राष्ट्रीय चेन्नई

मद्रास हाईकोर्ट ने 50 पार विदेशी महिला को आईवीएफ की अनुमति दी

मद्रास हाईकोर्ट ने 50 वर्ष से अधिक आयु की एक विदेशी नागरिक को चेन्नई में आईवीएफ उपचार जारी रखने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने कहा कि एआरटी अधिनियम, 2021 में महिलाओं के लिए 50 और पतियों के लिए 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा संसद ने भारत में जीवन प्रत्याशा के आधार पर तय की थी। ब्रिटेन में बसे श्रीलंकाई दंपति ने 2013 में भ्रूण फ्रीज कराए थे। 30 जून 2026 को मेडिकल वीजा मिला, पर वे 7 सितंबर को पहुंचे, जब 24 अगस्त को वह 50 वर्ष पूरे कर चुकी थीं। कोर्ट ने 18 दिन की देरी को मानवीय भूल कहा।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Madras High Court permitted a foreign national aged above 50 to undergo IVF treatment in Chennai. — Attributed in source to an order by Justice D. Bharatha Chakravarthy.
  • The ART (Regulation) Act, 2021 fixes an upper age limit of 50 for women and 55 for husbands. — Figures appear in the source as stated by the judge; statutory text not independently verified.
  • The petitioners are Sri Lankan nationals settled in the U.K. who froze embryos in 2013. — Attributed to submissions of advocate Shabnam Banu recorded by the court.
  • The woman obtained a medical visa on June 30, 2026, landed on September 7, 2026, and turned 50 on August 24, 2026, missing the limit by 18 days. — Dates and the 18-day figure appear in the source as recorded by the judge.
  • The court allowed use of an oocyte from a third-party donor below 50 years of age. — Stated in the source as part of the court's order.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

पहली नज़र में यह चिकित्सा-कानूनी फैसला है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह सवाल फिर खड़ा करता है कि संसद द्वारा तय की गई सीमा को अदालत कितना ढीला कर सकती है। जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने माना कि 2021 का एआरटी कानून विदेशी नागरिकों पर भी लागू होता है, फिर भी कहा कि भारत की जीवन प्रत्याशा और परिस्थितियों को आधार बनाकर तय की गई 50/55 की सीमा इस याचिकाकर्ता पर लागू करना ज़रूरी नहीं — यह चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, पर कड़े नियमन के पक्षधरों के लिए असहज। आदेश को बार-बार "असाधारण परिस्थितियों" और 18 दिन की मानवीय भूल तक सीमित बताकर अदालत ने संभावित राजनीतिक विवाद को पहले ही सीमित करने की कोशिश की है।

  • संसद द्वारा तय आयु-सीमा को एक मामले में भी शिथिल करना विधायी मंशा और न्यायिक विवेक की सीमाओं पर पुरानी बहस को फिर हवा देता है।
  • सीमा को "भारतीय परिस्थितियों" पर आधारित बताने से यह राजनीतिक सवाल उठ सकता है कि एक ही कानून के तहत विदेशी चिकित्सा पर्यटकों और भारतीय महिलाओं के साथ व्यवहार अलग-अलग क्यों हो।
  • चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के पक्षधर इसे व्यावहारिक और स्वागतयोग्य नज़ीर बता सकते हैं, जबकि सख़्त एआरटी नियमन चाहने वाले इसे कानून के कमज़ोर पड़ने के रूप में देख सकते हैं।
  • दंपति के श्रीलंकाई मूल और ब्रिटेन में बसने से मामले को प्रवासी आयाम मिलता है, हालांकि अदालत ने इसे केवल निवास और मंशा के तथ्य के रूप में देखा, राजनीतिक कारक के रूप में नहीं।
  • न्यायाधीश का यह ज़ोर कि फैसला "बहुत विशिष्ट तथ्यों" पर आधारित है, इसे सामान्य नज़ीर बनने से बचाने की सचेत कोशिश जान पड़ता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि इस आदेश के खिलाफ अपील होती है या नहीं, और एआरटी कानून की आयु-सीमा में छूट या अपवाद पर नीतिगत स्तर पर कोई चर्चा शुरू होती है या नहीं।

यह खबर सरकार की कोई प्रतिक्रिया, कानून में बदलाव या किसी राजनीतिक दल का रुख स्थापित नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 भारत में आईवीएफ जैसी प्रजनन तकनीकों को नियंत्रित करता है और इसमें महिलाओं के लिए 50 वर्ष तथा पतियों के लिए 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तय है। ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसे एक श्रीलंकाई दंपति चेन्नई के जी.जी. हॉस्पिटल में मेडिकल वीजा पर आईवीएफ उपचार करा रहे थे, लेकिन पत्नी की आयु 50 वर्ष पार होने पर अस्पताल ने अधिनियम के उल्लंघन की आशंका जताई। दंपति ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया, जहां न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने उपचार जारी रखने की अनुमति दी।

मुख्य तथ्य

  • मद्रास हाईकोर्ट ने 50 वर्ष की आयु पार कर चुकी एक विदेशी नागरिक को चेन्नई में आईवीएफ उपचार जारी रखने की अनुमति दी।
  • एआरटी (विनियमन) अधिनियम, 2021 में महिलाओं के लिए 50 और पतियों के लिए 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा निर्धारित है।
  • न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने कहा कि संसद ने यह आयु सीमा भारत में जीवन प्रत्याशा, यहां की जीवन-परिस्थितियों और भारत में जन्म लेने वाले बच्चों के कल्याण को देखते हुए तय की थी।
  • दंपति मूलतः श्रीलंकाई नागरिक हैं, ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसे हैं और बच्चों का पालन-पोषण भी ब्रिटेन में करना चाहते हैं।
  • दंपति ने 2013 में ब्रिटेन में उपचार शुरू किया और भ्रूण फ्रीज कराए, जो 2021 अधिनियम के लागू होने से बहुत पहले था।
  • विदेश में उपचार से गर्भपात होने पर वे 2023 में चेन्नई आए, जहां पत्नी में फाइब्रॉयड पाए गए और सर्जरी की सलाह दी गई।
  • मेडिकल वीजा 30 जून 2026 को मिला, पर वे 7 सितंबर 2026 को चेन्नई पहुंचे, जबकि 24 अगस्त 2026 को पत्नी 50 वर्ष पूरे कर चुकी थीं।
  • कोर्ट ने 18 दिन की देरी को "दुर्भाग्यपूर्ण मानवीय भूल" मानते हुए असाधारण परिस्थिति बताया; प्रस्तावित अंडाणु (ओसाइट) दानकर्ता 50 वर्ष से कम आयु की है।

समयरेखा

  1. 2013दंपति ने ब्रिटेन में आईवीएफ उपचार शुरू किया और भ्रूण फ्रीज कराए।
  2. 2021भारत में सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम लागू हुआ, जिसमें आयु सीमा तय की गई।
  3. 2023विदेश में गर्भपात के बाद दंपति चेन्नई आए; पत्नी में फाइब्रॉयड का निदान, सर्जरी की सलाह और सर्जरी के बाद वे ब्रिटेन लौटे।
  4. 30 जून 2026दंपति को भारत आने के लिए मेडिकल वीजा मिला, जब पत्नी निर्धारित आयु सीमा के भीतर थीं।
  5. 24 अगस्त 2026पहली याचिकाकर्ता (पत्नी) ने 50 वर्ष की आयु पूरी की।
  6. 7 सितंबर 2026दंपति चेन्नई पहुंचे; अस्पताल ने एआरटी अधिनियम के उल्लंघन की आशंका जताई।
  7. 23 सितंबर 2026आदेश की रिपोर्ट प्रकाशित — कोर्ट ने उपचार जारी रखने की अनुमति दी।

किसका दाँव

  • याचिकाकर्ता दंपति (श्रीलंकाई मूल, ब्रिटेन में बसे) — 2013 से चल रहे आईवीएफ प्रयास और फ्रीज किए भ्रूणों के आधार पर संतान प्राप्ति का अवसर।
  • मद्रास हाईकोर्ट / न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती — एआरटी अधिनियम की आयु सीमा की व्याख्या और विशेष परिस्थितियों में राहत देने का न्यायिक विवेक।
  • जी.जी. हॉस्पिटल, चेन्नई (पांचवां प्रतिवादी) — अधिनियम के उल्लंघन के जोखिम से बचाव; न्यायिक आदेश के बिना उपचार जारी रखने पर आशंका।
  • अधिवक्ता शबनम बानू — याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क रखना कि बच्चों का पालन-पोषण ब्रिटेन में होगा।
  • संसद / एआरटी नियामक ढांचा — भारत में जीवन प्रत्याशा व बाल कल्याण के आधार पर तय आयु सीमा का विदेशी नागरिकों पर अनुप्रयोग।
  • मेडिकल टूरिज्म क्षेत्र — विदेशी मरीजों के लिए भारत में एआरटी उपचार की उपलब्धता और नियामक स्पष्टता।

क्यों अहम है

यह आदेश दिखाता है कि एआरटी अधिनियम, 2021 की कठोर आयु सीमा विदेशी नागरिकों पर भी लागू होती है, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में न्यायालय राहत दे सकता है। इससे मेडिकल टूरिज्म के जरिए भारत आने वाले विदेशी मरीजों और कानून के उद्देश्य—भारत में जन्मे बच्चों के कल्याण—के बीच संतुलन का प्रश्न सामने आता है। साथ ही यह वीजा, समय-सीमा और नियामक अनुपालन में मानवीय भूल के कानूनी प्रभाव को भी रेखांकित करता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 — महिलाओं के लिए 50 वर्ष, पतियों के लिए 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा।
  • मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती ने विदेशी नागरिक को आईवीएफ की अनुमति दी।
  • कोर्ट के अनुसार आयु सीमा भारत की जीवन प्रत्याशा व बाल कल्याण के आधार पर तय की गई थी।
  • याचिकाकर्ता: श्रीलंकाई मूल के, ब्रिटेन में बसे दंपति; चेन्नई के जी.जी. हॉस्पिटल में मेडिकल वीजा पर उपचार।
  • महत्वपूर्ण तिथियां: भ्रूण फ्रीज 2013; वीजा 30 जून 2026; 50 वर्ष पूरे 24 अगस्त 2026; भारत आगमन 7 सितंबर 2026।
  • आदेश में अंडाणु (ओसाइट) तृतीय-पक्ष दानकर्ता से लेने की अनुमति; दानकर्ता 50 वर्ष से कम आयु की।

मेन्स दृष्टिकोण

एआरटी अधिनियम, 2021 ने सहायक प्रजनन तकनीक को विनियमित करते हुए महिलाओं के लिए 50 और पतियों के लिए 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा तय की, जिसका आधार—जैसा मद्रास हाईकोर्ट ने रेखांकित किया—भारत में जीवन प्रत्याशा, यहां की जीवन-परिस्थितियां और भारत में जन्म लेकर पलने वाले बच्चों का कल्याण था। प्रस्तुत मामले में विदेशी नागरिक दंपति, जिन्होंने 2013 में ही ब्रिटेन में भ्रूण फ्रीज कराए और 2023 से भारत में उपचार करा रहे थे, समय पर मेडिकल वीजा (30 जून 2026) लेने के बावजूद 18 दिन देर से 7 सितंबर 2026 को पहुंचे, जबकि 24 अगस्त 2026 को पत्नी 50 वर्ष पूरे कर चुकी थीं। कोर्ट ने इसे "दुर्भाग्यपूर्ण मानवीय भूल" से उत्पन्न असाधारण परिस्थिति मानते हुए आयु सीमा लागू न करने की घोषणा की और यह स्पष्ट किया कि आदेश मामले के अत्यंत विशिष्ट तथ्यों—दोनों याचिकाकर्ताओं का विदेशी नागरिक होना, मेडिकल टूरिज्म के तहत केवल तकनीकी सहयोग लेना, और समय-सीमा से मात्र 18 दिन की चूक—पर आधारित है। इससे उठने वाले प्रश्न हैं: क्या भारत-केंद्रित आयु मानदंड विदेशी मरीजों पर यथावत लागू होने चाहिए, और नियामक निश्चितता तथा मानवीय विवेक के बीच संतुलन कैसे बने। आगे का रास्ता यह है कि कानून के उद्देश्य—बाल कल्याण और चिकित्सीय सुरक्षा—की रक्षा करते हुए विदेशी मरीजों व मेडिकल टूरिज्म से जुड़े ऐसे सीमांत मामलों के लिए स्पष्ट प्रशासनिक प्रक्रिया विकसित हो, ताकि हर मामले में न्यायालय जाना अनिवार्य न रहे।

मुख्य शब्द

आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन)
शरीर के बाहर शुक्राणु और अंडाणु के निषेचन से बने भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित करने की प्रजनन तकनीक।
एआरटी (विनियमन) अधिनियम, 2021
भारत में सहायक प्रजनन तकनीक क्लिनिकों व प्रक्रियाओं को विनियमित करने वाला कानून; महिलाओं के लिए 50, पतियों के लिए 55 वर्ष आयु सीमा।
ओसाइट (अंडाणु) दानकर्ता
वह महिला जो निषेचन के लिए अपना अंडाणु देती है; इस मामले में प्रस्तावित दानकर्ता 50 वर्ष से कम आयु की।
भ्रूण फ्रीजिंग
निषेचित भ्रूण को भविष्य में उपयोग के लिए संरक्षित करना; इस दंपति ने 2013 में ब्रिटेन में यह कराया।
फाइब्रॉयड
गर्भाशय में होने वाली गांठें, जिनके कारण पहली याचिकाकर्ता को 2023 में सर्जरी की सलाह दी गई।
मेडिकल टूरिज्म / मेडिकल वीजा
चिकित्सा उपचार के लिए विदेश यात्रा; इसके लिए जारी विशेष वीजा, जो दंपति को 30 जून 2026 को मिला।

अभ्यास प्रश्न

  1. एआरटी (विनियमन) अधिनियम, 2021 में निर्धारित आयु सीमा का औचित्य क्या है और विदेशी नागरिकों के मामले में इसके अनुप्रयोग पर मद्रास हाईकोर्ट के तर्क का मूल्यांकन कीजिए।
  2. क्या प्रजनन अधिकार और बाल कल्याण के बीच संतुलन साधने में वैधानिक आयु सीमा उपयुक्त साधन है? चर्चा कीजिए।
  3. मेडिकल टूरिज्म के संदर्भ में भारत के एआरटी नियामक ढांचे की चुनौतियों और सुधार की दिशाओं पर प्रकाश डालिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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