मेल बैलट पर रोक की ट्रंप की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यावधि चुनावों के लिए मेल बैलट पर पाबंदी लगाने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील खारिज कर दी, जबकि मतदान पहले ही शुरू हो चुका है। फैसले से राज्य वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया के तहत मेल बैलट भेजते रह सकेंगे, जो कुल डाले गए मतों का लगभग एक तिहाई हैं। बहुमत ने कारण नहीं बताए; जस्टिस सैमुअल अलीटो और क्लेरेंस थॉमस ने असहमति जताई। योजना में एक समान लिफाफा और ऑनलाइन पोर्टल पर मतदाता सूची देना अनिवार्य था।
स्रोत
France 24 · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The US Supreme Court on Monday rejected Trump's bid to restrict mail ballots for the midterm elections. — Attributed to the court's order as reported by France 24 with AP; majority gave no reasoning, typical of emergency docket.
- Justices Samuel Alito and Clarence Thomas publicly dissented; Kavanaugh agreed restrictions should not apply to the midterms. — Named in the source with a direct quote from Alito's dissent.
- Mail ballots have accounted for nearly a third of votes cast. — Figure appears in source; no originating dataset cited.
- A whistleblower report said postal requirements could stop millions of mail ballots being sent due to portal and bar code faults. — Attributed to an unnamed whistleblower report; specifics unverifiable by the desk.
- Trump falsely blamed mail voting for his 2020 loss though he has used it himself, including this year. — Source states this as established context; no separate citation given.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव (कांग्रेस के नियंत्रण के लिए) से पहले ट्रंप प्रशासन ने डाक से मतदान (मेल बैलट) पर नई शर्तें लगाने की कोशिश की थी। योजना के तहत राज्यों को एक समान लिफाफा अपनाना और पात्र मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन पोर्टल पर देना अनिवार्य होता, और शर्तें न मानने वाले राज्यों को बैलट पहुंचाने से डाक सेवा (पोस्टल सर्विस) इनकार कर सकती थी। डेमोक्रेटिक राज्य अधिकारियों और मतदान अधिकार समूहों ने इसे अदालत में चुनौती दी और निचली अदालतों ने योजना पर रोक लगा दी। सोमवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन की अपील खारिज कर दी, जबकि कई राज्यों में मतदान पहले ही शुरू हो चुका है।
मुख्य तथ्य
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्यावधि चुनावों के लिए मेल बैलट पर पाबंदी लगाने की ट्रंप की अपील खारिज कर दी, जबकि मतदान पहले ही शुरू हो चुका था।
- मेल बैलट अमेरिका में डाले गए कुल मतों का लगभग एक तिहाई हिस्सा हैं।
- बहुमत ने अपने संक्षिप्त आदेश में कारण नहीं बताए, जो आपातकालीन डॉकेट में सामान्य है; जस्टिस सैमुअल अलीटो और क्लेरेंस थॉमस ने सार्वजनिक रूप से असहमति जताई।
- ट्रंप प्रशासन की योजना में राज्यों के लिए एक समान लिफाफा शैली अपनाना और पात्र मतदाताओं की सूची ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करना अनिवार्य था।
- अलबामा, नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन ने पिछले सप्ताह मतदाताओं को मेल बैलट भेजना शुरू कर दिया था, जबकि नई प्रणाली सक्रिय नहीं थी।
- एक व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट के अनुसार पोर्टल ठीक से बना नहीं था और एक बार कोड की गलती से बैलट का पूरा बैच रद्द हो सकता था, जिससे लाखों मेल बैलट कभी न भेजे जाने की आशंका थी।
- जस्टिस ब्रेट कवानॉ ने माना कि मध्यावधि चुनावों के लिए प्रतिबंध लागू नहीं होने चाहिए, पर संकेत दिया कि भविष्य में मामला आने पर वे प्रशासन के पक्ष में फैसला दे सकते हैं।
- निचली अदालतों ने योजना रोकी थी, जिसमें ट्रंप द्वारा ही नामित एक न्यायाधीश का प्रारंभिक निषेधाज्ञा (प्रिलिमिनरी इंजंक्शन) भी शामिल था।
समयरेखा
- 2020ट्रंप जो बाइडन से चुनाव हारे और उन्होंने झूठा आरोप लगाया कि हार का कारण मेल वोटिंग है।
- इस वर्ष (हाल ही में)ट्रंप ने स्वयं भी डाक से मतदान की पद्धति से वोट डाला।
- फैसले से पहले का सप्ताहअलबामा, नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन ने मतदाताओं को मेल बैलट भेजना शुरू किया, नई प्रणाली सक्रिय नहीं थी।
- फैसले से पहलेडेमोक्रेटिक राज्य अधिकारियों व मतदान अधिकार समूहों की चुनौती पर निचली अदालतों ने योजना रोकी; प्रशासन सुप्रीम कोर्ट गया और एक प्रारंभिक प्रक्रियात्मक जीत मिली।
- सोमवारसुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की अपील खारिज की; अलीटो और थॉमस असहमत।
- नवंबरकांग्रेस के नियंत्रण के लिए निर्णायक मध्यावधि चुनाव।
किसका दाँव
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप — चुनाव अखंडता के नाम पर मेल बैलट प्रतिबंध लगाना चाहते थे; फैसला उनके लिए स्पष्ट पराजय।
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट — एक बार फिर तीव्र राजनीतिक विवाद के केंद्र में; योजना की वैधता पर निर्णय नहीं किया, केवल लागू होने से रोका।
- राज्य चुनाव अधिकारी (जैसे वाशिंगटन के स्टीव हॉब्स, कोलोराडो की जेना ग्रिसवोल्ड) — चुनाव से कुछ सप्ताह पहले पूरी प्रक्रिया बदलना असंभव था; अब पुरानी प्रक्रिया से मतदान जारी रह सकेगा।
- मतदाता, विशेषकर वाशिंगटन, ओरेगन और कोलोराडो जैसे पूर्णतः डाक-मतदान वाले राज्यों के — लाखों मेल बैलट न भेजे जाने की आशंका टली; मतदान का अधिकार सुरक्षित।
- अमेरिकी पोस्टल सर्विस — अलीटो के अनुसार डाक नियमन का व्यापक अधिकार; योजना के तहत असहमत राज्यों को बैलट पहुंचाने से इनकार कर सकती थी।
- डेमोक्रेटिक राज्य अधिकारी व मतदान अधिकार समूह — तर्क था कि राष्ट्रपति को चुनाव नियम तय करने का संवैधानिक अधिकार नहीं; अदालत में उनका पक्ष प्रभावी रहा।
क्यों अहम है
डाक से मतदान अमेरिका में करीब एक तिहाई मतों का माध्यम है, इसलिए चुनाव के मुहाने पर नियम बदलने से लाखों मतदाता प्रभावित हो सकते थे। फैसला यह भी रेखांकित करता है कि चुनाव संचालन के नियम बनाने में संघीय कार्यपालिका और राज्यों के अधिकार-क्षेत्र का प्रश्न अनसुलझा है, क्योंकि अदालत ने योजना की वैधता पर निर्णय नहीं दिया। कवानॉ की टिप्पणी संकेत देती है कि यह विवाद भविष्य में फिर अदालत पहुंच सकता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मेल बैलट प्रतिबंध की ट्रंप की अपील खारिज की; असहमत न्यायाधीश—सैमुअल अलीटो और क्लेरेंस थॉमस।
- अमेरिका में मेल बैलट कुल डाले गए मतों का लगभग एक तिहाई हैं।
- योजना की दो प्रमुख शर्तें: एक समान लिफाफा शैली और पात्र मतदाता सूची ऑनलाइन पोर्टल पर जमा करना।
- पूर्णतः डाक से मतदान वाले राज्य: वाशिंगटन, ओरेगन और (लगभग पूर्णतः) कोलोराडो।
- फैसले से पहले मेल बैलट भेजना शुरू करने वाले राज्य: अलबामा, नॉर्थ कैरोलिना, विस्कॉन्सिन।
- नवंबर के मध्यावधि चुनाव अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण के लिए निर्णायक हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
यह मामला चुनाव प्रशासन में संघीय कार्यपालिका और राज्यों के अधिकार-क्षेत्र के टकराव तथा न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि पोस्टल सर्विस पर संघीय नियंत्रण उसे मेल बैलट के रख-रखाव के नियम तय करने का अधिकार देता है और अनुपालन संभव था; दूसरी ओर डेमोक्रेटिक राज्य अधिकारियों व मतदान अधिकार समूहों ने कहा कि राष्ट्रपति के पास चुनाव नियम बनाने की संवैधानिक शक्ति नहीं है और यह कदम बड़े चुनाव की पूर्वसंध्या पर डाक मतदान को व्यावहारिक रूप से समाप्त कर देता। व्यावहारिक पक्ष भी निर्णायक रहा—अधिकारियों के अनुसार कुछ सप्ताह में पूरी प्रणाली बदलना असंभव था, और व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट ने पोर्टल की खामियों तथा एक बार कोड त्रुटि से पूरे बैच के रद्द होने की आशंका जताई। सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्रतिबंध लागू होने से रोका, वैधता पर निर्णय नहीं किया, जिससे विवाद खुला है। आगे का रास्ता स्पष्ट कानूनी परिभाषा, चुनाव से पर्याप्त पहले किसी भी प्रक्रियात्मक बदलाव की समय-सीमा, तकनीकी बुनियादी ढांचे का परीक्षण और साक्ष्य-आधारित बहस पर निर्भर करता है—स्रोत के अनुसार मेल बैलट में धोखाधड़ी के लगभग कोई साक्ष्य नहीं हैं।
मुख्य शब्द
- मेल बैलट
- डाक से भेजा और भरा जाने वाला मतपत्र; अमेरिका में कुल मतों का लगभग एक तिहाई।
- मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म)
- राष्ट्रपति कार्यकाल के बीच होने वाले चुनाव; इस बार नवंबर में कांग्रेस के नियंत्रण के लिए।
- आपातकालीन डॉकेट
- सुप्रीम कोर्ट की त्वरित सुनवाई प्रक्रिया, जिसमें आमतौर पर संक्षिप्त आदेश दिए जाते हैं और कारण नहीं बताए जाते।
- प्रिलिमिनरी इंजंक्शन (प्रारंभिक निषेधाज्ञा)
- अदालत का अंतरिम आदेश जो मुकदमे के दौरान किसी नीति को लागू होने से रोकता है।
- यूएस पोस्टल सर्विस
- अमेरिकी डाक सेवा; अलीटो के अनुसार इसके पास डाक नियमन का व्यापक अधिकार है।
- व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट
- अंदरूनी सूचनादाता की रिपोर्ट, जिसने पोर्टल की खामियों और बैलट रद्द होने के जोखिम को उजागर किया।
अभ्यास प्रश्न
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के मेल बैलट संबंधी फैसले के आलोक में चुनाव संचालन पर संघीय कार्यपालिका और राज्यों के अधिकार-क्षेत्र के प्रश्न की चर्चा करें।
- चुनाव की पूर्वसंध्या पर मतदान प्रक्रिया में बड़े बदलाव लागू करने के प्रशासनिक और लोकतांत्रिक जोखिम क्या हैं? स्रोत में उल्लिखित उदाहरणों से समझाइए।
- 'चुनाव अखंडता' के दावों और साक्ष्य के अभाव के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए—मतदाता विश्वास और मताधिकार की सुगमता के संदर्भ में विश्लेषण करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
