राष्ट्रीय कर्नाटक

कावेरी जलाशयों का जलस्तर घटा, कर्नाटक में कमी की चेतावनी

कर्नाटक के चार प्रमुख कावेरी बेसिन जलाशयों — कृष्णराज सागर, कबिनी, हेमावती और हारंगी — में भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। केआरएस में सकल भंडारण 27.54 टीएमसी है, जो पिछले साल 47.68 टीएमसी था, और जीवंत भंडारण करीब 51% घटा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने लोगों से पेयजल और बिजली की कमी के लिए "मानसिक रूप से तैयार" रहने को कहा। राज्य में लगभग 60% वर्षा की कमी है, 178 तालुकों में कमी दर्ज हुई और पहले चरण में 101 तालुक सूखाग्रस्त घोषित किए गए। जलविद्युत उत्पादन करीब 23% गिरा है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • KRS reservoir holds 27.54 TMC gross storage against 47.68 TMC on September 16 last year; live storage down nearly 51%. — Figures appear in source and are repeated consistently in its own summary box; attributed to reservoir data cited by the report.
  • Karnataka faces around 60% rainfall deficit, with 178 taluks deficient, 158 very scanty and 20 with no rainfall. — Attributed to CM DK Shivakumar in the source; internally consistent (158+20=178).
  • 101 taluks declared drought-hit in the first phase. — Attributed to the state government in the source; no independent verification possible.
  • Hydroelectric power generation has declined by around 23%. — Attributed to the state government; no supporting data or baseline period given.
  • About 112.88 TMC of surplus Cauvery water flowed into the sea over five years; Mekedatu could store at least 22 TMC of drinking water. — Attributed to Water Resources Minister N Cheluvarayaswamy; a claim made in support of the project, not independently sourced.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

कर्नाटक में सूखा अब केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, एक राजनीतिक परीक्षा बन गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार लोगों से 'मानसिक रूप से तैयार' रहने की अपील कर पहले ही अपेक्षाएं कम कर रहे हैं, और साथ ही क्षेत्रीय निरीक्षण तथा जिला प्रभारी मंत्रियों के दौरों के जरिए सरकार की सक्रियता दिखा रहे हैं। विपक्ष से सूखे का राजनीतिकरण न करने की उनकी अपील बताती है कि यह मुद्दा चुनावी रूप से कितना संवेदनशील है। साथ-साथ मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाना संकट को दीर्घकालिक भंडारण समाधान के लिए दबाव में बदलने की कोशिश है।

  • पेयजल और बिजली की कमी की पहले से चेतावनी देकर मुख्यमंत्री जिम्मेदारी का रुख वर्षा की कमी की ओर मोड़ रहे हैं और सरकार के लिए राजनीतिक कवच बना रहे हैं।
  • 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करना और आगे और जोड़ने की संभावना राहत आवंटन को निर्वाचन क्षेत्र स्तर का राजनीतिक फैसला बना देती है।
  • केंद्रीय दल के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखना दोनों तरफ काम करता है — मदद मिली तो श्रेय, नहीं मिली तो केंद्र पर आरोप का आधार।
  • कर्नाटक के सांसदों के सहयोग से मेकेदातु पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मिलने की योजना तमिलनाडु के साथ संवेदनशील नदी-जल राजनीति को फिर सामने ले आएगी।
  • 21-23 सितंबर का विशेष विधानमंडल सत्र और 18 सितंबर की कैबिनेट बैठक सूखा प्रबंधन पर सरकार-विपक्ष टकराव के मुख्य मंच बन सकते हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि विशेष सत्र में विपक्ष सूखा प्रबंधन पर कितना तीखा हमला करता है, और अतिरिक्त तालुकों की घोषणा तथा केंद्रीय दल का दौरा किस दिशा में जाता है।

यह खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि केंद्र कैसी प्रतिक्रिया देगा, मेकेदातु को मंजूरी मिलेगी या नहीं, और विपक्ष औपचारिक रूप से क्या रुख अपनाएगा।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

कर्नाटक के कावेरी बेसिन के चार प्रमुख जलाशयों — कृष्णराज सागर (केआरएस), कबिनी, हेमावती और हारंगी — में जलभंडारण पिछले वर्ष की इसी तारीख की तुलना में तेजी से घटा है, क्योंकि राज्य भारी वर्षा कमी से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पेयजल और बिजली की कमी की चेतावनी देते हुए लोगों से "मानसिक रूप से तैयार" रहने को कहा है। जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने सूखे वर्षों में पेयजल भंडारण के लिए मेकेदातु परियोजना की पैरवी तेज कर दी है। कावेरी बेसिन कर्नाटक के 11 जिलों में 34,273 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यह तमिलनाडु के साथ पुराने जल विवाद का केंद्र भी है।

मुख्य तथ्य

  • केआरएस की कुल क्षमता 49.45 टीएमसी है; वर्तमान सकल भंडारण 27.54 टीएमसी, जबकि पिछले 16 सितंबर को 47.68 टीएमसी था।
  • केआरएस का जीवंत भंडारण 19.17 टीएमसी है, 2025 की इसी अवधि के 39.30 टीएमसी के मुकाबले — लगभग 51% की कमी।
  • कबिनी (क्षमता 19.52 टीएमसी) में सकल भंडारण 10.95 टीएमसी (पिछले वर्ष 18.23 टीएमसी); जीवंत भंडारण केवल 1.14 टीएमसी (पिछले वर्ष 8.42 टीएमसी)।
  • हेमावती में 19.49 टीएमसी (कुल क्षमता लगभग 37 टीएमसी) — पिछले वर्ष 36.95 टीएमसी; हारंगी में 6.48 टीएमसी (क्षमता 8.5 टीएमसी) — पिछले वर्ष 8.33 टीएमसी।
  • राज्य में लगभग 60% वर्षा की कमी; 178 तालुकों में कमी, जिनमें 158 में अत्यंत कम और 20 में शून्य वर्षा; पहले चरण में 101 तालुक सूखाग्रस्त घोषित।
  • बिलिगुंडलु (कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा मापन बिंदु) पर 16 जून से 14 सितंबर तक प्रवाह 37.531 टीएमसी दर्ज हुआ।
  • जलविद्युत उत्पादन लगभग 23% घटा; सरकार ने पेयजल के लिए पहले 379 करोड़ रुपये जारी किए, जिनमें ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों को 1 करोड़ रुपये प्रत्येक।
  • मंत्री का दावा: बीते पाँच वर्षों में लगभग 112.88 टीएमसी अतिरिक्त कावेरी जल समुद्र में बहा; मेकेदातु से कम से कम 22 टीएमसी पेयजल भंडारण संभव।

समयरेखा

  1. 16 जून से 14 सितंबर (इस वर्ष)बिलिगुंडलु पर 37.531 टीएमसी प्रवाह दर्ज।
  2. 16 सितंबर 2025जलाशयों के तुलनात्मक आँकड़े: केआरएस 47.68 टीएमसी, कबिनी 18.23 टीएमसी, हेमावती 36.95 टीएमसी, हारंगी 8.33 टीएमसी सकल भंडारण।
  3. पूर्व मेंमुख्यमंत्री ने 15 दिन में स्थल निरीक्षण आधारित वर्षा कमी व सूखा रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया; प्रधानमंत्री को केंद्रीय दल भेजने के लिए पत्र लिखा।
  4. बुधवारजल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने कावेरी नीरावरी निगम की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
  5. 16 सितंबर 2026 (रिपोर्ट प्रकाशन)चारों कावेरी जलाशयों में भारी गिरावट के आँकड़े सामने आए।
  6. 18 सितंबरराज्य मंत्रिमंडल की बैठक — सूखा प्रबंधन, पेयजल और किसानों के उपायों पर चर्चा प्रस्तावित।
  7. 21 से 23 सितंबरकर्नाटक विधानमंडल का विशेष सत्र, जिसमें सूखा और कृषि संकट मुख्य मुद्दे रहेंगे।

किसका दाँव

  • मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार — पेयजल और बिजली संकट प्रबंधन; केंद्र से सहायता और केंद्रीय दल की मांग; राजनीतिक जवाबदेही।
  • जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी — जल आवंटन, अधिकारियों की क्षेत्र-तैनाती और मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाना।
  • कर्नाटक के किसान — सिंचाई जल की अनिश्चितता; बुवाई से पहले जलाशय स्तर की जानकारी पर निर्भरता; फसल नुकसान का जोखिम।
  • तमिलनाडु — बिलिगुंडलु पर प्रवाह और मेकेदातु परियोजना पर आपत्तियाँ, जिनका उत्तर एसओपी के जरिये दिए जाने का दावा।
  • केंद्र सरकार / केंद्रीय जल आयोग / जल शक्ति मंत्रालय — सूखा आकलन दल भेजना, मेकेदातु परियोजना पर मंजूरी और प्रतिक्रिया।
  • बिजली उपभोक्ता एवं राज्य विद्युत तंत्र — जलविद्युत उत्पादन में 23% गिरावट के बीच उच्च मांग पूरी करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था।
  • कावेरी नीरावरी निगम व जिला प्रभारी मंत्री — क्षेत्रीय निरीक्षण, तथ्यात्मक आँकड़ों के साथ रिपोर्टिंग; विफलता पर निलंबन की चेतावनी।

क्यों अहम है

कावेरी बेसिन कर्नाटक के 11 जिलों में 34,273 वर्ग किलोमीटर में फैला है और बेंगलुरु सहित बड़ी आबादी की पेयजल तथा लगभग 18.85 लाख एकड़ की सिंचाई इसी पर निर्भर है। भंडारण में लगभग आधी गिरावट और 23% कम जलविद्युत उत्पादन का असर पेयजल, खरीफ फसल और बिजली आपूर्ति तीनों पर एक साथ पड़ता है। यह संकट अंतरराज्यीय जल बँटवारे (तमिलनाडु को रिलीज) और मेकेदातु जैसे विवादित भंडारण प्रस्तावों को भी फिर केंद्र में ले आता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • कावेरी बेसिन के कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशय: कृष्णराज सागर (केआरएस), कबिनी, हेमावती, हारंगी।
  • बिलिगुंडलु — कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर कावेरी जल मापन बिंदु; 16 जून-14 सितंबर में प्रवाह 37.531 टीएमसी।
  • कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण अवॉर्ड के अनुसार कर्नाटक का लक्ष्य 18.85 लाख एकड़ सिंचाई (15.55 लाख बड़े/मध्यम + 3.30 लाख लघु सिंचाई)।
  • कर्नाटक में कावेरी बेसिन 11 जिलों में 34,273 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है।
  • मेकेदातु परियोजना: कम से कम 22 टीएमसी पेयजल भंडारण का दावा; केंद्रीय जल आयोग की सकारात्मक प्रतिक्रिया का उल्लेख।
  • सूखा आँकड़े: लगभग 60% वर्षा कमी, 178 तालुकों में कमी, 101 तालुक पहले चरण में सूखाग्रस्त घोषित।

मेन्स दृष्टिकोण

कर्नाटक का वर्तमान संकट दिखाता है कि मानसून की विफलता कैसे एक साथ पेयजल, सिंचाई और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है: लगभग 60% वर्षा कमी, 178 तालुकों में कमी और 101 तालुक सूखाग्रस्त घोषित होने के बीच केआरएस का जीवंत भंडारण लगभग 51% घट गया, कबिनी का जीवंत भंडारण 8.42 टीएमसी से गिरकर मात्र 1.14 टीएमसी रह गया, और जलविद्युत उत्पादन लगभग 23% घटा। सरकार की प्रतिक्रिया तीन स्तरों पर है — तत्कालिक (उपलब्ध जल का 20% विशेष रूप से पेयजल के लिए आरक्षित, तुमकुरु, बसरालु और नागमंगला क्षेत्रों के तालाबों में हर तीन दिन में जल छोड़ना, बाँध स्तर पर दिन में दो बार अपडेट, पेयजल के लिए 379 करोड़ रुपये), प्रशासनिक (स्थल निरीक्षण आधारित सूखा रिपोर्ट, केंद्रीय दल के लिए प्रधानमंत्री को पत्र, 18 सितंबर की कैबिनेट व 21-23 सितंबर का विशेष सत्र), और दीर्घकालिक (मेकेदातु भंडारण परियोजना, जिसके लिए डूब क्षेत्र की वैकल्पिक भूमि, दस्तावेजों का डिजिटलीकरण और तीन वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य बताया गया)। चुनौती यह है कि मेकेदातु अंतरराज्यीय संवेदनशीलता से जुड़ा है, जबकि किसानों की बुवाई संबंधी अपेक्षाएँ जलाशय स्तर की सटीक व नियमित सूचना पर निर्भर हैं; आगे का रास्ता माँग-प्रबंधन, फसल सलाह, पारदर्शी जल आवंटन और सूखा राहत में गैर-राजनीतिक समन्वय में दिखता है।

मुख्य शब्द

टीएमसी (TMC)
जल मात्रा की इकाई — हजार मिलियन क्यूबिक फीट; जलाशय भंडारण मापने में प्रयुक्त।
जीवंत भंडारण (Live storage)
जलाशय में वह जल जो वास्तव में उपयोग के लिए निकाला जा सकता है, मृत भंडारण से ऊपर का हिस्सा।
मेकेदातु परियोजना
कर्नाटक की प्रस्तावित कावेरी भंडारण परियोजना; सरकार के अनुसार कम से कम 22 टीएमसी पेयजल भंडारण देगी।
बिलिगुंडलु
कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित कावेरी जल प्रवाह मापन बिंदु।
कावेरी नीरावरी निगम
कर्नाटक की कावेरी सिंचाई परियोजनाओं से जुड़ी संस्था, जिसकी समीक्षा बैठक जल संसाधन मंत्री ने की।
कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण अवॉर्ड
वह निर्णय जिसके तहत कर्नाटक 18.85 लाख एकड़ सिंचाई का लक्ष्य रखता है।

अभ्यास प्रश्न

  1. कर्नाटक के कावेरी बेसिन जलाशयों में गिरावट के आँकड़ों के आधार पर बताइए कि वर्षा कमी किस प्रकार पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत को एक साथ प्रभावित करती है। (250 शब्द)
  2. मेकेदातु जैसी भंडारण परियोजनाएँ अंतरराज्यीय जल विवादों में क्यों संवेदनशील बन जाती हैं? कर्नाटक सरकार के तर्कों और तमिलनाडु की आपत्तियों के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
  3. सूखा घोषणा और राहत प्रबंधन में स्थल निरीक्षण आधारित आकलन तथा केंद्र-राज्य समन्वय की भूमिका पर चर्चा कीजिए, कर्नाटक के हालिया कदमों के उदाहरण सहित।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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