यूजीएमआरटी ने दुर्लभ पल्सर से विशाल रेडियो फ्लैश खोजे

पुणे से 80 किलोमीटर दूर खोडाद स्थित अपग्रेडेड जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) की मदद से भारत, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के खगोलविदों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने दुर्लभ न्यूट्रॉन तारे पीएसआर जे1227-4853 से माइक्रोसेकंड अवधि के अत्यंत चमकीले रेडियो फ्लैश खोजे हैं। यह पल्सर प्रति सेकंड 592 बार घूमता है और लगभग 174 घंटे की निगरानी में 235 विशाल पल्स मिले। मुख्य लेखक सप्तर्षि सरकार के अनुसार कुछ फ्लैश सामान्य उत्सर्जन से लगभग 1,000 गुना चमकीले थे और सबसे छोटा 1.28 माइक्रोसेकंड का रहा। अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Astronomers using the uGMRT at Khodad, 80 km from Pune, detected microsecond-duration giant radio pulses from PSR J1227-4853. — Attributed to an international team from India, the US, Germany and the UK; study said to be published in The Astrophysical Journal.
  • PSR J1227-4853 is one of only three known transitional millisecond pulsars among more than 3,000 known pulsars. — Attributed to lead author Saptarshi Sarkar in comments to The Indian Express.
  • The pulsar spins 592 times a second; 235 giant pulses were found in about 174 hours of monitoring. — Figures appear in the source text as reported by the research team.
  • Some flashes were nearly 1,000 times brighter than normal emission and the shortest lasted 1.28 microseconds. — Direct quote attributed to Sarkar; not independently verifiable here.
  • The discovery is credited to the uGMRT's sensitivity, microsecond time resolution and long-term monitoring ability. — Attributed to co-author Jayanta Roy, Associate Professor at NCRA.

विश्लेषकों की राय राय

AI टेक्नोलॉजी विश्लेषक

यह खगोल विज्ञान की खबर जितनी है, उतनी ही तकनीक की भी। माइक्रोसेकंड भर चलने वाली स्पंदनों को पकड़ने के लिए संवेदनशीलता, अत्यंत सूक्ष्म समय-विभेदन और विशाल डेटा प्रवाह को छानने वाला बैक-एंड, तीनों ज़रूरी हैं — और यह नतीजा बताता है कि अपग्रेडेड जीएमआरटी इन तीनों में विश्व स्तर पर टिकता है। करीब 174 घंटे की निगरानी से 235 विशाल स्पंदन निकालना हार्डवेयर जितना ही डेटा-पाइपलाइन का कारनामा है।

  • प्रति सेकंड 592 बार घूमते तारे से 1.28 माइक्रोसेकंड की चमक दर्ज करना बेहद तेज़ टाइमिंग इलेक्ट्रॉनिक्स के बिना संभव नहीं।
  • यह अपग्रेड की अहमियत रेखांकित करता है: नया टेलीस्कोप बनाए बिना, रिसीवर, बैंडविड्थ और प्रोसेसिंग को आधुनिक करके मौजूदा ढांचा अनुसंधान की अग्रिम पंक्ति में रह सकता है।
  • दुर्लभ घटनाओं की खोज में असली अड़चन प्रेक्षण समय और डेटा प्रबंधन है, इसलिए वर्षों तक लगातार निगरानी की क्षमता अब टेलीस्कोपों की प्रमुख प्रतिस्पर्धी विशेषता बन गई है।
  • 3,000 से अधिक ज्ञात पल्सारों में यह केवल तीन ट्रांज़िशनल मिलीसेकंड पल्सारों में एक है — संवेदनशीलता बढ़ने पर वस्तुओं की नई उपश्रेणियाँ सामने आने की परिचित प्रवृत्ति इससे मेल खाती है।
  • भारत, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की साझेदारी दिखाती है कि बड़े वैज्ञानिक उपकरण अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही पूरे नतीजे देते हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि यह पल्सार फास्ट रेडियो बर्स्ट जैसी अन्य तीव्र उत्सर्जनों की तुलना के लिए प्रयोगशाला बनता है या नहीं, और माइक्रोसेकंड टाइमिंग तकनीकें अगली पीढ़ी के रेडियो एरे तक कैसे फैलती हैं।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि ये चमक किस भौतिक प्रक्रिया से पैदा होती है या ब्रह्मांड के अन्य रेडियो बर्स्ट से उसका क्या संबंध है — यह सवाल अभी खुला है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पुणे से 80 किलोमीटर दूर खोडाद स्थित अपग्रेडेड जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) का उपयोग करते हुए भारत, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के खगोलविदों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक दुर्लभ न्यूट्रॉन तारे पीएसआर जे1227-4853 से अत्यंत चमकीले, माइक्रोसेकंड अवधि के रेडियो फ्लैश खोजे हैं। न्यूट्रॉन तारे फटे हुए विशाल तारों के अत्यधिक घने अवशेष कोर होते हैं, और पल्सर तेजी से घूमता तथा अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा है जो अपने दोनों चुंबकीय ध्रुवों के आसपास से रेडियो तरंगें उत्सर्जित करता है। यूजीएमआरटी का संचालन नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (एनसीआरए) करता है, जो टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) की एक इकाई है। अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

मुख्य तथ्य

  • पीएसआर जे1227-4853 प्रति सेकंड 592 बार घूमता है — स्रोत के अनुसार यह एक सामान्य रसोई ब्लेंडर से लगभग दोगुनी गति है।
  • टीम ने कई वर्षों में करीब 174 घंटे की निगरानी की, जिसमें 235 अलग-अलग विशाल रेडियो पल्स मिले।
  • कुछ फ्लैश पल्सर के सामान्य उत्सर्जन से लगभग 1,000 गुना अधिक चमकीले थे; सबसे छोटा पल्स केवल 1.28 माइक्रोसेकंड का था, जो पलक झपकने से लगभग 1,00,000 गुना छोटा है।
  • 3,000 से अधिक ज्ञात पल्सरों में यह केवल तीन ज्ञात 'ट्रांज़िशनल मिलिसेकंड पल्सर' में से एक है।
  • विशाल पल्स उत्पन्न करने वाले ज्ञात पल्सरों की संख्या लगभग 20 है, जिसमें यह भी शामिल है — मुख्य लेखक के शब्दों में 'दुर्लभ में दुर्लभतम'।
  • यूजीएमआरटी खोडाद में स्थित है, पुणे से 80 किलोमीटर दूर, और इसे एनसीआरए चलाता है, जो टीआईएफआर की इकाई तथा परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के तहत सहायता प्राप्त संस्थान है।
  • मुख्य लेखक सप्तर्षि सरकार एनसीआरए-टीआईएफआर में पीएचडी छात्र हैं; सह-लेखक जयंत रॉय एनसीआरए में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
  • अध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ और पीएसआर जे1227−4853 को तेज घूमते न्यूट्रॉन तारों के अध्ययन की नई 'प्रयोगशाला' के रूप में स्थापित करता है।

समयरेखा

  1. कई वर्षों तक (सटीक तिथियां स्रोत में नहीं)यूजीएमआरटी से पीएसआर जे1227-4853 की करीब 174 घंटे की निगरानी
  2. निगरानी के बादआंकड़ों के विश्लेषण से 235 विशाल रेडियो पल्स की पहचान, जिनमें सबसे छोटा 1.28 माइक्रोसेकंड
  3. तिथि स्रोत में नहींअध्ययन द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित

किसका दाँव

  • एनसीआरए-टीआईएफआर — यूजीएमआरटी का संचालन करता है; खोज इसकी उच्च संवेदनशीलता और माइक्रोसेकंड समय-विभेदन की क्षमता को रेखांकित करती है
  • परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) — टीआईएफआर इसके तहत सहायता प्राप्त संस्थान है; मूलभूत विज्ञान अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश का प्रतिफल
  • भारत, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के खगोलविदों की टीम — अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दुर्लभ न्यूट्रॉन तारे के उत्सर्जन तंत्र की समझ
  • सप्तर्षि सरकार (मुख्य लेखक, पीएचडी छात्र, एनसीआरए-टीआईएफआर) — अध्ययन का नेतृत्व; पल्सर की चरम चमक और अत्यल्प अवधि के निष्कर्ष
  • जयंत रॉय (सह-लेखक, एसोसिएट प्रोफेसर, एनसीआरए) — खोज का श्रेय यूजीएमआरटी की संवेदनशीलता और दीर्घकालिक निगरानी क्षमता को देते हैं
  • वैश्विक खगोल-भौतिकी समुदाय — ब्रह्मांड के सबसे चरम रेडियो विस्फोटों के विविध तंत्रों को समझने में मदद

क्यों अहम है

यह खोज दिखाती है कि भारत का यूजीएमआरटी दुनिया के सबसे संवेदनशील निम्न-आवृत्ति रेडियो टेलीस्कोपों में से एक है और माइक्रोसेकंड स्तर की खगोलीय घटनाएं पकड़ सकता है। पीएसआर जे1227−4853 3,000 से अधिक ज्ञात पल्सरों में केवल तीन ट्रांज़िशनल मिलिसेकंड पल्सर में से एक है, इसलिए इसे 'विशाल पल्स' उत्पन्न करते देखना न्यूट्रॉन तारों के विकास और उत्सर्जन तंत्र को समझने का दुर्लभ अवसर है। यह ब्रह्मांड के सबसे चमकीले और सबसे छोटे रेडियो विस्फोटों के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाल सकता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • यूजीएमआरटी खोडाद (पुणे से 80 किमी) में है; संचालन एनसीआरए द्वारा, जो टीआईएफआर की इकाई और डीएई के तहत सहायता प्राप्त संस्थान है।
  • पल्सर = तेजी से घूमता, अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा जो दोनों चुंबकीय ध्रुवों के आसपास से रेडियो तरंगें उत्सर्जित करता है।
  • पीएसआर जे1227-4853 प्रति सेकंड 592 बार घूमता है; 174 घंटे की निगरानी में 235 विशाल पल्स मिले।
  • सबसे छोटा पल्स 1.28 माइक्रोसेकंड; कुछ पल्स सामान्य उत्सर्जन से ~1,000 गुना चमकीले।
  • 3,000+ ज्ञात पल्सरों में केवल 3 ट्रांज़िशनल मिलिसेकंड पल्सर ज्ञात; विशाल पल्स देने वाले पल्सर लगभग 20।
  • अध्ययन 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल' में प्रकाशित; मुख्य लेखक सप्तर्षि सरकार, सह-लेखक जयंत रॉय।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की बड़ी वैज्ञानिक सुविधाओं का मूल्य इसी तरह की खोजों में दिखता है: यूजीएमआरटी की उच्च संवेदनशीलता, माइक्रोसेकंड समय-विभेदन और वर्षों तक चलने वाली निगरानी क्षमता के कारण ही भारत, अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन की टीम पीएसआर जे1227-4853 से 235 विशाल रेडियो पल्स पकड़ सकी, जिनमें कुछ सामान्य उत्सर्जन से ~1,000 गुना चमकीले और सबसे छोटा 1.28 माइक्रोसेकंड का था। वैज्ञानिक महत्व दो स्तरों पर है — पहला, यह पल्सर 3,000 से अधिक ज्ञात पल्सरों में केवल तीन ट्रांज़िशनल मिलिसेकंड पल्सर में से एक है, इसलिए इसे 'संक्रमण की अवस्था' में देखना न्यूट्रॉन तारों के विकास की समझ देता है; दूसरा, विशाल पल्स देने वाले लगभग 20 पल्सर ही ज्ञात हैं, अतः यह स्रोत तेज घूमते न्यूट्रॉन तारों में रेडियो उत्सर्जन तंत्र की नई प्रयोगशाला बनता है और ब्रह्मांड के सबसे चरम रेडियो विस्फोटों के विविध कारणों को समझने में सहायक हो सकता है। संस्थागत पक्ष में यह डीएई–टीआईएफआर–एनसीआरए की सार्वजनिक वित्त-पोषित अनुसंधान श्रृंखला तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उपयोगिता दर्शाता है। आगे का रास्ता स्रोत में नीति-रूप में नहीं बताया गया; अध्ययन के अनुसार दीर्घकालिक निगरानी अभियान और उच्च समय-विभेदन वाली प्रेक्षण क्षमता ऐसी खोजों की कुंजी हैं।

मुख्य शब्द

यूजीएमआरटी
खोडाद (पुणे से 80 किमी) स्थित अपग्रेडेड जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप; दुनिया के सबसे संवेदनशील निम्न-आवृत्ति रेडियो टेलीस्कोपों में से एक।
न्यूट्रॉन तारा
विस्फोट कर चुके विशाल तारे का अत्यधिक घना बचा हुआ कोर।
पल्सर
तेजी से घूमता, अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन तारा, जिसकी रेडियो किरण लाइटहाउस की तरह नियमित अंतराल पर पृथ्वी तक पहुंचती है।
ट्रांज़िशनल मिलिसेकंड पल्सर
पल्सर का अत्यंत दुर्लभ प्रकार; 3,000 से अधिक ज्ञात पल्सरों में ऐसे केवल तीन ज्ञात हैं।
विशाल रेडियो पल्स (जायंट पल्स)
पल्सर के सामान्य उत्सर्जन से कई सौ-हजार गुना चमकीले, अत्यंत अल्प अवधि के रेडियो विस्फोट; ऐसे लगभग 20 पल्सर ज्ञात हैं।
एनसीआरए
नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स — टीआईएफआर की इकाई, जो यूजीएमआरटी चलाती है; टीआईएफआर डीएई के तहत सहायता प्राप्त संस्थान है।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत के यूजीएमआरटी जैसी बड़ी वैज्ञानिक सुविधाएं मूलभूत खगोल-भौतिकी अनुसंधान में कैसे योगदान देती हैं? पीएसआर जे1227-4853 से विशाल रेडियो पल्स की खोज के उदाहरण से समझाइए।
  2. न्यूट्रॉन तारे और पल्सर में क्या अंतर है, और 'ट्रांज़िशनल मिलिसेकंड पल्सर' का अध्ययन तारकीय विकास को समझने के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  3. माइक्रोसेकंड अवधि के अत्यंत चमकीले रेडियो फ्लैश का पता लगाने के लिए टेलीस्कोप में कौन-सी तकनीकी क्षमताएं आवश्यक हैं? यूजीएमआरटी के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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