फॉर्म 6, 8 से जुड़े एसआईआर आदेश सर्वसम्मति से मंजूर: चुनाव आयोग

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि बिहार में पहले चरण (24 जून 2025), एक दर्जन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में दूसरे चरण (27 अक्टूबर 2025) और 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में तीसरे चरण (14 मई 2026) के एसआईआर आदेशों में फॉर्म 6 और 8 के साथ अनिवार्य नागरिकता घोषणा पत्र शामिल था, और इन्हें सीईसी तथा दोनों आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूर किया। अधिकारियों ने ईसीआईनेट से क्षेत्रीय अधिकारियों को रोकने के आरोप का खंडन किया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • SIR orders for Phase 1 (Bihar, June 24, 2025), Phase 2 (Oct 27, 2025) and Phase 3 (May 14, 2026) were unanimously approved by the CEC and two election commissioners. — Attributed to unnamed EC officials; dates appear in the source, no independent documentation cited.
  • Forms 6 and 8 were listed with a mandatory citizenship declaration form in all three phases. — Attributed to EC officials citing pages and paragraphs of the orders; text of orders not reproduced in source.
  • Commissioner Vivek Joshi objected to Form 6 on May 16 and SS Sandhu on Aug 13. — Dates stated in source without named attribution; year not specified for the objections.
  • The Supreme Court verdict of May 27, 2026 upheld EC's power to add the declaration form. — Figure and date appear in source; verdict not quoted or otherwise sourced.
  • ECINET is not locking out field officers and is a decentralised platform under RP Acts 1950 and 1951. — Attributed to EC sources and an unnamed EC official quoted by TOI.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह लड़ाई इस बात की है कि चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की कहानी पर राजनीतिक कब्ज़ा किसका होगा। सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला करते हुए दोनों आयुक्तों की प्रशंसा करके राहुल गांधी ने संस्था को पूरी तरह नकारने के बजाय एक व्यक्ति को अलग-थलग करने की रणनीति चुनी है। आयोग का जवाब — कि तीनों चरणों के आदेश सर्वसम्मति से मंजूर हुए और आपत्तियां बाद में आईं — उसी रणनीति की धार कम करने की कोशिश है, और यह दिखाता है कि मतदाता सूची का विवाद तकनीकी प्रक्रिया से निकलकर पूरी राजनीतिक जंग बन गया है।

  • विपक्ष 'वोट चोरी' के आख्यान को चुनावी हथियार बना रहा है, जिससे संस्थागत विश्वसनीयता अपने आप में केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गई है।
  • एक पदाधिकारी की आलोचना और बाकी आयुक्तों की तारीफ सोची-समझी गणना है — इससे पूरे आयोग को अवैध ठहराने का आरोप टल जाता है।
  • पन्नों, पैराग्राफ और तारीखों का क्रम गिनाकर आयोग 'पहले सर्वसम्मति, बाद में आपत्ति' का प्रति-आख्यान खड़ा कर रहा है।
  • 14 मई 2026 का तीसरा चरण 19 राज्यों/यूटी को छूता है, इसलिए चुनाव वाले राज्यों के क्षेत्रीय दलों के लिए भी इस विवाद में उतरने का प्रोत्साहन है।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोग के अधिकार को सही ठहराने के बाद बहस वैधता से हटकर राजनीतिक मंशा के सवालों पर आ गई है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि दोनों आयुक्त सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं, और विपक्ष इसे संसद में या राज्य-दर-राज्य कितना आगे बढ़ाता है।

यह विवरण आयोग के सूत्रों की सफाई पर आधारित है; आयुक्तों की आपत्तियों का पूरा सार, उनका अपना पक्ष और ज़मीनी हकीकत इससे स्थापित नहीं होती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

चुनाव आयोग मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चरणबद्ध तरीके से करा रहा है — पहला चरण बिहार में, दूसरा एक दर्जन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में और तीसरा 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में। इन आदेशों में फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के साथ मतदाता या उसके माता-पिता की नागरिकता से जुड़ा अनिवार्य घोषणा पत्र शामिल किया गया। राहुल गांधी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर 'वोट चोरी' और एसआईआर में गड़बड़ियों के आरोप लगाते हुए दोनों चुनाव आयुक्तों की सराहना की, जिसके बीच आयोग ने स्पष्ट किया कि तीनों आयुक्तों ने आदेशों को सर्वसम्मति से मंजूर किया था।

मुख्य तथ्य

  • चुनाव आयोग के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि एसआईआर के तीनों चरणों के आदेशों में फॉर्म 6 और फॉर्म 8 के साथ नागरिकता विवरण का अनिवार्य घोषणा पत्र सूचीबद्ध था।
  • फॉर्म 6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण का आवेदन है; फॉर्म 8 उस मतदाता के लिए है जो जिस राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में नामांकन चाहता है, उसके बाहर से स्थानांतरित हो रहा है।
  • बिहार में पहले चरण का एसआईआर आदेश 24 जून 2025 को जारी हुआ।
  • एक दर्जन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए दूसरे चरण का आदेश 27 अक्टूबर 2025 को जारी हुआ।
  • 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए तीसरे चरण का आदेश 14 मई 2026 को जारी हुआ।
  • आयुक्त विवेक जोशी ने तीसरे एसआईआर आदेश पर हस्ताक्षर करने के दो दिन बाद, 16 मई को फॉर्म 6 पर आपत्ति जताई; एसएस संधू ने 13 अगस्त को आपत्ति दर्ज की।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के एसआईआर पर दिए फैसले में घोषणा पत्र जोड़ने की चुनाव आयोग की शक्ति को बरकरार रखा।
  • आयोग ने कहा कि ईसीआईनेट एक विकेंद्रीकृत मंच है, जो आरपी अधिनियम 1950, आरपी अधिनियम 1951 और आयोग के समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुरूप बनाया गया है।

समयरेखा

  1. 24 जून 2025बिहार में एसआईआर के पहले चरण का आदेश जारी।
  2. 27 अक्टूबर 2025एक दर्जन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए दूसरे चरण का एसआईआर आदेश जारी।
  3. 14 मई 202619 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए तीसरे चरण का एसआईआर आदेश जारी; विवेक जोशी ने भी इस पर हस्ताक्षर किए।
  4. 16 मईआयुक्त विवेक जोशी ने फॉर्म 6 पर आपत्ति जताई।
  5. 27 मई 2026सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर फैसले में घोषणा पत्र जोड़ने की आयोग की शक्ति को बरकरार रखा।
  6. 13 अगस्तआयुक्त एसएस संधू ने फॉर्म 6/घोषणा पत्र पर आपत्ति दर्ज की।
  7. गुरुवार (कहानी का दिन)चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आदेशों के पृष्ठ और पैरा का हवाला देकर स्पष्टीकरण दिया; राहुल गांधी ने सीईसी पर हमला बोला।

किसका दाँव

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार — 'वोट चोरी' और एसआईआर में गड़बड़ी के आरोपों का सामना; आयोग की प्रक्रिया की विश्वसनीयता दांव पर।
  • चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी — आदेशों पर सहमति के बाद फॉर्म 6 व घोषणा पत्र पर आपत्ति; आयोग का कहना है कि यह बाद की सोच थी।
  • राहुल गांधी — एसआईआर प्रक्रिया और सीईसी पर सीधा हमला; दोनों आयुक्तों की सराहना।
  • मतदाता (नए व स्थानांतरित) — फॉर्म 6/8 और नागरिकता घोषणा पत्र से पंजीकरण; घोषणा देने पर अन्य दस्तावेज देने की जरूरत नहीं।
  • क्षेत्रीय अधिकारी — बीएलओ, एईआरओ, ईआरओ, डीईओ, सीईओ — ईसीआईनेट पर यूनिक आईडी व पासवर्ड से सांविधिक कार्य; लॉक-आउट के आरोपों का खंडन।
  • सुप्रीम कोर्ट — 27 मई 2026 के फैसले में आयोग की घोषणा पत्र जोड़ने की शक्ति पर मुहर।

क्यों अहम है

मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया की नींव है, और इसमें नागरिकता घोषणा पत्र जोड़ने पर विवाद सीधे मताधिकार तथा आयोग की कानूनी सीमा के सवाल से जुड़ा है। आयोग के भीतर मतभेद और सार्वजनिक आरोपों से एक संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता व आंतरिक सहमति की धारणा प्रभावित होती है। ईसीआईनेट जैसे डिजिटल मंच पर पहुंच का प्रश्न यह तय करता है कि जमीनी चुनाव अधिकारी अपने सांविधिक कार्य कैसे करेंगे।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एसआईआर = विशेष गहन पुनरीक्षण; चरण 1 बिहार (24 जून 2025), चरण 2 एक दर्जन राज्य/यूटी (27 अक्टूबर 2025), चरण 3 19 राज्य/यूटी (14 मई 2026)।
  • फॉर्म 6: नए मतदाता के पंजीकरण का आवेदन; फॉर्म 8: राज्य/यूटी के बाहर से मतदाता के स्थानांतरण के लिए।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 — ईसीआईनेट मंच इन कानूनों व आयोग के निर्देशों के अनुरूप बताया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट का एसआईआर फैसला: 27 मई 2026 — घोषणा पत्र जोड़ने की चुनाव आयोग की शक्ति बरकरार।
  • चुनाव आयोग की संरचना: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी।
  • ईसीआईनेट पर सांविधिक कार्य केवल बीएलओ, एईआरओ, ईआरओ, डीईओ और सीईओ अपनी यूनिक आईडी-पासवर्ड से कर सकते हैं।

मेन्स दृष्टिकोण

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनावी शुचिता का उपाय है, लेकिन इसमें फॉर्म 6 व फॉर्म 8 के साथ मतदाता या उसके माता-पिता की नागरिकता का अनिवार्य घोषणा पत्र जोड़ने से दो सवाल खड़े हुए — क्या यह आयोग के अधिकार क्षेत्र में है, और क्या यह मतदाताओं पर अतिरिक्त बोझ है। चुनाव आयोग का तर्क है कि घोषणा पत्र मतदाताओं की सुविधा के लिए है, क्योंकि घोषणा देने वाले को कोई अन्य दस्तावेज नहीं देना पड़ता, और इसे सभी राज्यों/यूटी में समान रूप से लागू किया गया; तीनों चरणों के आदेश तीनों आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूर किए थे, तथा सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के फैसले में यह शक्ति बरकरार रखी। दूसरी ओर, आयुक्तों द्वारा हस्ताक्षर के बाद (16 मई व 13 अगस्त) दर्ज आपत्तियां और राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोप संस्थागत पारदर्शिता तथा आंतरिक असहमति के प्रबंधन की कमजोरी दिखाते हैं। आगे का रास्ता: आदेशों व असहमति नोटों का समयबद्ध सार्वजनिक प्रकटीकरण, ईसीआईनेट जैसे विकेंद्रीकृत मंच पर भूमिका-आधारित पहुंच का स्पष्ट दस्तावेजीकरण, मतदाताओं व बीएलओ स्तर पर प्रक्रिया-संचार, और दलों के साथ नियमित परामर्श, ताकि कानूनी वैधता के साथ सार्वजनिक भरोसा भी बना रहे।

मुख्य शब्द

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण)
मतदाता सूचियों का चरणबद्ध गहन पुनरीक्षण, जिसमें फॉर्म 6, 8 और नागरिकता घोषणा पत्र शामिल किए गए।
फॉर्म 6
नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन पत्र।
फॉर्म 8
जिस राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में नामांकन चाहा जा रहा है, उसके बाहर से मतदाता के स्थानांतरण के लिए फॉर्म।
ईसीआईनेट
चुनाव आयोग का विकेंद्रीकृत डिजिटल मंच, जिसे आरपी अधिनियम 1950 व 1951 और आयोग के निर्देशों के अनुरूप बनाया गया बताया जाता है।
ईआरओ / एईआरओ / बीएलओ / डीईओ / सीईओ
मतदाता पंजीकरण अधिकारी, सहायक ईआरओ, बूथ लेवल अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी — सूची से जुड़े क्षेत्रीय अधिकारी।
घोषणा पत्र
मतदाता या उसके माता-पिता के नागरिकता विवरण का अनिवार्य घोषणा; इसे देने पर अन्य दस्तावेज आवश्यक नहीं।

अभ्यास प्रश्न

  1. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में नागरिकता घोषणा पत्र जोड़ने के औचित्य और आलोचनाओं का परीक्षण कीजिए। सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले के संदर्भ में चुनाव आयोग की शक्तियों पर चर्चा करें।
  2. चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है; आयुक्तों की आंतरिक असहमति के सार्वजनिक होने से संस्थागत विश्वसनीयता पर क्या प्रभाव पड़ता है? उपाय सुझाइए।
  3. ईसीआईनेट जैसे विकेंद्रीकृत डिजिटल मंच चुनावी प्रशासन को कैसे प्रभावित करते हैं? बीएलओ से सीईओ तक भूमिका-आधारित पहुंच के महत्व को समझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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