मानसून की वापसी शुरू, सीजन 10% से अधिक कमी के साथ खत्म होने के आसार

आईएमडी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शनिवार को पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई, जबकि सामान्य तिथि 17 सितंबर है। 1 जून से 19 सितंबर तक देशभर में बारिश में 15% की कमी दर्ज हुई है। बिहार, पंजाब, हरियाणा और सभी पांच प्रायद्वीपीय राज्यों सहित 14 राज्यों में 20% से अधिक कमी है। सीजन 30 सितंबर को 10% से अधिक कमी के साथ समाप्त हो सकता है। खरीफ रकबा 1% और धान लगभग 4% घटा।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Nationwide cumulative rainfall deficit of 15% between June 1 and September 19 — Figure appears in source, attributed to IMD data
  • Monsoon withdrawal began from west Rajasthan on Saturday, against the normal date of September 17 — Attributed to IMD; withdrawal line listed as passing through Ramgarh, Mohangarh, Phalodi and Khajuwala
  • 14 states, including Bihar, Punjab, Haryana and all five peninsular states, have over 20% rain deficit — Stated in source without direct attribution to a named official
  • Season likely to end September 30 with over 10% deficit, a level considered drought — Projection presented in source; no named official quoted for the estimate
  • Overall kharif sown area down just over 1%; paddy down nearly 4% year-on-year — Attributed to acreage data released Friday; source of data not named

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

10% से अधिक कमी के साथ खत्म होने वाला मानसून सिर्फ मौसम का आंकड़ा नहीं, एक राजनीतिक कारक है — क्योंकि बारिश की कमी तेज़ी से खाद्य कीमतों, ग्रामीण आय और राहत की मांगों में बदल जाती है। इस खबर में राज्यवार फैलाव ही इसे राजनीतिक रूप से भारी बनाता है: बिहार, पंजाब, हरियाणा और दक्षिण के सभी पांच राज्यों में पहले ही 20% से ज्यादा कमी है, यानी सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों तरह की सरकारों वाला इलाका। बहस कमी के लिए दोष तय करने से हटकर — जो किसी सरकार के वश में नहीं — उसके नतीजों के प्रबंधन पर आएगी: खरीद, मुआवज़ा, पानी छोड़ना और कीमतों पर नियंत्रण।

  • सूखे जैसी मानी जाने वाली स्तर की राष्ट्रव्यापी कमी विपक्ष को तैयार ग्रामीण संकट का मुद्दा देती है, जबकि सरकारें राहत वितरण और भंडार पर ज़ोर देंगी।
  • धान के रकबे में करीब 4% की गिरावट यहां सबसे संवेदनशील आंकड़ा है, क्योंकि चावल किसान आय और उपभोक्ता महंगाई—दोनों के केंद्र में है।
  • अलग-अलग राजनीतिक दलों के शासन वाले 14 राज्य प्रभावित होने से राहत राशि, जल बंटवारे और फसल नुकसान आंकलन पर केंद्र-राज्य टकराव की आशंका है।
  • खबर रबी सीजन पर भी जोखिम बताती है, यानी राजनीतिक असर इस फसल से आगे अगले बुवाई चक्र तक खिंच सकता है।
  • राजस्थान, पंजाब और सौराष्ट्र-कच्छ से जल्दी वापसी उन कृषि पट्टियों में दबाव बढ़ाती है जहां किसान राजनीति पहले से संगठित है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राहत और मुआवज़े की घोषणाएं कब आती हैं, खाद्य कीमतें थामने के लिए खरीद या निर्यात-भंडारण पर क्या कदम उठते हैं, और प्रभावित राज्य सरकारें केंद्र से सूखा सहायता की मांग कितनी तेज़ी से उठाती हैं।

यह खबर वर्षा और रकबे के आंकड़े तथा आईएमडी का आकलन बताती है, अंतिम फसल उत्पादन नहीं; इसमें किसी सूखा घोषणा, राहत पैकेज, राजनीतिक प्रतिक्रिया या चुनावी असर का कोई उल्लेख नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारत में जून से सितंबर तक चलने वाला दक्षिण-पश्चिम (ग्रीष्मकालीन) मानसून कृषि और जल संसाधनों की रीढ़ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस बार मानसून की वापसी शनिवार को पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई, जबकि सामान्य वापसी तिथि 17 सितंबर है। 1 जून से 19 सितंबर तक देशभर में संचयी बारिश में 15% की कमी दर्ज हुई है और सीजन 30 सितंबर को 10% से अधिक कमी के साथ समाप्त होने के आसार हैं — यह स्तर सूखे के समान माना जाता है। इस कमी को एल नीनो से जोड़ा जा रहा है, जो भारत में कमजोर मानसून से जुड़ा रहता है।

मुख्य तथ्य

  • 1 जून से 19 सितंबर तक देशभर में संचयी बारिश में 15% की कमी दर्ज हुई।
  • मानसून की वापसी शनिवार को पश्चिमी राजस्थान से शुरू हुई, जबकि सामान्य तिथि 17 सितंबर है।
  • शनिवार को वापसी रेखा रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला से गुजरी।
  • आईएमडी के अनुसार अगले तीन-चार दिनों में राजस्थान के और हिस्सों तथा पंजाब व सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ भागों से वापसी के अनुकूल स्थितियां हैं।
  • बिहार, पंजाब, हरियाणा और सभी पांच प्रायद्वीपीय राज्यों सहित 14 राज्यों में 20% से अधिक बारिश की कमी।
  • सीजन 30 सितंबर को कुल 10% से अधिक कमी के साथ समाप्त हो सकता है, जो सूखे का स्तर माना जाता है।
  • शुक्रवार के रकबा आंकड़े: कुल खरीफ बोया क्षेत्र 1% से कुछ अधिक घटा, जल-गहन धान में लगभग 4% की गिरावट।
  • पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी पर निम्न दबाव क्षेत्र और उसके बाद बने अवदाब से अगले सप्ताह पूर्वी भारत व तटीय ओडिशा में अच्छी बारिश संभव।

समयरेखा

  1. 1 जूनमानसून सीजन की संचयी बारिश गणना की शुरुआत; 19 सितंबर तक 15% कमी दर्ज।
  2. 17 सितंबर (सामान्य तिथि)आमतौर पर इस दिन से मानसून की वापसी शुरू होती है।
  3. शनिवार (वापसी शुरू)पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू; वापसी रेखा रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला से गुजरी।
  4. अगले तीन-चार दिनराजस्थान के और हिस्सों, पंजाब तथा सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ भागों से वापसी की अनुकूल स्थिति।
  5. अगला सप्ताहबंगाल की खाड़ी के निम्न दबाव/अवदाब से पूर्वी भारत और तटीय ओडिशा में अच्छी बारिश की संभावना।
  6. 30 सितंबरमानसून सीजन का समापन, 10% से अधिक कुल कमी के साथ खत्म होने के आसार।
  7. 15 अक्टूबरसामान्यतः वापसी की प्रक्रिया पूरी होती है; इसके कुछ दिन बाद प्रायद्वीपीय भारत में शीत (उत्तर-पूर्वी) मानसून की शुरुआत।

किसका दाँव

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) — मानसून की वापसी, वर्षा कमी और आगे की मौसम स्थिति की निगरानी व पूर्वानुमान जारी करना।
  • किसान (खरीफ व रबी) — वर्षा की क्षेत्रीय असमानता और विषम समय से उपज तथा अगले रबी सीजन की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
  • धान उत्पादक — जल-गहन धान का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4% घटा।
  • 14 कमी-ग्रस्त राज्य (बिहार, पंजाब, हरियाणा व पांच प्रायद्वीपीय राज्य आदि) — 20% से अधिक वर्षा कमी से सिंचाई, जल भंडारण और फसल पर दबाव।
  • पूर्वी भारत व तटीय ओडिशा — बंगाल की खाड़ी के अवदाब से अगले सप्ताह अच्छी बारिश की संभावना।

क्यों अहम है

देशव्यापी 10% से अधिक वर्षा कमी वह स्तर है जिसे सूखे के तौर पर देखा जाता है, और इसका असर उपज, जल भंडारण तथा रबी बुवाई पर पड़ सकता है। खरीफ बुवाई कुल मिलाकर ठीक रहने के बावजूद क्षेत्रीय असमानता और बारिश का विषम समय कृषि क्षेत्र को जोखिम में रखता है। धान के रकबे में लगभग 4% गिरावट खाद्य आपूर्ति और कीमतों की दृष्टि से संवेदनशील संकेत है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य वापसी 17 सितंबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक पूरी होती है।
  • इस बार वापसी पश्चिमी राजस्थान से शनिवार को शुरू; वापसी रेखा रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला से गुजरी।
  • 1 जून–19 सितंबर की अवधि में देशव्यापी वर्षा कमी 15%; 14 राज्यों में 20% से अधिक कमी।
  • 10% से अधिक की कुल वर्षा कमी को सूखे के स्तर के रूप में देखा जाता है।
  • एल नीनो: मध्य व पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने की परिघटना, जो भारत में कठोर ग्रीष्म व कमजोर मानसून से जुड़ी है।
  • खरीफ कुल रकबा 1% से कुछ अधिक घटा; धान का रकबा लगभग 4% कम।

मेन्स दृष्टिकोण

2023 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य तिथि (17 सितंबर) के बाद पश्चिमी राजस्थान से वापस लौटना शुरू हुआ, लेकिन 1 जून–19 सितंबर की संचयी वर्षा में 15% कमी और 14 राज्यों में 20% से अधिक कमी दर्शाती है कि वितरण अत्यंत असमान रहा। आईएमडी के अनुमान के अनुसार सीजन 30 सितंबर को 10% से अधिक कमी के साथ समाप्त हो सकता है — वह स्तर जिसे सूखा माना जाता है। इसका प्रमुख कारण स्रोत में एल नीनो बताया गया है, जो मध्य-पूर्वी विषुवतीय प्रशांत की सतह के गर्म होने से जुड़ी परिघटना है और भारत में कमजोर मानसून से जुड़ी रहती है। परिणाम दोहरे हैं: खरीफ बुवाई कुल मिलाकर संतोषजनक रही (कुल रकबा केवल 1% से कुछ अधिक घटा), पर जल-गहन धान में लगभग 4% गिरावट तथा वर्षा के विषम समय व क्षेत्रीय भिन्नता से उपज एवं आगामी रबी बुवाई पर जोखिम बना हुआ है। आगे का रास्ता स्रोत के दायरे में यही संकेत देता है कि बंगाल की खाड़ी के निम्न दबाव/अवदाब से पूर्वी भारत व तटीय ओडिशा में मिलने वाली बारिश तथा मानसून-पश्चात/शीत मानसून पर निगरानी, और कमी-ग्रस्त राज्यों में जल तथा फसल प्रबंधन पर ध्यान आवश्यक है।

मुख्य शब्द

दक्षिण-पश्चिम मानसून
ग्रीष्मकालीन मानसून, जिसकी वापसी सामान्यतः 17 सितंबर से शुरू होकर 15 अक्टूबर तक पूरी होती है।
वापसी रेखा (लाइन ऑफ विदड्रॉअल)
वह रेखा जो दर्शाती है कि मानसून किस क्षेत्र से लौट चुका है; शनिवार को यह रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला से गुजरी।
एल नीनो
मध्य व पूर्वी विषुवतीय प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने की परिघटना, जो भारत में कठोर ग्रीष्म और कमजोर मानसून से जुड़ी है।
खरीफ फसल
ग्रीष्म में बोई जाने वाली फसलें; इस वर्ष कुल रकबा 1% से कुछ अधिक घटा, धान लगभग 4%।
शीत मानसून (प्रायद्वीपीय भारत)
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी पूरी होने के कुछ दिन बाद प्रायद्वीपीय भारत में शुरू होने वाला मानसून।
अवदाब (डिप्रेशन)
निम्न दबाव क्षेत्र से विकसित मौसम प्रणाली; पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में बनी प्रणाली से पूर्वी भारत में बारिश संभव।

अभ्यास प्रश्न

  1. एल नीनो भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून को कैसे प्रभावित करता है? 2023 के मानसून के आंकड़ों के आधार पर परीक्षण कीजिए।
  2. वर्षा की मात्रा से अधिक उसका वितरण और समय कृषि उपज के लिए महत्वपूर्ण क्यों है? खरीफ रकबे और धान के आंकड़ों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
  3. मानसून की वापसी की प्रक्रिया और उसकी सामान्य तिथियां क्या हैं, तथा विलंबित वापसी का रबी सीजन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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