कमजोर विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' का मोदी की भाजपा से मुकाबला

विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि उसे बराबरी का मैदान नहीं दिया गया, जबकि लगातार तीसरे कार्यकाल की कोशिश में जुटी भाजपा जनमत सर्वेक्षणों में आगे है। पिछले जुलाई में बना 'इंडिया' गठबंधन कांग्रेस के साथ दो दर्जन से अधिक दलों को जोड़ता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारियों को विपक्ष राजनीति से प्रेरित बताता है; मोदी इन आरोपों को 'बहाने' कहते हैं। भाजपा 12 राज्यों में, कांग्रेस तीन में सत्ता में है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The INDIA alliance, formed last July, has more than two dozen member parties including Congress. — Stated as fact in the source with no external citation; internally consistent.
  • More than 100 politicians have been investigated by federal agencies since the BJP took power, 95% of them from the opposition. — Attributed in the source to the Indian Express; not independently verified here.
  • Of 25 opposition leaders under investigation who joined the BJP, 23 saw cases dropped or put on hold. — Also attributed to the Indian Express report.
  • Congress alleged its bank accounts were frozen; the tax department denied the claims. — Both allegation and denial are attributed in the source.
  • Congress's vote share fell below 40% in 1989 and to around 20% in 2014 and 2019. — Figures appear in the source without a named data source.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

'इंडिया' गठबंधन की मुश्किल एक नहीं, दो हैं — बाहरी दबाव और भीतरी कमज़ोरी, दोनों एक साथ। जाँच एजेंसियों और खाते सील होने के आरोप विपक्ष को 'पीड़ित' कथानक देते हैं, लेकिन सीट बँटवारे की अनिश्चितता, साझा एजेंडे और राष्ट्रीय चेहरे की कमी उस कथानक को वोट में बदलने की ताक़त छीन लेती है। बीजेपी 12 राज्यों में और कांग्रेस सिर्फ़ तीन में — यही आँकड़ा मौजूदा शक्ति-संतुलन बताता है।

  • दो दर्जन से ज़्यादा दलों के गठबंधन में क्षेत्रीय हित राष्ट्रीय लक्ष्य पर भारी पड़ रहे हैं — पश्चिम बंगाल में सीट बँटवारा न होना इसका सबसे तीखा उदाहरण है।
  • केजरीवाल और सोरेन की गिरफ़्तारियाँ विपक्ष को राजनीतिक हथियार देती हैं, लेकिन प्रचार के चरम पर बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी का नुक़सान भी।
  • इन आरोपों को 'बहाने' कहकर मोदी बहस को संस्थाओं के दुरुपयोग से हटाकर विपक्ष की नाकामी पर ले जाते हैं — रणनीतिक रूप से सुविधाजनक मोड़।
  • जेडी(यू) और आरएलडी जैसे शुरुआती साथियों का एनडीए में जाना गठबंधन की मोलभाव क्षमता और भरोसे, दोनों पर चोट है।
  • कांग्रेस का घटता वोट प्रतिशत और नेताओं का पलायन गठबंधन की धुरी बनने की उसकी क्षमता पर सवाल खड़े करते हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि अनसुलझा सीट बँटवारा अहम राज्यों में विपक्षी वोट बाँटता है, या 'बराबरी का मैदान नहीं' वाला तर्क सहानुभूति बनकर मतदाता को हिला पाता है।

यह रिपोर्ट यह साबित नहीं करती कि गिरफ़्तारियाँ या खाते सील होना वाकई राजनीति से प्रेरित थे, और सर्वेक्षणों की बढ़त नतीजों की गारंटी भी नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 9 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारत के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी की भाजपा लगातार तीसरे कार्यकाल की कोशिश में है और जनमत सर्वेक्षणों में आगे है। इसके मुकाबले पिछले जुलाई में बना विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस) कांग्रेस और छोटे व क्षेत्रीय दलों को मिलाकर दो दर्जन से अधिक सदस्यों का असंगठित समूह है, जिसे जोड़ने वाली एकमात्र बात भाजपा को हटाने की इच्छा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जांच एजेंसियों और वित्तीय दबाव के जरिये बराबरी का मैदान नहीं दे रही; मोदी इन आरोपों को 'बहाने' कहकर खारिज करते हैं। साथ ही गठबंधन पर सीट बंटवारे, साझा घोषणापत्र और करिश्माई राष्ट्रीय नेता के अभाव के सवाल भी हैं।

मुख्य तथ्य

  • 'इंडिया' गठबंधन पिछले जुलाई में बना; इसका पूरा नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस है और इसमें दो दर्जन से अधिक दल हैं।
  • भाजपा देश के 28 राज्यों में से 12 में सत्ता में है, जबकि कांग्रेस अब केवल तीन राज्यों तक सीमित है।
  • इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भाजपा के सत्ता में आने के एक दशक में 100 से अधिक नेताओं की केंद्रीय एजेंसियों ने जांच की, जिनमें 95% विपक्ष के थे।
  • उसी रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार जांच के दायरे में आए 25 विपक्षी नेता भाजपा में गए, जिनमें 23 के मामले बंद हुए या रोक दिए गए।
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव शुरू होने से एक महीने पहले भ्रष्टाचार के आरोप में हिरासत में लिया गया।
  • दिसंबर में सुरक्षा चूक पर विरोध के दौरान 140 से अधिक विपक्षी सांसद संसद से कुछ समय के लिए निलंबित किए गए; उसी महीने सांसद महुआ मोइत्रा को निष्कासित किया गया।
  • कांग्रेस पहले लगातार 40% से अधिक वोट पाती थी; 1989 में 40% से नीचे गई और 2014 तथा 2019 में करीब 20% रह गई।
  • जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय लोक दल—'इंडिया' के दो शुरुआती सदस्य—पाला बदलकर भाजपा के एनडीए में शामिल हो गए।

समयरेखा

  1. 1989कांग्रेस का वोट शेयर पहली बार 40% से नीचे गिरा।
  2. 2014 और 2019कांग्रेस का वोट शेयर लगभग 20% तक गिरा; भाजपा सत्ता में।
  3. 2022महाराष्ट्र में सहयोगी शिवसेना के बागियों ने गठबंधन सरकार गिराकर भाजपा के साथ नई सरकार बनाई; एनसीपी में भी गुटीय विभाजन हुआ।
  4. पिछली गर्मी (last summer)राहुल गांधी आपराधिक मानहानि मामले में तीन महीने के लिए सांसद पद से अयोग्य घोषित; अपील पर अदालत ने सजा पर रोक लगाई।
  5. पिछला जुलाईकांग्रेस व क्षेत्रीय दलों को मिलाकर 'इंडिया' गठबंधन का गठन।
  6. दिसंबर140 से अधिक विपक्षी सांसदों का अस्थायी निलंबन; महुआ मोइत्रा का संसद से निष्कासन।
  7. फरवरीकांग्रेस नेताओं का आरोप कि पार्टी के बैंक खाते फ्रीज किए गए; कर विभाग ने आरोप नकारा।
  8. मार्चराहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत के दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का विचार 'पूरी तरह झूठ' है।
  9. चुनाव शुरू होने से एक महीने पहलेअरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी, जिससे विपक्ष एक प्रमुख प्रचारक से वंचित हुआ।

किसका दाँव

  • भाजपा (नरेंद्र मोदी) — लगातार तीसरे कार्यकाल की कोशिश; जनमत सर्वेक्षणों में आगे; विपक्ष के आरोपों को 'बहाने' और 'लोकतंत्र-संस्थाओं पर बेबुनियाद हमला' बताती है।
  • कांग्रेस और राहुल गांधी — वोट शेयर व राज्यों में सिकुड़ती ताकत, बैंक खाते फ्रीज होने का आरोप, नेतृत्व व प्रचार शैली पर आलोचना।
  • 'इंडिया' गठबंधन के दल — साझा उम्मीदवार, सीट बंटवारा और साझा घोषणापत्र न बन पाने से वोट बंटने का खतरा।
  • अरविंद केजरीवाल व हेमंत सोरेन — भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तारी, जिसे वे निराधार व राजनीति से प्रेरित बताते हैं।
  • तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) — पश्चिम बंगाल में सीट साझा न करने का फैसला; क्षेत्रीय जमीन बचाने बनाम राष्ट्रीय नतीजे का तनाव।
  • केंद्रीय जांच एजेंसियां व कर विभाग — निष्पक्षता पर सवाल; कर विभाग ने खाते फ्रीज करने के आरोप नकारे।
  • मतदाता और नागरिक समाज/एमनेस्टी इंटरनेशनल — चुनावी मैदान की निष्पक्षता; एमनेस्टी का कहना है कि विपक्ष पर 'कार्रवाई' 'संकट बिंदु' पर पहुंच गई है।

क्यों अहम है

चुनाव की निष्पक्षता और विपक्ष की क्षमता किसी भी लोकतंत्र की सेहत के मूल संकेतक हैं; जब जांच एजेंसियों और वित्तीय नियंत्रण के इस्तेमाल पर सवाल उठते हैं तो 'बराबरी के मैदान' की बहस संस्थागत विश्वसनीयता की बहस बन जाती है। दूसरी ओर, विपक्ष की अपनी कमजोरियां—सीट बंटवारे की असफलता, दलबदल और राष्ट्रीय चेहरे का अभाव—यह तय करती हैं कि प्रतिस्पर्धी राजनीति कितनी असरदार रहेगी। दोनों पहलू मिलकर 2024 के बाद की भारतीय राजनीति की दिशा तय करेंगे।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 'इंडिया' = Indian National Developmental Inclusive Alliance; गठन पिछले जुलाई, दो दर्जन से अधिक दल।
  • भाजपा 28 राज्यों में से 12 में सत्ता में, कांग्रेस केवल 3 में।
  • कांग्रेस का वोट शेयर: 1989 में पहली बार 40% से नीचे, 2014 व 2019 में लगभग 20%।
  • इंडियन एक्सप्रेस: एक दशक में 100+ नेताओं की केंद्रीय एजेंसी जांच, 95% विपक्ष से।
  • जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय लोक दल 'इंडिया' छोड़कर एनडीए में शामिल।
  • दिसंबर में सुरक्षा चूक के विरोध पर 140+ विपक्षी सांसद निलंबित; महुआ मोइत्रा संसद से निष्कासित।

मेन्स दृष्टिकोण

आम चुनाव 2024 की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा दो स्तरों पर कमजोर दिखती है—संस्थागत और संगठनात्मक। विपक्ष का तर्क है कि जांच एजेंसियों और वित्तीय साधनों के उपयोग से बराबरी का मैदान नहीं मिला: केजरीवाल व सोरेन की गिरफ्तारियां, कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज होने का आरोप (कर विभाग द्वारा खंडित), 140 से अधिक सांसदों का निलंबन, महुआ मोइत्रा का निष्कासन और राहुल गांधी की अस्थायी अयोग्यता; इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जांच के दायरे में आए नेताओं में 95% विपक्ष के थे और भाजपा में गए 25 में 23 के मामले बंद या स्थगित हुए। एमनेस्टी इंटरनेशनल इसे 'संकट बिंदु' कहता है, वहीं भाजपा इसे 'ऐतिहासिक हार' के डर से उठाया शोर बताती है। दूसरी ओर विपक्ष की आंतरिक कमजोरियां भी हैं—कांग्रेस का 40%+ से 20% तक गिरा वोट शेयर, दलबदल, महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी विभाजन, जद(यू) व रालोद का एनडीए में जाना, बंगाल में तृणमूल का सीट साझा न करना, तथा वैचारिक टकराव के कारण साझा घोषणापत्र व साझा मंच में देरी। केसी सुरी की आलोचना है कि गैर-भाजपा दल परिवार-केंद्रित इकाइयों में बदल गए हैं। आगे का रास्ता: विश्वसनीय सीट-बंटवारा और साझा कार्यक्रम, संस्थागत निष्पक्षता की पारदर्शी कसौटियां, तथा प्रशांत किशोर की चेतावनी के अनुरूप 'चुनाव के बाद भी कल है' वाली दीर्घकालिक संगठनात्मक तैयारी।

मुख्य शब्द

इंडिया (INDIA) गठबंधन
Indian National Developmental Inclusive Alliance—पिछले जुलाई बना विपक्षी गठबंधन, जिसमें कांग्रेस सहित दो दर्जन से अधिक दल हैं।
एनडीए
भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन, जिसमें हाल में जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय लोक दल शामिल हुए।
बराबरी का मैदान (level playing field)
सभी दलों को समान चुनावी अवसर; विपक्ष का आरोप है कि सरकार इसे नकार रही है।
सीट-बंटवारा
गठबंधन दलों में सीटें बांटकर एकजुट उम्मीदवार उतारना; बंगाल में तृणमूल ने इससे इनकार किया।
आपराधिक मानहानि मामला
वह मामला जिसमें राहुल गांधी तीन महीने के लिए सांसद पद से अयोग्य हुए; अदालत ने अपील पर सजा पर रोक लगाई।
एमनेस्टी इंटरनेशनल
मानवाधिकार संगठन, जिसने कहा कि चुनाव से पहले विपक्ष पर कार्रवाई 'संकट बिंदु' तक पहुंच गई है।

अभ्यास प्रश्न

  1. विपक्ष के 'बराबरी का मैदान न मिलने' के आरोपों और सरकार के प्रत्युत्तर का परीक्षण कीजिए। स्रोत में दिए तथ्यों के आधार पर संस्थागत निष्पक्षता के सवालों पर चर्चा करें।
  2. भारत में गठबंधन-निर्माण में राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय हितों के बीच अंतर्निहित तनाव को 'इंडिया' गठबंधन के अनुभव (जैसे पश्चिम बंगाल) से समझाइए।
  3. कांग्रेस के वोट शेयर में 40%+ से लगभग 20% तक की गिरावट के कारण क्या रहे? दलबदल और संगठनात्मक कमजोरियों की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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