नेतन्याहू ने गाजा नरसंहार के आरोपों को 'सदी का सबसे बड़ा झूठ' कहा
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि गाजा में नरसंहार के आरोप 'इस सदी का सबसे बड़ा झूठ' हैं। उन्होंने ईरान पर हमले को उचित ठहराया। फिलिस्तीनी मिशन की अपील पर उनके मंच पर आते ही दर्जनों प्रतिनिधि सभागार से बाहर चले गए, जिन्हें उन्होंने 'नैतिक कायर' कहा। 7 अक्टूबर 2023 के हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे; गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अब तक 73,922 फिलिस्तीनी मारे गए हैं।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Netanyahu called genocide allegations in Gaza 'the biggest lie of the century' and labelled walking-out delegates 'moral cowards'. — Directly quoted and attributed to Netanyahu in the source.
- Netanyahu said leaders of countries that walked out privately thanked Israel for striking Iran's nuclear capability. — Attributed to Netanyahu; no independent corroboration or named leaders in the source.
- At least 73,922 Palestinians have been killed in Israel's offensive. — Figure appears in source, attributed to the Hamas-run Gaza Health Ministry, described as generally considered reliable internationally.
- The October 7, 2023 attack killed about 1,200 people and 251 were kidnapped. — Figures appear in the source; consistent across mentions.
- The 2024 pager detonations wounded more than 3,000 and killed 12, including two children. — Figures stated in source without a named source; internally consistent.
विश्लेषकों की राय राय
संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू का भाषण कूटनीतिक रूप से किसी को मनाने की कोशिश से ज़्यादा घरेलू श्रोताओं के लिए एक ललकार जैसा लगा — इज़रायली प्राइम टाइम के हिसाब से तय किया गया, चुनावी मौसम को ध्यान में रखते हुए। फ़िलिस्तीनी मिशन की अपील पर दर्जनों प्रतिनिधियों का सभागार छोड़कर जाना इज़रायल के कूटनीतिक अलगाव का दिखने वाला संकेत है, जबकि ईरान पर हमले को 'सबसे आसान फ़ैसलों में से एक' बताना क्षेत्रीय पूर्व-निरोध की नीति को सार्वजनिक रूप से दोहराता है। उनका यह दावा कि कई नेता निजी तौर पर धन्यवाद देते हैं, सार्वजनिक निंदा और पर्दे के पीछे की सुरक्षा गणनाओं के बीच के फ़ासले को उजागर करता है।
- वॉकआउट प्रतीकात्मक है, लेकिन यह उस राजनीतिक माहौल का संकेत देता है जिसमें हथियार आपूर्ति पर रोक, व्यापारिक कदम या क़ानूनी दबाव जैसे ठोस उपाय सरकारों के लिए आसान हो जाते हैं।
- ईरान की परमाणु क्षमता पर हमले को खुलकर स्वीकारना यह संकेत है कि इज़रायल पूर्व-निरोधक विकल्प अपने पास रखना चाहता है — तेहरान और उसके क्षेत्रीय साझेदार इसे इसी रूप में पढ़ेंगे।
- संघर्षविराम ने भारी लड़ाई रोकी है, मगर वह नाज़ुक है: हमास न निरस्त्र हुआ है न सत्ता से बाहर, पुनर्निर्माण शुरू नहीं हुआ और ग़ाज़ा का बड़ा हिस्सा इज़रायली नियंत्रण में है।
- वीज़ा अस्वीकृति के कारण अब्बास का रिकॉर्डेड भाषण देना फ़िलिस्तीनी नेतृत्व की कूटनीतिक कमज़ोरी दर्शाता है, जिससे पैरवी का भार तीसरे देशों पर आ रहा है।
- आईसीसी वारंट का सवाल और न्यूयॉर्क के मेयर की गिरफ़्तारी की मांग इज़रायली नेताओं की यात्रा व कूटनीतिक सक्रियता पर बढ़ती क़ानूनी अड़चनों की ओर इशारा करते हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि अटके हुए संघर्षविराम के अगले चरण आगे बढ़ते हैं या वॉकआउट करने वाले देश प्रतीक से आगे बढ़कर हथियार नीति, मान्यता या क़ानूनी मंचों के ज़रिये ठोस दबाव बनाते हैं।
यह ख़बर नरसंहार के आरोपों पर कोई फ़ैसला नहीं देती; नेताओं द्वारा निजी धन्यवाद का नेतन्याहू का दावा स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं है, और ग़ाज़ा में मृतकों का आंकड़ा वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय का है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया, जिसमें उन्होंने गाजा में नरसंहार के आरोपों को "इस सदी का सबसे बड़ा झूठ" बताया और ईरान के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के इजरायल के अधिकार का दावा किया। गाजा युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को हमास नेतृत्व वाले हमले से शुरू हुआ था, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 लोग बंधक बनाए गए। पिछले अक्टूबर में हुए युद्धविराम से भारी लड़ाई रुकी और शेष बंधक रिहा हुए, लेकिन आगे की प्रक्रिया ठहर गई है। संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीनी मिशन की अपील पर नेतन्याहू के मंच पर आते ही दर्जनों प्रतिनिधि सभागार से बाहर चले गए।
मुख्य तथ्य
- नेतन्याहू ने 24 सितंबर 2026 (गुरुवार) को संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा नरसंहार के आरोपों को 'इस सदी का सबसे बड़ा झूठ' कहा।
- उन्होंने ईरान पर हमले को 'मेरे जीवन के सबसे आसान फैसलों में से एक' बताया और बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को 'नैतिक कायर' कहा।
- फिलिस्तीनी मिशन ने 193 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में से कई को संदेश भेजकर सामूहिक वॉकआउट की अपील की थी।
- 7 अक्टूबर 2023 के हमास नेतृत्व वाले हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 का अपहरण हुआ।
- गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली कार्रवाई में अब तक कम से कम 73,922 फिलिस्तीनी मारे गए हैं।
- नेतन्याहू ने 17 सितंबर 2024 के पेजर हमले की याद दिलाते हुए मंच पर पेजर दिखाया; उस हमले में 3,000 से अधिक घायल और 12 मारे गए, जिनमें दो बच्चे थे।
- फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास (90) ने रामल्ला से पूर्व-रिकॉर्डेड भाषण दिया, क्योंकि अमेरिका ने लगातार दूसरे वर्ष उन्हें वीजा नहीं दिया।
- न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने नेतन्याहू को 'युद्ध अपराधी' कहकर उनकी गिरफ्तारी की मांग की; ममदानी ने 22 सितंबर को ट्रंप से मुलाकात की।
समयरेखा
- 1967 का युद्धइजरायल ने वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम पर कब्जा किया, जिन्हें फिलिस्तीनी अपने भावी राज्य का हिस्सा मानते हैं।
- 7 अक्टूबर 2023हमास नेतृत्व वाले हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए और 251 का अपहरण; गाजा युद्ध शुरू।
- 17 सितंबर 2024इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह को वितरित हजारों पेजर दूर से विस्फोट किए — 3,000+ घायल, 12 मृत।
- पिछला अक्टूबरइजरायल और हमास के बीच युद्धविराम; भारी लड़ाई रुकी और शेष बंधक रिहा, पर आगे के कदम ठहर गए।
- 22 सितंबर 2026 (मंगलवार)न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से न्यूयॉर्क में मुलाकात की।
- 24 सितंबर 2026 (गुरुवार)अब्बास का रिकॉर्डेड भाषण, उसके बाद नेतन्याहू का भाषण और प्रतिनिधियों का सामूहिक वॉकआउट।
किसका दाँव
- बेंजामिन नेतन्याहू / इजरायल सरकार — नरसंहार व युद्ध अपराध के आरोपों को खारिज करना, ईरान पर हमले को उचित ठहराना; चुनावों की तैयारी के बीच घरेलू समर्थन जुटाना।
- फिलिस्तीनी मिशन व राष्ट्रपति महमूद अब्बास — इजरायल पर ठोस अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग; विस्थापन अस्वीकार और फिलिस्तीनी राज्य की मांग।
- गाजा के नागरिक — 73,922 मौतें, बड़े पैमाने पर तबाही, पुनर्निर्माण में कोई प्रगति नहीं, सैन्य-नियंत्रित क्षेत्रों के पास हवाई हमले जारी।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा व अध्यक्ष खलीलुर रहमान — सभागार में व्यवस्था बनाए रखना; वॉकआउट के बीच बहुपक्षीय मंच की विश्वसनीयता।
- ज़ोहरान ममदानी (न्यूयॉर्क मेयर) — नेतन्याहू की गिरफ्तारी की मांग; नेतन्याहू का आरोप कि वे यहूदी न्यूयॉर्कवासियों को खतरे में डाल रहे हैं।
- अमेरिका / राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप — ईरान पर कार्रवाई के लिए नेतन्याहू का आभार; फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा से इनकार।
- वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी व बसने वाले (सेटलर) — सेटलर हिंसा और गिरफ्तारियों की कमी; अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बस्तियाँ अवैध मानी जाती हैं।
क्यों अहम है
गाजा युद्ध पर वैश्विक कूटनीतिक ध्रुवीकरण अब संयुक्त राष्ट्र के मंच पर खुलकर दिख रहा है — सामूहिक वॉकआउट इजरायल के बढ़ते अलगाव का प्रतीक है। युद्धविराम के बाद भी हमास निरस्त्र नहीं हुआ, इजरायल का गाजा के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है और पुनर्निर्माण शुरू नहीं हुआ, जिससे द्वि-राज्य समाधान की संभावना और धूमिल है। भारत जैसे देशों के लिए यह पश्चिम एशिया नीति, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं की प्रभावशीलता से जुड़ा प्रश्न है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या: 193; महासभा अध्यक्ष (स्रोत के अनुसार): खलीलुर रहमान।
- गाजा युद्ध की शुरुआत: 7 अक्टूबर 2023 — लगभग 1,200 मौतें, 251 अपहरण।
- गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय (हमास शासित सरकार का हिस्सा) के अनुसार मृतक फिलिस्तीनी: 73,922।
- 17 सितंबर 2024: लेबनान में हिजबुल्लाह के पेजरों में विस्फोट — 12 मृत, 3,000+ घायल।
- इजरायल ने 1967 के युद्ध में वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम पर कब्जा किया; अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी इजरायली बस्तियाँ अवैध।
- अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) वारंट के निष्पादन का अधिकार न्यूयॉर्क शहर के पास नहीं — मेयर ममदानी की स्वीकारोक्ति।
मेन्स दृष्टिकोण
गाजा संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विधि और बहुपक्षीय संस्थाओं की वैधता की परीक्षा बन गया है। एक ओर नेतन्याहू 7 अक्टूबर 2023 के हमले (लगभग 1,200 मौतें, 251 अपहरण) और ईरान के परमाणु खतरे को आत्मरक्षा का आधार बताते हुए नरसंहार के आरोपों को 'सदी का सबसे बड़ा झूठ' कहते हैं; दूसरी ओर गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के 73,922 मौतों के आंकड़े, वेस्ट बैंक में सेटलर हिंसा और अवैध बस्तियों के प्रश्न पर अनेक देश युद्ध अपराध व अवैध कब्जे का आरोप लगाते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में सामूहिक वॉकआउट, अब्बास को अमेरिकी वीजा से इनकार, और ICC वारंट की चर्चा दर्शाते हैं कि विवाद कूटनीतिक-न्यायिक क्षेत्र में स्थानांतरित हो चुका है, जबकि पिछले अक्टूबर के युद्धविराम के बाद निरस्त्रीकरण, शासन और पुनर्निर्माण पर कोई प्रगति नहीं हुई। आगे का रास्ता युद्धविराम के अगले चरणों को लागू कराने, मानवीय सहायता व पुनर्निर्माण तंत्र, बंधक-कैदी मुद्दों के निपटारे और सेटलर हिंसा पर जवाबदेही में निहित है — पर नेतन्याहू का यह कथन कि उनके नेतृत्व में कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा और फिलिस्तीनी प्राधिकरण शांति-भागीदार नहीं है, राजनीतिक समाधान को कठिन बनाता है।
मुख्य शब्द
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)
- संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों का मंच, जहाँ विश्व नेता वार्षिक भाषण देते हैं।
- नरसंहार (Genocide) के आरोप
- गाजा में इजरायली कार्रवाई को नरसंहार बताने वाले आरोप, जिन्हें इजरायल पूरी तरह खारिज करता है।
- सामूहिक वॉकआउट
- विरोध का कूटनीतिक तरीका — फिलिस्तीनी मिशन की अपील पर प्रतिनिधियों ने नेतन्याहू के भाषण से पहले सभागार छोड़ा।
- हिजबुल्लाह पेजर हमला
- 17 सितंबर 2024 को इजरायल द्वारा लेबनान में वितरित हजारों पेजरों का दूर से विस्फोट; 12 मृत, 3,000+ घायल।
- अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)
- युद्ध अपराधों की सुनवाई करने वाला न्यायालय; मेयर ममदानी ने इसके वारंट पर संघीय कार्रवाई की मांग की।
- फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA)
- महमूद अब्बास के नेतृत्व वाला निकाय, जिसे नेतन्याहू शांति का भागीदार नहीं मानते।
अभ्यास प्रश्न
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में सामूहिक वॉकआउट जैसे प्रतीकात्मक विरोध क्या बहुपक्षीय कूटनीति की सीमाओं को उजागर करते हैं? गाजा संघर्ष के संदर्भ में परीक्षण करें।
- युद्धविराम के बाद भी गाजा में निरस्त्रीकरण, शासन और पुनर्निर्माण पर प्रगति क्यों ठहरी हुई है? स्रोत में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर चर्चा करें।
- वेस्ट बैंक की बस्तियों की कानूनी स्थिति और 1967 के युद्ध की पृष्ठभूमि द्वि-राज्य समाधान को कैसे प्रभावित करती है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
