चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट पर विपक्ष का हमला
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 'तानाशाह की तरह' काम करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग नियुक्ति संबंधी 2023 के कानून से जुड़ी याचिकाएं बड़ी बेंच को भेजीं। गुजरात हाईकोर्ट ने अदानी मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को अंतरिम राहत देने से इनकार किया।
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Two election commissioners objected to decisions on the special intensive revision of electoral rolls 14 times in 10 months — Attributed in the source to a report by The Indian Express; figure appears in source but is not officially confirmed
- Opposition accused CEC Gyanesh Kumar of ruling 'like a dictator'; Congress said Modi and Kumar damaged democracy — Attributed to Opposition and Congress reactions as quoted in the source
- Supreme Court referred petitions against the 2023 EC appointments law to a larger bench, to be constituted by CJI Surya Kant — Attributed to proceedings before Justices Dipankar Datta and Satish Chandra Sharma; quotes given in source
- Gujarat High Court declined interim relief to journalist Ravi Nair, in custody since September 17 in an Adani Enterprises defamation case — Attributed to the court's observation; dates and case details appear in source
- Supreme Court called the three-month delay by Speaker Om Birla on disqualification pleas against 20 rebel TMC MPs a 'red flag' — Attributed to verbal observations of the court; Solicitor General's denial of delay also recorded
विश्लेषकों की राय राय
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद सामने आने से विपक्ष को तेज हथियार मिल गया है — बहस अब बाहरी आरोप से हटकर आयोग के भीतर दर्ज कथित असहमति पर आ गई है। दूसरी ओर, 2023 के नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजने से तत्काल फैसला टल गया है, जो सरकार के लिए समय के लिहाज़ से राहत है। कुल मिलाकर चुनाव आयोग, स्पीकर के लंबित निर्णय और हिरासत में पत्रकार — ये सब 'संस्थाओं की स्वतंत्रता' के एक ही विपक्षी नैरेटिव में जुड़ते दिख रहे हैं।
- 10 महीनों में 14 बार आपत्ति का रिपोर्ट किया गया आँकड़ा, सीईसी पर विपक्ष के 'तानाशाह' वाले आरोप को ठोस आधार देने के काम आ रहा है।
- कांग्रेस का इसे सीधे प्रधानमंत्री से जोड़ना और अखिलेश यादव का सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान की मांग करना दिखाता है कि विपक्ष इसे साझा राष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहता है।
- बड़ी बेंच को भेजने का मतलब है प्रक्रिया लंबी खिंचना; कानूनी अनिश्चितता बनी रहने तक राजनीतिक अभियान फैसले का इंतज़ार किए बिना चलता रहेगा।
- चयन प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर जस्टिस दत्ता की टिप्पणी आलोचकों के लिए उद्धरण योग्य बल है, पर जस्टिस शर्मा की असहमति याद दिलाती है कि मामला तय नहीं हुआ।
- 20 बागी तृणमूल सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने की देरी को कोर्ट का 'रेड फ्लैग' कहना, लेकिन समय-सीमा तय न करना दर्शाता है कि दलबदल की राजनीति में देरी ही मुख्य रणनीति बनी हुई है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि आयोग सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करता है या नहीं कि उसके फैसले सामूहिक थे, और विपक्ष इसे संसद तथा राज्यों के चुनाव प्रचार में केंद्रीय मुद्दा बनाता है या नहीं।
आपत्तियाँ दर्ज होने की रिपोर्ट मतदाता सूची में वास्तविक गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है, और इस खबर में दोनों आयुक्तों का अपना पक्ष शामिल नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आयोग के फैसलों पर 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। इस पर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 'तानाशाह की तरह' काम करने का आरोप लगाया। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति संबंधी 2023 के कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाएं बड़ी बेंच को भेज दीं। साथ ही गुजरात हाईकोर्ट ने अदानी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को अंतरिम राहत देने से इनकार किया।
मुख्य तथ्य
- इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट: दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े आयोग के फैसलों पर 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई।
- आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाता शामिल करने के विरुद्ध अपील दायर करने, तथा मतदाता सूचियों की कस्टडी व सुरक्षा जैसे मुद्दों पर थीं।
- कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार ने 'मिलकर देश के लोकतंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया'।
- समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेने का आग्रह किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के चुनाव आयोग नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं बड़ी बेंच को भेजीं; मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के समक्ष रखा जाएगा ताकि संवैधानिक बेंच बने।
- जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि कानून 'स्वतंत्र चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करता नहीं दिखता' और चयन समिति में 'प्रधानमंत्री के नामित व्यक्ति से प्रधानमंत्री की अवज्ञा की अपेक्षा नहीं की जा सकती'।
- गुजरात हाईकोर्ट ने पत्रकार रवि नायर को न्यायिक हिरासत से रिहाई की अंतरिम राहत देने से इनकार किया; नायर को 17 सितंबर को हिरासत में लिया गया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा लिए गए तीन महीने के समय को 'रेड फ्लैग' कहा, लेकिन समय-सीमा तय करने से इनकार किया।
समयरेखा
- अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021रवि नायर द्वारा अदानी समूह के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट की श्रृंखला, जिन पर मानहानि का मामला आधारित है।
- 17 सितंबरमानहानि मामले की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित न होने पर रवि नायर को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया।
- अगस्तसॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुसार बागी तृणमूल सांसदों को नोटिस जारी किए गए।
- पिछले 10 महीनेचुनाव आयुक्तों संधू और जोशी द्वारा SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज।
- हाल मेंसुप्रीम कोर्ट ने 2023 कानून से जुड़ी याचिकाएं बड़ी बेंच को भेजीं; गुजरात हाईकोर्ट ने नायर को राहत देने से इनकार किया।
किसका दाँव
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार — विपक्ष का आरोप है कि वे 'तानाशाह की तरह' काम कर रहे हैं; आयोग के फैसलों की साख उन पर केंद्रित।
- चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — SIR से जुड़े फैसलों पर उनकी दर्ज आपत्तियां आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया का प्रश्न उठाती हैं।
- कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (अखिलेश यादव) — लोकतंत्र और मतदाता सूची की शुचिता को लेकर सरकार व CEC पर हमला; SC से स्वतः संज्ञान की मांग।
- सुप्रीम कोर्ट — चुनाव आयोग नियुक्ति कानून की संवैधानिकता तय करना और अयोग्यता याचिकाओं में विलंब पर निगरानी।
- पत्रकार रवि नायर — अदानी एंटरप्राइजेज के आपराधिक मानहानि मामले में न्यायिक हिरासत में; अंतरिम राहत से इनकार।
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला — 20 बागी तृणमूल सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर 'शीघ्र निर्णय' की अपेक्षा।
क्यों अहम है
मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया की नींव है, और आयोग के भीतर 14 बार दर्ज आपत्तियां उसकी आंतरिक सहमति व पारदर्शिता पर सवाल खड़ी करती हैं। साथ ही चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के 2023 कानून पर संवैधानिक बेंच का गठन तय करेगा कि आयोग की स्वतंत्रता कैसे सुरक्षित होगी। सांसदों की अयोग्यता में विलंब और पत्रकार की हिरासत, दोनों संस्थागत जवाबदेही तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के व्यापक प्रश्नों से जुड़े हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) — चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया जिस पर दो आयुक्तों ने आपत्तियां दर्ज कीं।
- 2023 का कानून चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति को नियंत्रित करता है; इसकी संवैधानिकता की याचिकाएं बड़ी बेंच को भेजी गईं।
- जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के समक्ष रखने का आदेश दिया।
- वर्तमान चुनाव आयोग: CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी।
- 20 बागी तृणमूल कांग्रेस सांसदों की अयोग्यता याचिकाएं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास तीन महीने से लंबित — SC ने इसे 'रेड फ्लैग' कहा।
- रवि नायर के विरुद्ध मामला अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा दायर आपराधिक मानहानि का है; उन्हें 17 सितंबर को हिरासत में लिया गया।
मेन्स दृष्टिकोण
इस प्रकरण का केंद्रीय प्रश्न चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और बहु-सदस्यीय निकाय के भीतर सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया है। रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों — नए मतदाताओं का पंजीकरण, नाम हटाना-बहाल करना, अपील दायर करना, सूचियों की कस्टडी व सुरक्षा — पर आपत्ति जताई, जिससे विपक्ष ने CEC पर 'तानाशाही' का आरोप लगाया और कांग्रेस ने लोकतंत्र को नुकसान की बात कही। इसका दूसरा आयाम नियुक्ति प्रक्रिया है: सुप्रीम कोर्ट में 2023 के कानून को चुनौती दी गई है और जस्टिस दत्ता ने कहा कि यह 'स्वतंत्र चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करता नहीं दिखता' क्योंकि चयन समिति में प्रधानमंत्री के नामित व्यक्ति से अवज्ञा की अपेक्षा नहीं की जा सकती; जस्टिस शर्मा ने असहमति जताते हुए इसे 'विधि का सारवान प्रश्न' मानकर बड़ी बेंच को भेजने का समर्थन किया। आगे की राह संवैधानिक बेंच के निर्णय, आयोग के भीतर असहमति के अभिलेखन व पारदर्शी प्रकटन, तथा अयोग्यता याचिकाओं जैसे मामलों में 'शीघ्र निर्णय' की अपेक्षा के पालन पर निर्भर करती है — स्रोत में इससे आगे किसी नीतिगत उपाय का उल्लेख नहीं है।
मुख्य शब्द
- विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
- मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, जिसके फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां दर्ज कीं।
- स्वतः संज्ञान (suo motu)
- अदालत द्वारा किसी याचिका के बिना स्वयं मामले पर संज्ञान लेना; अखिलेश यादव ने SC से इसकी मांग की।
- संवैधानिक बेंच
- बड़ी पीठ, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश करते हैं; 2023 नियुक्ति कानून का मामला इसे भेजा गया।
- गैर-जमानती वारंट
- गिरफ्तारी का आदेश; हाईकोर्ट ने कहा कि निष्पादित हो जाने के बाद नायर इसे चुनौती नहीं दे सकते।
- आपराधिक मानहानि
- अदानी एंटरप्राइजेज द्वारा पत्रकार रवि नायर के सोशल मीडिया पोस्ट पर दायर मामला।
- अयोग्यता याचिका
- सांसदों की सदस्यता समाप्ति की मांग वाली याचिका; 20 बागी तृणमूल सांसदों के मामले लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित।
अभ्यास प्रश्न
- चुनाव आयोग एक बहु-सदस्यीय संस्था है — आयुक्तों की आपत्तियों के प्रकाश में आयोग की आंतरिक निर्णय-प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चर्चा करें।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी 2023 के कानून पर उठे संवैधानिक प्रश्नों का परीक्षण कीजिए। क्या चयन समिति की संरचना आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है?
- सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं पर पीठासीन अधिकारी के निर्णय में विलंब लोकतांत्रिक जवाबदेही को कैसे प्रभावित करता है? सुप्रीम कोर्ट की 'रेड फ्लैग' टिप्पणी के संदर्भ में उत्तर दें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
