दस योजनाओं के विज्ञापन खर्च का आधा जीएसटी बचत उत्सव पर: आरटीआई
सरकार ने 2023-24 से 2025-26 के बीच दस प्रमुख योजनाओं के प्रचार पर ₹54.5 करोड़ खर्च किए। यह जानकारी बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए आरटीआई जवाबों और राज्यसभा में रखे गए आंकड़ों से सामने आई। इसमें से आधी राशि, ₹27.1 करोड़, सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच जीएसटी बचत उत्सव पर खर्च हुई। पीएम इंटर्नशिप योजना को ₹12.6 करोड़ और पीएम विश्वकर्मा को ₹7.4 करोड़ मिले। दस में आठ योजनाओं को आवंटन मिला। कुल खर्च में प्रिंट मीडिया की हिस्सेदारी 58.8 प्रतिशत रही।
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The government spent ₹54.5 crore publicising 10 key schemes between 2023-24 and 2025-26. — Figure appears in source, attributed to RTI replies and data presented in the Rajya Sabha.
- GST Bachat Utsav received ₹27.1 crore between September and December 2025, the largest share. — Figure appears in source and is internally consistent with the stated half of ₹54.5 crore.
- PM Internship Scheme got ₹12.6 crore (Oct 2024–Mar 2026) and PM Vishwakarma ₹7.4 crore (Sep 2023–Mar 2026). — Both figures appear in source, drawn from the same RTI responses; no independent verification possible.
- Print media took 58.8% of ad spend, electronic 19.5%, digital 14.6%, outdoor 7.2%. — Breakdown appears in source and sums to 100.1%, a rounding-level discrepancy.
- Higher allocation to GST Bachat Utsav had political undertones, says Paritosh Joshi. — Clearly attributed opinion of a named consultant, not a verified fact.
विश्लेषकों की राय राय
आरटीआई के आंकड़े बताते हैं कि दस योजनाओं के कुल प्रचार खर्च का आधा हिस्सा एक ही अभियान — जीएसटी बचत उत्सव — पर, और वह भी सिर्फ चार महीनों में गया; यह केंद्र की संदेश-प्राथमिकता को साफ दिखाता है। रणनीति यह दिखती है कि योजनाओं का सामान्य प्रचार नहीं, बल्कि त्योहारी मौसम में यह संदेश सबसे ऊंची आवाज़ में पहुंचाना था कि कर कटौती से सीधे लोगों की जेब में बचत हुई। ₹54.5 करोड़ कुल विज्ञापन खर्च का मात्र 2.6 प्रतिशत है, इसलिए रकम बड़ी नहीं है — राजनीति इस बात में है कि यह छोटी रकम कहां लगाई गई।
- दस में से आठ योजनाओं को ही आवंटन मिला और दो को कुछ नहीं, जिससे लगता है कि प्रचार संसाधन कुछ चुनिंदा फ्लैगशिप संदेशों पर केंद्रित रहे।
- जीएसटी बचत उत्सव पर चार महीनों में ₹27.1 करोड़ यह संकेत देता है कि सरकार उपभोक्ता को सीधे महसूस होने वाले लाभ के राजनीतिक मूल्य को पहचानती है।
- पीएम इंटर्नशिप योजना (₹12.6 करोड़) और पीएम विश्वकर्मा (₹7.4 करोड़) का दूसरे-तीसरे स्थान पर होना युवाओं और कारीगर वर्ग पर परोक्ष फोकस की ओर इशारा करता है।
- प्रिंट की 58.8 प्रतिशत हिस्सेदारी और डिजिटल की केवल 14.6 प्रतिशत यह दिखाती है कि छोटे शहरों और ग्रामीण पाठकों तक पहुंच पर भरोसा बना हुआ है।
- विपक्ष इसे 'काम से ज्यादा प्रचार' कह सकता है, जबकि सरकार का तर्क मजबूत रहेगा कि बड़े कर सुधार की जानकारी देना वैध जनसूचना जिम्मेदारी है — खबर में किसी पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राज्यसभा में विपक्ष इन आंकड़ों पर आगे सवाल उठाता है या नहीं, और जीएसटी राजस्व की तस्वीर स्थिर होने के बाद यह खर्च पैटर्न जारी रहता है या नहीं।
यह खबर बताती है कि कितना और कहां खर्च हुआ, लेकिन यह साबित नहीं करती कि खर्च के फैसले राजनीतिक मंशा से हुए, या अभियान ने मतदाता धारणा या उपभोग को बदला।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार अपनी प्रमुख योजनाओं का प्रचार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (सीबीसी) के माध्यम से प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और आउटडोर मीडिया पर कराती है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाबों और राज्यसभा में रखे गए आंकड़ों से पता चला है कि 2023-24 से 2025-26 के बीच दस प्रमुख योजनाओं के प्रचार पर ₹54.5 करोड़ खर्च हुए। इसमें आधी राशि जीएसटी बचत उत्सव को गई, जो जीएसटी दर स्लैब के युक्तिकरण (जीएसटी 2.0) से उपभोक्ताओं को होने वाली बचत के प्रचार के लिए चलाया गया 100 दिन का राष्ट्रव्यापी अभियान है।
मुख्य तथ्य
- 2023-24 से 2025-26 के बीच दस प्रमुख योजनाओं के प्रचार पर सरकार ने कुल ₹54.5 करोड़ खर्च किए।
- जीएसटी बचत उत्सव को सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 के बीच ₹27.1 करोड़ आवंटित हुए — कुल का लगभग आधा।
- पीएम इंटर्नशिप योजना पर अक्टूबर 2024 से मार्च 2026 के बीच ₹12.6 करोड़ खर्च — दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा।
- पीएम विश्वकर्मा योजना को सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच ₹7.4 करोड़ मिले।
- ट्रैक की गई दस योजनाओं में आठ को विज्ञापन आवंटन मिला, दो को कुछ भी नहीं मिला।
- मीडिया-वार हिस्सेदारी: प्रिंट 58.8%, इलेक्ट्रॉनिक 19.5%, डिजिटल 14.6% और आउटडोर 7.2%।
- यह ₹54.5 करोड़ सरकार के कुल विज्ञापन खर्च का 2.6 प्रतिशत है।
- जीएसटी बचत उत्सव 100 दिन का राष्ट्रव्यापी आउटरीच अभियान है जो जीएसटी 2.0 से उपभोक्ता बचत को रेखांकित करता है।
समयरेखा
- सितंबर 2023 से मार्च 2026पीएम विश्वकर्मा योजना के प्रचार पर ₹7.4 करोड़ का आवंटन।
- अक्टूबर 2024 से मार्च 2026पीएम इंटर्नशिप योजना के विज्ञापन पर ₹12.6 करोड़ खर्च।
- सितंबर 2025 से दिसंबर 2025जीएसटी बचत उत्सव अभियान को ₹27.1 करोड़ आवंटित।
- 28 सितंबर 2026आरटीआई जवाबों के आधार पर बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट प्रकाशित (अंतिम अद्यतन 11:33 बजे रात)।
किसका दाँव
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय / सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन — प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और आउटडोर मीडिया पर सरकारी योजनाओं के विज्ञापन का प्रबंधन और आवंटन।
- केंद्र सरकार — जीएसटी दर युक्तिकरण जैसे सुधारों को जनता तक पहुंचाना और ठोस लाभ दिखाने की राजनीतिक आवश्यकता।
- उपभोक्ता — जीएसटी 2.0 से होने वाली बचत की जानकारी; त्योहारी मौसम में खर्च के फैसले।
- प्रिंट व अन्य मीडिया उद्योग — कुल विज्ञापन खर्च का 58.8% प्रिंट को मिला; राजस्व का स्रोत।
- पीएम इंटर्नशिप व पीएम विश्वकर्मा के लाभार्थी — योजना की जागरूकता और पहुंच इन्हीं प्रचार आवंटनों पर निर्भर।
- व्यापारी वर्ग — पारितोष जोशी के अनुसार व्यापारियों ने भी अपने अभियान चलाए, यानी प्रचार संयुक्त प्रयास रहा।
क्यों अहम है
सरकारी विज्ञापन खर्च का वितरण बताता है कि किस नीति को प्राथमिकता से जनता तक पहुंचाया जा रहा है — दस योजनाओं के कुल प्रचार बजट का आधा एक ही अभियान, जीएसटी बचत उत्सव, को जाना इसका संकेत है। आरटीआई और राज्यसभा में रखे आंकड़ों से ऐसी जानकारी सामने आना सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण है। साथ ही यह सवाल उठता है कि जिन दो योजनाओं को कोई आवंटन नहीं मिला, उनकी जागरूकता कैसे बनेगी।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- जीएसटी बचत उत्सव: जीएसटी 2.0 के तहत दर स्लैब युक्तिकरण से उपभोक्ता बचत पर 100 दिन का राष्ट्रव्यापी अभियान।
- सरकारी विज्ञापन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (सीबीसी) के जरिए जारी होते हैं।
- 2023-24 से 2025-26: दस योजनाओं के प्रचार पर ₹54.5 करोड़; जीएसटी बचत उत्सव को ₹27.1 करोड़।
- मीडिया हिस्सेदारी: प्रिंट 58.8%, इलेक्ट्रॉनिक 19.5%, डिजिटल 14.6%, आउटडोर 7.2%।
- पीएम इंटर्नशिप योजना ₹12.6 करोड़ (दूसरा स्थान), पीएम विश्वकर्मा ₹7.4 करोड़ (तीसरा स्थान)।
- यह जानकारी आरटीआई जवाबों तथा राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों से सामने आई।
मेन्स दृष्टिकोण
सरकारी योजनाओं का प्रचार लोककल्याणकारी राज्य में सूचना-प्रसार का वैध साधन है, क्योंकि लाभार्थी तक जानकारी न पहुंचे तो योजना निष्प्रभावी रहती है; लेकिन आवंटन का असमान वितरण नीतिगत प्राथमिकताओं और राजनीतिक संकेतन दोनों को उजागर करता है। आरटीआई के जवाबों के अनुसार 2023-24 से 2025-26 के बीच दस योजनाओं के प्रचार पर हुए ₹54.5 करोड़ में से आधा, ₹27.1 करोड़, केवल जीएसटी बचत उत्सव को गया, जबकि दो योजनाओं को कुछ नहीं मिला। मीडिया विशेषज्ञ पारितोष जोशी का तर्क है कि शुद्ध जीएसटी राजस्व में गिरावट के राजनीतिक निहितार्थ थे और त्योहारी मौसम में कर कटौती को जनता के लिए ठोस कदम के रूप में प्रस्तुत करने के लिए अधिकतम दृश्यता चाही गई; उनके अनुसार व्यापारियों के अपने अभियानों के कारण यह प्रचार संयुक्त प्रयास था। आगे का रास्ता पारदर्शिता में है — मंत्रालयवार व योजनावार विज्ञापन व्यय का नियमित सार्वजनिक प्रकटीकरण, आवंटन का लाभार्थी-आधारित तर्कसंगत वितरण, तथा प्रिंट पर 58.8% निर्भरता के बजाय लक्षित वर्ग की मीडिया आदतों के अनुरूप संतुलित माध्यम-मिश्रण, ताकि प्रचार व्यय का परिणाम जागरूकता में मापा जा सके।
मुख्य शब्द
- जीएसटी बचत उत्सव
- जीएसटी दर स्लैब के युक्तिकरण से उपभोक्ता बचत के प्रचार के लिए चलाया गया 100 दिन का राष्ट्रव्यापी 'बचत उत्सव' अभियान।
- जीएसटी 2.0
- स्रोत के अनुसार जीएसटी दर स्लैब को युक्तिसंगत बनाने वाले सुधार, जिनसे उपभोक्ता बचत को अभियान में रेखांकित किया गया।
- सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (सीबीसी)
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई, जो प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और आउटडोर माध्यमों पर सरकारी विज्ञापन संचालित करती है।
- सूचना का अधिकार (आरटीआई)
- वह कानूनी व्यवस्था जिसके तहत नागरिक सरकारी सूचना मांग सकते हैं; इसी के जवाबों से यह विज्ञापन व्यय सामने आया।
- पीएम इंटर्नशिप योजना
- केंद्र की योजना जिसके प्रचार पर अक्टूबर 2024 से मार्च 2026 के बीच ₹12.6 करोड़ खर्च हुए।
- पीएम विश्वकर्मा योजना
- केंद्र की योजना जिसे सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच ₹7.4 करोड़ का विज्ञापन आवंटन मिला।
अभ्यास प्रश्न
- सरकारी योजनाओं के प्रचार पर सार्वजनिक धन के व्यय को कैसे उचित ठहराया जा सकता है? दस योजनाओं के ₹54.5 करोड़ व्यय के वितरण के आलोक में परीक्षण कीजिए।
- आरटीआई और संसद में रखे गए उत्तर सरकारी व्यय की जवाबदेही को कैसे मजबूत करते हैं? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।
- जीएसटी दर युक्तिकरण जैसे कर सुधारों के लिए व्यापक जनसंचार अभियान क्यों आवश्यक माने जाते हैं, और उनके संभावित राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।