राजाम में रेशम कीट पालन केंद्र नौ वर्षों से बंद
विजयनगरम जिले के राजाम की वस्त्रपुरी कॉलोनी में 10 अक्टूबर 1993 को तत्कालीन मंत्री धर्माना प्रसाद राव ने रेशम कीट पालन केंद्र का उद्घाटन किया था, जो नौ साल पहले पूरी तरह बंद हो गया। दो एकड़ में बने इस केंद्र में एक समय करीब 30 लोग काम करते थे। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति, नई नियुक्तियां न होना और धन की कमी से केंद्र बेकार पड़ा है। कुएं की मोटर चोरी हो गई और जमीन पर अतिक्रमण की खबर है। सेरीकल्चर एडी सालमान राजू ने कहा कि धन मिलने पर मरम्मत होगी।
स्रोत
Andhra Jyothy (ఆంధ్రజ్యోతి) · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The silkworm rearing centre in Rajam's Vastrapuri Colony was opened on October 10, 1993 by then Youth Welfare, Sports and Self-Employment Minister Dharmana Prasada Rao on two acres allotted by the government. — Specific date, minister's name and land extent appear in the source; no document cited.
- The centre shut down completely nine years ago after staff retirements, non-replacement of posts and lack of funds. — Stated as reporting in the source; no official attribution given.
- Valuable land is being encroached, private persons are building beyond the fence and the well's motor was stolen. — Unattributed claims based on the reporter's account; no police or revenue source quoted.
- Around 70 officers and staff once worked in the sericulture department across the district; staff are now shared between Vizianagaram and Parvathipuram Manyam districts. — Attributed to Sericulture Assistant Director Salman Raju.
- Officials have reported the matter to the government and will take up repairs once funds are sanctioned. — Attributed quote from Salman Raju; forward-looking statement, not verifiable.
विश्लेषकों की राय राय
यह किसी जर्जर इमारत की कहानी से ज़्यादा एक छोटी क्षेत्रीय मूल्य-श्रृंखला के ढहने की कहानी है। दो एकड़ ज़मीन, भवन, कुआं और बोरवेल के रूप में लगी सार्वजनिक पूंजी नौ साल से शून्य प्रतिफल दे रही है, और मोटर चोरी तथा अतिक्रमण के चलते संपत्ति का मूल्य भी घट रहा है। भर्ती और रखरखाव पर होने वाला तुलनात्मक रूप से छोटा खर्च बचाने की कीमत शहतूत की खेती, किसान आय और दिहाड़ी रोज़गार जैसे बड़े आर्थिक लाभ के रूप में चुकानी पड़ी दिखती है।
- खबर के मुताबिक यहां करीब 30 लोग काम करते थे और जिले भर में सेरीकल्चर विभाग में लगभग 70 कर्मचारी थे — यानी नुकसान मुख्य रूप से ग्रामीण रोज़गार और तकनीकी नौकरियों के रूप में सामने आया है।
- नुकसान उठाने वाले साफ हैं: राजाम, रेगिडी, संतकविटि और वंगरा के किसान, जिन्होंने शहतूत पत्तों का बाज़ार और तकनीकी मदद दोनों खोए; लाभ केवल ज़मीन पर अतिक्रमण करने वालों को दिख रहा है।
- रेशम कीट पालन श्रम-प्रधान सहायक गतिविधि है जो छोटी जोत से भी सालभर नकद आय दे सकती है, इसलिए इसके ठप होने से छोटे और सीमांत किसानों का एक आय-विविधीकरण विकल्प बंद हो गया।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जगह नई भर्ती न करना वेतन बिल घटाने का सस्ता रास्ता लगता है, पर अब मरम्मत के लिए नई पूंजी चाहिए, इसलिए वह बचत भ्रम साबित हो सकती है।
- "निधि मंजूर होते ही मरम्मत" वाला आधिकारिक रुख बताता है कि पुनरुद्धार का लागत-लाभ गणित अब भी तय नहीं है, जबकि ज़मीन बचाना तत्काल प्राथमिकता बन गया है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सरकार वाकई धन मंजूर करती है या अतिक्रमण इतना बढ़ जाता है कि दो एकड़ ज़मीन व्यवहारिक रूप से हाथ से निकल जाए — और इस बीच सर्वे, सीमांकन तथा बाड़बंदी जैसे कम खर्चीले कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
यह खबर न तो हुए आर्थिक नुकसान को आंकड़ों में बताती है, न कितने किसान प्रभावित हुए या पुनरुद्धार पर कितना खर्च आएगा, और न ही यह स्पष्ट करती है कि रेशम बाज़ार में आए व्यापक बदलावों की इस गिरावट में कितनी भूमिका रही।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के राजाम कस्बे की वस्त्रपुरी कॉलोनी में सरकार ने दो एकड़ भूमि पर रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर) केंद्र स्थापित किया था, जिसका उद्घाटन 10 अक्टूबर 1993 को तत्कालीन युवजन कल्याण, खेल एवं स्वयं-रोजगार मंत्री धर्माना प्रसाद राव ने किया था। कई वर्षों तक यह केंद्र ठीक चला और राजाम, रेगिडि, संतकविटि तथा वंगरा क्षेत्रों में शहतूत (मल्बरी) की खेती को बढ़ावा मिला। आधुनिक सुविधाओं का अभाव, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्थान पर नई नियुक्तियां न होना और धन की कमी के कारण नौ साल पहले यह केंद्र पूरी तरह बंद हो गया। अब भवन बेकार पड़ा है, कुएं की मोटर चोरी हो गई और बाड़ पार कर निजी निर्माण व अतिक्रमण की शिकायतें हैं।
मुख्य तथ्य
- राजाम की वस्त्रपुरी कॉलोनी में रेशम कीट पालन केंद्र का उद्घाटन 10 अक्टूबर 1993 को तत्कालीन मंत्री धर्माना प्रसाद राव ने किया।
- सरकार ने इस केंद्र के लिए दो एकड़ भूमि आवंटित की, जिसमें शहतूत (मल्बरी) की खेती हेतु स्थान, एक कुआं और एक बोरवेल शामिल था।
- पूर्ण संचालन के दौरान केंद्र में लगभग 30 लोग काम करते थे; जिले भर में सेरीकल्चर विभाग में करीब 70 अधिकारी व कर्मचारी थे।
- शुरुआती दिनों में एक सुपरवाइजर, इंस्पेक्टर और चार तकनीकी सहायक तैनात थे; अधिकांश सेवानिवृत्त हो गए या स्थानांतरित हो गए।
- केंद्र नौ वर्ष पहले पूरी तरह बंद हो गया; ठेका कर्मचारी हटा दिए गए और रिक्त पदों पर नई भर्ती नहीं हुई।
- केंद्र में उगाई गई शहतूत की पत्तियां सीतमपेट ले जाकर बेची जाती थीं।
- कुएं की मोटर चोरी हो गई; कुछ निजी व्यक्ति बाड़ पार कर निर्माण कर रहे हैं और स्थानीय लोग भवन का निजी उपयोग कर रहे हैं।
- सेरीकल्चर एडी (सहायक निदेशक) सालमान राजू के अनुसार मामला सरकार को रिपोर्ट किया गया है, धन मंजूर होते ही मरम्मत शुरू होगी।
समयरेखा
- 10 अक्टूबर 1993तत्कालीन युवजन कल्याण, खेल एवं स्वयं-रोजगार मंत्री धर्माना प्रसाद राव ने राजाम में रेशम कीट पालन केंद्र का उद्घाटन किया।
- उद्घाटन के बाद कई वर्षकेंद्र ठीक चला, लगभग 30 लोग कार्यरत रहे; राजाम, रेगिडि, संतकविटि, वंगरा में मल्बरी खेती को प्रोत्साहन मिला।
- क्रमशः (वर्ष स्रोत में नहीं)कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए या स्थानांतरित हुए, ठेका कर्मचारी हटाए गए, नियुक्तियां नहीं हुईं।
- नौ वर्ष पहलेकेंद्र पूरी तरह बंद हो गया।
- 20 सितंबर 2026 (रिपोर्ट की तिथि)केंद्र झाड़ियों से घिरा, मोटर चोरी, भूमि अतिक्रमण की स्थिति सामने आई; एडी ने मरम्मत का आश्वासन दिया।
किसका दाँव
- क्षेत्र के किसान (राजाम, रेगिडि, संतकविटि, वंगरा) — केंद्र बंद होने से मल्बरी खेती और रेशम पालन का प्रोत्साहन व तकनीकी सहायता समाप्त।
- स्थानीय गरीब व श्रमिक — पहले केंद्र से रोजगार मिलता था; अब यह अवसर खत्म।
- सेरीकल्चर विभाग, विजयनगरम — गंभीर कर्मचारी कमी; विजयनगरम व पार्वतीपुरम मन्यम जिलों के बीच कर्मचारियों का समायोजन करना पड़ रहा है।
- सालमान राजू, एडी, सेरीकल्चर — केंद्र का पुनरुद्धार, भूमि संरक्षण और मल्बरी खेती को प्राथमिकता देने की योजना बनाने की जिम्मेदारी।
- राज्य सरकार — धन मंजूरी, रिक्त पदों पर भर्ती और दो एकड़ मूल्यवान सरकारी भूमि की सुरक्षा।
- जिला प्रशासन — अतिक्रमण रोकने और केंद्र की निगरानी सुनिश्चित करने का दायित्व।
क्यों अहम है
रेशम पालन ग्रामीण क्षेत्रों में कम भूमि वाले किसानों और गरीबों के लिए पूरक आय और रोजगार का स्रोत है; सरकारी केंद्र बीज, तकनीकी सलाह और मल्बरी खेती के प्रोत्साहन की रीढ़ होते हैं। राजाम केंद्र का नौ वर्षों से बंद रहना दिखाता है कि पूंजीगत निवेश के बाद स्टाफिंग और रखरखाव की उपेक्षा से सार्वजनिक परिसंपत्ति बेकार हो जाती है। साथ ही सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और उपकरण चोरी शासन-निगरानी की कमजोरी को उजागर करती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- राजाम रेशम कीट पालन केंद्र: विजयनगरम जिला, आंध्र प्रदेश; वस्त्रपुरी कॉलोनी; क्षेत्र दो एकड़।
- उद्घाटन तिथि: 10 अक्टूबर 1993; उद्घाटनकर्ता: तत्कालीन मंत्री धर्माना प्रसाद राव (युवजन कल्याण, खेल, स्वयं-रोजगार)।
- सेरीकल्चर = रेशम कीट पालन; मल्बरी (शहतूत) रेशम कीट का मुख्य आहार।
- केंद्र से एकत्र मल्बरी पत्तियां सीतमपेट में बेची जाती थीं।
- प्रभावित मल्बरी खेती क्षेत्र: राजाम, रेगिडि, संतकविटि, वंगरा।
- स्रोत के अनुसार सेरीकल्चर कर्मचारी विजयनगरम और पार्वतीपुरम मन्यम जिलों के बीच समायोजित किए जा रहे हैं।
मेन्स दृष्टिकोण
राजाम का रेशम कीट पालन केंद्र कृषि-आधारित ग्रामीण उद्योग में 'संस्थागत क्षय' का उदाहरण है: 1993 में दो एकड़ भूमि, भवन, कुआं और बोरवेल के साथ शुरू हुआ केंद्र तीन दशक बाद इसलिए बंद पड़ा है क्योंकि बदलती परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक सुविधाएं नहीं जोड़ी गईं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के स्थान पर नई भर्ती नहीं हुई, ठेका कर्मचारी हटा दिए गए और रखरखाव के लिए धन नहीं आया। इसके परिणाम बहुआयामी हैं — राजाम, रेगिडि, संतकविटि और वंगरा में मल्बरी खेती को मिलने वाला प्रोत्साहन खत्म हुआ, गरीबों का रोजगार घटा, कुएं की मोटर चोरी हो गई और निगरानी के अभाव में मूल्यवान सरकारी भूमि पर बाड़ पार कर निर्माण व अतिक्रमण हो रहा है। आगे की राह में तीन बातें जरूरी दिखती हैं: विभागीय रिक्तियों को भरकर वास्तविक पर्यवेक्षण बहाल करना (स्रोत के अनुसार तैनात कर्मचारी मौके पर नहीं दिखते), सरकार से मरम्मत के लिए निधि मंजूर कराना जैसा सेरीकल्चर एडी ने कहा है, और भूमि संरक्षण के साथ मल्बरी खेती को प्राथमिकता देकर केंद्र को पुनर्जीवित करना। व्यापक सबक यह है कि ग्रामीण उद्योग की बुनियादी संरचना बनाने से अधिक कठिन उसे चालू रखना है।
मुख्य शब्द
- सेरीकल्चर (रेशम कीट पालन)
- रेशम कीटों को पालकर रेशम उत्पादन करने वाली कृषि-आधारित गतिविधि; इसके लिए सरकारी विभाग व केंद्र सहायता देते हैं।
- मल्बरी (शहतूत) सागु
- शहतूत की खेती, जिसकी पत्तियां रेशम कीटों का आहार होती हैं; केंद्र इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित करता था।
- एडी, सेरीकल्चर
- सेरीकल्चर विभाग का सहायक निदेशक; विजयनगरम में यह पद सालमान राजू संभाल रहे हैं।
- एएसवो / तकनीकी सहायक
- केंद्र में तैनात किए गए पर्यवेक्षी व तकनीकी कर्मचारी, जिनकी उपस्थिति स्रोत के अनुसार मौके पर नहीं दिखती।
- वस्त्रपुरी कॉलोनी, राजाम
- विजयनगरम जिले का वह स्थान जहां 1993 में दो एकड़ में रेशम कीट पालन केंद्र स्थापित किया गया।
अभ्यास प्रश्न
- ग्रामीण रोजगार और पूरक आय के स्रोत के रूप में रेशम पालन के महत्व का परीक्षण कीजिए। राजाम केंद्र के उदाहरण से सरकारी कृषि-संस्थाओं के क्षय के कारण स्पष्ट कीजिए।
- "सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण आसान, संचालन कठिन है।" रिक्त पदों, निधि की कमी और निगरानी के अभाव के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए।
- सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकने और बंद पड़े कृषि-उद्योग केंद्रों के पुनरुद्धार के लिए जिला प्रशासन कौन-कौन से कदम उठा सकता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
