राष्ट्रीय कोलकाता

पीएम विश्वकर्मा के तीन साल, 30 लाख शिल्पकार पंजीकृत

केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय ने कोलकाता के धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में पीएम विश्वकर्मा की तीसरी वर्षगांठ मनाई। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बताया कि 17 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना में 30 लाख लाभार्थी पंजीकृत हुए हैं, जिनमें करीब 24.50 लाख को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण मिला। इंडिया पोस्ट के जरिये 18.15 लाख टूलकिट बांटे गए, तथा 6.18 लाख शिल्पकारों को 5% ब्याज पर एक लाख रुपये तक के 5,297 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 30 lakh beneficiaries registered under PM Vishwakarma; about 24.50 lakh given basic skill training — Attributed in source to Union MSME Minister Jitan Ram Manjhi and repeated by Dr. Rajneesh; figures appear consistently in the text.
  • 18.15 lakh modern toolkits delivered through India Post; 6.18 lakh artisans given loans up to Rs 1 lakh at 5% interest totalling Rs 5,297 crore — Attributed to the Union MSME Minister in the source; not independently verifiable here.
  • Scheme was launched by PM Narendra Modi on 17 September 2023 — Stated twice in source, internally consistent.
  • West Bengal onboarded the scheme in May 2026 and has received more than 7 lakh applications — Date appears in source but is inconsistent with a third-anniversary event; application figure attributed to the Chief Minister — editor must verify.
  • Suvendu Adhikari addressed the event as Chief Minister of West Bengal — Designation as given in the source; no supporting attribution provided — flag for verification.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

पीएम विश्वकर्मा की तीसरी वर्षगांठ दिल्ली की जगह कोलकाता में मनाना — और उस मंच पर केंद्रीय एमएसएमई मंत्रियों, राज्य के मंत्रियों तथा मुख्यमंत्री का साथ बैठना — किसी योजना के जश्न से आगे की बात है; यह बंगाल में केंद्र-राज्य समन्वय के नए दौर का संकेत है। कहानी के मुताबिक राज्य हाल ही में योजना से जुड़ा और वहां सात लाख से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं, यानी दोनों सरकारों के लिए कारीगर जातियों तक सीधा रास्ता खुला है। आंकड़े प्रभावी दिखते हैं, लेकिन 30 लाख पंजीकरण और 6.18 लाख ऋण लाभार्थियों के बीच का अंतर राजनीतिक रूप से कमजोर कड़ी है।

  • वर्षगांठ के लिए कोलकाता का चयन राजनीतिक प्राथमिकता का साफ संकेत है — पूर्वी भारत और खासकर बंगाल पर केंद्र का ध्यान बढ़ा है।
  • एक राज्य सरकार का मंच से केंद्रीय योजना की सराहना करना और अमल में तेजी का भरोसा देना, बंगाल की जानी-पहचानी केंद्र-राज्य तकरार से अलग तस्वीर पेश करता है।
  • बढ़ई, कुम्हार, लोहार, बुनकर जैसी विश्वकर्मा बिरादरियां बिखरी हुई पर स्थानीय स्तर पर असरदार वोट समूह हैं, और आईडी कार्ड, टूलकिट व चेक बांटने का दृश्य सीधे उन्हीं को संबोधित है।
  • दो हजार से अधिक कारीगरों के साथ पंचायत प्रतिनिधियों को बुलाना गांव स्तर पर पहुंच का ढांचा खड़ा करने की रणनीति दिखाता है।
  • 30 लाख पंजीकरण के मुकाबले 6.18 लाख को ऋण मिलना — यही वह आंकड़ा है जिससे विपक्ष "प्रचार ज्यादा, वितरण कम" का तर्क गढ़ सकता है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि बंगाल के सात लाख आवेदन कितनी तेजी से प्रशिक्षण, टूलकिट और ऋण में बदलते हैं — और इसका श्रेय कौन सरकार ज्यादा लेती है।

यह खबर सरकारी कार्यक्रम का विवरण और आधिकारिक आंकड़े ही देती है; न स्वतंत्र सत्यापन, न लाभार्थियों की आय पर वास्तविक असर, और न कोई चुनावी नतीजा इससे साबित होता है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, सस्ता ऋण और बाजार से जोड़ाव देना है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने इस योजना की तीसरी वर्षगांठ कोलकाता के धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में मनाई। पश्चिम बंगाल ने योजना के क्रियान्वयन के लिए हाल ही में इसे अपनाया है और यह राज्य में एमएसएमई मंत्रालय का इस योजना के तहत पहला कार्यक्रम था। स्रोत के अनुसार राज्य में योजना के लिए 7 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

मुख्य तथ्य

  • पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई।
  • देशभर में 30 लाख लाभार्थी योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं।
  • लगभग 24.50 लाख लाभार्थियों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण (Basic Skill Training) मिला है।
  • इंडिया पोस्ट के माध्यम से 18.15 लाख आधुनिक टूलकिट वितरित किए गए।
  • 6.18 लाख विश्वकर्माओं को 5% वार्षिक रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक का ऋण मिला, कुल राशि 5,297 करोड़ रुपये।
  • पश्चिम बंगाल में योजना के तहत 7 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं (मुख्यमंत्री के अनुसार)।
  • स्रोत के अनुसार पश्चिम बंगाल मई 2026 में योजना के क्रियान्वयन के लिए ऑनबोर्ड हुआ।
  • कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के 2000 से अधिक विश्वकर्मा और पंचायत पदाधिकारी शामिल हुए; आईडी/प्रमाणपत्र, टूलकिट और 1 लाख रुपये के चेक बांटे गए।

समयरेखा

  1. 17 सितंबर 2023प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की।
  2. मई 2026 (स्रोत में उल्लिखित)पश्चिम बंगाल पीएम विश्वकर्मा के क्रियान्वयन के लिए ऑनबोर्ड हुआ।
  3. तीसरी वर्षगांठ कार्यक्रम (तिथि स्रोत में नहीं दी गई)कोलकाता के धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में एमएसएमई मंत्रालय ने वर्षगांठ मनाई, प्रदर्शनी का उद्घाटन और लाभ वितरण हुआ।

किसका दाँव

  • पारंपरिक शिल्पकार व कारीगर (विश्वकर्मा) — कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, सस्ता ऋण और बाजार पहुंच के जरिये आजीविका व उद्यम स्थापित करने का अवसर।
  • एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार — योजना का क्रियान्वयन, राज्यों में विस्तार तथा एमएसएमई क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
  • पश्चिम बंगाल सरकार — हाल में ऑनबोर्डिंग के बाद 7 लाख से अधिक आवेदनों पर सुविधात्मक सहायता व समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • इंडिया पोस्ट — आधुनिक टूलकिट की डिलीवरी का माध्यम — 18.15 लाख टूलकिट पहुंचाए गए।
  • बैंक व वित्तीय सेवा विभाग — 5% रियायती ब्याज पर संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना; 5,297 करोड़ रुपये वितरित।
  • महिला उद्यमी — राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे के अनुसार सशक्तीकरण से परिवार, समुदाय और विकसित भारत को मजबूती।

क्यों अहम है

पारंपरिक शिल्पकार अक्सर औपचारिक ऋण, आधुनिक उपकरण और बाजार से कटे रहते हैं; पीएम विश्वकर्मा इन्हें ग्रामीण स्वरोजगार से औपचारिक उद्यम की ओर ले जाने का प्रयास है। तीन साल में 30 लाख पंजीकरण, 18.15 लाख टूलकिट और 5,297 करोड़ रुपये का ऋण इस बदलाव के पैमाने को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल के जुड़ने से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में योजना का दायरा बढ़ता है, जहां शिल्प परंपरा और एमएसएमई संभावनाएं मजबूत हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • पीएम विश्वकर्मा: 17 सितंबर 2023 को शुरू; क्रियान्वयन एमएसएमई मंत्रालय द्वारा।
  • योजना का ध्येय वाक्य: 'सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि'।
  • ऋण सुविधा: 1 लाख रुपये तक, 5% प्रति वर्ष रियायती ब्याज दर।
  • उपलब्धियां: 30 लाख पंजीकरण, 24.50 लाख कौशल प्रशिक्षण, 18.15 लाख टूलकिट, 5,297 करोड़ रुपये ऋण।
  • टूलकिट वितरण का माध्यम: इंडिया पोस्ट।
  • केंद्रीय एमएसएमई मंत्री: जीतन राम मांझी; राज्य मंत्री: शोभा करंदलाजे; सचिव: भरत खेड़ा।

मेन्स दृष्टिकोण

पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरी को औपचारिक उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास है — कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, 5% ब्याज पर 1 लाख रुपये तक का संस्थागत ऋण और बाजार से जोड़ाव इसके चार स्तंभ हैं। तीन वर्षों के आंकड़े (30 लाख पंजीकरण, 24.50 लाख प्रशिक्षित, 18.15 लाख टूलकिट, 6.18 लाख को कुल 5,297 करोड़ रुपये का ऋण) बताते हैं कि पंजीकरण और प्रशिक्षण की गति ऋण वितरण से आगे है, यानी पंजीकरण से वित्तीय समावेशन तक पहुंचने में अंतर बना हुआ है। साथ ही यह योजना केंद्र-राज्य सहयोग पर निर्भर है: पश्चिम बंगाल के देर से ऑनबोर्ड होने और वहां 7 लाख से अधिक लंबित आवेदनों से स्पष्ट है कि राज्य एजेंसियों की सुविधात्मक भूमिका, सत्यापन और आउटरीच निर्णायक है, जिसे मुख्यमंत्री ने तेज करने का आश्वासन दिया। आगे की राह में जिला व पंचायत स्तर पर आउटरीच मजबूत करना, बैंकों व इंडिया पोस्ट के साथ समन्वय, महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना और प्रशिक्षण के बाद बाजार जोड़ाव सुनिश्चित करना शामिल है, ताकि शिल्पकार ग्रामीण स्वरोजगारी से स्थायी उद्यमी बन सकें और 'विकसित भारत' के लक्ष्य में योगदान दें।

मुख्य शब्द

पीएम विश्वकर्मा
17 सितंबर 2023 को शुरू केंद्रीय योजना, जो पारंपरिक शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट, सस्ता ऋण व बाजार सहायता देती है।
एमएसएमई मंत्रालय
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, जो पीएम विश्वकर्मा और अन्य उद्यम संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन करता है।
सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि
पीएम विश्वकर्मा का ध्येय वाक्य, जो कारीगरों की प्रतिष्ठा, क्षमता और आर्थिक उन्नति को दर्शाता है।
बुनियादी कौशल प्रशिक्षण
योजना के तहत दिया जाने वाला प्रारंभिक प्रशिक्षण; लगभग 24.50 लाख लाभार्थियों ने प्राप्त किया।
रियायती ऋण
योजना के तहत 5% वार्षिक ब्याज पर 1 लाख रुपये तक का संस्थागत ऋण; अब तक 5,297 करोड़ रुपये वितरित।
विकसित भारत
प्रधानमंत्री का विकास लक्ष्य, जिसे कार्यक्रम में एमएसएमई व कारीगर सशक्तीकरण से जोड़ा गया।

अभ्यास प्रश्न

  1. पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को ग्रामीण स्वरोजगार से औपचारिक उद्यम की ओर कैसे ले जाती है? तीन वर्षों की उपलब्धियों के आधार पर मूल्यांकन करें।
  2. योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्र-राज्य समन्वय की भूमिका पर पश्चिम बंगाल की हाल की ऑनबोर्डिंग के संदर्भ में चर्चा करें।
  3. पंजीकरण और प्रशिक्षण की तुलना में ऋण वितरण के कम आंकड़े क्या दर्शाते हैं? कारीगरों के वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के उपाय सुझाएं।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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