तरंग शक्ति में 40 देशों को भारत दिखाएगा स्वदेशी रक्षा प्रणालियां
जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक होने वाले भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुपक्षीय युद्धाभ्यास तरंग शक्ति के दौरान भारत करीब 40 देशों के वायुसेना प्रमुखों को अपनी स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियां दिखाएगा, अधिकारियों ने बताया। इन्हें 29 सितंबर को बेंगलुरु में एचएएल और बीईएल तथा 3 अक्टूबर को वडोदरा में सी-295 उत्पादन लाइन पर जानकारी दी जाएगी। 65 देशों को निमंत्रण भेजे गए, आठ विमान ला रहे हैं और 32 पर्यवेक्षक हैं। 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ रहा।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Tarang Shakti will be held in Jodhpur from September 26 to October 12, with air force leaders from around 40 countries shown Indian defence systems. — Attributed to officials aware of the matter, who are not named in the source.
- Visiting air force officials will be briefed at HAL and BEL in Bengaluru on September 29 and at the C295 line in Vadodara on October 3. — Dates and venues attributed to the same unnamed officials.
- Invitations went to 65 countries; eight confirmed with air assets and 32 as observers. — Figures appear in the source; no individual attribution given.
- India's defence exports reached a record ₹38,424 crore in 2025-26, up 63% from ₹23,622 crore, against a ₹50,000 crore target for 2029-30. — Figures appear in the source without a named agency; internally consistent with the stated percentage increase.
- July agreements will supply BrahMos and Astra missiles to Indonesia, the third ASEAN state to get BrahMos. — Stated in the source as concluded agreements; no source cited for the claim.
विश्लेषकों की राय राय
तरंग शक्ति अब केवल वायुसेना का अभ्यास नहीं, बल्कि सरकार के लिए एक राजनीतिक और व्यापारिक मंच है। करीब 40 देशों के वायुसेना प्रमुखों को जोधपुर से बेंगलुरु और वडोदरा की उत्पादन इकाइयों तक ले जाना सैन्य कूटनीति को निर्यात ऑर्डर में बदलने की कोशिश है, और साथ ही 'आत्मनिर्भर भारत' के नारे को घरेलू स्तर पर दिखाने योग्य सबूत देने की भी। ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड निर्यात सरकार को मजबूत राजनीतिक कथानक देता है, लेकिन 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ का लक्ष्य एक मापदंड भी बना देता है।
- सरकार ने रक्षा निर्यात को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का विषय बना दिया है और रिकॉर्ड आंकड़े राजनीतिक मंचों पर उपलब्धि के रूप में गिनाए जा सकते हैं।
- दस वर्षीय रक्षा कूटनीति रोडमैप 'रक्षा' का जारी होना और रक्षा अताशे नेटवर्क का पुनर्गठन एक समन्वित रणनीति की ओर इशारा करते हैं, न कि एकबारगी प्रचार कदम।
- अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और यूएई के साथ बांग्लादेश और श्रीलंका का विमानों के साथ शामिल होना भारत के लिए, खासकर पड़ोस में, कूटनीतिक रूप से फायदेमंद है।
- 65 देशों को निमंत्रण गया पर केवल आठ विमानों के साथ आ रहे हैं और 32 पर्यवेक्षक हैं — इससे आलोचकों को यह कहने की जगह मिलती है कि रुचि व्यापक है पर प्रतिबद्धता सीमित।
- इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस और अस्त्र समझौते दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के बढ़ते प्रभाव के दावे को मजबूत करते हैं, साथ ही क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर बहस भी खोलते हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि अभ्यास के बाद वास्तविक ऑर्डर या बातचीत शुरू होती है या नहीं, और विपक्ष ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य की प्रगति पर सवाल उठाता है या नहीं।
यह खबर यह नहीं बताती कि इस प्रदर्शन से कितने नए सौदे होंगे या कौन से देश खरीद के करीब हैं, न ही निर्यात आंकड़ों का विवरण या उन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इसमें शामिल हैं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तरंग शक्ति भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा बहुपक्षीय वायु युद्धाभ्यास है, जिसका दूसरा संस्करण 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर में हो रहा है। इस अभ्यास के साथ-साथ भारत लगभग 40 देशों के वायुसेना प्रमुखों को अपनी स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण क्षमताएं दिखाएगा, ताकि सैन्य निर्यात बढ़ाया जा सके। यह पहल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जारी 'रक्षा' नामक 10-वर्षीय रक्षा कूटनीति रोडमैप के कुछ सप्ताह बाद आई है। भारत ने 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।
मुख्य तथ्य
- तरंग शक्ति अभ्यास जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक आयोजित; यह भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा बहुपक्षीय युद्धाभ्यास है।
- लगभग 40 देशों के वायुसेना प्रमुखों को भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों की जानकारी दी जाएगी।
- 29 सितंबर को बेंगलुरु में एचएएल और बीईएल का दौरा, 3 अक्टूबर को वडोदरा में सी-295 उत्पादन लाइन का दौरा।
- अभ्यास के दूसरे संस्करण के लिए 65 देशों को निमंत्रण; 8 देश विमान ला रहे हैं और 32 देश पर्यवेक्षक के रूप में आ रहे हैं।
- विमान लाने वाले देश: अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और श्रीलंका।
- 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड ₹38,424 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹23,622 करोड़ से 63% अधिक है।
- 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित।
- जुलाई में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अस्त्र बीवीआर मिसाइल की आपूर्ति के समझौते; अस्त्र का यह पहला निर्यात।
समयरेखा
- जुलाई (वर्ष स्रोत में उल्लिखित नहीं)इंडोनेशिया की सशस्त्र सेनाओं को ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और अस्त्र बीवीआर मिसाइल की आपूर्ति के समझौते संपन्न।
- तरंग शक्ति से कुछ सप्ताह पूर्वरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'रक्षा' नाम से रक्षा कूटनीति का 10-वर्षीय रणनीतिक रोडमैप जारी किया।
- 26 सितंबरजोधपुर में तरंग शक्ति अभ्यास प्रारंभ।
- 29 सितंबरविदेशी वायुसेना प्रमुखों का बेंगलुरु में एचएएल और बीईएल दौरा।
- 3 अक्टूबरवडोदरा में सी-295 उत्पादन लाइन का दौरा।
- 12 अक्टूबरतरंग शक्ति अभ्यास का समापन।
किसका दाँव
- भारतीय वायुसेना — अभ्यास की मेजबानी और साझेदार देशों के समक्ष स्वदेशी प्लेटफॉर्म, सेंसर, हथियार और मानवरहित प्रणालियों का प्रदर्शन।
- एचएएल और बीईएल — बेंगलुरु में विदेशी वायुसेना नेतृत्व को अपनी विनिर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन, संभावित निर्यात ऑर्डर।
- रक्षा मंत्रालय / रक्षा उत्पादन विभाग — निर्यात एसओपी और ओजीईएल ढांचे में सुधार तथा ₹50,000 करोड़ के निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति।
- भारतीय रक्षा उद्योग — लाइसेंसिंग सरलीकरण और विदेशी बाजार पहुंच में आसानी से निर्यात अवसर।
- भागीदार व पर्यवेक्षक देश (अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, ब्राजील, जापान आदि) — संयुक्त अभ्यास से अंतरसंचालनीयता और भारतीय रक्षा उत्पादों के आकलन का अवसर।
- इंडोनेशिया — ब्रह्मोस लेने वाला तीसरा आसियान देश; अस्त्र मिसाइल का पहला विदेशी खरीदार।
क्यों अहम है
तरंग शक्ति अब केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत के लिए रक्षा निर्यात की मार्केटिंग मंच बन गया है—जहां 40 देशों के वायुसेना प्रमुखों को स्वदेशी क्षमताएं दिखाई जाएंगी। रक्षा निर्यात में 63% की वृद्धि और ब्रह्मोस-अस्त्र सौदों के साथ भारत खरीदार से विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता की भूमिका में बदल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और रक्षा कूटनीति के आपसी पूरक संबंध को दर्शाता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- तरंग शक्ति: भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा बहुपक्षीय युद्धाभ्यास; दूसरा संस्करण जोधपुर, 26 सितंबर–12 अक्टूबर।
- रक्षा निर्यात 2025-26: ₹38,424 करोड़ (रिकॉर्ड), 2024-25 में ₹23,622 करोड़; लक्ष्य 2029-30 तक ₹50,000 करोड़।
- 'रक्षा': रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा जारी रक्षा कूटनीति का 10-वर्षीय रणनीतिक रोडमैप।
- ओजीईएल (Open General Export Licence): एक बार का स्थायी प्राधिकरण, जिससे निर्यातक कई खेपों के लिए स्वयं प्राधिकरण बना सकते हैं।
- सी-295 परिवहन विमान की उत्पादन लाइन वडोदरा में; एचएएल व बीईएल बेंगलुरु में।
- ब्रह्मोस लेने वाला तीसरा आसियान देश इंडोनेशिया—पहले फिलीपींस और वियतनाम; ब्रह्मोस भारत-रूस संयुक्त विकास।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की रक्षा नीति में एक संरचनात्मक बदलाव दिख रहा है—अब वह केवल आयातक नहीं, बल्कि विकासकर्ता, निर्माता और आपूर्तिकर्ता बनने का प्रयास कर रहा है, जैसा वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के कथन से स्पष्ट है कि आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग परस्पर विरोधी नहीं, पूरक हैं। इसके कारक हैं: औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया का सरलीकरण, पुर्जों को लाइसेंस व्यवस्था से बाहर करना, निर्यात प्राधिकरण का सरलीकरण, ओजीईएल ढांचे में सुधार, तथा रक्षा अताशे नेटवर्क का उन देशों की ओर पुनर्गठन जो भारत से हथियार खरीद सकते हैं। परिणाम स्वरूप 2025-26 में निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा (63% वृद्धि) और मिसाइल, तोप, राकेट, बख्तरबंद वाहन, गश्ती पोत, रडार व निगरानी प्रणालियों का निर्यात हो रहा है। तरंग शक्ति जैसे अभ्यास और बेंगलुरु-वडोदरा की औद्योगिक यात्राएं 'शो-एंड-सेल' कूटनीति का उदाहरण हैं। आगे की राह: 2029-30 के ₹50,000 करोड़ लक्ष्य के लिए निर्यात-पश्चात सेवा व साख, अंतरसंचालनीयता और आसियान जैसे क्षेत्रों में ब्रह्मोस-अस्त्र सौदों जैसी सफलताओं को दोहराना आवश्यक है।
मुख्य शब्द
- तरंग शक्ति
- भारतीय वायुसेना का सबसे बड़ा बहुपक्षीय वायु युद्धाभ्यास; दूसरा संस्करण जोधपुर में।
- रक्षा (Raksha)
- रक्षा मंत्री द्वारा जारी 10-वर्षीय रणनीतिक रोडमैप, जो वैश्विक साझेदारी और निर्यात को मजबूत करने की दृष्टि देता है।
- ओजीईएल
- ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस—पात्र निर्यातकों को निर्दिष्ट रक्षा वस्तुओं की कई खेपों के लिए स्वयं प्राधिकरण जारी करने की छूट।
- आत्मनिर्भरता
- रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता निर्माण की नीति, जिसे स्रोत में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का पूरक बताया गया है।
- ब्रह्मोस
- भारत-रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित क्रूज मिसाइल; इंडोनेशिया इसे लेने वाला तीसरा आसियान देश।
- अस्त्र
- दृश्य सीमा से परे (BVR) हवा-से-हवा मिसाइल, जिसका इंडोनेशिया सौदा इसका पहला निर्यात है।
अभ्यास प्रश्न
- तरंग शक्ति जैसे बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास भारत की रक्षा कूटनीति और निर्यात लक्ष्यों को कैसे आगे बढ़ाते हैं? उदाहरणों सहित चर्चा करें।
- भारत के रक्षा निर्यात में हुई हाल की वृद्धि के पीछे कौन-से नीतिगत सुधार हैं, और 2029-30 के ₹50,000 करोड़ लक्ष्य तक पहुंचने में क्या चुनौतियां हैं?
- "आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग परस्पर विरोधी नहीं, पूरक हैं"—भारत के रक्षा उत्पादन के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
