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राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में महापौर चुनाव के लिए नामांकन

राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया बुधवार को शुरू हुई, जिसमें भाजपा, कांग्रेस, अन्य दलों के उम्मीदवारों तथा निर्दलीयों ने कुल 989 नामांकन दाखिल किए। ईवीएम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका में प्रक्रिया टाल दी गई, जहां 10 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ। महापौर व अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर और उपप्रमुखों का 22 सितंबर को होगा।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (4)
  • Nominations began Wednesday for mayors and chairpersons in 305 of Rajasthan's 309 urban local bodies. — Figure appears in source; process attributed to State Election Commission public notice issued Tuesday.
  • A list contains 989 nominations, with multiple nominations in several urban bodies, including the same candidate appearing more than once. — Figure appears in source, attributed to 'a list'; issuing authority not specified.
  • The process was deferred in Jaipur, Jodhpur and Kota municipal corporations and Suket municipality due to EVM-related technical problems. — Stated in source; re-polling at 10 polling stations on September 16, 2026, with counting on September 17.
  • Mayors/chairpersons will be elected on September 21 and deputies on September 22. — Schedule stated in source; revised schedule for the four deferred bodies to be issued later by the SEC.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

राजस्थान की 305 शहरी निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के चुनाव दोनों बड़ी पार्टियों की ज़मीनी पकड़ की परीक्षा हैं। पार्षदों के चुनाव पहले ही हो चुके हैं, इसलिए अब असली लड़ाई संख्याबल जुटाने और समर्थन जुटाने की है, जिसमें निर्दलीय भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए निर्णायक बन सकते हैं। 989 नामांकन — और कई जगह एक ही उम्मीदवार का नाम एक से अधिक बार होना — स्थानीय चुनावों की उस जानी-पहचानी रणनीति की ओर इशारा करता है जिसमें पार्टियाँ बैकअप उम्मीदवार तैयार रखती हैं।

  • चूँकि ये चुनाव निर्वाचित पार्षदों के ज़रिये अप्रत्यक्ष रूप से होते हैं, इस चरण में प्रचार से ज़्यादा संख्या प्रबंधन और निर्दलियों को साधना अहम है।
  • कई निकायों में बहु-नामांकन पार्टी के भीतर की खींचतान या अंतिम क्षण में बदलाव की गुंजाइश रखने की सोची-समझी रणनीति दिखा सकते हैं।
  • जयपुर, जोधपुर और कोटा राज्य के सबसे प्रतिष्ठित नगर निगम हैं; वहाँ प्रक्रिया टलने से किसी भी जीत के राजनीतिक असर दो हिस्सों में बँट जाएगा।
  • ईवीएम की तकनीकी दिक्कतों के कारण पुनर्मतदान विपक्ष को प्रक्रिया पर सवाल उठाने का मौका देता है, वहीं दूसरा पक्ष यह है कि आयोग ने सुधार के लिए कदम उठाया।
  • महापौर पद नगर प्रशासन और स्थानीय संरक्षण-तंत्र पर नियंत्रण देते हैं, इसलिए दोनों दल नतीजों को अपनी लोकप्रियता का पैमाना बताने की कोशिश करेंगे।

किस पर नज़र रखें — 21 और 22 सितंबर के नतीजों के साथ यह देखना होगा कि पुनर्मतगणना के बाद जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के लिए राज्य निर्वाचन आयोग कौन-सा संशोधित कार्यक्रम जारी करता है, जहाँ कुछ वार्ड ही बहुमत का रुख बदल सकते हैं।

यह खबर यह नहीं बताती कि किस दल के पास कितने निकायों में बहुमत है या महापौर पद कौन जीतेगा, और न ही ईवीएम गड़बड़ी के कारण या उसके दायरे की पुष्टि करती है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों के तहत इसी महीने पार्षदों के चुनाव के बाद अब महापौर, सभापति और अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य के 309 नगरीय निकायों में से 305 के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की, जिसके बाद बुधवार को नामांकन दाखिल हुए। ईवीएम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका में यह प्रक्रिया टाल दी गई है।

मुख्य तथ्य

  • राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में महापौर व अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया बुधवार को नामांकन के साथ शुरू हुई।
  • भाजपा, कांग्रेस, अन्य दलों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों ने कुल 989 नामांकन दाखिल किए।
  • कई नगरीय निकायों में एक से अधिक नामांकन दाखिल हुए, जिनमें एक ही उम्मीदवार के एक से अधिक बार नामांकन के मामले भी शामिल हैं।
  • राज्य निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को 309 नगरीय निकायों में से 305 के लिए महापौर/अध्यक्ष चुनाव की सार्वजनिक सूचना जारी की।
  • चार निकायों — जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका — में प्रक्रिया टाली गई।
  • कुछ वार्डों में ईवीएम की तकनीकी दिक्कतों के कारण परिणाम घोषित नहीं हो सके; 16 सितंबर 2026 (बुधवार) को 10 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ।
  • पुनर्मतदान की मतगणना गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को होगी।
  • 305 निकायों में महापौर/अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को और उपमहापौर, उपसभापति व उपाध्यक्ष का चुनाव 22 सितंबर को होगा।

समयरेखा

  1. सितंबर 2026 के आरंभ मेंनगरीय निकायों में पार्षदों (वार्ड सदस्यों) का चुनाव संपन्न हुआ।
  2. मंगलवार (15 सितंबर 2026)राज्य निर्वाचन आयोग ने 309 में से 305 निकायों के महापौर/अध्यक्ष चुनाव की सार्वजनिक सूचना जारी की।
  3. बुधवार, 16 सितंबर 2026305 निकायों में नामांकन प्रक्रिया शुरू, कुल 989 नामांकन; 10 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हुआ।
  4. गुरुवार, 17 सितंबर 2026पुनर्मतदान की मतगणना।
  5. 21 सितंबर 2026305 निकायों में महापौर व अध्यक्ष का चुनाव।
  6. 22 सितंबर 2026उपमहापौर, उपसभापति और उपाध्यक्ष का चुनाव।

किसका दाँव

  • राज्य निर्वाचन आयोग, राजस्थान — सार्वजनिक सूचना जारी करना, पुनर्मतदान कराना और चार निकायों के लिए संशोधित कार्यक्रम जारी करना।
  • भाजपा और कांग्रेस — 305 निकायों में महापौर/अध्यक्ष पद पर अपने उम्मीदवार जिताकर शहरी सत्ता पर पकड़।
  • निर्दलीय व अन्य दलों के उम्मीदवार — 989 नामांकनों में शामिल; त्रिशंकु निकायों में निर्णायक भूमिका की संभावना।
  • नवनिर्वाचित पार्षद — महापौर/अध्यक्ष व उपप्रमुखों के चुनाव में मतदाता की भूमिका।
  • जयपुर, जोधपुर, कोटा व सुकेत के मतदाता — ईवीएम की तकनीकी दिक्कतों के कारण उनके निकाय प्रमुखों का चुनाव विलंबित।

क्यों अहम है

नगरीय निकाय प्रमुखों का चुनाव तय करता है कि शहरों में सफाई, जलापूर्ति, सड़क और नियोजन जैसे कामों की कमान किस दल के हाथ रहेगी, इसलिए 305 निकायों का यह चुनाव राजस्थान की शहरी राजनीति का बड़ा संकेतक है। तीन बड़े नगर निगमों (जयपुर, जोधपुर, कोटा) में ईवीएम संबंधी दिक्कतों से प्रक्रिया टलना चुनावी तकनीक की विश्वसनीयता और प्रशासनिक तैयारी पर सवाल उठाता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • राजस्थान में कुल 309 नगरीय निकाय; 305 में महापौर/अध्यक्ष चुनाव की सूचना जारी।
  • नामांकन की कुल संख्या: 989 (भाजपा, कांग्रेस, अन्य दल व निर्दलीय)।
  • महापौर/अध्यक्ष चुनाव 21 सितंबर, उपप्रमुखों का चुनाव 22 सितंबर 2026।
  • चार निकाय स्थगित: जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम व कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका।
  • 10 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान 16 सितंबर 2026, मतगणना 17 सितंबर 2026।
  • राज्य निर्वाचन आयोग नगरीय निकाय चुनाव कराने वाली संस्था है।

मेन्स दृष्टिकोण

राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में महापौर व अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया शहरी स्थानीय स्वशासन के व्यवहार में उतरने का उदाहरण है — पहले पार्षदों का चुनाव, फिर निर्वाचित पार्षदों द्वारा निकाय प्रमुख और उपप्रमुख का चयन। 989 नामांकनों में एक ही उम्मीदवार के बार-बार नामांकन दाखिल करने के मामले दर्शाते हैं कि दल नामांकन निरस्त होने के जोखिम से बचने के लिए सतर्कता बरत रहे हैं, जबकि निर्दलीयों की भारी उपस्थिति संकीर्ण बहुमत वाले निकायों में सौदेबाजी की गुंजाइश बनाती है। दूसरी ओर, जयपुर, जोधपुर, कोटा नगर निगम और सुकेत नगरपालिका में ईवीएम की तकनीकी गड़बड़ी से कुछ वार्डों के परिणाम घोषित न हो पाना, 10 केंद्रों पर पुनर्मतदान और संशोधित कार्यक्रम की आवश्यकता — यह चुनावी मशीनरी की तैयारी, तकनीकी ऑडिट और पारदर्शी संप्रेषण की जरूरत को रेखांकित करता है। आगे का रास्ता यह है कि राज्य निर्वाचन आयोग मशीनों की पूर्व-जांच व आकस्मिक योजना मजबूत करे, स्थगित निकायों का कार्यक्रम शीघ्र व स्पष्ट रूप से जारी करे, और निकाय प्रमुखों के चुनाव में दलबदल तथा खरीद-फरोख्त रोकने के लिए प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करे, ताकि शहरी शासन में जनादेश की विश्वसनीयता बनी रहे।

मुख्य शब्द

नगरीय निकाय (Urban Local Body)
शहरी क्षेत्रों की स्थानीय स्वशासन संस्था; राजस्थान में नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका इसके रूप हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग
राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने वाली संस्था; इसने 305 निकायों के लिए सार्वजनिक सूचना जारी की।
महापौर व अध्यक्ष
नगर निगम का प्रमुख महापौर, तथा नगर परिषद/नगरपालिका का प्रमुख सभापति/अध्यक्ष कहलाता है।
पुनर्मतदान (Re-poll)
गड़बड़ी की स्थिति में संबंधित मतदान केंद्रों पर दोबारा कराया जाने वाला मतदान; यहां 10 केंद्रों पर हुआ।
ईवीएम
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन; इसकी तकनीकी दिक्कतों से कुछ वार्डों के परिणाम घोषित नहीं हो सके।
पार्षद
वार्ड से निर्वाचित निकाय सदस्य, जो महापौर/अध्यक्ष और उपप्रमुखों का चुनाव करते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में महापौर/अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया का वर्णन करें और बताएं कि चार निकायों में यह क्यों स्थगित हुई।
  2. स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम संबंधी तकनीकी गड़बड़ियों के कारण पुनर्मतदान की आवश्यकता चुनावी विश्वसनीयता पर क्या प्रश्न खड़े करती है? चर्चा करें।
  3. शहरी स्थानीय शासन में निकाय प्रमुखों के अप्रत्यक्ष चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका का समीक्षात्मक मूल्यांकन कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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