उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से मॉनसून की विदाई

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून बुधवार को पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बड़े हिस्सों, पूरी दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से विदा हो गया, आईएमडी ने बताया। दिल्ली से यह सामान्य तिथि 25 सितंबर से दो दिन पहले लौटा, जो 2002 के बाद सबसे जल्दी विदाई है। 22 सितंबर तक देशभर में वर्षा 15 प्रतिशत कम रही, 832.4 मिमी के सामान्य के मुकाबले 706.9 मिमी। बंगाल की खाड़ी में गहरा अवदाब आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तेज बारिश दे सकता है।

स्रोत

Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Monsoon withdrew from Delhi two days before the normal date of September 25, the earliest since 2002 (September 20). — Attributed to IMD data in the source; internally consistent.
  • All-India monsoon rainfall was 15% deficient as on September 22, with 706.9mm against a normal of 832.4mm. — Figures appear in source, attributed to IMD; arithmetic consistent with a roughly 15% shortfall.
  • A deep depression over the Bay of Bengal was to cross the north Andhra Pradesh-south Odisha coasts near Kalingapatnam by the night of September 23. — Directly quoted from an IMD statement.
  • Delhi received 562.7mm since June 1, 6% above the normal of 532.3mm; Safdarjung logged 728.6mm, nearly 14% above normal. — Figures appear in source; no separate attribution given beyond IMD data.
  • El Nino will intensify into a 'very strong' event, with near 100% likelihood of persisting through February 2027. — Attributed to the World Meteorological Organisation statement of September 3.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह खबर मौसम की दिखती है, लेकिन इसका असली वजन राजनीति में महसूस होने की संभावना है। पंजाब में 40%, बिहार में 37%, आंध्र प्रदेश में 38% और मेघालय में 60% की बारिश की कमी का मतलब है ग्रामीण आय, कृषि कर्ज और बिजली-पानी सब्सिडी पर बढ़ता दबाव। डब्ल्यूएमओ के मुताबिक अल नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है और रबी की बारिश पर असर डाल सकता है — यानी यह राजनीतिक बोझ एक सीजन में खत्म नहीं होगा।

  • सबसे प्रभावित राज्यों में विपक्ष की स्वाभाविक प्रतिक्रिया सूखा घोषित करने, मुआवजे और कर्जमाफी की मांग उठाने की होगी।
  • आपदा राहत कोष और सहायता पैकेज के आकार व समय को लेकर केंद्र-राज्य टकराव तेज हो सकता है।
  • दिल्ली में 6% अधिक बारिश और देशभर में 15% की कमी का अंतर 'महानगर बनाम ग्रामीण' कथानक को राजनीतिक रूप से आसान सामग्री देता है।
  • अनुमानों में लगातार कटौती — आईएमडी का अप्रैल से जून तक और स्काईमेट का 94% से 85% तक — विपक्ष को यह सवाल देती है कि चेतावनियों के बाद तैयारी कितनी हुई।
  • अगर बंगाल की खाड़ी का सिस्टम आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश लाता है, तो सरकारों को सूखा और बाढ़ दोनों का प्रबंधन साथ-साथ करने की कठिन परीक्षा देनी होगी।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि आने वाले हफ्तों में अधिक कमी वाले राज्य सूखा प्रभावित क्षेत्र अधिसूचित करते हैं, केंद्रीय सहायता मांगते हैं, या रबी के लिए बीज और सिंचाई पैकेज घोषित करते हैं।

यह खबर केवल मौसम संबंधी है — इसमें यह स्थापित नहीं होता कि किसी सरकार या दल की प्रतिक्रिया क्या रही, चुनावी असर क्या होगा, या फसल नुकसान कितना है; ये सब मेरे विश्लेषणात्मक अनुमान हैं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) भारत की मुख्य वर्षा ऋतु है, जिसकी विदाई सामान्यतः सितंबर के दूसरे पखवाड़े में उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार 23 सितंबर 2026 को मॉनसून पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के बड़े हिस्सों, पूरी दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश व गुजरात के कुछ भागों से विदा हो गया। दिल्ली से विदाई सामान्य तिथि 25 सितंबर से दो दिन पहले हुई, जो 2002 के बाद सबसे जल्दी है। इस बार पूरे सत्र में वर्षा कमज़ोर रही और आईएमडी व स्काईमेट दोनों ने अल नीनो के मजबूत होने के कारण कम वर्षा की चेतावनी दी थी।

मुख्य तथ्य

  • आईएमडी के अनुसार 23 सितंबर 2026 को मॉनसून पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के अधिकांश भागों, पूरी दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से विदा हुआ।
  • दिल्ली से विदाई सामान्य तिथि 25 सितंबर से दो दिन पहले हुई; 2002 (20 सितंबर) के बाद यह सबसे जल्दी विदाई है। पिछले वर्ष भी विदाई 24 सितंबर को हुई थी।
  • 1 जून-22 सितंबर की अवधि में देशभर में 706.9 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य 832.4 मिमी है — 15% की कमी।
  • क्षेत्रीय कमी: पूर्व व पूर्वोत्तर भारत -27%, दक्षिण प्रायद्वीप -26%, उत्तर-पश्चिम भारत -10%, मध्य भारत -6%।
  • राज्यवार कमी: पंजाब -40%, हरियाणा -24%, राजस्थान -21%, बिहार -37%, मेघालय -60%, मणिपुर -43%, अरुणाचल -42%, आंध्र प्रदेश -38%, कर्नाटक -30%, केरल -27%।
  • दिल्ली में 1 जून से औसतन 562.7 मिमी वर्षा हुई, सामान्य 532.3 मिमी से 6% अधिक; सफदरजंग में 728.6 मिमी, सामान्य 640.4 मिमी से लगभग 14% अधिक।
  • बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य भाग पर गहरा अवदाब 5 किमी/घंटा की गति से पश्चिम की ओर बढ़ा और 23 सितंबर की रात विशाखापत्तनम-गोपालपुर के बीच, कालिंगपटनम के निकट तट पार करने की संभावना जताई गई।
  • 23 सितंबर को विदाई रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से गुजर रही थी।

समयरेखा

  1. 20 सितंबर 2002दिल्ली से मॉनसून की अब तक की सबसे जल्दी विदाई दर्ज (तुलना का आधार)।
  2. अप्रैल (पूर्वानुमान)आईएमडी ने मॉनसून वर्षा एलपीए के 92% रहने का अनुमान दिया; स्काईमेट ने 94% का अनुमान दिया।
  3. जून (संशोधित आउटलुक)आईएमडी ने अनुमान 92% से घटाकर 90% किया और कमज़ोर सत्र की 60% संभावना जताई।
  4. 17 अगस्तस्काईमेट ने संशोधित पूर्वानुमान में वर्षा एलपीए के 85% और सूखे की 70% संभावना बताई।
  5. 31 अगस्तआईएमडी ने सितंबर के लिए सामान्य से कम वर्षा (एलपीए के 91% से कम) का पूर्वानुमान जारी किया।
  6. 3 सितंबरविश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने कहा कि अल नीनो पूरी तरह स्थापित है और आगे 'बहुत मजबूत' होगा; फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग 100% संभावना।
  7. 19 सितंबरपश्चिमी राजस्थान से विदाई शुरू हुई — सामान्य तिथि 17 सितंबर से दो दिन देर।
  8. 22 सितंबरअखिल भारतीय मॉनसून वर्षा 15% कम दर्ज (706.9 मिमी बनाम 832.4 मिमी)।
  9. 23 सितंबर 2026पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के अधिकांश भाग, पूरी दिल्ली तथा यूपी-गुजरात के कुछ हिस्सों से मॉनसून की विदाई; गहरा अवदाब तट की ओर बढ़ा।
  10. 26-27 सितंबर (संभावित)स्काईमेट के अनुसार हवा की दिशा पूर्वी होने से दिल्ली व आसपास कुछ वर्षा संभव।

किसका दाँव

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) — विदाई, विदाई रेखा और अवदाब पर आधिकारिक निगरानी व पूर्वानुमान जारी करना; अप्रैल व जून के पूर्वानुमानों की सटीकता।
  • पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के किसान — क्रमशः -40%, -24% और -21% वर्षा की कमी के बीच जल्दी विदाई से सिंचाई व फसल पर दबाव।
  • आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय जिले — गहरा अवदाब कालिंगपटनम के निकट तट पार करने से स्थानीय स्तर पर तेज बारिश का खतरा।
  • दिल्ली/एनसीआर — विदाई जल्दी होने पर भी मौसमी वर्षा सामान्य से 6% (सफदरजंग में 14%) अधिक; 26-27 सितंबर को वर्षा की संभावना।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) — अल नीनो के 'बहुत मजबूत' होने और फरवरी 2027 तक बने रहने की चेतावनी, जिससे बाढ़, सूखा व अत्यधिक गर्मी का जोखिम।
  • स्काईमेट वेदर (निजी पूर्वानुमान एजेंसी) — सूखे की 70% संभावना का संशोधित अनुमान और उत्तर-पश्चिम भारत पर अवदाब के असर का आकलन।
  • रबी फसल उत्पादक — विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो से हल्की सर्दी और रबी के लिए कम वर्षा की आशंका।

क्यों अहम है

मॉनसून की जल्दी विदाई और 15% की अखिल भारतीय कमी का मतलब है कि खरीफ के अंतिम चरण में मिट्टी की नमी और जलाशय भरने का समय घट गया, जबकि पंजाब, बिहार, मेघालय और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में कमी 37-60% तक है। अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग शत-प्रतिशत संभावना से रबी सीजन में भी कम वर्षा और हल्की सर्दी का जोखिम है। साथ ही बंगाल की खाड़ी का गहरा अवदाब दिखाता है कि विदाई के बावजूद पूर्वी तट पर भारी वर्षा की घटनाएँ जारी रह सकती हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • दिल्ली से मॉनसून विदाई की सामान्य तिथि 25 सितंबर; पश्चिमी राजस्थान से विदाई की सामान्य तिथि 17 सितंबर।
  • 1 जून-22 सितंबर 2026: देशभर में 706.9 मिमी वर्षा, सामान्य 832.4 मिमी, यानी 15% कमी।
  • सर्वाधिक क्षेत्रीय कमी पूर्व व पूर्वोत्तर भारत (-27%), उसके बाद दक्षिण प्रायद्वीप (-26%); मेघालय में -60% (अत्यधिक कम)।
  • 23 सितंबर की विदाई रेखा: गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा, नलिया।
  • आईएमडी की भाषा में 'सामान्य से कम वर्षा' का अर्थ एलपीए (दीर्घावधि औसत) के 91% से कम।
  • डब्ल्यूएमओ (3 सितंबर): अल नीनो स्थापित, 'बहुत मजबूत' होने की संभावना, फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग 100% संभावना।

मेन्स दृष्टिकोण

2026 का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सत्र दो विरोधाभासों को उजागर करता है: एक ओर दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्र में वर्षा सामान्य से 6-14% अधिक रही, दूसरी ओर अखिल भारतीय स्तर पर 15% की कमी और पंजाब (-40%), बिहार (-37%), मेघालय (-60%), आंध्र प्रदेश (-38%) जैसे कृषि-निर्भर राज्यों में गंभीर घाटा दर्ज हुआ — अर्थात राष्ट्रीय औसत क्षेत्रीय संकट को छिपा देता है। इसका प्रमुख कारण डब्ल्यूएमओ द्वारा चिह्नित मजबूत होता अल नीनो रहा, जिसके चलते आईएमडी ने अप्रैल के 92% अनुमान को जून में 90% और 60% कमी-संभावना तक संशोधित किया, तथा स्काईमेट ने अगस्त में 85% वर्षा व 70% सूखे की संभावना जताई। दिल्ली से 2002 के बाद सबसे जल्दी विदाई और पश्चिमी राजस्थान से देर से शुरू हुई विदाई दिखाती है कि मॉनसून की समय-सारणी अनियमित होती जा रही है, जबकि बंगाल की खाड़ी का गहरा अवदाब विदाई-काल में भी तटीय आंध्र-ओडिशा पर भारी वर्षा का जोखिम बनाए रखता है। आगे की राह में जिला-स्तरीय वर्षा निगरानी, घाटे वाले क्षेत्रों में सिंचाई व जल-भंडारण की तैयारी, तथा अल नीनो के फरवरी 2027 तक टिकने के मद्देनजर रबी फसलों के लिए आकस्मिक योजना पर ध्यान आवश्यक है — स्रोत में इससे आगे की नीतिगत घोषणाओं का उल्लेख नहीं है।

मुख्य शब्द

मॉनसून विदाई रेखा
वह रेखा जो दर्शाती है कि किन स्थानों तक मॉनसून लौट चुका है; 23 सितंबर को यह गुरदासपुर से नलिया तक थी।
गहरा अवदाब (Deep Depression)
बंगाल की खाड़ी में बनी निम्न दबाव प्रणाली का एक चरण, जो तट पार करते समय तेज वर्षा देती है।
एलपीए (दीर्घावधि औसत)
वर्षा का दीर्घकालिक औसत, जिसके प्रतिशत में मॉनसून पूर्वानुमान दिए जाते हैं; 91% से कम को सामान्य से कम माना जाता है।
अल नीनो
प्रशांत महासागर के गर्म होने की परिघटना, जो भारत में कमज़ोर मॉनसून, सूखा व अत्यधिक गर्मी से जुड़ी है।
आईएमडी
भारत मौसम विज्ञान विभाग — मॉनसून की प्रगति, विदाई और वर्षा आँकड़ों की आधिकारिक एजेंसी।
सफदरजंग वेधशाला
दिल्ली का आधार मौसम केंद्र, जहाँ 1 जून से 728.6 मिमी वर्षा दर्ज हुई (सामान्य 640.4 मिमी)।

अभ्यास प्रश्न

  1. 2026 के मॉनसून सत्र में राष्ट्रीय औसत (-15%) और राज्यवार आँकड़ों (मेघालय -60%, पंजाब -40%) के अंतर के आधार पर समझाइए कि वर्षा के औसत आँकड़े कृषि संकट को कैसे छिपा सकते हैं।
  2. अल नीनो भारतीय मॉनसून और रबी सीजन को कैसे प्रभावित करता है? डब्ल्यूएमओ की सितंबर 2026 की चेतावनी के संदर्भ में चर्चा करें।
  3. मॉनसून की जल्दी विदाई के बावजूद बंगाल की खाड़ी में गहरे अवदाब जैसी प्रणालियाँ तटीय राज्यों के लिए क्यों चुनौती बनी रहती हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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