मॉनसून की वापसी 19 सितंबर से, वर्षा कमी 15%: आईएमडी

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से 19 सितंबर के आसपास शुरू होने की संभावना है, जबकि सामान्य तिथि 17 सितंबर है, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को कहा। मजबूत होते अल नीनो के कारण प्रभावित इस मौसम में 13 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा कमी -15% रही। सबसे अधिक कमी दक्षिण प्रायद्वीप (-28%) और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत (-25%) में है। आंध्र प्रदेश -43%, पंजाब -40%, बिहार -35% और तेलंगाना -20% पर हैं। इस सप्ताह कई क्षेत्रों में बारिश का अनुमान है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Southwest monsoon withdrawal to begin from west Rajasthan around September 19, against a normal date of September 17. — Attributed to an IMD statement quoted in the source; figures appear in source.
  • All-India monsoon deficit stands at -15% as of September 13. — Attributed to IMD; source also gives month-end figures of -40% in June, -13% in July and -14% in August.
  • State-wise deficits include Andhra Pradesh -43%, Punjab -40%, Bihar -35%, Karnataka -29%, Telangana -20%, Meghalaya -59%. — Cited as 'data shows' without naming the dataset; figures appear in source.
  • Skymet expects withdrawal by September 20 and had forecast seasonal rainfall at 85% of LPA with 70% drought probability. — Attributed to Skymet vice president Mahesh Palawat and Skymet's August 17 revised forecast.
  • IMD's quoted statement mentions withdrawal 'around September 19, 2026'. — Year in the quoted statement is inconsistent with the rest of the report; flagged for editorial check.

विश्लेषकों की राय राय

AI రాజకీయ విశ్లేషకులు · తెలుగు

వర్షపాత లోటు అనేది వాతావరణ వార్త మాత్రమే కాదు — అది రాజకీయ ఎజెండాను నిర్దేశించే అంశం. ఆంధ్రప్రదేశ్ (-43%), పంజాబ్ (-40%), బిహార్ (-35%), కర్ణాటక (-29%), తెలంగాణ (-20%) వంటి కీలక వ్యవసాయ రాష్ట్రాల్లో ఈ లోటు పూడే అవకాశం లేదని ఐఎండీ చెప్పడం, రాబోయే నెలల్లో కరవు ప్రకటనలు, ఇన్‌పుట్ సబ్సిడీలు, పరిహారం, రుణమాఫీ డిమాండ్ల చుట్టూ కేంద్ర-రాష్ట్ర రాజకీయ ఘర్షణకు దారితీసే అవకాశం ఉంది. అధికార పక్షాలకు ఇది పరిపాలనా సవాలు, ప్రతిపక్షాలకు రెడీమేడ్ ఆయుధం.

  • లోటు ఎక్కువగా ఉన్న రాష్ట్రాల్లో రైతు ఓటు బ్యాంకు నిర్ణయాత్మకం కావడంతో, పరిహారం-సాయం ప్యాకేజీల డిమాండ్లు వెంటనే రాజకీయ రూపం తీసుకునే అవకాశం ఉంది.
  • కరవు నిర్ధారణ, నిధుల కేటాయింపు కేంద్రం చేతిలో ఉండటం వల్ల ఇది సాధారణంగా కేంద్ర-రాష్ట్ర సమాఖ్య వివాదంగా మారుతుంది — ప్రతిపక్ష పాలిత రాష్ట్రాలు వివక్ష ఆరోపణలు చేసే అవకాశం ఉంది.
  • బిహార్, పంజాబ్, ఆంధ్రప్రదేశ్, తెలంగాణ, కర్ణాటక వంటి రాష్ట్రాల్లో వేర్వేరు పార్టీలు అధికారంలో ఉన్నందున, ఒకే వాతావరణ సంకటానికి భిన్నమైన రాజకీయ కథనాలు వెలువడతాయి.
  • రుతుపవనాల ఉపసంహరణ సాధారణ తేదీ కంటే రెండు రోజులు ఆలస్యం కావడం, ఈ వారం వర్షాలు అనే అంశాలను అధికార పక్షాలు 'పరిస్థితి మెరుగుపడుతోంది' అనే వాదనకు ఉపయోగించుకోవచ్చు.
  • ధరల పెరుగుదల, ఆహార ద్రవ్యోల్బణం రాజకీయంగా అత్యంత సున్నితమైన అంశాలు కావడంతో, ప్రభుత్వాల దృష్టి సరఫరా నిర్వహణ, నిల్వల విడుదల వైపు మళ్లే అవకాశం ఉంది.

किस पर नज़र रखें — రబీ సీజన్ ప్రారంభంలో నీటి విడుదల, విత్తన-ఎరువుల సరఫరా, కరవు మండలాల ప్రకటనలపై రాష్ట్ర ప్రభుత్వాల ప్రకటనలు — అక్కడే ఈ లోటు రాజకీయంగా ఎంత పెద్ద అంశమవుతుందో తేలుతుంది.

ఈ కథనం వాతావరణ శాఖ అంచనాలు, లోటు గణాంకాలను మాత్రమే తెలియజేస్తుంది; పంట నష్టం పరిమాణం, ఏదైనా ప్రభుత్వ సహాయ ప్రకటన, పార్టీల స్పందన లేదా ఎన్నికల ప్రభావం గురించి ఇది ఏమీ నిర్ధారించలేదు — ఆ కోణం పూర్తిగా నా విశ్లేషణ మాత్రమే.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत की वार्षिक वर्षा का मुख्य स्रोत है और आमतौर पर सितंबर के मध्य से पश्चिमी राजस्थान से इसकी वापसी शुरू होती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार को कहा कि इस बार वापसी 19 सितंबर के आसपास शुरू होने की स्थितियाँ बन रही हैं, जबकि सामान्य तिथि 17 सितंबर है। मजबूत होते अल नीनो के कारण यह मॉनसून सीजन गंभीर रूप से प्रभावित हुआ और 13 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा कमी -15% रही। आईएमडी के अनुसार पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वोत्तर भारत के कई जिलों की कमी अब पूरी होने की संभावना नहीं है।

मुख्य तथ्य

  • आईएमडी के अनुसार पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून की वापसी 19 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है; सामान्य तिथि 17 सितंबर है और पिछले वर्ष वापसी 14 सितंबर को ही शुरू हो गई थी।
  • 13 सितंबर तक देशव्यापी मॉनसून वर्षा कमी -15% थी; जून में यह -40% तक पहुँची, जुलाई के अंत तक -13% और अगस्त के अंत में -14% रही।
  • क्षेत्रवार कमी: दक्षिण प्रायद्वीप -28%, पूर्व व पूर्वोत्तर भारत -25%, उत्तर-पश्चिम भारत -10%, मध्य भारत -6%।
  • राज्यवार कमी: मेघालय -59%, आंध्र प्रदेश -43%, अरुणाचल प्रदेश -42%, पंजाब -40%, बिहार -35%, कर्नाटक -29%, केरल -27%, तमिलनाडु -26%, राजस्थान -25%, हरियाणा -23%, तेलंगाना -20%।
  • आईएमडी ने 31 अगस्त के पूर्वानुमान में सितंबर में सामान्य से कम वर्षा (दीर्घावधि औसत के 91% से कम) की संभावना जताई थी।
  • स्काईमेट ने 17 अगस्त को संशोधित पूर्वानुमान में मॉनसून वर्षा एलपीए का 85% और सूखे की 70% संभावना बताई; अप्रैल में उसका अनुमान 94% था।
  • आईएमडी ने अप्रैल में मॉनसून एलपीए का 92% रहने का अनुमान दिया था, जिसे जून के आउटलुक में घटाकर 90% किया और कमी वाले सीजन की 60% संभावना जोड़ी।
  • मौसमी प्रणालियाँ: दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश, दक्षिण-पूर्व राजस्थान व उत्तर गुजरात पर निम्न दबाव क्षेत्र; झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़ व मप्र तक ट्रफ; ओडिशा-पश्चिम बंगाल के निकट बंगाल की खाड़ी पर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण।

समयरेखा

  1. अप्रैलआईएमडी ने मॉनसून एलपीए का 92% रहने का पूर्वानुमान दिया; स्काईमेट ने 94% का अनुमान लगाया।
  2. जूनदेशव्यापी वर्षा कमी -40% तक पहुँची; आईएमडी ने पूर्वानुमान 92% से घटाकर 90% किया और कमी वाले सीजन की 60% संभावना जताई।
  3. जुलाई अंतव्यापक वर्षा के बाद कमी घटकर -13% पर आई।
  4. 17 अगस्तस्काईमेट ने संशोधित पूर्वानुमान में एलपीए का 85% और सूखे की 70% संभावना बताई।
  5. अगस्त अंतदेशव्यापी कमी -14% दर्ज।
  6. 31 अगस्तआईएमडी ने सितंबर के लिए सामान्य से कम वर्षा (एलपीए के 91% से कम) का पूर्वानुमान जारी किया।
  7. 13 सितंबरदेशव्यापी मॉनसून वर्षा कमी -15% पर पहुँची।
  8. 15-17 सितंबरजम्मू, कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान व मुजफ्फराबाद में व्यापक वर्षा; 16-17 को पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में वर्षा का अनुमान।
  9. 18-20 सितंबरतटीय आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में वर्षा; ओडिशा में 19-20 सितंबर को गतिविधि।
  10. 19 सितंबर (अनुमानित)पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून की वापसी शुरू होने की संभावना; स्काईमेट के अनुसार 20 सितंबर तक।

किसका दाँव

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) — मॉनसून पूर्वानुमान, वापसी की घोषणा और वर्षा कमी के आँकड़े जारी करना; अप्रैल व जून के पूर्वानुमानों को संशोधित करना पड़ा।
  • स्काईमेट वेदर (उपाध्यक्ष महेश पलावत) — निजी पूर्वानुमान एजेंसी; 20 सितंबर तक वापसी और सीजन में एलपीए के 85% वर्षा व 70% सूखा संभावना का आकलन।
  • कृषि प्रधान राज्य – पंजाब (-40%), बिहार (-35%), आंध्र प्रदेश (-43%), कर्नाटक (-29%) — वर्षा की बड़ी कमी, जिसकी भरपाई की संभावना नहीं; खरीफ फसल व सिंचाई पर दबाव।
  • पूर्वोत्तर के राज्य – मेघालय (-59%), अरुणाचल प्रदेश (-42%) — सामान्यतः अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भारी कमी।
  • किसान — कमजोर मॉनसून और जल्दी वापसी से फसल उत्पादन व जल उपलब्धता प्रभावित।

क्यों अहम है

मॉनसून की समय पर वापसी और मौसमी वर्षा की कुल मात्रा खरीफ फसल, जलाशयों के भराव और ग्रामीण आय को सीधे प्रभावित करती है। इस बार -15% की देशव्यापी कमी, और पंजाब, बिहार, आंध्र प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्यों में 35-43% तक की कमी अब पूरी होने की संभावना नहीं है। अल नीनो के मजबूत होने और पूर्वानुमानों के लगातार नीचे संशोधित होने से यह सीजन जलवायु परिवर्तनशीलता और पूर्वानुमान की चुनौतियों को रेखांकित करता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की सामान्य शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से 17 सितंबर को होती है; इस वर्ष 19 सितंबर के आसपास संभावित।
  • 13 सितंबर तक देशव्यापी मॉनसून वर्षा कमी -15%; दक्षिण प्रायद्वीप -28% और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत -25%।
  • सर्वाधिक कमी वाले राज्य: मेघालय -59%, आंध्र प्रदेश -43%, अरुणाचल प्रदेश -42%, पंजाब -40%।
  • आईएमडी का अप्रैल अनुमान एलपीए का 92%, जून में संशोधित 90% और कमी वाले सीजन की 60% संभावना।
  • स्काईमेट का 17 अगस्त संशोधित अनुमान: एलपीए का 85% वर्षा, सूखे की 70% संभावना।
  • आईएमडी के अनुसार 'सामान्य से कम वर्षा' का अर्थ दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 91% से कम।

मेन्स दृष्टिकोण

इस वर्ष का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून मजबूत होते अल नीनो से गंभीर रूप से प्रभावित रहा, जिसका परिणाम 13 सितंबर तक -15% की देशव्यापी वर्षा कमी और वापसी की सामान्य तिथि 17 सितंबर के मुकाबले 19 सितंबर से शुरुआत के रूप में सामने आया। कमी का वितरण असमान है — दक्षिण प्रायद्वीप (-28%) और पूर्व व पूर्वोत्तर भारत (-25%) सर्वाधिक प्रभावित, जबकि मध्य भारत (-6%) तुलनात्मक रूप से बेहतर; पंजाब (-40%), बिहार (-35%), आंध्र प्रदेश (-43%) जैसे कृषि प्रधान राज्यों में कमी की भरपाई अब संभव नहीं मानी जा रही। मौसम के भीतर बड़ा उतार-चढ़ाव भी उल्लेखनीय है: जून में -40% कमी, जुलाई की व्यापक वर्षा से -13% तक सुधार, फिर सितंबर तक -15% पर वापसी। पूर्वानुमानों का बार-बार नीचे संशोधन (आईएमडी: 92% से 90%; स्काईमेट: 94% से 85% और 70% सूखा संभावना) मौसमी पूर्वानुमान की सीमाओं और अल नीनो जैसे समुद्री-वायुमंडलीय कारकों की भूमिका को दर्शाता है। आगे का रास्ता जिला-स्तरीय वर्षा निगरानी, कमी वाले क्षेत्रों में सिंचाई व जल भंडारण पर ध्यान, तथा किसानों तक समय पर मौसम सलाह पहुँचाने पर निर्भर है — स्रोत में इससे आगे कोई नीतिगत उपाय उल्लिखित नहीं है।

मुख्य शब्द

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी
मॉनसून प्रणाली का उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना, जो सामान्यतः पश्चिमी राजस्थान से 17 सितंबर को शुरू होता है।
अल नीनो
प्रशांत महासागर से जुड़ी जलवायु परिघटना, जिसके मजबूत होने से इस बार भारतीय मॉनसून गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।
दीर्घावधि औसत (एलपीए)
मॉनसून वर्षा का दीर्घकालिक औसत मानक; आईएमडी के अनुसार एलपीए के 91% से कम वर्षा 'सामान्य से कम' मानी जाती है।
निम्न दबाव क्षेत्र
वर्षा लाने वाली मौसमी प्रणाली; इस समय दक्षिण-पश्चिम मध्य प्रदेश, दक्षिण-पूर्व राजस्थान और उत्तर गुजरात पर मौजूद।
ट्रफ
निम्न दबाव की विस्तारित रेखा; झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक फैली हुई।
स्काईमेट वेदर
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी, जिसने 17 अगस्त को एलपीए के 85% वर्षा और 70% सूखा संभावना का संशोधित अनुमान दिया।

अभ्यास प्रश्न

  1. अल नीनो भारतीय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को कैसे प्रभावित करता है? 2023-24 के आँकड़ों के आलोक में क्षेत्रीय वर्षा वितरण की असमानता की व्याख्या करें।
  2. मॉनसून की वापसी में विलंब या समय-पूर्व वापसी का खरीफ फसल और जल भंडारण पर क्या प्रभाव पड़ता है? चर्चा करें।
  3. मौसमी मॉनसून पूर्वानुमानों को बार-बार संशोधित करना पड़ता है — इसके कारण क्या हैं और पूर्वानुमान की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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