पार्थेनन मूर्तियां स्थायी रूप से लौटाने की ग्रीस के पीएम की मांग

ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से पार्थेनन मूर्तियां स्थायी रूप से ग्रीस को लौटाने के लिए 'राजनीतिक इच्छाशक्ति' दिखाने का आग्रह किया है। गार्डियन में लिखे लेख में उन्होंने ब्रिटिश म्यूजियम के इस सुझाव को खारिज किया कि बायो टेपेस्ट्री ऋण समझौता एक नमूना बन सकता है, और कहा कि म्यूजियम के स्वामित्व को मान्यता देने वाली कोई व्यवस्था ग्रीस स्वीकार नहीं करेगा। ये मूर्तियां 19वीं सदी से ब्रिटिश म्यूजियम में हैं और ग्रीस उनके हटाए जाने की वैधता पर लंबे समय से सवाल उठाता रहा है।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Greek PM Kyriakos Mitsotakis urged Andy Burnham to find the 'political will' to return the Parthenon sculptures permanently. — Attributed in source to an article Mitsotakis wrote in the Guardian on Thursday; quotes reproduced as given.
  • The sculptures have been in the British Museum since the 19th Century and entered the collection by act of Parliament after an 1816 select committee deemed Lord Elgin's actions legal. — Historical detail stated in the source without external citation; internally consistent.
  • British Museum director Nicholas Cullinan suggested the Bayeux Tapestry loan offered hope of a deal with Greece. — Attributed to the named museum director in the source; Mitsotakis's rejection of that template is also quoted.
  • Burnham said in 2023 the sculptures should be returned with 'no strings attached' but told the Financial Times last month it is an issue for the British Museum. — Both statements attributed to named outlets and dates in the source; source describes Burnham as having returned to government as prime minister.
  • UK law prevents permanent return of British Museum items, though the British Museum Act could be amended. — Presented as the museum's and UK government's position, with the amendment point attributed to campaigners.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

यह देखने में संग्रहालय का विवाद है, पर दरअसल यह सांस्कृतिक संपत्ति को कूटनीतिक दबाव में बदलने की कोशिश है। एथेंस बेयो टेपेस्ट्री ऋण समझौते को नमूना मानने से साफ इनकार कर रहा है, क्योंकि 'ऋण' का अर्थ ब्रिटिश म्यूजियम के स्वामित्व को स्वीकार करना होगा — और यही वह बिंदु है जिसे ग्रीस दो सदियों से चुनौती दे रहा है। मुद्दे को कानूनी सवाल से 'राजनीतिक इच्छाशक्ति' की परीक्षा में बदलकर मित्सोटाकिस ने दबाव संग्रहालय से हटाकर ब्रिटिश सरकार पर डाल दिया है।

  • धरोहर की वापसी अब द्विपक्षीय संबंधों में 'सॉफ्ट पावर' की मुद्रा बनती जा रही है, और ब्रिटिश अखबार में सीधे लिखना जन-कूटनीति की सोची-समझी चाल है।
  • ब्रिटेन का यह तर्क कि मामला कानून और संग्रहालय के दायरे में है, उसकी राजनीतिक जवाबदेही कम करता है; ग्रीस इसे जानबूझकर लिया गया निर्णय बताता है।
  • बर्नम ने 2023 में 'बिना शर्त' वापसी की बात कही थी, अब कहते हैं यह संग्रहालय का विषय है — इस बदलाव को एथेंस अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रहा है।
  • ग्रीस के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से दबाव बनवाने की इच्छा जताना विवाद को तीसरे पक्ष के जरिये अंतरराष्ट्रीय बनाने का संकेत है, जो सहयोगी देशों के बीच असहजता पैदा कर सकता है।
  • ब्रिटेन की असली सामरिक सावधानी नज़ीर की है: एक दावेदार के साथ किया गया समझौता बाकी दावेदारों के लिए संदर्भ बन जाएगा।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि ब्रिटिश सरकार ब्रिटिश म्यूजियम अधिनियम में संशोधन का कोई संकेत देती है या स्वामित्व के सवाल को टालने वाला कोई 'दीर्घकालिक साझेदारी' जैसा रचनात्मक फॉर्मूला सामने आता है।

यह खबर ब्रिटिश सरकार के रुख में किसी बदलाव, किसी चल रही बातचीत या किसी समयसीमा की पुष्टि नहीं करती — अभी यह एकपक्षीय सार्वजनिक अपील है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पार्थेनन मूर्तियां (ब्रिटेन में 'एल्गिन मार्बल्स' के नाम से जानी जाने वाली) 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश राजदूत लॉर्ड एल्गिन द्वारा एथेंस से हटाई गई थीं, जब वहां ओटोमन साम्राज्य का शासन था। 1816 में ब्रिटिश संसद की एक प्रवर समिति ने एल्गिन के कार्य को वैध ठहराया और संसद के एक अधिनियम के जरिये ये मूर्तियां ब्रिटिश म्यूजियम के संग्रह में आ गईं। ग्रीस लंबे समय से इनके हटाए जाने की वैधता पर सवाल उठाता है और स्थायी वापसी की मांग करता है। अब ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस ने गार्डियन में लेख लिखकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से 'राजनीतिक इच्छाशक्ति' दिखाने का आग्रह किया है।

मुख्य तथ्य

  • ग्रीस के पीएम किरियाकोस मित्सोटाकिस ने गार्डियन में गुरुवार को लिखे लेख में ब्रिटेन के पीएम एंडी बर्नहम से मूर्तियां लौटाने की 'राजनीतिक इच्छाशक्ति' और 'साहस' दिखाने को कहा।
  • मूर्तियां 447 ईसा पूर्व से 432 ईसा पूर्व के बीच एथेना के मंदिर—आज के एक्रोपोलिस स्थित पार्थेनन—की सजावट के लिए बनाई गई थीं।
  • ब्रिटिश राजदूत लॉर्ड एल्गिन को 19वीं सदी की शुरुआत में तत्कालीन शासक ओटोमन साम्राज्य से कुछ संगमरमर प्रतिमाएं हटाने की अनुमति मिली थी।
  • 1816 में ब्रिटिश संसदीय प्रवर समिति ने एल्गिन के कार्य को वैध माना, जिसके बाद संसद के अधिनियम से मूर्तियां ब्रिटिश म्यूजियम संग्रह में शामिल हुईं।
  • मित्सोटाकिस ने ब्रिटिश म्यूजियम के निदेशक निकोलस कलिनन के सुझाव को खारिज किया कि बायो टेपेस्ट्री ऋण समझौता पार्थेनन मूर्तियों के लिए नमूना बन सकता है।
  • मित्सोटाकिस ने लिखा कि ग्रीस म्यूजियम के स्वामित्व को मान्यता देने वाली या अपने ही स्मारक के हिस्से 'उधार' लेने वाली कोई व्यवस्था स्वीकार नहीं कर सकता।
  • 2023 में, सरकार में वापसी से कई साल पहले, बर्नहम ने कहा था कि मूर्तियां 'बिना किसी शर्त' ग्रीस को लौटाई जानी चाहिए; पिछले महीने उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि 'अंततः यह ब्रिटिश म्यूजियम का मामला है'।
  • ब्रिटिश म्यूजियम और ब्रिटिश सरकार का रुख है कि कानून संग्रह की वस्तुओं की स्थायी वापसी रोकता है, जबकि ऋण समझौते आम हैं।

समयरेखा

  1. 447–432 ईसा पूर्वएथेंस के एक्रोपोलिस स्थित एथेना मंदिर (पार्थेनन) की सजावट के लिए मूर्तियों का निर्माण।
  2. 19वीं सदी की शुरुआतओटोमन साम्राज्य की अनुमति से ब्रिटिश राजदूत लॉर्ड एल्गिन ने कुछ संगमरमर प्रतिमाएं हटाईं।
  3. 1816ब्रिटिश संसदीय प्रवर समिति ने एल्गिन के कार्य को वैध ठहराया; संसद के अधिनियम से मूर्तियां ब्रिटिश म्यूजियम संग्रह में आईं।
  4. 2023तत्कालीन म्यूजियम चेयर जॉर्ज ऑसबोर्न ने बीबीसी से 200 साल से अधिक के 'कटु मतभेद' के बाद 'अधिक सहयोगात्मक व्यवस्था' की बात कही; बर्नहम ने 'बिना शर्त' वापसी का समर्थन किया।
  5. पिछला महीनाबर्नहम ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि मामला ब्रिटिश म्यूजियम का है; ग्रीस के स्वास्थ्य मंत्री ने ब्रेइटबार्ट न्यूज से कहा कि वे ट्रंप से ब्रिटेन पर दबाव की अपेक्षा रखते हैं।
  6. गुरुवार (हाल में)मित्सोटाकिस का गार्डियन में लेख; बायो टेपेस्ट्री मॉडल को खारिज करते हुए स्थायी वापसी की मांग।

किसका दाँव

  • ग्रीस सरकार / पीएम किरियाकोस मित्सोटाकिस — मूर्तियों की स्थायी वापसी और राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत की पुनर्एकता; ऋण आधारित व्यवस्था अस्वीकार्य।
  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम — 2023 के 'बिना शर्त वापसी' के अपने बयान और अब 'यह म्यूजियम का मामला है' वाले रुख के बीच राजनीतिक दबाव।
  • ब्रिटिश म्यूजियम (निदेशक निकोलस कलिनन) — संग्रह पर स्वामित्व और कानूनी बाध्यता; बायो टेपेस्ट्री जैसे ऋण समझौते को संभावित रास्ता मानता है।
  • ब्रिटिश सरकार — ब्रिटिश म्यूजियम अधिनियम में संशोधन का प्रश्न, जिसे उसने प्राथमिकता नहीं बताया है।
  • एक्रोपोलिस म्यूजियम, एथेंस — पार्थेनन गैलरी में ब्रिटिश म्यूजियम की मूर्तियों के लिए जानबूझकर खाली जगह छोड़ी गई है।
  • अभियानकर्ता (कैंपेनर्स) — तर्क देते हैं कि ब्रिटिश म्यूजियम अधिनियम में संशोधन संभव है।

क्यों अहम है

यह विवाद औपनिवेशिक व साम्राज्यवादी दौर में हासिल सांस्कृतिक संपदा की वापसी (रेस्टिट्यूशन) के बड़े वैश्विक प्रश्न का प्रतीक है, जिसमें कानूनी स्वामित्व और नैतिक दावे आपस में टकराते हैं। मित्सोटाकिस का लेख दिखाता है कि ऋण-आधारित समझौते, जैसे बायो टेपेस्ट्री, ग्रीस के लिए समाधान नहीं हैं क्योंकि वे ब्रिटिश म्यूजियम के स्वामित्व को स्वीकार करने जैसा होगा। 200 साल से अधिक पुराना यह गतिरोध दो सहयोगी देशों के सांस्कृतिक कूटनीति का परीक्षण बन गया है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • पार्थेनन मूर्तियां ब्रिटेन में 'एल्गिन मार्बल्स' कहलाती हैं; ये एथेंस के एक्रोपोलिस स्थित पार्थेनन (एथेना मंदिर) से हैं।
  • निर्माण काल: 447 ईसा पूर्व से 432 ईसा पूर्व।
  • लॉर्ड एल्गिन ब्रिटिश राजदूत थे; अनुमति तत्कालीन शासक ओटोमन साम्राज्य से मिली थी।
  • 1816 की ब्रिटिश संसदीय प्रवर समिति ने एल्गिन के कार्य को वैध माना; संसद के अधिनियम से मूर्तियां ब्रिटिश म्यूजियम में आईं।
  • ब्रिटिश म्यूजियम अधिनियम स्थायी वापसी में बाधा है; ऋण (लोन) समझौते आम हैं।
  • बायो टेपेस्ट्री: मध्ययुगीन कढ़ाई, फ्रांस से ब्रिटिश म्यूजियम को ऋण पर दी गई।

मेन्स दृष्टिकोण

पार्थेनन मूर्तियों का विवाद सांस्कृतिक संपदा की वापसी पर कानूनी वैधता बनाम नैतिक दावे के द्वंद्व को उजागर करता है। ब्रिटेन का पक्ष 1816 की संसदीय प्रवर समिति की वैधता-घोषणा और संसद के अधिनियम से बने स्वामित्व पर टिका है, तथा ब्रिटिश म्यूजियम व सरकार का कहना है कि कानून स्थायी वापसी रोकता है; ग्रीस का पक्ष यह है कि ओटोमन शासन के दौरान हटाना वैध नहीं था और एक अविभाज्य स्मारक को दो हिस्सों में बांटकर समझना संभव नहीं—मित्सोटाकिस ने इसे बायो टेपेस्ट्री को दो टुकड़ों में काटने की कल्पना से समझाया। बीच का रास्ता जो ब्रिटिश म्यूजियम सुझाता है—दीर्घकालिक ऋण—ग्रीस के लिए अस्वीकार्य है, क्योंकि वह म्यूजियम के स्वामित्व की परोक्ष स्वीकृति होगी। आगे का मार्ग अभियानकर्ताओं के अनुसार ब्रिटिश म्यूजियम अधिनियम में संशोधन है, किंतु ब्रिटिश सरकार ने इसे प्राथमिकता नहीं बताया; इसलिए समाधान कानूनी से अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रश्न बन जाता है, जिसमें एक्रोपोलिस म्यूजियम की खाली छोड़ी गई पार्थेनन गैलरी प्रतीकात्मक दबाव बनाती है।

मुख्य शब्द

पार्थेनन मूर्तियां / एल्गिन मार्बल्स
एथेंस के पार्थेनन से 19वीं सदी की शुरुआत में हटाई गई संगमरमर प्रतिमाएं, ब्रिटेन में एल्गिन मार्बल्स कहलाती हैं।
ब्रिटिश म्यूजियम अधिनियम
वह ब्रिटिश कानून जिसके चलते म्यूजियम संग्रह की वस्तुओं की स्थायी वापसी संभव नहीं; अभियानकर्ता इसमें संशोधन चाहते हैं।
बायो टेपेस्ट्री
मध्ययुगीन कढ़ाईदार कपड़ा, जिसे दशकों की अस्वीकृत मांगों के बाद ब्रिटेन-फ्रांस समझौते से ब्रिटिश म्यूजियम को ऋण पर दिया गया।
एक्रोपोलिस म्यूजियम की पार्थेनन गैलरी
एथेंस स्थित गैलरी, जिसे जानबूझकर ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूर्तियों के लिए खाली जगह छोड़कर बनाया गया।
ओटोमन साम्राज्य
19वीं सदी की शुरुआत में एथेंस की शासक सत्ता, जिसने लॉर्ड एल्गिन को प्रतिमाएं हटाने की अनुमति दी।
1816 की संसदीय प्रवर समिति
ब्रिटिश संसद की समिति जिसने एल्गिन के कार्य को वैध ठहराया, जिसके बाद मूर्तियां म्यूजियम संग्रह में आईं।

अभ्यास प्रश्न

  1. पार्थेनन मूर्तियों के विवाद के आलोक में सांस्कृतिक संपदा की वापसी (रेस्टिट्यूशन) से जुड़े कानूनी और नैतिक प्रश्नों की चर्चा कीजिए।
  2. क्या दीर्घकालिक ऋण समझौते (जैसे बायो टेपेस्ट्री) विवादित सांस्कृतिक वस्तुओं के विवाद का व्यावहारिक समाधान हो सकते हैं? ग्रीस की आपत्तियों के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए।
  3. सांस्कृतिक कूटनीति द्विपक्षीय संबंधों को कैसे प्रभावित करती है? ग्रीस-ब्रिटेन प्रकरण के उदाहरण से समझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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