तेलंगाना में टीजी सेफ ने 208 खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की

टीजी सेफ के कमिश्नर अविनाश मोहंती ने बताया कि अगस्त में विभाग के गठन के बाद से 208 प्रतिष्ठानों की जांच की गई, जिनमें गंदगी से लेकर एनालॉग पनीर और घटिया दवाओं की बिक्री तक की गड़बड़ियां मिलीं। हाल के अभियान में 46 प्रतिष्ठानों की जांच में चार लाइसेंस निलंबित हुए और 19 टन से अधिक सामग्री जब्त की गई। जनवरी 2025 से 115 दवाएं मानक गुणवत्ता की नहीं पाई गईं। हर माह 500-600 नमूनों की जांच होती है; 609 कारोबारियों को हाइजीन रेटिंग मिली है।

स्रोत

Times of India — Hyderabad · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • TG SAFE inspected 208 establishments since August, flagging violations from poor hygiene to analogue paneer and substandard medicines. — Attributed to Avinash Mohanty, commissioner, TG SAFE, in response to reader queries.
  • In a recent drive, 46 establishments were inspected, four licences suspended and over 19 tonnes of material seized. — Figures appear in source, attributed to the commissioner; no independent documentation cited.
  • Since January 2025, 115 medicines were detected as Not of Standard Quality. — Figure appears in source, attributed to the commissioner citing Drugs Control Laboratory analysis.
  • Nearly 500-600 food samples are sent for laboratory testing every month; around 609 FBOs have hygiene ratings in Telangana. — Figures stated by the commissioner; approximate and unverified externally.
  • Headline claim that 30 licences were cancelled in one month. — Not supported anywhere in the body text, which mentions four suspensions; editor should verify before use.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

टीजी सेफ मूलतः एक संस्थागत विलय है — जीएचएमसी के खाद्य सुरक्षा विंग और इंस्टिट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन को एक ही नियामक के तहत लाना। अगस्त से 208 प्रतिष्ठानों की जाँच, चार लाइसेंस निलंबन और 19 टन से अधिक माल की जब्ती प्रवर्तन की मंशा दिखाती है, लेकिन ये मुख्यतः अभियान-आधारित कार्रवाइयाँ हैं, निरंतर प्रणालीगत निगरानी नहीं। कमिश्नर स्वयं मानते हैं कि मानव संसाधन की आवश्यकता का आकलन चल रहा है और नमूनों की संख्या काफी बढ़ानी होगी — यानी महत्वाकांक्षा क्षमता से आगे है।

  • विलय से क्षेत्राधिकार का दोहराव घटेगा और जवाबदेही स्पष्ट होगी, पर नियामक ताकत निरीक्षकों और प्रयोगशाला क्षमता पर टिकी है, जिनका आकलन विभाग के अनुसार अभी जारी है।
  • महीने में 500-600 नमूने राज्यभर के खाद्य कारोबारियों की संख्या के सामने सीमित हैं, इसलिए जोखिम-आधारित लक्षित जाँच एक बाध्यता है, कोई आदर्श डिज़ाइन नहीं।
  • एनालॉग पनीर पर रोक और 115 घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं की पहचान उत्पाद-विशिष्ट आदेशों और अभियोजन पर निर्भरता दर्शाती है; रिकॉल व्यवस्था है, पर उपभोक्ता तक सूचना कैसे पहुँचेगी यह स्पष्ट नहीं।
  • रसोई देखने का अधिकार, अनिवार्य सीसीटीवी, मासिक प्रमाणपत्र जैसी पाठक-मांगें केंद्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे से बाहर हैं — राज्य एजेंसी कितनी भी सक्रिय हो, कानूनी बदलाव बिना ये खाई नहीं भरेगी।
  • केवल लगभग 609 कारोबारियों के पास हाइजीन रेटिंग होना यही पुराना सबक दोहराता है कि स्वैच्छिक प्रोत्साहन योजनाएँ प्रवर्तन का विकल्प नहीं बनतीं।

किस पर नज़र रखें — सरकार को भेजा जाने वाला मानव संसाधन प्रस्ताव, मोबाइल प्रयोगशालाओं का वादा किया गया विस्तार और नमूना जाँच की संख्या — इन्हीं से पता चलेगा कि अभियान स्थायी नियामक व्यवस्था बन रहे हैं या नहीं।

खबर जाँच की संख्या बताती है, लेकिन कुल प्रतिष्ठानों में उनका अनुपात, मुकदमों का नतीजा, वसूला गया जुर्माना या ज़मीनी स्तर पर खाद्य सुरक्षा सुधरने का कोई प्रमाण नहीं देती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तेलंगाना सरकार ने अगस्त में जीएचएमसी की खाद्य सुरक्षा शाखाओं और इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन को मिलाकर 'टीजी सेफ' नामक विभाग बनाया, जो राज्य में खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी करता है। टीजी सेफ के कमिश्नर अविनाश मोहंती ने टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठकों के सवालों के जवाब में विभाग की जांच-कार्रवाई का ब्यौरा दिया। इनमें मिलावट, एनालॉग पनीर, घटिया दवाओं, हाइजीन रेटिंग और इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल जैसे मुद्दे शामिल थे।

मुख्य तथ्य

  • अगस्त में टीजी सेफ के गठन के बाद से विभाग ने 208 प्रतिष्ठानों की जांच की, जिनमें खराब साफ-सफाई से लेकर एनालॉग पनीर और घटिया दवाओं की बिक्री तक की गड़बड़ियां पाई गईं।
  • हाल के विशेष अभियान में 46 प्रतिष्ठानों की जांच हुई; गंभीर उल्लंघनों पर चार प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित और 19 टन से अधिक सामग्री जब्त की गई।
  • तेलंगाना में एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश हाल ही में जारी किए गए।
  • जनवरी 2025 से अब तक 115 दवाएं 'नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी' (NSQ) पाई गईं; ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मुकदमा व लाइसेंस निलंबन/रद्दीकरण जैसी कार्रवाई होती है।
  • वर्तमान में हर महीने करीब 500-600 खाद्य नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे जाते हैं; इस संख्या को बढ़ाने का लक्ष्य है।
  • तेलंगाना में अब तक लगभग 609 खाद्य कारोबारियों (एफबीओ) को एफएसएसएआई हाइजीन रेटिंग मिली है।
  • इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल में टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) 25% से अधिक हो तो उसे तलने में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उसका उचित निस्तारण जरूरी है।
  • टीजी सेफ का गठन जीएचएमसी की खाद्य सुरक्षा शाखाओं और इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन के विलय से हुआ है।

समयरेखा

  1. जनवरी 2025 सेदवा नमूनों की जांच में 115 दवाएं मानक गुणवत्ता की नहीं (NSQ) पाई गईं।
  2. अगस्तजीएचएमसी की खाद्य सुरक्षा शाखाओं और इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन के विलय से टीजी सेफ का गठन।
  3. अगस्त के बादमिठाई, खोया, पनीर व अन्य डेयरी उत्पादों के निर्माताओं और विक्रेताओं पर विशेष अभियान; कुल 208 प्रतिष्ठानों की जांच।
  4. हाल ही में46 प्रतिष्ठानों की जांच, चार लाइसेंस निलंबित, 19 टन से अधिक सामग्री जब्त; एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध के आदेश जारी।

किसका दाँव

  • टीजी सेफ (कमिश्नर अविनाश मोहंती) — राज्य में खाद्य व दवा गुणवत्ता की निगरानी, जांच, नमूना संग्रह और प्रवर्तन कार्रवाई की जिम्मेदारी।
  • उपभोक्ता/आम जनता — मिलावटी भोजन और घटिया दवाओं से स्वास्थ्य जोखिम; बीमार पड़ने पर टीजी सेफ को शिकायत का अधिकार।
  • खाद्य कारोबारी (एफबीओ), रेस्तरां, मिठाई व डेयरी इकाइयां — लाइसेंस निलंबन, जब्ती और हाइजीन रेटिंग में भागीदारी; एफएसएसएआई मानकों के अनुपालन का दबाव।
  • फार्मेसियां और दवा थोक विक्रेता — नमूना जांच में NSQ पाए जाने पर मुकदमा तथा लाइसेंस निलंबन/रद्द होने का जोखिम।
  • एफएसएसएआई — हाइजीन रेटिंग योजना और खाद्य सुरक्षा कानून के मानक तय करता है; ग्राहकों द्वारा रसोई जांच व सीसीटीवी जैसे सुझावों पर विचार।
  • ड्रग्स कंट्रोल लैबोरेटरी व ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन — दवा नमूनों का विश्लेषण और असुरक्षित दवाओं की वापसी (रिकॉल) के आदेश जारी करना।

क्यों अहम है

खाद्य मिलावट और घटिया दवाएं सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, और तेलंगाना के आंकड़े बताते हैं कि जोखिम व्यापक है — 208 जांचों में गंदगी से एनालॉग पनीर तक की गड़बड़ियां और जनवरी 2025 से 115 NSQ दवाएं। विभागों के विलय से बने टीजी सेफ का प्रदर्शन दिखाएगा कि जनशक्ति, प्रयोगशाला क्षमता और जोखिम-आधारित निरीक्षण मिलकर प्रवर्तन को कितना मजबूत कर सकते हैं। यह उपभोक्ता अधिकारों की सीमाओं — जैसे रसोई देखने का कोई कानूनी अधिकार न होना — पर भी रोशनी डालता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • टीजी सेफ: अगस्त में जीएचएमसी की खाद्य सुरक्षा शाखाओं और इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन के विलय से बना तेलंगाना का विभाग।
  • NSQ (नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी): जनवरी 2025 से तेलंगाना में 115 दवाएं इस श्रेणी में पाई गईं; कार्रवाई ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत।
  • टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड्स) 25% से अधिक होने पर इस्तेमाल किया खाद्य तेल तलने योग्य नहीं।
  • एफएसएसएआई हाइजीन रेटिंग स्कीम: तेलंगाना में लगभग 609 एफबीओ को रेटिंग मिली।
  • खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत निरीक्षण का अधिकार अधिकारियों को है; ग्राहक नमूना जांच करा सकता है, रसोई देखने का अधिकार नहीं।
  • तेलंगाना में एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन व बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश।

मेन्स दृष्टिकोण

खाद्य मिलावट और घटिया दवाओं का प्रसार भारत में नियामक क्षमता की कमी, बिखरे हुए प्रवर्तन ढांचे और प्रयोगशाला अवसंरचना की सीमाओं से जुड़ा है। तेलंगाना का अनुभव बताता है कि संस्थागत एकीकरण (जीएचएमसी की खाद्य सुरक्षा शाखाओं और इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन को मिलाकर टीजी सेफ) और जोखिम-आधारित निरीक्षण से प्रवर्तन तेज हो सकता है — 208 प्रतिष्ठानों की जांच, चार लाइसेंस निलंबन, 19 टन से अधिक जब्ती, एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध और जनवरी 2025 से 115 NSQ दवाओं की पहचान इसके उदाहरण हैं। पर चुनौतियां बनी हुई हैं: मासिक केवल 500-600 नमूनों की जांच, जनशक्ति आवश्यकता का आकलन अभी जारी, और उपभोक्ता सशक्तीकरण की कानूनी सीमाएं (रसोई जांच या सीसीटीवी की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं; मासिक खाद्य सुरक्षा प्रमाणपत्र भी अनिवार्य नहीं)। आगे का रास्ता — नमूना संख्या बढ़ाना, मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का विस्तार, आश्चर्य निरीक्षण, एफएसएसएआई हाइजीन रेटिंग में अधिक भागीदारी (अभी 609 एफबीओ), भंडारण-तापमान व टीपीसी जैसे मानकों की सख्त निगरानी, तथा उच्च जोखिम वाले बड़े प्रतिष्ठानों के लिए सीसीटीवी जैसे उपायों पर एफएसएसएआई के साथ विचार।

मुख्य शब्द

टीजी सेफ
तेलंगाना का खाद्य व दवा सुरक्षा विभाग, अगस्त में जीएचएमसी खाद्य सुरक्षा शाखाओं और इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन के विलय से गठित।
एनालॉग पनीर
पनीर जैसा दिखने वाला विकल्प उत्पाद, जिसके निर्माण, भंडारण, परिवहन व बिक्री पर तेलंगाना में प्रतिबंध के आदेश जारी हुए हैं।
NSQ (नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी)
प्रयोगशाला जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी न उतरने वाली दवा; ऐसी दवाओं को बाजार से वापस बुलाया जाता है।
टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड्स)
इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल की गुणवत्ता का मापदंड; 25% से अधिक टीपीसी वाला तेल तलने में प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
एफएसएसएआई हाइजीन रेटिंग स्कीम
स्वैच्छिक योजना जिसमें खाद्य प्रतिष्ठानों की स्वच्छता का मूल्यांकन कर रेटिंग दी जाती है; तेलंगाना में 609 एफबीओ रेटेड।
जोखिम-आधारित निरीक्षण
पहचाने गए जोखिमों के आधार पर विशेष खाद्य श्रेणियों व प्रतिष्ठानों को लक्षित कर की जाने वाली जांच और नमूना संग्रह।

अभ्यास प्रश्न

  1. खाद्य मिलावट और घटिया दवाओं पर अंकुश लगाने में राज्य स्तरीय नियामक संस्थाओं के समक्ष कौन-सी क्षमता संबंधी चुनौतियां हैं? तेलंगाना के टीजी सेफ के अनुभव से उदाहरण देते हुए चर्चा करें।
  2. क्या उपभोक्ताओं को रेस्तरां की रसोई देखने या सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए? खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के वर्तमान प्रावधानों के संदर्भ में परीक्षण करें।
  3. जोखिम-आधारित निरीक्षण और मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन को कैसे मजबूत कर सकती हैं? तर्कसंगत उत्तर दें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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