न्यायाधिकरण सदस्यों को एक माह विस्तार पर केंद्र का रुख मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से निर्देश लेने को कहा कि नए न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम के तहत नई नियुक्तियां होने तक सेवानिवृत्त हो रहे न्यायाधिकरण सदस्यों को एक माह तक कार्य जारी रखने की अनुमति दी जाए या नहीं। "हम ऐसी स्थिति नहीं चाहते जहां न्यायाधिकरण निष्क्रिय हो जाएं," सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि को जवाब के लिए एक दिन दिया। केंद्र ने बताया कि 16 न्यायाधिकरणों में 248 सदस्य पात्र पाए गए, 229 को विस्तार आदेश जारी हुए।

स्रोत

Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

#supreme court#tribunals#tribunal reforms act#judiciary#appointments

डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Supreme Court asked Attorney General R Venkataramani to take instructions on a one-month extension for retiring tribunal members. — Attributed in source to court proceedings before a bench headed by CJI Surya Kant; matter posted for Wednesday.
  • 248 members serving in 16 tribunals were found eligible to continue; extension orders issued to 229, with 19 in process. — Figures appear in source, attributed to the Centre's submission to the court last week.
  • Tribunals Reforms Act 2026 provides a five-year tenure and maximum age of 70 (67 in some cases). — Stated in source without direct citation of the statutory provision; internally consistent.
  • Supreme Court struck down the Tribunal Reforms Act 2021 in November 2025, citing 'legislative override'. — Source quotes the judgment's reasoning; no case citation given beyond reference to the Madras Bar Association case of July 2021.
  • The 2026 Act creates a National Tribunals Commission headed by a former SC judge or retired HC chief justice. — Described in source as following the court's direction; no source document cited.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

ऊपर से यह प्रशासनिक तकनीकी मामला लगता है, पर असल में यह ट्रिब्यूनल पर नियंत्रण को लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच वर्षों से चल रही रस्साकशी का ताजा अध्याय है। सुप्रीम कोर्ट के 2021 कानून को रद्द करने के बाद संसद द्वारा राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग सहित 2026 का कानून लाना अदालत के लिए रणनीतिक जीत दिखता है। लेकिन एक महीने की सामूहिक अवधि-वृद्धि पर केंद्र की आपत्ति बताती है कि वह नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी रफ्तार अपने हाथ में रखना चाहता है।

  • 2021 के कानून को "विधायी अतिक्रमण" कहकर रद्द करने के बाद 2026 का कानून आना संकेत देता है कि इस मुद्दे पर पहल कार्यपालिका से न्यायपालिका की ओर खिसकी है।
  • बेंच की यह टिप्पणी कि वह ट्रिब्यूनल को निष्क्रिय होते नहीं देखना चाहती, दर्शाती है कि अदालत रिक्तियों के दबाव के औजार बनने के प्रति सतर्क है।
  • अटॉर्नी जनरल का यह तर्क कि तात्कालिक व्यवस्थाएं नई नियुक्तियों में अड़चन हैं, दोनों तरह से पढ़ा जा सकता है — गति बढ़ाने की मंशा, और नियुक्ति के अपने अधिकार की रक्षा।
  • 248 पात्र सदस्य और 229 को आदेश जारी — ये आंकड़े रिकॉर्ड पर रखकर केंद्र अदालत और आलोचकों को यह राजनीतिक जवाब दे रहा है कि वह टाल नहीं रहा।
  • याचिकाकर्ताओं की चेतावनी कि कार्यकाल या आयु सीमा पार कर चुके सदस्यों को हटाने से एनजीटी जैसी संस्थाओं का कामकाज प्रभावित होगा, पर्यावरण बनाम उद्योग विवादों के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।

किस पर नज़र रखें — बुधवार को अटॉर्नी जनरल का जवाब और यह कि केंद्र बेंच द्वारा मांगा गया "निश्चित आश्वासन" देता है या नहीं; एनटीसी के गठन और उसके सदस्यों के चयन की रफ्तार तय करेगी कि यह टकराव कितना तीखा होगा।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि रिक्तियां जानबूझकर या किसी राजनीतिक मंशा से बनी हुई हैं, न ही एनटीसी के गठन की स्थिति या नई नियुक्तियों की समयसीमा स्पष्ट करती है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल्स) में सदस्यों की सेवानिवृत्ति और नई नियुक्तियों के मुद्दे की सुनवाई कर रहा है। नवंबर 2025 में कोर्ट ने न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को रद्द कर दिया था, यह कहते हुए कि उसने मद्रास बार एसोसिएशन मामले (जुलाई 2021) में रद्द किए गए प्रावधानों को ही "फिर से पैक" कर दिया था। इसके बाद संसद ने पिछले माह न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2026 पारित किया, जिसमें राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC) का प्रावधान है। नई नियुक्तियों में देरी के कारण न्यायाधिकरणों के निष्क्रिय होने की आशंका पैदा हुई है।

मुख्य तथ्य

  • सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि से निर्देश लेने को कहा कि सेवानिवृत्त हो रहे सदस्य एक माह या नई नियुक्तियों तक कार्य जारी रख सकें या नहीं।
  • पीठ की अध्यक्षता सीजेआई सूर्य कांत ने की; इसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे।
  • केंद्र ने बताया कि न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2026 के तहत 16 न्यायाधिकरणों के 248 सदस्य सेवा जारी रखने के पात्र पाए गए।
  • 229 व्यक्तियों को विस्तार आदेश जारी हो चुके हैं, 19 आदेश जारी होने की प्रक्रिया में हैं।
  • 2026 अधिनियम में पांच वर्ष का कार्यकाल और अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष (कुछ मामलों में 67) का प्रावधान है।
  • कोर्ट ने पहले सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को 8 सितंबर तक कार्य जारी रखने की अनुमति दी थी; यह अवधि पिछले सप्ताह समाप्त हो गई।
  • नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को रद्द किया, चार वर्ष का कार्यकाल और 50 वर्ष की न्यूनतम प्रवेश आयु को असंवैधानिक ठहराया।
  • 2026 अधिनियम के तहत NTC का अध्यक्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश या सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश होगा, साथ में दो न्यायिक और दो तकनीकी सदस्य (25 वर्ष से अधिक विशेषज्ञ अनुभव)।

समयरेखा

  1. जुलाई 2021मद्रास बार एसोसिएशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरण संबंधी प्रावधानों को रद्द किया।
  2. नवंबर 2025सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को रद्द किया और राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग गठित करने का निर्देश दिया।
  3. पिछला माहसंसद ने न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2026 पारित किया, जिसमें NTC का प्रावधान है।
  4. 8 सितंबरकोर्ट द्वारा सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को कार्य जारी रखने की दी गई अनुमति की अंतिम तिथि।
  5. पिछला सप्ताहविस्तार अवधि समाप्त; केंद्र को शीघ्र नई नियुक्तियां सुनिश्चित करने का निर्देश; 248 पात्र सदस्यों की जानकारी दी गई।
  6. मंगलवारबार एसोसिएशनों ने कामकाज प्रभावित होने की बात कही; कोर्ट ने AG को निर्देश लेने के लिए एक दिन दिया।
  7. बुधवारमामले की अगली सुनवाई निर्धारित।

किसका दाँव

  • सुप्रीम कोर्ट (सीजेआई सूर्य कांत की पीठ) — न्यायाधिकरणों को निष्क्रिय होने से बचाना और नियुक्तियों की निश्चित गारंटी सुनिश्चित करना।
  • केंद्र सरकार / अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि — तदर्थ व्यवस्थाएं नहीं चाहती, क्योंकि उनका कहना है कि इससे नई नियुक्ति प्रक्रिया में बाधा आती है।
  • सेवानिवृत्त हो रहे न्यायाधिकरण सदस्य व अध्यक्ष — कार्यकाल विस्तार या सेवा समाप्ति; 248 पात्र, 229 को विस्तार आदेश।
  • न्यायाधिकरणों के बार एसोसिएशन — सदस्यों की सेवानिवृत्ति से कुछ न्यायाधिकरणों का कामकाज प्रभावित; अंतरिम विस्तार की मांग।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) — याचिकाकर्ताओं के अनुसार कार्यकाल/आयु सीमा पूरी कर चुके सदस्यों को हटाने से NGT का कामकाज खतरे में।
  • राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC) — चयन, प्रदर्शन समीक्षा, शिकायत जांच और आंकड़े संकलन के जरिये पारदर्शी व स्वतंत्र न्यायाधिकरण व्यवस्था।

क्यों अहम है

न्यायाधिकरण कर, पर्यावरण, कंपनी और सेवा विवादों जैसे विशेषीकृत मामलों का निपटारा करते हैं; सदस्यों के अभाव में उनके निष्क्रिय होने से वादियों को न्याय मिलने में देरी होगी। यह मामला विधायी शक्ति और न्यायिक समीक्षा के बीच टकराव—"विधायी ओवरराइड"—तथा न्यायाधिकरणों की कार्यपालिका से स्वतंत्रता के सवाल को भी सामने रखता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में रद्द किया; आधार—मद्रास बार एसोसिएशन मामला, जुलाई 2021।
  • न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2026: कार्यकाल पांच वर्ष, अधिकतम आयु 70 वर्ष (कुछ मामलों में 67)।
  • रद्द किए गए प्रावधान: चार वर्ष का कार्यकाल और 50 वर्ष की न्यूनतम प्रवेश आयु।
  • राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC): अध्यक्ष—पूर्व SC न्यायाधीश/सेवानिवृत्त HC मुख्य न्यायाधीश, 2 न्यायिक + 2 तकनीकी सदस्य।
  • केंद्र के अनुसार 16 न्यायाधिकरणों में 248 सदस्य पात्र, 229 को विस्तार आदेश, 19 प्रक्रियाधीन।
  • वर्तमान सुनवाई: सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी मोहना की पीठ; अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि।

मेन्स दृष्टिकोण

न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों का संकट संस्थागत और संवैधानिक दोनों स्तरों पर है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 को इस आधार पर रद्द किया कि उसने मद्रास बार एसोसिएशन (जुलाई 2021) में असंवैधानिक ठहराए गए चार वर्ष के कार्यकाल और 50 वर्ष की न्यूनतम प्रवेश आयु को "विधायी ओवरराइड" के रूप में पुनर्जीवित किया, बिना संवैधानिक दोष हटाए। परिणामस्वरूप संसद ने 2026 अधिनियम पारित किया, जिसमें पांच वर्ष का कार्यकाल, 70 (कहीं 67) वर्ष की आयु सीमा और राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग का प्रावधान है—जिसे कोर्ट ने "अनिवार्य संरचनात्मक सुरक्षा" कहा था। परंतु संक्रमण-काल में सदस्यों की सेवानिवृत्ति से कुछ न्यायाधिकरणों, विशेषकर NGT, का कामकाज प्रभावित हुआ है; बार एसोसिएशनें अंतरिम विस्तार चाहती हैं, जबकि केंद्र तदर्थ व्यवस्था को नई नियुक्ति प्रक्रिया में बाधा मानता है। आगे का रास्ता यही है कि विस्तार को नई नियुक्तियों के साथ सह-समाप्तिकारी (coterminous) रखते हुए NTC के जरिये खोज-सह-चयन समिति से समयबद्ध, पारदर्शी नियुक्तियां पूरी की जाएं, ताकि न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता और निरंतरता दोनों बनी रहें।

मुख्य शब्द

न्यायाधिकरण (Tribunal)
विशेषीकृत विवादों के निपटारे के लिए गठित अर्ध-न्यायिक निकाय, जिसमें न्यायिक व तकनीकी सदस्य होते हैं।
न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2026
संसद द्वारा पिछले माह पारित कानून; पांच वर्ष कार्यकाल, 70/67 वर्ष आयु सीमा और NTC का प्रावधान।
राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC)
न्यायाधिकरण अध्यक्षों/सदस्यों का चयन, प्रदर्शन समीक्षा, शिकायत जांच और आंकड़े संकलन करने वाला निकाय।
विधायी ओवरराइड
न्यायालय द्वारा असंवैधानिक ठहराए गए प्रावधान को विधायिका द्वारा दोबारा लागू करने का प्रयास।
मद्रास बार एसोसिएशन मामला (जुलाई 2021)
वह निर्णय जिसमें कोर्ट ने न्यायाधिकरण सदस्यों के कार्यकाल व आयु से जुड़े प्रावधानों को रद्द किया।
स्टॉप-गैप/को-टर्मिनस व्यवस्था
अस्थायी विस्तार जो नई नियुक्तियां होते ही स्वतः समाप्त हो जाए।

अभ्यास प्रश्न

  1. न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग की भूमिका का परीक्षण कीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे "अनिवार्य संरचनात्मक सुरक्षा" क्यों कहा?
  2. "विधायी ओवरराइड" की अवधारणा को न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम 2021 के रद्दीकरण के संदर्भ में समझाइए।
  3. सदस्यों की सेवानिवृत्ति से न्यायाधिकरणों के निष्क्रिय होने का जोखिम न्याय तक पहुंच को कैसे प्रभावित करता है? अंतरिम विस्तार और समयबद्ध नियुक्ति के बीच संतुलन पर चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

अगली ख़बरकेरल में बुजुर्गों की देखभाल पर विधेयक का मसौदा तैयार →
← सभी ख़बरें