फ्रांस का प्रस्ताव: सामूहिक अत्याचारों में वीटो का उपयोग नियंत्रित हो
संयुक्त राष्ट्र महासभा के चल रहे सत्र में फ्रांस ने मानवीय संकटों और नरसंहार जैसे मामलों में सुरक्षा परिषद के वीटो के उपयोग को नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा। अमिताभ मट्टू ने कहा कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 22 सितंबर की टिप्पणियों ने 2015 में शुरू हुई फ्रांस-मेक्सिको पहल को नई गति दी, जिसे अब 128 देशों का समर्थन है, चार महीनों में 21 देश जुड़े और ब्रिटेन ने भी सिद्धांत स्वीकार किया। स्वरण सिंह के अनुसार कोई भी P5 देश वीटो समाप्त करने की बात नहीं कर रहा।
स्रोत
United Nations / UNGA · मूल ख़बर पढ़ें ↗
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- France and Mexico announced that 128 states now support the veto-restraint declaration, with 21 joining in the last four months. — Figures appear in source, attributed to Amitabh Mattoo citing France and Mexico announcements; not independently verified here.
- Emmanuel Macron raised the veto-regulation proposal at the UNGA on September 22. — Date and speaker stated in source by Mattoo; no document cited.
- The U.K. has joined France in accepting the voluntary veto-restraint principle, making two P5 members committed. — Attributed to Mattoo in the source; no official text quoted.
- The Liechtenstein initiative, adopted by the UNGA in 2022, requires the General Assembly to meet within 10 working days after a veto. — Described in source by Mattoo with year and timeline; consistent internally.
- The word 'veto' is not mentioned in the UN Charter and was created through a separate mechanism. — Stated as assertion by Swaran Singh; no source given in text.
विश्लेषकों की राय राय
फ्रांस का प्रस्ताव वीटो को समाप्त करने की कोशिश नहीं है — यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर को छुए बिना पी5 देशों के राजनीतिक व्यवहार को बदलने की कोशिश है। अमिताभ मट्टू इसे 2015 की फ्रांस-मेक्सिको पहल को दिया गया नया जोर बताते हैं, जिसके तहत स्थायी सदस्य नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और बड़े पैमाने के युद्ध अपराधों के मामलों में स्वेच्छा से वीटो से परहेज करेंगे। सामरिक रूप से असली बदलाव आंकड़ों में है: अब 128 देश समर्थन में हैं, पिछले चार महीनों में 21 जुड़े, और ब्रिटेन ने भी यह सिद्धांत स्वीकार किया — यानी पहली बार पांच में से दो स्थायी सदस्य इस आत्म-संयम के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन यह उपकरण नैतिक-राजनीतिक है, कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं।
- चार्टर संशोधन के लिए उन्हीं शक्तियों की सहमति चाहिए जिनका विशेषाधिकार छिनना है, इसलिए स्वैच्छिक संयम ही व्यावहारिक रास्ता है — क्रांतिकारी नहीं, सुधारवादी, जैसा मट्टू कहते हैं।
- फ्रांस और ब्रिटेन का एक साथ खड़ा होना पी5 में दरार का संकेत देता है, हालांकि स्वर्ण सिंह कहते हैं कि इन दोनों के लिए — जो समूह के सबसे भारी वजन वाले नहीं हैं — ऐसा सैद्धांतिक रुख लेना आसान है।
- पहल की जड़ें सामरिक हैं: सीरिया पर चीन और रूस के वीटो ने परिषद को पंगु बना दिया था, और 2013 के घौटा रासायनिक हमले के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने 'अच्छे आचरण की संहिता' प्रस्तावित की थी।
- तीन सवालों को गड्डमड्ड नहीं करना चाहिए — वीटो का प्रयोग, उसके लिए जवाबदेही, और परिषद का व्यापक ढांचागत सुधार; मैक्रों की पहल केवल पहले को छूती है।
- 2022 में स्वीकृत लीशटेनस्टाइन पहल, जिसमें किसी भी वीटो के 10 कार्यदिवसों के भीतर महासभा की बैठक होती है, और सभी परिषद सदस्यों पर लागू ACT आचार संहिता — जवाबदेही की दिशा में मौजूदा कदम हैं, पर इनकी ताकत नैतिक है, कानूनी बाध्यता नहीं।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि समर्थक देशों की संख्या बढ़ती रहती है या नहीं, शेष तीन स्थायी सदस्य — अमेरिका, रूस और चीन — इस सिद्धांत पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, और अगली बार किसी मानवीय संकट में वीटो पड़ने पर 128 देशों का दबाव व्यवहार बदल पाता है या नहीं।
स्वैच्छिक घोषणा होने के कारण इसमें कोई प्रवर्तन तंत्र नहीं है, और यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि मूल राष्ट्रीय हित दांव पर होने पर कोई स्थायी सदस्य इस संयम का पालन करेगा, न ही यह स्पष्ट है कि गाजा जैसे विशिष्ट संघर्षों पर यह ढांचा कैसे लागू होगा।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के चल रहे सत्र में फ्रांस ने प्रस्ताव रखा है कि सामूहिक सुरक्षा और वीटो के उपयोग के मामले में संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली सुधारी जाए। फ्रांस की मांग है कि सूडान, लेबनान जैसे मानवीय संकटों तथा नरसंहार के मामलों में सुरक्षा परिषद (UNSC) में वीटो का उपयोग "नियंत्रित" हो, क्योंकि वीटो "विशेषाधिकार" नहीं बल्कि "जिम्मेदारी" है। इस पर अमिताभ मट्टू (डीन, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जेएनयू) और स्वरण सिंह (पूर्व प्रोफेसर, उसी संस्थान) की कल्लोल भट्टाचार्जी द्वारा संचालित चर्चा में यह प्रश्न उठा कि क्या स्थायी सदस्यता और वीटो समाप्त किए जाने चाहिए।
मुख्य तथ्य
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 22 सितंबर को UNGA में वीटो के नियंत्रित उपयोग की बात रखी।
- फ्रांस-मेक्सिको पहल पहली बार 2015 में शुरू हुई; इसके तहत P5 नरसंहार, मानवता के विरुद्ध अपराध और बड़े पैमाने के युद्ध अपराधों में स्वेच्छा से वीटो न करने पर सहमत होंगे।
- फ्रांस और मेक्सिको के अनुसार अब 128 देश इस घोषणा का समर्थन करते हैं, जिनमें 21 देश पिछले चार महीनों में जुड़े।
- ब्रिटेन, एक अन्य P5 देश, ने भी यह सिद्धांत स्वीकार किया — पहली बार पाँच में से दो स्थायी सदस्यों ने स्वैच्छिक संयम की प्रतिबद्धता जताई।
- लिकटेंस्टाइन पहल, जिसे UNGA ने 2022 में अपनाया, के तहत वीटो पड़ने पर 10 कार्य-दिवसों के भीतर महासभा की बैठक बुलाकर बहस होगी।
- सीरिया गृहयुद्ध और अगस्त 2013 के घोउटा रासायनिक हमले के बाद सितंबर में तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने UNSC के लिए 'आचरण संहिता' (code of good conduct) प्रस्तावित की थी।
- स्वरण सिंह के अनुसार कोई भी P5 देश अपने वीटो अधिकार को समाप्त करने की बात नहीं कर रहा; सुधार पर पाँचों के भिन्न संस्करण हैं।
- 'वीटो' शब्द संयुक्त राष्ट्र चार्टर में उल्लिखित नहीं है; यह एक अलग तंत्र के जरिये बना।
समयरेखा
- अगस्त 2013सीरिया के घोउटा में रासायनिक हथियार हमला; चीन और रूस के वीटो से UNSC प्रस्ताव पारित करना असंभव हो रहा था।
- सितंबर 2013तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने भाषण में UNSC के लिए 'आचरण संहिता' प्रस्तावित की।
- 2015फ्रांस-मेक्सिको पहल की शुरुआत — सामूहिक अत्याचारों में P5 द्वारा स्वैच्छिक वीटो-संयम।
- 2022UNGA ने लिकटेंस्टाइन पहल अपनाई — वीटो के बाद 10 कार्य-दिवसों में महासभा में बहस।
- 22 सितंबर (इस सत्र में)मैक्रों ने UNGA में वीटो नियंत्रण की बात दोहराई; फ्रांस-मेक्सिको पहल को नई गति मिली।
- इसी सप्ताहफ्रांस और मेक्सिको ने घोषणा की कि 128 देश समर्थन में हैं, चार महीनों में 21 देश जुड़े।
किसका दाँव
- फ्रांस — वीटो के 'नियंत्रित' उपयोग की पैरवी; वीटो को विशेषाधिकार नहीं, जिम्मेदारी बताना।
- P5 (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस) — वीटो अधिकार बरकरार रखना; ब्रिटेन-फ्रांस सिद्धांत स्वीकार, कोई भी वीटो समाप्ति के पक्ष में नहीं।
- मेक्सिको — फ्रांस के साथ 2015 की पहल का सह-प्रवर्तक; 128 देशों का समर्थन जुटाया।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) — लिकटेंस्टाइन पहल के तहत वीटो पर जवाबदेही का मंच बनना।
- भारत व G4 — स्रोत के अनुसार भारत का रुख — वास्तविक सुधार के लिए वीटो सहित स्थायी श्रेणी का विस्तार आवश्यक; G4 की ओर से विस्तृत मॉडल प्रस्तुत।
- मानवीय संकटों से प्रभावित क्षेत्र (सूडान, लेबनान, सीरिया, गाजा) — वीटो से परिषद के पक्षाघात के कारण कार्रवाई न होने का सीधा असर।
क्यों अहम है
यह बहस तय करेगी कि क्या नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराधों के समय सुरक्षा परिषद पक्षाघात से बच सकेगी, वह भी चार्टर संशोधन के असंभव रास्ते के बिना। ब्रिटेन के जुड़ने से पहली बार दो स्थायी सदस्य स्वैच्छिक संयम पर हैं, जिससे वीटो के "विशेषाधिकार से जिम्मेदारी" वाले मानक में बदलाव की संभावना बनती है। भारत जैसे सुधार-आकांक्षी देशों के लिए यह प्रश्न भी अहम है कि नए स्थायी सदस्यों को वीटो मिलेगा या नहीं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- फ्रांस-मेक्सिको पहल: 2015 में शुरू; सामूहिक अत्याचारों में P5 द्वारा स्वैच्छिक वीटो-संयम; अब 128 देशों का समर्थन।
- लिकटेंस्टाइन पहल: UNGA द्वारा 2022 में अपनाई; वीटो पड़ने पर 10 कार्य-दिवसों में महासभा में बहस।
- ACT पहल = Accountability, Coherence and Transparency — गैर-स्थायी सदस्यों सहित सभी UNSC सदस्यों के लिए आचार संहिता।
- 'वीटो' शब्द संयुक्त राष्ट्र चार्टर में नहीं है; अलग तंत्र से बना।
- P5 = अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस।
- सितंबर 2013 में फ्रांस्वा ओलांद ने UNSC के लिए 'code of good conduct' प्रस्तावित किया था।
मेन्स दृष्टिकोण
वीटो पर बहस को केवल 'रखें या हटाएँ' तक सीमित नहीं किया जा सकता; स्रोत के अनुसार कम से कम पाँच परस्पर-व्यापी रास्ते हैं — वीटो की समाप्ति, समानता के नाम पर नए स्थायी सदस्यों को वीटो का विस्तार, सामूहिक अत्याचारों में स्वैच्छिक संयम (फ्रांस-मेक्सिको पहल), वीटो के बाद राजनीतिक जवाबदेही (लिकटेंस्टाइन पहल) और परिषद का व्यापक संरचनात्मक सुधार। मैक्रों का प्रस्ताव संस्थागत रूप से मामूली पर मानक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चार्टर पुनर्लेखन के असंभव कार्य के बजाय P5 के राजनीतिक व्यवहार को बदलने का प्रयास करता है; औपचारिक समाप्ति के लिए उन्हीं स्थायी सदस्यों की सहमति चाहिए जिनका विशेषाधिकार छीना जा रहा है। स्वरण सिंह का तर्क सीमाएँ रेखांकित करता है: ब्रिटेन-फ्रांस P5 के 'हैवीवेट' नहीं हैं, इसलिए उनके लिए सैद्धांतिक रुख लेना आसान है; और कोई भी अंतरराष्ट्रीय संगठन बड़ी शक्तियों के मूल हितों के विरुद्ध निर्णय लेकर टिक नहीं सकता। आगे का व्यावहारिक रास्ता जवाबदेही-केंद्रित उपाय हैं — वीटो प्रयोग पर महासभा में स्पष्टीकरण की बाध्यता, जिससे P5 सतर्क हों — साथ ही यह स्वीकारते हुए कि इनकी ताकत नैतिक-राजनीतिक है, कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं, और संघर्षों की व्याख्या पर देशों में गहरे मतभेद बने रहेंगे।
मुख्य शब्द
- वीटो
- UNSC के स्थायी सदस्यों की निषेधाधिकार शक्ति; स्रोत के अनुसार यह शब्द UN चार्टर में उल्लिखित नहीं है।
- फ्रांस-मेक्सिको पहल
- 2015 में शुरू; नरसंहार, मानवता विरुद्ध अपराध व बड़े युद्ध अपराधों में P5 द्वारा स्वेच्छा से वीटो न करने की घोषणा।
- लिकटेंस्टाइन पहल
- UNGA द्वारा 2022 में अपनाई; वीटो पड़ने पर 10 कार्य-दिवसों में महासभा की बहस, जिसमें वीटो देने वाले को कारण बताना पड़े।
- ACT आचार संहिता
- Accountability, Coherence and Transparency Initiative — स्थायी व गैर-स्थायी सदस्यों से अत्याचार रोकने वाली विश्वसनीय कार्रवाई के विरुद्ध मतदान न करने का आग्रह।
- P5
- UNSC के पाँच स्थायी सदस्य — अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस।
- 'आचरण संहिता' (2013)
- घोउटा रासायनिक हमले के बाद फ्रांस्वा ओलांद द्वारा प्रस्तावित, वीटो-संयम का पहला औपचारिक विचार।
अभ्यास प्रश्न
- क्या सामूहिक अत्याचारों में वीटो पर 'स्वैच्छिक संयम' सुरक्षा परिषद के पक्षाघात का व्यावहारिक समाधान है? फ्रांस-मेक्सिको और लिकटेंस्टाइन पहलों के आलोक में परीक्षण करें।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार में 'वीटो का उपयोग', 'वीटो की जवाबदेही' और 'संरचनात्मक सुधार' — इन तीन प्रश्नों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- भारत के लिए वीटो सहित स्थायी श्रेणी के विस्तार की मांग कितनी यथार्थवादी है, जब कोई P5 देश वीटो छोड़ने को तैयार नहीं? चर्चा करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
