ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन तकनीक, आर्थिक लचीलेपन पर चर्चा

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन रविवार को नेताओं ने तकनीक, आर्थिक लचीलेपन और सतत विकास पर चर्चा शुरू की। एक दिन पहले 11 सदस्यीय समूह ने नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से अपनाया था। भारत मंडपम में खुले सत्र में भारत की 2026 अध्यक्षता की चार प्राथमिकताएं — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व — शामिल हैं, जिनमें एआई, फिनटेक और डिजिटल अवसंरचना हैं। 11 पूर्ण सदस्य विश्व आबादी के लगभग 49.5%, वैश्विक जीडीपी के 40% और व्यापार के 26% हिस्सेदार हैं।

स्रोत

BRICS / G20 / SCO / Quad · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The 11-member BRICS grouping unanimously adopted the New Delhi Declaration 2026 on Saturday. — Stated in source; attributed to the reporting agency, no dissent noted.
  • Modi said the declaration focuses on innovation, sustainability and people-to-people ties and called BRICS 'wider in reach and stronger in purpose'. — Attributed in source to Modi's posts on X.
  • The 11 full members account for about 49.5% of world population, 40% of global GDP and 26% of global trade. — Figures appear twice in source; no originating data source cited.
  • BRICS has 11 full members and 10 partner countries; nine partner countries are named. — Source says 10 partners but lists only nine names — internal inconsistency editors should note.
  • India assumed the BRICS presidency on January 1 under the theme 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability'. — Stated in source without separate attribution.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

विस्तारित 11-सदस्यीय ब्रिक्स द्वारा नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार करना भारत के लिए वास्तविक कूटनीतिक उपलब्धि है — इतने विविध समूह को एक ही पाठ पर सहमत कराना आसान नहीं होता। रविवार का एजेंडा — एआई, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक और आपूर्ति-श्रृंखला लचीलापन — केवल आर्थिक नहीं है; ये आज की भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्रीय क्षेत्र हैं। फिर भी घोषणापत्र का व्यावहारिक और विकास-केंद्रित ढांचा दिखाता है कि नई दिल्ली ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी गुट के बजाय बहु-संबद्ध मंच बनाए रखना चाहती है।

  • विश्व आबादी का 49.5 प्रतिशत, जीडीपी का 40 प्रतिशत और व्यापार का 26 प्रतिशत — यही समूह की मोलभाव शक्ति का आधार है, लेकिन जीडीपी हिस्से से व्यापार हिस्सा बहुत पीछे रहना आंतरिक आर्थिक एकीकरण की कमजोरी दर्शाता है।
  • रूस और ईरान के नेताओं की उपस्थिति समूह को प्रतिबंध-विरोधी रंग देती है, पर सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और इंडोनेशिया भी इसमें शामिल हैं — यही आंतरिक विविधता शिखर सम्मेलन की भाषा को संतुलित और नरम रखती है।
  • एआई और डिजिटल भुगतान ढांचे पर सहयोग का अर्थ है तकनीकी मानकों तथा डेटा शासन पर स्वतंत्र दिशा, और पश्चिमी राजधानियां इसी बिंदु को सबसे ध्यान से पढ़ेंगी।
  • आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान, स्वास्थ्य संकट और जलवायु जोखिम के इर्द-गिर्द 'लचीलापन' शब्द का प्रयोग आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा मानने की वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है।
  • बहुपक्षीय शासन सुधार पर सहमति भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुकूल है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे मुद्दों पर बीजिंग का रुख इस सहमति की व्यावहारिक सीमा बना रहता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि प्रौद्योगिकी और वित्त संबंधी वादे वित्तपोषित संस्थागत तंत्र बनते हैं या एक और वार्षिक घोषणापत्र बनकर रह जाते हैं — और वाशिंगटन व ब्रसेल्स की प्रतिक्रिया क्या रहती है।

यह खबर घोषणापत्र की विशिष्ट प्रतिबद्धताओं, मुद्रा या भुगतान प्रणाली पर किसी ठोस निर्णय, या क्रियान्वयन की समयसीमा को स्पष्ट नहीं करती, और गैर-सदस्य देशों की किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख भी नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हुआ, जिसकी अध्यक्षता भारत ने की। भारत ने 1 जनवरी 2026 को 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय के साथ ब्रिक्स अध्यक्षता संभाली थी। विस्तारित ब्रिक्स अब 11 पूर्ण सदस्यों और 10 भागीदार देशों का समूह है। सम्मेलन के पहले दिन नेताओं ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 अपनाया, और दूसरे दिन भारत मंडपम में तकनीक, आर्थिक लचीलेपन और सतत विकास पर चर्चा हुई।

मुख्य तथ्य

  • 11 पूर्ण ब्रिक्स सदस्य विश्व की लगभग 49.5% आबादी, वैश्विक जीडीपी के 40% और वैश्विक व्यापार के 26% का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • ब्रिक्स के 11 सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात।
  • समूह के 10 भागीदार देश: बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।
  • 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को 11 सदस्यीय समूह ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 अपनाया।
  • भारत ने 1 जनवरी को 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय के तहत ब्रिक्स अध्यक्षता ग्रहण की।
  • भारत की 2026 अध्यक्षता की चार प्राथमिकताएं — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व।
  • रविवार के मुख्य खुले सत्र का शीर्षक: 'Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth', स्थान भारत मंडपम।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने परिणाम को ऐसे ब्रिक्स का प्रतिबिंब बताया जो 'पहुंच में व्यापक और उद्देश्य में मजबूत' है।

समयरेखा

  1. 1 जनवरी 2026भारत ने 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय के साथ ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली।
  2. 12 सितंबर 2026 (शनिवार)18वें शिखर सम्मेलन के पहले दिन नेताओं की फैमिली फोटो; 11 सदस्यीय समूह ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 अपनाया।
  3. 13 सितंबर 2026 (रविवार)दूसरे और अंतिम दिन भारत मंडपम में तकनीक, आर्थिक लचीलापन और सतत विकास पर खुला सत्र; सम्मेलन का समापन।

किसका दाँव

  • भारत (अध्यक्ष देश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) — 2026 अध्यक्षता की चार प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना और घोषणापत्र को व्यावहारिक, विकास-उन्मुख सहयोग में बदलना।
  • 11 पूर्ण ब्रिक्स सदस्य — एआई, फिनटेक, डिजिटल अवसंरचना में ज्ञान-साझेदारी, विकास वित्त, व्यापार सुविधा और बहुपक्षीय शासन सुधार पर साझा रुख।
  • 10 भागीदार देश (बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, वियतनाम) — विस्तारित ब्रिक्स ढांचे में भागीदारी के जरिये आर्थिक व तकनीकी सहयोग तक पहुंच।
  • उपस्थित नेता (पुतिन, शी जिनपिंग, प्राबोवो सुबियांतो, सिसी, रामाफोसा, पेजेशकियान, अबी अहमद आदि) — वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधानों और जलवायु जोखिमों पर सामूहिक स्थिति तय करना।
  • बहुपक्षीय शासन संस्थाएं — ब्रिक्स सदस्यों द्वारा सुधारों पर जोर, जिसका असर वैश्विक आर्थिक शासन पर पड़ सकता है।

क्यों अहम है

विस्तार के बाद ब्रिक्स अब विश्व की लगभग आधी आबादी, 40% वैश्विक जीडीपी और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसके फैसलों का वजन बढ़ा है। भारत की अध्यक्षता में अपनाया गया नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 एआई, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, हरित वित्त और बहुपक्षीय शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे रखता है। भारत के लिए यह वैश्विक मंच पर एजेंडा-निर्धारक भूमिका का अवसर है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली, 12-13 सितंबर 2026; मुख्य सत्र भारत मंडपम में।
  • नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 — 11 सदस्यीय ब्रिक्स द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया (12 सितंबर 2026)।
  • भारत की अध्यक्षता 1 जनवरी से; विषय — 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability'।
  • ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई।
  • ब्रिक्स के 10 भागीदार देश, जिनमें बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान, वियतनाम शामिल हैं।
  • आंकड़े याद रखें: विश्व आबादी का ~49.5%, वैश्विक जीडीपी का 40%, वैश्विक व्यापार का 26%।

मेन्स दृष्टिकोण

विस्तारित ब्रिक्स का उदय बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की बढ़ती सौदेबाजी क्षमता का संकेत है: 11 पूर्ण सदस्य अब विश्व की लगभग 49.5% आबादी, 40% वैश्विक जीडीपी और 26% व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं, तथा 10 अन्य देश भागीदार के रूप में जुड़े हैं। भारत ने 2026 की अध्यक्षता को लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व के चार स्तंभों पर केंद्रित किया — जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और फिनटेक में ज्ञान-साझेदारी; आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान, स्वास्थ्य संकट व जलवायु जोखिम से निपटने की आर्थिक-सामाजिक-संस्थागत तैयारी; नीति समन्वय, विकास वित्त, व्यापार सुविधा और बहुपक्षीय शासन सुधार; तथा जलवायु शमन, हरित वित्त व ऊर्जा संक्रमण शामिल हैं। चुनौती सदस्यों की विषम विकास प्राथमिकताओं और सर्वसम्मति-आधारित निर्णय-प्रक्रिया में निहित है, जिसे घोषणापत्र स्वयं व्यक्तिगत विकास प्राथमिकताओं को ध्यान में रखने की बात कहकर स्वीकार करता है। आगे का रास्ता, जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, सहयोग को 'अधिक व्यावहारिक, विकास-उन्मुख और सदस्य देशों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील' बनाना है — अर्थात घोषणाओं को परियोजनाओं, वित्त और तकनीकी हस्तांतरण में बदलना।

मुख्य शब्द

ब्रिक्स (BRICS)
अब 11 पूर्ण सदस्यों वाला समूह — ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई; साथ में 10 भागीदार देश।
नई दिल्ली घोषणापत्र 2026
12 सितंबर 2026 को सर्वसम्मति से अपनाया गया शिखर दस्तावेज, जो नवाचार, स्थायित्व और जन-से-जन संबंधों पर केंद्रित है।
ब्रिक्स अध्यक्षता (चेयरशिप)
वार्षिक अध्यक्ष पद; भारत ने 1 जनवरी को इसे ग्रहण किया और शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय किया।
भागीदार देश (पार्टनर कंट्रीज)
पूर्ण सदस्यता के बिना ब्रिक्स प्रक्रियाओं में शामिल 10 देश, जैसे बेलारूस, मलेशिया, नाइजीरिया, वियतनाम।
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)
भारत की अध्यक्षता के नवाचार स्तंभ में शामिल उभरती तकनीक, एआई और फिनटेक के साथ सहयोग का क्षेत्र।
भारत मंडपम
नई दिल्ली स्थित स्थल, जहां शिखर सम्मेलन का मुख्य खुला सत्र आयोजित हुआ।

अभ्यास प्रश्न

  1. विस्तारित ब्रिक्स (11 सदस्य) वैश्विक आबादी, जीडीपी और व्यापार में जिस हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करता है, उसके आलोक में बहुपक्षीय शासन सुधार की मांग का मूल्यांकन कीजिए।
  2. भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के चार स्तंभों — लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थायित्व — की विवेचना कीजिए और बताइए कि ये भारत के हितों से कैसे जुड़ते हैं।
  3. 'ब्रिक्स का विस्तार उसकी पहुंच बढ़ाता है, पर सर्वसम्मति कठिन बनाता है।' नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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