सरकार ने नौ साल बाद सीबीएफसी का पुनर्गठन किया, 18 सदस्य नियुक्त

सरकार ने बुधवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) में 18 सदस्य नियुक्त करते हुए नौ साल बाद इसका पुनर्गठन किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बयान में सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, प्रसेनजित चटर्जी, फिल्मकार प्रियदर्शन, संगीतकार रिकी केज, रूपाली गांगुली और कवि यतींद्र मिश्र के नाम शामिल हैं। कार्यकाल तीन वर्ष का है। सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 के तहत अध्यक्ष को छोड़कर बोर्ड में 12 से 25 सदस्य होने चाहिए। मई में शशि शेखर वेम्पति अध्यक्ष बने थे।

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The government appointed 18 members to the CBFC on Wednesday, reconstituting the body after nine years. — Attributed to a statement issued by the Ministry of Information and Broadcasting; figure appears in source.
  • New members include Suniel Shetty, Preity Zinta, Pankaj Tripathi, Prosenjit Chatterjee, Priyadarshan, Ricky Kej, Roopali Ganguly and Yatindra Mishra. — Names listed in the ministry statement as reported in the source.
  • Under the Cinematograph Act 1952, CBFC must have 12 to 25 members excluding the chairperson. — Stated in source as a legal provision; no external verification performed.
  • Shashi Shekhar Vempati was appointed CBFC chairperson in May, succeeding Prasoon Joshi. — Reported in source without direct attribution to a document.
  • Only a few of the 10 remaining members were active, making reconstitution necessary; new board is 'full-fledged'. — Attributed to an unnamed government official speaking to HT.

विश्लेषकों की राय राय

AI मनोरंजन विश्लेषक

नौ साल बाद सीबीएफसी का 18 सदस्यों के साथ पुनर्गठन ऊपर से प्रशासनिक कदम लगता है, लेकिन इसका सीधा असर इंडस्ट्री की कमाई पर पड़ता है — सर्टिफिकेशन में देरी और कट आज रिलीज़ डेट, मार्केटिंग खर्च और ओटीटी सौदों को तय करते हैं। सुनील शेट्टी, प्रीति ज़िंटा, पंकज त्रिपाठी, प्रसेनजित चटर्जी और प्रियदर्शन जैसे नाम — हिंदी, बंगाली और दक्षिण के सिनेमा के साथ टेलीविज़न, संगीत और साहित्य को समेटते हुए — यह संकेत देते हैं कि सक्रिय क्रिएटिव आवाज़ें फिर मेज़ पर हैं। ऐसी सूची पर बहस स्वाभाविक है; असली परीक्षा नामों की नहीं, बल्कि सर्टिफिकेशन के तेज़ और अनुमान-योग्य होने की है।

  • एक सरकारी अधिकारी का यह कहना कि बोर्ड में 10 सदस्य ही बचे थे और उनमें कुछ ही सक्रिय थे, निर्माताओं की देरी संबंधी शिकायतों की परोक्ष स्वीकृति है।
  • बॉक्स ऑफिस के लिहाज़ से सर्टिफिकेशन अब औपचारिकता नहीं — कट और रेटिंग के फैसले रिलीज़ कैलेंडर, प्रचार बजट और फैमिली ऑडियंस तक पहुँच तय करते हैं।
  • अभिनेता, निर्देशक, संगीतकार और टेलीविज़न कलाकार का यह मिश्रण इंडस्ट्री में यह उम्मीद जगाता है कि रचनात्मक मंशा को अधिक संवेदनशील सुनवाई मिलेगी।
  • प्रसेनजित चटर्जी और प्रियदर्शन की मौजूदगी बताती है कि बोर्ड केवल हिंदी-केंद्रित नहीं है, जो क्षेत्रीय संदर्भ वाले फैसलों में अहम है।
  • बोर्ड की नियुक्तियों पर सवाल हमेशा उठते हैं; विश्वसनीयता अंततः फैसलों की निरंतरता और पारदर्शिता से बनेगी, नामों के स्टार वैल्यू से नहीं।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि आने वाले विवादित या बड़े बजट के रिलीज़ कितनी तेज़ी से और कितने कम कट के साथ सर्टिफिकेशन पार करते हैं — यही इस पुनर्गठन की असली कसौटी है।

यह खबर सर्टिफिकेशन के नियमों या प्रक्रिया में किसी बदलाव की पुष्टि नहीं करती; नियुक्तियों और तीन साल के कार्यकाल के अलावा बोर्ड व्यवहार में कैसे काम करेगा, यह अभी तय नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत गठित निकाय है जो भारत में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों को प्रमाणपत्र देता है। यह बोर्ड सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करता है और इसमें अध्यक्ष के अलावा सदस्य नियुक्त किए जाते हैं। इसका पिछला पुनर्गठन अगस्त 2017 में हुआ था, जिसके बाद नौ साल तक नए सदस्य नहीं जोड़े गए। बुधवार को सरकार ने 18 नए सदस्य नियुक्त करते हुए बोर्ड का पुनर्गठन किया।

मुख्य तथ्य

  • सरकार ने बुधवार को सीबीएफसी में 18 सदस्य नियुक्त किए, नौ साल में पहली बार बोर्ड का पुनर्गठन हुआ।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बयान में अभिनेता सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी और प्रसेनजित चटर्जी, फिल्मकार प्रियदर्शन, संगीतकार रिकी केज तथा टेलीविजन अभिनेत्री रूपाली गांगुली के नाम शामिल हैं।
  • सरकारी आदेश के अनुसार 18 सदस्यों की नियुक्ति तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए की गई है।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत सीबीएफसी में अध्यक्ष को छोड़कर 12 से 25 सदस्य होने चाहिए।
  • मई में सरकार ने शशि शेखर वेम्पति को सीबीएफसी अध्यक्ष नियुक्त किया था; उन्होंने प्रसून जोशी का स्थान लिया, जो प्रसार भारती के अध्यक्ष बने।
  • पिछला पुनर्गठन अगस्त 2017 में हुआ था, जिसमें प्रसून जोशी अध्यक्ष और 12 अन्य सदस्य तीन वर्ष के लिए नियुक्त हुए थे।
  • उन 12 में से दो सदस्यों का निधन हुआ — नरेंद्र कोहली (2021) और नील हर्बर्ट नोंगकिनरिह (2022) — जिससे 10 सदस्य शेष रह गए; रिक्तियाँ नहीं भरी गईं।
  • कवि व लेखक यतींद्र मिश्र, अयोध्या के पूर्व राजपरिवार से संबंधित, नए बोर्ड में शामिल; वे स्वर्गीय बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के पुत्र हैं, जो श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी भी रहे।

समयरेखा

  1. अगस्त 2017सीबीएफसी का पिछला पुनर्गठन — प्रसून जोशी अध्यक्ष और 12 अन्य सदस्य, तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए।
  2. 2021बोर्ड सदस्य नरेंद्र कोहली का निधन; रिक्ति नहीं भरी गई।
  3. 2022बोर्ड सदस्य नील हर्बर्ट नोंगकिनरिह का निधन; बोर्ड में 10 सदस्य शेष।
  4. मई (इस वर्ष)शशि शेखर वेम्पति सीबीएफसी अध्यक्ष नियुक्त; प्रसून जोशी प्रसार भारती के अध्यक्ष बने।
  5. बुधवार (घोषणा का दिन)सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 18 सदस्यों की नियुक्ति के साथ सीबीएफसी का पुनर्गठन किया।

किसका दाँव

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय — सीबीएफसी के सदस्यों व अध्यक्ष की नियुक्ति करता है; बोर्ड को "पूर्ण रूप से सक्रिय" बनाने की जिम्मेदारी।
  • सीबीएफसी — फिल्म प्रमाणन का काम; वर्षों से घटी सदस्य संख्या और सीमित सक्रिय भागीदारी के बाद अब 18 सदस्यों वाला बोर्ड।
  • शशि शेखर वेम्पति (अध्यक्ष) — मई में नियुक्ति के बाद अब पूर्ण सदस्यता वाले बोर्ड के साथ कामकाज।
  • नए सदस्य (सुनील शेट्टी, प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, प्रसेनजित चटर्जी, प्रियदर्शन, रिकी केज, रूपाली गांगुली, यतींद्र मिश्र आदि) — तीन वर्ष के कार्यकाल में प्रमाणन प्रक्रिया में भागीदारी।
  • पूर्व बोर्ड के बचे सदस्य (वामन केंद्रे, रमेश पातंगे) — नए बोर्ड में बनाए रखे गए, निरंतरता बनी।
  • फिल्म उद्योग व दर्शक — फिल्मों के प्रमाणन की गति और निर्णयों पर सीधा असर।

क्यों अहम है

सीबीएफसी हर उस फिल्म को प्रमाणपत्र देता है जो भारत में सिनेमाघरों में रिलीज होती है, इसलिए बोर्ड की संरचना और सक्रियता सीधे फिल्म उद्योग के कामकाज से जुड़ी है। सरकारी अधिकारी के अनुसार 10 बचे सदस्यों में से कुछ ही सक्रिय रूप से काम में शामिल थे, जिससे व्यापक पुनर्गठन आवश्यक हो गया था। नौ साल बाद 18 सदस्यों की नियुक्ति से बोर्ड को "पूर्ण रूप से गठित" बताया गया है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • सीबीएफसी की स्थापना/संचालन सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत; यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन है।
  • अधिनियम के अनुसार बोर्ड में अध्यक्ष को छोड़कर 12 से 25 सदस्य होने चाहिए।
  • नए सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष; कुल 18 सदस्य नियुक्त।
  • शशि शेखर वेम्पति — मई में सीबीएफसी अध्यक्ष नियुक्त; पूर्व अध्यक्ष प्रसून जोशी अब प्रसार भारती के अध्यक्ष।
  • पिछला पुनर्गठन अगस्त 2017 में — प्रसून जोशी अध्यक्ष व 12 सदस्य।
  • यतींद्र मिश्र — कवि व लेखक, अयोध्या के पूर्व राजपरिवार से; पिता बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी रहे।

मेन्स दृष्टिकोण

सीबीएफसी का नौ साल बाद पुनर्गठन नियामक निकायों में समय पर नियुक्ति और संस्थागत क्षमता के प्रश्न को सामने रखता है। सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 अध्यक्ष के अतिरिक्त 12 से 25 सदस्यों की व्यवस्था करता है, पर 2017 के बाद न तो नया बोर्ड बना और न ही 2021 व 2022 में सदस्यों के निधन से बनी रिक्तियाँ भरी गईं, जिससे संख्या 10 पर आ गई; सरकारी अधिकारी के अनुसार इनमें भी कुछ ही सदस्य सक्रिय रूप से कामकाज में शामिल थे। इसके निहितार्थ स्पष्ट हैं — प्रमाणन जैसे नियमित, समयबद्ध कार्य के लिए पर्याप्त और सक्रिय सदस्यता आवश्यक है, अन्यथा निर्णय-भार कुछ ही लोगों पर आ जाता है। नई 18-सदस्यीय संरचना में अभिनय, फिल्म निर्माण, संगीत, टेलीविजन और साहित्य से जुड़े नाम शामिल हैं तथा पिछले बोर्ड के कुछ सदस्य भी बनाए रखे गए हैं, जिससे विविधता और निरंतरता दोनों का प्रयास दिखता है। आगे का रास्ता यही है कि तीन वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति या किसी रिक्ति के बाद नियुक्तियाँ बिना विलंब हों, ताकि बोर्ड निरंतर "पूर्ण रूप से गठित" रहे।

मुख्य शब्द

सीबीएफसी (केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड)
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन निकाय जो भारत में फिल्मों को प्रमाणपत्र देता है।
सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952
वह कानून जिसके तहत सीबीएफसी काम करता है; इसमें अध्यक्ष के अलावा 12 से 25 सदस्यों का प्रावधान है।
पुनर्गठन (reconstitution)
बोर्ड में नए सदस्यों की नियुक्ति के जरिए उसकी संरचना नए सिरे से तय करना; अंतिम बार अगस्त 2017 में हुआ था।
प्रसार भारती
सार्वजनिक प्रसारण संस्था, जिसके अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद प्रसून जोशी ने सीबीएफसी अध्यक्ष पद छोड़ा।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
ट्रस्ट जिसके ट्रस्टी नए बोर्ड सदस्य यतींद्र मिश्र के स्वर्गीय पिता बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र रहे।

अभ्यास प्रश्न

  1. सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत सीबीएफसी की संरचना क्या है, और नौ वर्ष तक पुनर्गठन न होने से इसके कामकाज पर क्या असर पड़ा? समीक्षा करें।
  2. वैधानिक निकायों में रिक्तियों का समय पर न भरा जाना संस्थागत प्रभावशीलता को कैसे कमजोर करता है? सीबीएफसी के उदाहरण से स्पष्ट करें।
  3. फिल्म प्रमाणन बोर्ड में रचनात्मक क्षेत्रों (अभिनय, फिल्म निर्माण, संगीत, साहित्य) से सदस्यों की नियुक्ति के पक्ष और चुनौतियाँ क्या हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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