigation minister Uttam Kumar Reddy; no independent documentation cited.
विश्लेषकों की राय राय
पालमूरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए भूमि अधिग्रहण तेज करने का मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का निर्देश केवल प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से अहम पुराने महबूबनगर क्षेत्र पर कांग्रेस के दावे को मजबूत करने की कोशिश है। पालमूरु से आने वाले मुख्यमंत्री के लिए सिंचाई का वादा पूरा करना निजी और पार्टी की विश्वसनीयता, दोनों की परीक्षा है। साथ ही मंत्री जूपल्ली कृष्ण राव और उत्तम कुमार रेड्डी के बयान पिछली बीआरएस सरकार पर जिम्मेदारी डालने का स्पष्ट नैरेटिव गढ़ते हैं, जिसमें 90% काम पूरा होने के दावे को चुनौती दी गई है।
- पुराना महबूबनगर कांग्रेस का मजबूत गढ़ है, इसलिए पीआरएलआईएस पर दिखने वाली प्रगति को सरकार राजनीतिक पूंजी की तरह देख रही है।
- 'बीआरएस राज में पालमूरु के साथ अन्याय' वाला ढांचा दोहरा काम करता है — देरी पर बचाव और विपक्ष पर हमला।
- भूमि अधिग्रहण स्थानीय स्तर पर हमेशा संवेदनशील होता है; धन और लंबित बिल जारी करने का आश्वासन प्रभावित किसानों की नाराजगी और विधायकों पर दबाव कम करने की कोशिश है।
- करीब एक लाख करोड़ रुपये की जरूरत सार्वजनिक रूप से बताना लागत और रफ्तार पर अपेक्षाएं पहले से तय करता है, जो धीमी प्रगति के लिए राजनीतिक कवच बनता है।
- जूराला को डीआरआईपी में शामिल करने के लिए केंद्र को पत्र लिखना वित्तीय बोझ बांटने का कदम है, जो केंद्र-राज्य टकराव का मुद्दा भी बन सकता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि मंत्रियों-विधायकों के क्षेत्रीय दौरों से भूमि अधिग्रहण में ठोस प्रगति होती है या नहीं, मुआवजे की मांगें किस रूप में उठती हैं, और बीआरएस इस आरोप का कितना तीखा जवाब देती है।
यह खबर परियोजना पूरी होने की समयसीमा, धन जारी करने का कार्यक्रम, शेष अधिग्रहण की मात्रा या मंत्रियों के आरोपों पर बीआरएस की प्रतिक्रिया स्थापित नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
पालमूरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना (पीआरएलआईएस) तेलंगाना के सूखाग्रस्त दक्षिणी जिलों—पूर्ववर्ती महबूबनगर क्षेत्र—के लिए एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसका लक्ष्य लगभग 12.3 लाख एकड़ की सिंचाई के साथ पेयजल और औद्योगिक जलापूर्ति भी है। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा की और भूमि अधिग्रहण युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद मंत्रियों ने पिछली बीआरएस सरकार पर परियोजना में कोई ठोस काम न करने का आरोप लगाया, जबकि बीआरएस नेताओं का दावा रहा है कि 90% काम पूरा हो चुका है। सरकार जुराला परियोजना को केंद्र की डीआरआईपी योजना में शामिल करने का भी प्रयास कर रही है।
मुख्य तथ्य
- मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने मंगलवार को पूर्ववर्ती महबूबनगर जिले की सिंचाई परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए।
- मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव के अनुसार पीआरएलआईएस पूरा करने में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता हो सकती है।
- जुपल्ली ने कहा कि पंप, मोटर और सर्ज पूल के लिए 35,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, पर 10 वर्षों में वास्तव में केवल 25,000 करोड़ रुपये खर्च हुए।
- 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने परियोजना दो वर्ष में पूरी करने की घोषणा की थी।
- पीआरएलआईएस का लक्ष्य दक्षिण तेलंगाना के सूखाग्रस्त जिलों में लगभग 12.3 लाख एकड़ की सिंचाई है।
- पीआरएलआईएस के चरण-1 में छह जिलों—नागरकुर्नूल, महबूबनगर, नारायणपेट, विकाराबाद, रंगारेड्डी और नलगोंडा—के 1,226 गांवों को पेयजल आपूर्ति की परिकल्पना है।
- गाद जमने से जुराला जलाशय की भंडारण क्षमता आठ टीएमसी से नीचे रह गई है; डीआरआईपी के तहत सहायता के प्रस्ताव जल शक्ति मंत्रालय को भेजे गए हैं।
- जुपल्ली ने दावा किया कि तुम्मिडिहट्टी में 160 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जिसका बड़ा हिस्सा गुरुत्वाकर्षण प्रवाह से लिया जा सकता है।
समयरेखा
- 2015तत्कालीन मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने पीआरएलआईएस दो वर्ष में पूरा करने की घोषणा की।
- लगभग 10 वर्ष की अवधिपंप, मोटर, सर्ज पूल के लिए 35,000 करोड़ रुपये आवंटन के मुकाबले 25,000 करोड़ रुपये ही खर्च हुए (जुपल्ली का दावा)।
- मंगलवार (समीक्षा बैठक)मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पीआरएलआईएस समेत परियोजनाओं की समीक्षा की, भूमि अधिग्रहण के लिए धन और लंबित बिलों के भुगतान का आश्वासन दिया।
- बैठक के बादमंत्री जुपल्ली कृष्ण राव और वकिटी श्रीहरि ने मीडिया से बात की; सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने जुराला को डीआरआईपी में शामिल करने के लिए केंद्र को पत्र लिखने की जानकारी दी।
किसका दाँव
- मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी — भूमि अधिग्रहण तेज कराना, धन जारी करना और पालमूरु क्षेत्र की परियोजनाएं पूरी करने की राजनीतिक जिम्मेदारी।
- मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव व वकिटी श्रीहरि — पालमूरु क्षेत्र की सिंचाई परियोजनाओं पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें और प्रगति की निरंतर निगरानी।
- सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी — पीआरएलआईएस पूरा करने, जुराला को डीआरआईपी में शामिल कराने और परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का दायित्व।
- बीआरएस (पिछली सरकार) — 90% काम पूरा होने के दावे पर सवाल; परियोजना में देरी और अनुमतियों में विफलता के आरोप।
- छह जिलों के किसान व निवासी (नागरकुर्नूल, महबूबनगर, नारायणपेट, विकाराबाद, रंगारेड्डी, नलगोंडा) — 12.3 लाख एकड़ सिंचाई तथा 1,226 गांवों में पेयजल आपूर्ति।
- केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय — जुराला परियोजना को डीआरआईपी के तहत सहायता देने पर निर्णय।
- भूमि गंवाने वाले भू-स्वामी व ठेकेदार — मुआवजा, भूमि अधिग्रहण की गति और लंबित बिलों का भुगतान।
क्यों अहम है
पीआरएलआईएस दक्षिण तेलंगाना के सूखाग्रस्त क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जलापूर्ति की रीढ़ मानी जाती है, और इसकी देरी सीधे लाखों एकड़ की खेती तथा 1,226 गांवों की पेयजल आपूर्ति से जुड़ी है। भूमि अधिग्रहण और वित्तीय अनुशासन—अनुमानित 1 लाख करोड़ रुपये की लागत—यह तय करेंगे कि परियोजना कब पूरी होती है। साथ ही यह कांग्रेस और बीआरएस के बीच क्षेत्रीय "अन्याय" के राजनीतिक विवाद का केंद्र भी बन गई है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- पीआरएलआईएस = पालमूरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना; लक्ष्य लगभग 12.3 लाख एकड़ सिंचाई।
- पीआरएलआईएस चरण-1: छह जिलों के 1,226 गांवों को पेयजल—नागरकुर्नूल, महबूबनगर, नारायणपेट, विकाराबाद, रंगारेड्डी, नलगोंडा।
- डीआरआईपी (Dam Rehabilitation and Improvement Project) केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से संबंधित; तेलंगाना ने जुराला परियोजना को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव भेजा।
- गाद के कारण जुराला जलाशय की भंडारण क्षमता आठ टीएमसी से नीचे।
- अन्य प्राथमिकता परियोजनाएं जिनके समतुल्य पालमूरु को रखा गया: देवादुला, एसएलबीसी और सीतारामा।
- जुपल्ली के अनुसार तुम्मिडिहट्टी में 160 टीएमसी पानी उपलब्ध, बड़ा हिस्सा गुरुत्व प्रवाह से संभव।
मेन्स दृष्टिकोण
तेलंगाना की पालमूरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं की तीन क्लासिक अड़चनों को उजागर करती है—भूमि अधिग्रहण में देरी, वित्तीय अंतराल और वैधानिक अनुमतियों का अभाव। स्रोत के अनुसार 2015 में दो साल में पूरा करने की घोषणा के बावजूद 10 वर्षों में पंप-मोटर-सर्ज पूल के लिए आवंटित 35,000 करोड़ रुपये में से 25,000 करोड़ ही खर्च हुए, मुख्य नहरों व वितरण नेटवर्क की अनुमतियां नहीं मिलीं, और अब पूरा करने की अनुमानित आवश्यकता करीब 1 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है; यह दर्शाता है कि हेडवर्क्स पर खर्च के बावजूद वितरण तंत्र के बिना सिंचाई लाभ जमीन पर नहीं उतरता। दूसरी ओर जुराला जलाशय की क्षमता गाद से आठ टीएमसी से नीचे आना जलाशय प्रबंधन और बांध सुरक्षा की चुनौती है, जिसके लिए राज्य ने केंद्रीय डीआरआईपी सहायता मांगी है। आगे का रास्ता स्रोत में संकेतित उपायों तक सीमित है: क्षेत्रीय दौरों के साथ युद्धस्तर पर भूमि अधिग्रहण, अधिग्रहण के लिए धन जारी करना, लंबित बिलों का भुगतान, मंत्री-स्तरीय निरंतर समीक्षा व निगरानी, और डीआरआईपी के तहत गाद-निकासी से भंडारण क्षमता व परिचालन क्षमता में सुधार। साथ ही यह प्रश्न भी उठता है कि परियोजना की प्रगति पर परस्पर विरोधी राजनीतिक दावों (90% पूर्णता बनाम "कोई ठोस काम नहीं") के बीच पारदर्शी, स्वतंत्र प्रगति-लेखा कैसे सुनिश्चित हो।
मुख्य शब्द
- पीआरएलआईएस
- पालमूरु रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना—दक्षिण तेलंगाना में लगभग 12.3 लाख एकड़ सिंचाई तथा पेयजल व औद्योगिक जलापूर्ति के लक्ष्य वाली परियोजना।
- डीआरआईपी
- Dam Rehabilitation and Improvement Project—बांध सुधार से जुड़ी केंद्रीय योजना, जिसके तहत तेलंगाना ने जुराला के लिए सहायता मांगी है।
- टीएमसी
- जल मात्रा मापने की इकाई (हजार मिलियन घन फुट), जलाशय भंडारण और उपलब्ध पानी बताने में प्रयुक्त।
- सर्ज पूल
- लिफ्ट सिंचाई प्रणाली का ढांचा, जिसके लिए पंप और मोटर के साथ धन आवंटित किया गया था।
- गुरुत्व प्रवाह (ग्रैविटी फ्लो)
- पंपिंग के बिना ढलान से पानी बहाकर लाना; जुपल्ली के अनुसार तुम्मिडिहट्टी के अधिकांश पानी के लिए संभव।
- पूर्ववर्ती महबूबनगर जिला
- पुनर्गठन से पहले का बड़ा जिला, जिसके क्षेत्र को पालमूरु क्षेत्र कहा जाता है और जहां ये परियोजनाएं केंद्रित हैं।
अभ्यास प्रश्न
- बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण और वैधानिक अनुमतियों की देरी लागत वृद्धि कैसे करती है? पीआरएलआईएस के उदाहरण से समझाइए।
- जलाशयों में गाद जमाव बांध सुरक्षा और भंडारण क्षमता को कैसे प्रभावित करता है, और डीआरआईपी जैसी योजनाएं इसमें क्या भूमिका निभा सकती हैं?
- सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई परियोजनाओं के हेडवर्क्स पर व्यय बनाम नहर-वितरण नेटवर्क पर व्यय—किसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए और क्यों?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।