इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में दिल्ली शीर्ष पर

नीति आयोग और डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा जारी इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) 2025 में दिल्ली 100 में से 84 अंकों के साथ पहले स्थान पर रही। महाराष्ट्र को 78, कर्नाटक को 73, चंडीगढ़ को 71 और गोवा को 65 अंक मिले। दूसरे संस्करण में सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का आकलन 16 संकेतकों पर किया गया, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन अपनाना, चार्जिंग तैयारी और शोध व नवाचार शामिल हैं। राष्ट्रीय मध्य स्कोर 36 से 40 हुआ। मध्य प्रदेश 23वें से 7वें स्थान पर आया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Delhi tops IEMI 2025 with 84 points out of 100, followed by Maharashtra (78) and Karnataka (73). — Figures appear in the source and match its ranking table; attributed to the NITI Aayog-WRI India index.
  • The index, second edition, covers all 36 states and UTs using 16 indicators across three themes with 50/30/20 weightage. — Stated in the source with a methodology table; no independent verification possible.
  • National median score rose from 36 in 2024 to 40 in 2025, and the best score from 77 to 84. — Figures appear in the source; attributed to the index.
  • Madhya Pradesh recorded the biggest rank rise, from 23 to 7; Manipur topped hilly and northeastern states with 46 points. — Both figures appear in the source; the source also cautions rankings may not be directly comparable across editions.
  • 26 of 36 states and UTs have EV policies in 2025. — Stated in the source as index data; no separate source given.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

आईईएमआई 2025 की रैंकिंग तकनीकी सूचकांक है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह वही किस्म का आंकड़ा है जो जल्दी ही शासन का रिपोर्ट कार्ड बन जाता है। दिल्ली 84 अंकों के साथ शीर्ष पर और उसके बाद महाराष्ट्र व कर्नाटक — यानी अग्रिम पंक्ति में अलग-अलग दलों की सरकारों वाले राज्य हैं, जिससे किसी एकपक्षीय राजनीतिक कथानक की गुंजाइश कम रहती है। मध्य प्रदेश की 23वें से 7वें स्थान पर छलांग जैसे बड़े बदलाव ही आगे चुनावी मंचों पर सुनाई देने वाले आंकड़े हैं।

  • सूचकांक नीति आयोग और डब्ल्यूआरआई इंडिया की साझेदारी से आया है, इसलिए बेहतर स्कोर पाने वाली राज्य सरकारें इसे अपने प्रशासन की स्वतंत्र पुष्टि के रूप में पेश कर सकती हैं।
  • शीर्ष पांच — दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, चंडीगढ़ और गोवा — बहुत भिन्न राजनीतिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र हैं, जिससे किसी एक दल के श्रेय लेने का दावा कमजोर पड़ता है।
  • राष्ट्रीय माध्यिका स्कोर 36 से 40 होना बताता है कि सुधार व्यापक है, यानी रैंक में पिछड़े राज्य भी यह तर्क दे सकते हैं कि उनका प्रदर्शन सुधरा है।
  • मध्य प्रदेश (23 से 7), गोवा और पुडुचेरी (दस-दस स्थान) तथा बिहार (आठ स्थान) की छलांग संबंधित सरकारों को तत्काल प्रचार सामग्री देती है, विशेष रूप से चुनाव के करीब वाले राज्यों में।
  • खबर में दर्ज असंतुलन — हरियाणा में चार्जिंग तैयारी 91 पर लेकिन वाहन अपनाने में 19, उत्तर प्रदेश में इसका उल्टा — विपक्ष को दो तरह की आलोचना का आधार देता है: ढांचा है पर उपयोग नहीं, या उपयोग है पर ढांचा नहीं।

किस पर नज़र रखें — देखने वाली बात यह है कि ऊंची रैंक वाले राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्री इन अंकों को उपलब्धि के प्रमाण के रूप में कितना उठाते हैं, और पिछड़े राज्य जवाब में ईवी नीति घोषणाओं की रफ्तार बढ़ाते हैं या नहीं।

खबर स्वयं कहती है कि पीयर ग्रुपिंग, नए डेटा बिंदु और नए नॉर्मलाइजेशन के कारण रैंकिंग की सीधी तुलना संभव नहीं है; साथ ही यह स्थापित नहीं होता कि इन अंकों का श्रेय किस दल या सरकार को है, या इनका मतदाताओं पर कोई असर पड़ता है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 2 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

नीति आयोग और डब्ल्यूआरआई इंडिया ने संयुक्त रूप से विकसित इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) का दूसरा संस्करण 2025 में जारी किया। यह सूचकांक इलेक्ट्रिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में राज्य और केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के प्रदर्शन का आकलन करता है। इसमें सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को तीन प्रमुख विषयों के अंतर्गत 16 संकेतकों पर परखा गया है। 2025 संस्करण में दिल्ली 100 में से 84 अंकों के साथ शीर्ष पर रही और राष्ट्रीय मध्य स्कोर में भी सुधार दर्ज हुआ।

मुख्य तथ्य

  • आईईएमआई 2025 में दिल्ली 84 अंकों (100 में से) के साथ प्रथम, महाराष्ट्र 78 अंकों के साथ दूसरे और कर्नाटक 73 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर।
  • शीर्ष प्रदर्शकों में चंडीगढ़ (71) और गोवा (65) भी शामिल; महाराष्ट्र और कर्नाटक ही दो बड़े राज्य हैं जो शीर्ष प्रदर्शक श्रेणी में हैं।
  • राष्ट्रीय मध्य (मीडियन) स्कोर 2024 के 36 से बढ़कर 2025 में 40 हुआ; सर्वोच्च स्कोर 77 से बढ़कर 84 हुआ।
  • पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर 46 अंकों के साथ शीर्ष पर।
  • मध्य प्रदेश की रैंक में सर्वाधिक सुधार — 23वें से 7वें स्थान पर; गोवा और पुडुचेरी 10-10 स्थान तथा बिहार 8 स्थान ऊपर।
  • हरियाणा का परिवहन विद्युतीकरण स्कोर केवल 19 पर चार्जिंग तैयारी स्कोर 91; उत्तर प्रदेश में उलटा — विद्युतीकरण 58, चार्जिंग तैयारी 36।
  • चार्जिंग तैयारी में कर्नाटक 97 के साथ शीर्ष पर, गोवा 92, महाराष्ट्र व हरियाणा 91 प्रत्येक, दिल्ली 88; दो-तिहाई से अधिक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश फ्रंटरनर स्तर से नीचे।
  • 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 26 के पास ईवी नीति है; अनुसंधान व नवाचार में महाराष्ट्र 85, कर्नाटक 82, तमिलनाडु 77 शीर्ष पर।

समयरेखा

  1. 2024आईईएमआई का पहला संस्करण; राष्ट्रीय मध्य स्कोर 36 और सर्वोच्च स्कोर 77।
  2. 2025नीति आयोग व डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा आईईएमआई का दूसरा संस्करण जारी; दिल्ली 84 अंकों के साथ शीर्ष, मध्य स्कोर 40।

किसका दाँव

  • नीति आयोग — डब्ल्यूआरआई इंडिया के साथ सूचकांक का सह-विकासकर्ता; राज्यों के इलेक्ट्रिक गतिशीलता प्रदर्शन का तुलनात्मक आकलन।
  • डब्ल्यूआरआई इंडिया — सूचकांक की कार्यप्रणाली, 16 संकेतक और सामान्यीकरण (नॉर्मलाइज़ेशन) डेटासेट तैयार करने में भागीदार।
  • दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, चंडीगढ़, गोवा — शीर्ष प्रदर्शक श्रेणी में; ईवी अपनाने, चार्जिंग और नवाचार में अग्रणी स्थिति।
  • हरियाणा और उत्तर प्रदेश — असंतुलित प्रदर्शन — एक में चार्जिंग तैयारी मजबूत पर वाहन अपनाना कमजोर, दूसरे में उलटा।
  • पहाड़ी, पूर्वोत्तर और द्वीपीय क्षेत्र (मणिपुर 46 अंक) — साझा गतिशीलता, कॉरिडोर चार्जिंग, बिजली आपूर्ति और क्षेत्र-अनुकूल वाहन खंडों पर विशेष ध्यान की आवश्यकता।
  • ईवी स्टार्टअप और उद्योग क्लस्टर — महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु के औद्योगिक-तकनीकी क्लस्टर उच्च नवाचार स्कोर का आधार।

क्यों अहम है

सूचकांक दिखाता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का अपनाना और चार्जिंग ढांचे का विकास हमेशा साथ-साथ नहीं चलते, जिससे राज्यों को अपनी कमजोर कड़ी पहचानने का आधार मिलता है। मध्य स्कोर 36 से 40 होना देशव्यापी प्रगति दर्शाता है, पर दो-तिहाई से अधिक राज्य चार्जिंग तैयारी में फ्रंटरनर स्तर से नीचे हैं। भौगोलिक और आर्थिक भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए यह नीतिगत प्राथमिकताएँ तय करने में सहायक है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • आईईएमआई नीति आयोग और डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित; 2025 इसका दूसरा संस्करण।
  • तीन विषय व भार: परिवहन विद्युतीकरण 50%, चार्जिंग तैयारी 30%, अनुसंधान व नवाचार 20%।
  • 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों का 16 संकेतकों पर आकलन; प्रत्येक क्षेत्र का आधा स्कोर परिणाम, आधा नीति व सक्षमकारी स्थितियों पर।
  • आईईएमआई 2025 शीर्ष 5: दिल्ली 84, महाराष्ट्र 78, कर्नाटक 73, चंडीगढ़ 71, गोवा 65।
  • पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर शीर्ष पर — 46 अंक।
  • परिवहन विद्युतीकरण में सर्वोच्च स्कोर केवल तीन क्षेत्रों — दिल्ली, चंडीगढ़, महाराष्ट्र; 14 क्षेत्र 'एस्पिरेंट्स' श्रेणी में।

मेन्स दृष्टिकोण

आईईएमआई 2025 भारत के इलेक्ट्रिक गतिशीलता संक्रमण की संघीय असमानता को उजागर करता है: दिल्ली (84) और महाराष्ट्र (78) जैसे अग्रणी क्षेत्रों के मुकाबले राष्ट्रीय मध्य स्कोर केवल 40 है, और परिवहन विद्युतीकरण में 14 क्षेत्र 'एस्पिरेंट्स' श्रेणी में हैं। इसका मुख्य निष्कर्ष यह है कि ईवी अपनाना और चार्जिंग ढांचा एक-दूसरे के अनुपात में नहीं बढ़ते — हरियाणा में चार्जिंग तैयारी 91 पर विद्युतीकरण 19, जबकि उत्तर प्रदेश में विद्युतीकरण 58 पर चार्जिंग तैयारी 36। नवाचार में भी भौगोलिक संकेंद्रण दिखता है, जहाँ महाराष्ट्र (85), कर्नाटक (82) और तमिलनाडु (77) के औद्योगिक-स्टार्टअप क्लस्टर बढ़त बनाते हैं। 36 में से 26 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के पास ईवी नीति है, पर स्रोत के अनुसार नीति-निर्माण का दायरा अब क्रियान्वयन, चार्जिंग नेटवर्क, बिजली आपूर्ति, फ्लीट अपनाने और अनुसंधान-विकास की ओर झुक रहा है। आगे की राह क्षेत्र-विशिष्ट रणनीति में है — शहरी क्षेत्रों में घना चार्जिंग नेटवर्क और फ्लीट अपनाना, तथा पहाड़ी, पूर्वोत्तर व द्वीपीय क्षेत्रों में साझा गतिशीलता, कॉरिडोर चार्जिंग, बिजली आपूर्ति और क्षेत्र-अनुकूल वाहन खंड। यह भी ध्यान रखना होगा कि पीयर ग्रुपिंग, नए डेटा बिंदुओं और नए सामान्यीकरण डेटासेट के कारण रैंकिंग की सीधी तुलना हर मामले में उचित नहीं है।

मुख्य शब्द

इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई)
इलेक्ट्रिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों की प्रभावशीलता आँकने वाला सूचकांक।
परिवहन विद्युतीकरण (Transport Electrification)
सूचकांक का 50% भार वाला विषय, जो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की प्रगति मापता है।
चार्जिंग तैयारी (Charging Readiness)
30% भार वाला विषय — चार्जिंग ढांचा और उसे सक्षम बनाने वाली परिस्थितियाँ।
अनुसंधान व नवाचार
20% भार वाला विषय — ईवी स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन।
डब्ल्यूआरआई इंडिया
सूचकांक को नीति आयोग के साथ संयुक्त रूप से विकसित करने वाली भागीदार संस्था।
पीयर ग्रुपिंग व नॉर्मलाइज़ेशन
समान श्रेणी के राज्यों की तुलना और डेटा का मानकीकरण; इनके कारण पुरानी रैंक से सीधी तुलना सीमित।

अभ्यास प्रश्न

  1. आईईएमआई 2025 के निष्कर्षों के आलोक में समझाइए कि इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने और चार्जिंग ढांचे के विकास में असंतुलन क्यों उत्पन्न होता है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है।
  2. क्या राज्यों की रैंकिंग आधारित सूचकांक सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देते हैं? आईईएमआई के उदाहरण से परीक्षण कीजिए।
  3. पहाड़ी, पूर्वोत्तर और द्वीपीय क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिक गतिशीलता की रणनीति शहरी क्षेत्रों से किस प्रकार भिन्न होनी चाहिए? स्रोत में उल्लिखित बिंदुओं के आधार पर चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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